24 December, 2010

समग्र स्वक्षता अभियान में मची लूट

जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने जनपद पंचायत के ग्रामीण क्षेत्रो के भ्रमण के दौरान विगत दिनों क्षेत्र के विभिन्न गांवो में पहुचकर जनसंपर्क किया तथा ग्रामीणों से उनकी समस्याओं पर चर्चा  कर शासकीय  योजनाओं के क्रियान्वयन में गांवो में शासन द्वारा उपलब्द्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली और विकास में किये जा रहे प्रयासों से अवगत हुई.

जनपद अध्यक्ष इस दौरान ग्राम पंचायत बडगांव, नया खेडा, सिम्डारी, हथ्कुरी, सुगवा, देवगांव, खरखरी ग्राम में जनसंपर्क भ्रमण किया. उन्होंने इन ग्राम के विद्यालयों का भी आकस्मिक निरीक्षण किया. तथा बच्चो से मध्याह्न भोजन और शिक्षको की उपस्थिति के सम्बन्ध में जानकारी ली. अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग की दयनीय हालत एवं शिक्षा के गिरते स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा. जनपद शिक्षा केंद्र के कोई भी विद्यालय में पुताई नहीं हुई है जिस पर अध्यक्ष महोदय ने शासन से आयी राशी से तत्काल पुताई करने के निर्देश दिए.

हाई स्कूल बडगांव एवं हथ्कुरी में प्रयोगशाला की बदहाल स्थिति पर दोषी शिक्षको के खिलाफ कार्रवाई करने के  लिए  जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा. अपने भ्रमण में सबसे बुरी हालत मध्याह्न भोजन की देखने में आई. कही पर भी मेनू के अनुरूप भोजन नहीं बनाया जा रहा . बच्चो को विधिवत बैठाकर भोजन भी नहीं कराया जाता. पीने के लिए कही पर गिलास नहीं दी जाती. सभी जगहों पर बच्चे स्वयं बर्तन धोते मिले.

गाँव में जनसंपर्क भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से रु-ब-रु चर्चा के दौरान जनकल्याणकारी योजनाओं के मद्देनजर मिली जानकारी के परिप्रेक्ष्य में रीठी जनपद अध्यक्ष ने साथ में चल रहे जनपद पंचायत रीठी के कर्मचारियों को निर्देश दिए की जनकल्याणकारी योजनाओं, हितग्राही मूलक योजनाओं के जितने भी लंबित प्रकरण है उनका शत प्रतिशत निराकरण कराये यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर जनवरी माह में शत प्रतिशत निराकृत किया जावे.

अध्यक्ष महोदय ने जनपद सी ई ओ पंकज जैन को निर्देश दिए की जितनी भी पेंसन योजनाये जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंसन, विधवा पेंसन,  विकलांग पेंसन, बहुविकलांग पेंसन के प्रकरण, गरीबी रेखा में नाम जोड़ने के प्रकरण है, कपिलधारा कूप हितग्राही के डीजल पम्प, मोटर पम्प, इंदिरा आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, लाडली लक्ष्मी  योजना इन तमाम हितग्राही मूलक योजनाओं के प्रकरणों का शत प्रतिशत निराकरण किया जाए.








ग्राम पंचायत नया खेडा और सिम्डारी  में बनाये गए समग्र स्वच्छता  के तहत शौचालय निर्माण में शासन के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है. नया खेडा में बनाए गए सौ शौचालय में से एक में भी लेट्रिन शीट नहीं लगाईं गई है इसी तरह सिम्डारी  में भी इनकी वुरी स्थिति है. अध्यक्ष ने सी ई ओ को इन पंचायतो द्वारा की गई वितीय अनियमितता हेतु राशी बसूली के निर्देश दिए है. जनसंपर्क और निर्माण कार्यो के  निरीक्षण के कार्यक्रम की सूचना एक माह पूर्व जनपद के समस्त कर्मचारियों को होने के बाद भी ग्राम पंचायत सिम्डारी के सचिव इंदल पटेल तथा ग्राम पंचायत सुगवा के सचिव गुलाम आरिफ के पंचायत मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने को अध्यक्ष के निर्देशों की अवहेलना मान  उन्हें तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए .

22 December, 2010

खुले आम हो रही पानी की चोरी

विगत तीन वर्षों से लगातार सूखे की मार झेल रहे किसानो को नहर एवं अन्य सिचाई श्रोतो पर खेती की निर्भरता बढ़  गई है. जलाशयों से नहरों के माध्यम से जल वितरण की लचर व्यस्था के चलते क्षेत्र के किसानो में वैमनस्यता बढ़ती जा रही है और यह आपसी मनमुटाव कही किसी की जान पर न बन जाए ऐसी भी असंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

रीठी के barahata जलाशय से निकलने वाली नहर सिचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारी की अनदेखी के चलते नहर को जगह-जगह से छतिग्रस्त करके सिचाई की जा रही  है. इससे एक ओर जहा पानी का दुरूपयोग हो रहा है वही जलाशय से दूर के किसानो तक पानी पहुच ही नहीं पाता है.

विगत दिनों ऐसी ही एक शिकायत यहाँ के किसान संतोष पटेल ने एस डी ओ सिचाई विभाग रीठी को की अपनी शिकायत में किसान ने बताया की रीठी थाना के पास से निकलने वाली नहर पर दबंगों का कब्ज़ा है. सिचाई विभाग के कर्मचारी इससे बेखबर बने हुए है. नहर खोलने और चालू करने वाले व्यक्ति को शराब आदि पिलाकर पैसे वाले किसान जब चाहे तब पानी बंद और चालू करवा लेते है.
नहर के पानी को जगह-जगह पत्थर और मिटटी की मेढ़ बनाकर रोका गया है.

इस नहर पर खुले आम पम्प रखकर पानी लगाया जा रहा है. और प्रशासन बेखबर है.  प्रशासन से इस समस्या को तत्काल हल करने के लिए क्षेत्रीय किसान ने अपेक्षा की है और  मांग की है की सिचाई विभाग के कर्मचारियों द्वारा नहर के मरम्मत पर आने वाली राशी का  हिसाब दिया जाए और तत्काल जल वितरण व्यस्था दुरुस्त की जावे वर्ना क्षेत्र के किसान आन्दोलन पर उतारू हो जावेगे.

कमाई के लिए नियम तक पर रखे

सरकार कोई भी योजना शुरू तो कर देती है लेकिन घुमा फिरा कर वह पैसा नोकर्शाहो  और नेताओ के भ्रस्टाचार के मकडजाल के कारण  वही गोल-गोल घूमता रहता है.
मध्यान्ह भोजन योजना पर हर माह करोडो रूपये व्यय हो रहा है इसके  बाद भी शालाओ में उपस्थिति कम क्यों होती जा रही है....? स्वसहायता समूहों की मनमानी एवं अधिकारियो की ढुलमुल नीति इस योजना को चोपट कर रहा है.

हमारी  आने वाली पीढ़ी ज्यादा पढ़ी  लिखी हो देश के बच्चे शारीरिक रूप से मजबूत हो इस हेतु शुरू की गई मध्याह्न भोजन योजना भ्रस्टाचार की भेट चढ़कर रह गई है.
कटनी जिले के शासकीय विद्यालयों में पढने वाले छात्र-छात्राओं के भोजन पर करोडो  रूपये खर्च होने के बाद भी बच्चो को मानक के अनुरूप खाना नहीं मिल पा रहा है. जबकि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी जिले में सब कुछ ठीक होने का रटा रटाया वाक्य दोहरा रहे है.

इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक घटिया स्तर के भोजन की शिकायत सैकड़ो बार प्रकाश में आई है इसके बाद भी जिले में न तो व्यवथाये सुधरी और न ही अनियमितताए करने वाले समूह ही बदले गए. कुछ स्कूलों में तो हालत यह है की न तो स्कूल में बच्चे आ रहे और न ही खाना बन रहा है.

विगत दिनों जनपद पंचायत अध्यक्ष रीठी प्रीति सिंह ने क्षेत्र के विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन और शिक्षा के स्तर का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में अधिकांस स्कूलों में भोजन वितरण में अनियमितता दर्ज की गई थी. देवरी प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला, मोहास ई जी एस, प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला कैमोरी में ढेरो विसंगतिया पाई गई. इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है.

अधिकांस स्कूलों में सरपंच और सचिव के समर्थक समूहों द्वारा भोजन वितरण का काम किया जा रहा है. जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के कारण अधिकारी स्कूलों में एम् डी एम् पर ध्यान ही नहीं देते.

ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूलों में भोजन वितरण कर रहे समूह भोजन बनाने से ज्यादा कमाई पर ध्यान दे  रहे है. अधिकांस समूहों के द्वारा बनाये जा रहे भोजन में कच्ची रोटिया और दाल सब्जी के नाम पर सिर्फ पानी ही मिलता है. जिले के लगभग हर समूहों पर अनियमितताओं के आरोप लग चुके है.

सरकार की योजना का हाल ऐसा है जैसे एक टुकड़ा रोटी बीस कुत्तो में डाल दी गई हो और उस पर सब टूट पड़े हो.

नहीं खुलते प्रयोगशाला के पट

शिक्षा विभाग में व्याप्त अनियमितता ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. कटनी जिले में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालयों की दुर्दशा तो अब  कोई नई बात नहीं है लेकिन हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी स्थितिया बहुत अच्छी नहीं है.

सरकारी विद्यालयों में पदस्थ शिक्षक बच्चो की पढ़ाई पर जरा भी ध्यान नहीं देते. जिले में ऐसे कई स्कूल है जहा पर अभी भी बहुत से विषयो के पाठ्यक्रम की पढाई शुरू ही नहीं हुई है. मिल रही खबरों में रीठी हाई स्कूल में अब से पंद्रह दिन पहले तक संस्कृत की पढ़ाई शुरू तक नहीं हुई थी.

प्रश्ससनिक अनदेखी के चलते शिक्षा का स्तर दिनों दिन घटता जा रहा है जबकि शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए हर वर्ष राशी बढती जा रही है. क्षेत्र में सतत विकास एवं जनता के लिए आई हर एक योजन का हितग्राहियों को पूरा लाभ मिले इसके लिए रीठी जनपद की अध्यक्ष प्रीति सिंह क्षेत्र का युद्ध स्तर पर भ्रमण कर  रही है.



विगत दिनों बिलहरी हायर सेकंडरी स्कूल के निरीक्षण के दौरान रीठी जनपद अध्यक्ष को  वहा की प्रयोग शाला कबाड़ की हालात में मिली थी वैसी ही स्थिति बडगांव हाई स्कूल में भी पाई गई.

शासकीय हाई स्कूल बडगांव में भी अभी तक प्रयोगशाला के दरवाजे तक नहीं खोले गए है. गंदगी और अव्यवस्था में बदहाल पड़ी यहाँ की प्रयोगशाला के हाल बिलहरी से कुछ कम नहीं है. यहाँ भी अभी तक बच्चो को प्रेक्टिकल शुरू नहीं कराये गए है.

बडगांव में भी अवांछित विषयों की पुस्तके जिला से भेज दी गई है जो लावारिश हालत में पड़ी है.

पिछले दिनों कटनी के लगभग सभी समाचार पत्रों ने बिलहरी हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रयोगशाला की बदहाल स्थिति पर खबर प्रकाशित की थी. उसके बाद भी शिक्षा विभाग एवं कटनी कलेक्टर  कुम्भ्करनी नीद सो रहे है.
भगवान् ही मालिक है शिक्षा विभाग का. ऐसे में क्या देश की आने वाली पीढ़ी सही रूप से शिक्षित हो सकेगी......?

19 December, 2010

ऐतिहासिक पुष्पवती नगरी

कटनी जिले की ऐतिहासिक नगरी पुष्पवती नगरी के प्राचीन मंदिरों, वावालियो एवं जलाशयों की सरकारी अमले की उपेक्षा के चलते अपने विनास की ओर है. एक ओर जहा बिलहरी के प्राचीन जलाशय लक्षमण सागर के उन्नयन एवं पुनुर्द्धार के लिए डेढ़ करोड़ की लागत से सिचाई विभाग के मध्यम से काम जारी है जिसमे सौन्दर्यीकरण भी शामिल है तो वही शासन के नियमो को धता बताते हुए इस तालाब में गैरकानूनी रूप से सिंघाड़ा लगाकर इसमें गंदगी की जा रही है



दुर्गा बर्मन नाम के बिलहरी के व्यक्ति को दिए गए मत्स्य पालन हेतु इस तालाब में मत्स्य पालन तो नहीं हो रहा जबकि वावन एकड़ के इस तालाब में सिंघाड़ा जरूर लगाया गया है.


जानकार सूत्रों से जो खबर आ रही है उसके अनुसार जनपद रीठी में सी ई ओ कार्यालय से सरकारी तालाबो में मत्स्य पालन हेतु राशि जमा करके अनुमति जारी की जाती है. लेकिन बिलहरी में जो अनुमति पत्र दुर्गा बर्मन के पास है उसमे मत्स्य एवं सिंघाड़ा दोनों की अनुमति है.


जबकि इस सम्बन्ध में रीठी जनपद पंचायत की अध्यक्ष प्रीति सिंह को एक शिकायत में ग्रामीणों ने बताया की मत्स्य पालन की जगह इस तालाब में सिंघाड़ा बोया गया है. जिसमे प्रति बांस दो हजार रूपये की राशी के हिसाब से बर्मानो को सिंघाड़ा बोने हेतु वह व्यक्ति बाँट रहा है जिसे स्वयं अनुंती नहीं दी गई है.


लक्षमण सागर  जलाशय में इस समय  सिंघाड़ा बोया गया है. ग्राम  के लोगो  ने बताया की तालाब  में जमकर  गंदगी की जा रही है. सिंघाड़ा बोने के लिए तालाब के अन्दर ही मेढ़ बंधान करके  करके दर्जन भर लोगो को ताला का वितरण कर लाखो  रूपये की अवैध  राशी वसूली गई है.


जनपद अध्यक्ष ने इस पर तत्काल करवाई करने हेतु सी ई ओ को निर्देश  दिए है.

मागी गई जानकारी में कोरे कागज दिए

कटनी जिले में राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशों का पूरी तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है तभी तो यहाँ चलने वाले 67 हेड स्टार्ट केन्द्रों में से एक भी चालू हालत में नहीं है जबकि इनके रखरखाव और सञ्चालन के लिए आने वाली लाखो रूपये की राशी को ठिकाने लगाया जा चुका है.

राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल से जिला शिक्षा केन्द्रों को स्पष्ट निर्देश है की हेड स्टार्ट कार्यक्रम शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है. इस कार्यक्रम का लाभ छात्र-छात्राओं को शतप्रतिशत मिले इसके लिए निम्न कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे -
आवश्यकतानुसार कक्ष की मरम्मत, पुताई, सुरक्षा की द्रष्टि से खिड़की  व दरवाजो की मरम्मत आदि करना .
हेड स्टार्ट केन्द्रों में अर्थिंग  का होना अनिवार्य किया गया है.
कक्ष में कम्पुटर, प्रिंटर आदि के लिए असग-अलग स्विच साकेट लगाये जाने तथा यू पी एस के लिए 15 एम्पियर स्विच साकेट लगाये जाने के निर्देश दिए गए थे.
कम्पुटर कक्ष में सीमेंट का निर्धारित ऊचाई का प्लेटफार्म जिसमे ऊपर कडप्पा पत्थर हो लगाया जावे.
बी एस एन एल-यू एस ओ ऍफ़ योजना अंतर्गत यदि हेड स्टार्ट केंद्र में इंटरनेट कनेक्शन नहीं हुआ है तो तत्काल बी एस एन एल के विकासखंड स्तरीय अधिकारियो से संपर्क कर इन्टरनेट कनेक्शन कराये.
हेड स्टार्ट केंद्र एवं आसपास साफ़ सफाई रखी जाए.
किसी भी स्थिति में हेड स्टार्ट केंद्र की समस्त सामग्री (कम्पुटर, प्रिंटर, यू पी एस) आदि किसी अन्य कार्यालय/ स्थान में नहीं होना चाहिए. यदि हेड स्टार्ट केंद्र कोई सामग्री केंद्र में नहीं पायी जाती है तो सम्बंधित हेड स्टार्ट केंद्र प्रभारी के विरुद्ध शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जावेगी.

 उक्त समस्त कार्रवाई दिनांक 15 .07 .2010 के पूर्व करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन आज दिनांक तक हेड स्टार्ट केंद्र जस के तस बदहाल स्थिति में अभी भी बंद पड़े है.






गौरतलब है की प्रत्येक हेड स्टार्ट  केंद्र के रखरखाव के लिए प्रति वर्ष 25 हजार की राशी आती है लेकिन इस राशी का सदुपयोग किसी भी केंद्र पर होते नहीं पाया गया. जिले में कुल 67 हेड स्टार्ट केंद्र चालू है सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मनोज तिवारी को प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक 5454 विद्यार्थी लाभान्वित हुए है जिसमे बडवारा ब्लाक में 756 , बहोरिबंद में 668 , ढीमर खेडा में 927 , कटनी में 1410 , रीठी में 711 एवं विजय राघव गढ़ में 982 विद्यर्थियो को लाभान्वित होना बताया गया है.

इसी प्रकार इस योजना में जिले के कुल 378 शिक्षको को प्रक्षिशन दिलाया गया है वे विकास खंडवार   क्रमशः इस प्रकार है - बडवारा 70 , बहोरिबंद 62 , ढीमर खेडा 76 , कटनी   78 , रीठी 38 , विजय राघव गढ़ में 54 शिक्षको को हेड स्टार्ट केन्द्रों में शिक्षण कार्य हेतु प्रशिक्षण दिलाया गया है.

इस योजना का सञ्चालन जिले में कही पर नहीं हो रहा है जिला शिक्षा केंद्र से दिए जा रहे आकडे गलत और भ्रामक है. आर टी आई एक्टिविस्ट मनोज तिवारी को जिले में कुल लाभान्वित विद्यार्थियों 5454 की दी गयी सूची कोरी है. इसमें उपस्थित विद्यर्थियो की जो छाया प्रति दी गई है वह इस तरह से फोटो कापी कराई गई है की उसमे कुछ भी नजर ही नहीं आता. इस प्रकार जिला शिक्षा केंद्र द्वारा सूचना अधिकार के तह मागी गई जानकारी में कोरे कागज दिए गए जिससे गंभीर आर्थिक  अनियमितता होने का संदेह है.

बैटरी की स्थिति एवं नवीन आवंटन पर मांगी गई जानकारी में मनोज तिवारी को बताया गया है की निर्धारित अवधि तीन वर्ष पूर्ण होने के पश्चात बैटरी प्रदाय पूर्व केंद्र  के यू पी एस चार्ज नहीं हो रहे थे. जिस कारण बैटरी प्रदाय की गई. प्रदाय उपरांत यू पी एस बैकप प्रदान करने लगा.

कुल मिलाकर कम्पुटर सिस्टम बैटरी आदि के रखरखाव में अभी तक 667421 रूपये की राशी व्यय की जा चुकी है.

18 December, 2010

आवारा मवेशियों से किसान परेशान

इस समय आवारा  मवेशी चौक चोराहो के अलावा किसानो की फसलो को नुकसान  पंहुचा रहे है. किसानो को आवारा मवेशियों के कारण बड़ी मुश्किलों  का सामना करना पड़ रहा है. इन आवारा  जानवरों से न केवल यातायात वाधित होता है बल्कि किसानो की फसलो को बड़ी मात्रा में नुकसान हो रहा है. राहगीरों को भी कई तरह की परेशानियों से रूबरू होना पड़ रहा है. कई बार तो इन आवारा मवेशियों के कारण बहुत से दोपहिया चालक इनसे टकराकर घायल हो चुके है. बावजूद इसके जिले की ग्राम पंचायतो की उदासीनता ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही जिसके कारण लोगो को दिन-प्रतिदिन ऐसी समस्याओ से दो -चार होना पड़ रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रो में कांजी होस के रख रखाव में पंचायतो की रूचि न लेने से इस समय जिले भर के किसान परेशान है. अधिकांस पंचायतो द्वारा रूचि न लेने के कारण कांजी होस बदहाल स्थितियों में पहुच गयी है. इनमे यदि मवेशियों को बंद भी किया जाता है तो वहा भूसा पानी के अभाव में मवेशी ही हालात दयनीय हो जाती है.

 ग्रामीण अंचलो में अधिकांस जगहों पर आवारा मवेशियों के झुण्ड को बैठे या खड़े देखा जा सकता है. इन मवेशियों की सडको पर उपस्थिति के कारण जहा वाहन चलाने में दिक्कते आती है वही पैदल चलने वाले राहगीरों के चेहरों  पर भी इन मवेशियों की मुठभेड़ से चोटिल होने का भय साफ़ नजर आता है,.
रीठी जनपद मुख्यालय में ही देखा जाये तो कांजी  होस के महीनो से बंद होने के कारण आवारा  पशुओ के द्वारा फसल चोपट की जा रही है. पिछले महीने रीठी जनपद के  डांग गाँव में बाहर से आये आवारा मवेशियों से परसान किसानो ने मवेशियों का व्यापार करने वाले गिरोह को बुलाकर गाँव को आवारा पशुओ से मुक्त कराया.

इसी प्रकार ग्राम पंचायत मोहास, बांधा  की काजी होस भी वर्षों से बंद है. हासिल जानकारी के अनुसार मोहास काजी होस को बंद हुए महीनो हो गए और इसका सामान पंच, सरपंच तथा सचिव ने अपने-अपने घरो में रख लिया.
ग्राम पंचायत बंधा के कृष्ण कुमार पांडे ने बताया की हमारी ग्राम पंचायत में कांजी होस कागजो में तो चलू है लेकिन वास्तव में इस पंचायत में कांजी होस नहीं है. इसलिए आवर पशुओ को कांजी होस में डालने के लिए यहाँ के लोगो को हथकुरी या नितार्रा दूर दराज के लिए भटकना पड़ता है.
पंचायत में भी कांजी होस चालू न होने से ढेर सारे मवेशी को कम दामो पर कत्लखाने भेजे जाने की खबरे  भी आ रही है.
यही वजह है की जिले की ग्राम पंचायतो में आवारा मवेशियों की धमाचौकड़ी के कारण यहाँ के  किसानो का दिन का चैन और रातो की नीद गायब है.

16 December, 2010

अभी और बढ़ेगी महगाई


देश में भ्रष्टाचार दिन दूनी रात चौगिनी प्रगति कर रहा है, हमारे  के राजनेता बढ़ चढ़कर लूटने में लगे है. ऐसे में आज गरीब एवं मध्यम श्रेडी के परिवारों के प्रति सोचने वाला कोई भी नहीं है. तभी तो लगभग हर महीने पेट्रोल डीजल के दाम बढाकर अपरोक्ष रूप से महगाई बढ़ाने में केंद्र की कांग्रेस सरकार पूजीपतियो के साथ कदमताल मिला रही है.

पेट्रोल के दाम फिर से बढ़ गए है. जाहिर है इससे महगाई को और पंख लग जायेगे. विगत दिनों पेट्रोल के दाम करीब तीन रूपये महगे कर दिए गए. अपनी रोजी रोटी की जुगाड़ में लगे आम आदमी के लिए यह तीन रूपये की पेट्रोल की मूल्य वृद्धि उसके महीने के तीस दिनों के बजट पर असर डालेगी.

अब बच्चो को स्कूल ले जाने वाले ऑटो और टेक्सी चालक किराया  बढायेगे तो दूसरी तरफ प्रत्येक वस्तु के दाम बढाए जायेगे क्योकि प्रत्यक्ष  और परोक्ष रूप से व्यापार में परिवहन  की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. अब दूध, सब्जी वाले अपने वाहन में खपत हो रहे ईधन की वसूली तो आखिर आप से ही करेगे.

देखने में यह भले ही तीन रूपये की  मूल्य वृद्धि लगे  और यह स्वयं की जेब पर मामूली प्रभाव प्रतीत हो परन्तु इस साधारण सी दिखने वाली कीमत वृद्धि से लगभग हर एक सेवा की कीमतों पर प्रभाव पड़े बगैर नहीं रह सकता.

एक तो शुद्ध पेट्रोल पम्प पहले ही नहीं दिया जाता था और कम मात्र में भरकर पेट्रोल पम्प संचालक चोरी तो कर ही रहे थे इस सम्बन्ध में क्लोफर डेविड ने बताया की जब पेट्रोल पचास रूपये प्रति लीटर मिलता था तो दस फ़ीसदी कम भरे जाने पर पांच रूपये का नुकसान होता था लेकिन अब जब पेट्रोल साठ रूपये के आकडे को छू रहा है तब दस फ़ीसदी की चोरी पर सीधे छेह रूपये का नुक्सान होगा. स्पष्ट तौर पर महगाई के साथ-साथ नुक्सान का प्रतिशत भी बढ़ रहा है.

एक शहर में प्रतिदिन हजारो लीटर ईधन की खपत होती है. तीन रूपये की मूल्य वृद्धि से पेट्रोल पम्प की सेवाओं पर प्रभाव तो होगा ही लेकिन आम आदमी तो अपने काम से निकलेगा जिससे पेट्रोल पम्प मालिको के व्यवसाय पर तो कही कोई असर नहीं पड़ेगा उलटे मिलावटी और कम तौल से अब उनका लाभ और भी बढ़ जाएगा.

15 December, 2010

स्कूल की प्रयोगशाला को बनाया गोदाम

स्कूल की प्रयोगशाला को बनाया गोदाम
एक ओर जहा प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार पैसा पानी की तरह बहा रही है वही देख रेख एवं मानिटरिंग के अभाव में लाखो रूपये की सामग्री फिकी पड़ी है विद्यार्थियों के ज्ञान बढाने के लिए आई इस सामग्री का  लाभ नहीं  मिल पा रहा है.

 विद्यालयों की दुर्दशा की कहानी बयान करता बिलहरी का शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय शिक्षको एवं स्कूल शिक्षा  विभाग के अधिकारियो के लापरवाह रवैया के चलते अराजकता की हालत में पहुच गया है.

636 विद्यर्थियो की संख्या वाले इस विद्यालय की दुर्दशा यहाँ पदस्थ शिक्षको के लालच एवं उदासीनता के कारण हुई है. क्षेत्रीय जनता ने एक शिकायत में जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह से इस विद्यालय की अव्यवस्थाओ एवं विसंगतियों के अवलोकन का आग्रह किया था.

अपने औचक निरीक्षण में अध्यक्ष महोदय यहाँ की स्थिति देख दंग रह गयी. विद्यालय के 22 लोगो के स्टाफ में से मात्र तेरह कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर मिले. विद्यालय की अधिकतर कक्षाए शिक्षक न होने के कारण खाली पड़ी थी.

विद्यालय भवन की जर्जर हालत देख जब प्रीति सिंह ने उपस्थित शिक्षक के एस मिश्र से पूछा तो उन्होंने कहा की नवीन भवन निर्माणाधीन है शायद मार्च तक बनकर तैयार हो जायेगा तो विद्यालय उसमे  स्थानांतरित हो जायेगा. इसलिए इसमें कोई सुधार नहीं कराया जा रहा है. 

गौतलब है की शाला विकास के नाम पर विद्यार्थियों से लगभग प्रति वर्ष 45 हजार रूपये की राशी विद्यालय के कोष में एकत्रित होती है लेकिन इस विद्यालय की दुर्दशा देख कर कही से भी नहीं लगता की इस मद में आये पैसे से शाला में कही कोई मरम्मत का काम कराया गया या फिर पुताई कराई गई है.

लेकिन ठीक इसके विपरीत विद्यालय में एक अन्य मद से लगभग 25 हजार की राशी से मेंटेनेंस का काम चलते देख अध्यक्ष महोदय ने पुछा तो मिश्र बगले झाकने लगे.

प्रयोगशाला के  हालात यह बताते है की यहाँ कभी भी किसी भी प्रकार के प्रेक्टिकल विद्यार्थियों से नहीं कराये जाते है. प्रयोगशाला का कीमती सामान कबाड़ की हालात में कचरे के ढेर में पड़ा है. इस विषय में पूछने पर कक्षा ग्यारहवी की विज्ञान की छात्रा रूचि चोरासिया पिता गणेश प्रसाद चोरासिया ने  बताया की प्रयोगशाला में कभी भी उनसे प्रेक्टिकल नहीं कराये गए

 इसी कक्षा की एक और छात्रा पिंकी  यादव पिता राम कुमार यादव  ने बताया की उसने  प्रयोगशाला में प्रेक्टिकल होते कभी देखा ही नहीं . जबकि एक और  विद्यार्थी शुभम सोनी पिता लोकचंद सोनी ने कहा की भौतिक एवं रसायन विषय के प्रयोग अभी तक तो नहीं हुए शायद भविष्य में होगे.
प्रयोगशाला सहायक के विषय में विद्यार्थियों ने बताया की सुनील गौतम कटनी से आना जान करते है और आज नहीं आये है. गौरतलब है की यहाँ के अधिकांस शिक्षक कटनी से अप-डाउन करते है. देर से आना  जल्दी जाना इस क्रम में विद्यर्थियो की पढाई प्रभावित होती है.

इस सब विसंगतियों को देख प्रिंसिपल बी पी जोतिषी के कार्यशैली पर भी सवालिया निसान लगता है.

प्रयोगशाला कक्ष में बिखरे सामान एवं बेतरतीब पड़ी किताबो को देख अध्यक्ष के पूछने पर शिक्षक के एस मिश्र ने बतया की जिले से कुछ ऐसी पुस्तके भेज दी गयी है जो बिषय यहाँ पढाये ही नहीं जाते. ज्ञात हो की बिलहरी हायर सेकंडरी स्कूल में मात्र कला एवं विज्ञान विषयो की ही पढाई दी जाता है जबकि  जिले से यहाँ सैकड़ो की संख्या में कामर्स  की पुस्तके भी भेज दी गई है जो कचरे के ढेर में पड़ी है. यदि इन पुस्तकों को जरूरतमंद विद्यार्थियों  को बाट दिया जाता तो इसकी उपयोगिता सफल रहती.

जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर कटनी को इस पर तत्काल कार्रवाई करने के लीये लिखा है.

तालाब का पानी पीते चले आ रहे हो और पीते रहो.......


अखिलेश उपाध्याय / कटनी

गरीब मेला में आया अस्प्रश्यता का एक और मामला

सरकार लाख कोशिशे कर ले लेकिन भारतीय जनमानस से जाती-पाती के भेदभाव को मिटा पाना  इतना आसान नहीं है तभी तो कटनी जिले की रीठी जनपद  पंचायतो में लगातार अस्प्रश्यता के मामले निचली जाती के लोगो द्वारा शिकायत के रूप में प्रकाश में आ रहे है.


अभी बरजी प्राथमिक स्कूल के मध्यान्ह भोजन में उच्च  समाज की महिलाओं द्वारा हरिजन बच्चो की थालिया न धोने के मामले की जाँच पूरी भी नहीं हुई है जिसमे उच्चवर्ग के अधिकारियो तथा मीडियाकर्मियो पर आरोप लगाए जा रहे है की मीडिया में बैठे सवर्ण पत्रकार एवं निर्णायक भूमिका में बैठे अधिकारी अपने समाज का पक्ष ले रहे है व खबरों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे है.

यह मामला अधिकारी निपटाने में लगे ही थे की इसी बीच बिलहरी के गरीब मेला शिविर में इससे और भी गंभीर मला प्रकाश में  आया है.
बिलहरी ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर नो की पंच चन्दोबाई पति नरेश चोधरी ने रीठी जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह को लिखित शिकायत में बताया की वह तथा उसके वार्ड के लगभग नो सौ लोग तालाब का पानी पीने मजबूर है.
 चन्दोबाई  ने अपने पत्र में लिखा है की वह ग्राम पंचायत बिलहरी के वार्ड क्रमांक नो की पंच है जो हरिजन वार्ड के नाम से जाना जाता है.  लगभग सात सौ की आबादी वाले इस वार्ड में एक मात्र हेंडपंप के भरोसे लोग जीवन यापन कर रहे है.



आबादी के अधिक दबाब के चलते यह इकलौता  हेंड पम्प लोगो को पानी की पूर्ती नहीं कर पाता है इसलिए मजबूरन यहाँ के वाशिंदों को हरिजन बस्ती के पास ढकोरा तालाब  का प्रदूषित पानी पीने की मजबूरी है. वे ऐसा पिछले कई महीनो से कर रहे है.



चंदो  बाई ने इस पत्र में आगे लिखा है की  जिस वार्ड की वह पंच है वहा पीने के पानी की बड़ी जटिल समस्या है. आस-पास अन्य कोई हेंडपंप अथवा कुआ न होने से वार्ड के हरिजन लोग तालाब का गन्दा पानी पीने मजबूर है.

हरिजन होने के नाते गाँव के अन्य हेंडपंप से वे पानी भर नहीं सकते. ऐसे में विवशता में उन्हें जीने के लिए इस प्रदूषित तालाब का पानी पीना पड़ रहा है.

इन पर की जा रही ज्यादती यही ख़त्म नहीं होती इस तालाब में  मछली पालने वाले इन पर और भी अत्याचार कर रहे है. इस तालाब में मछली पालन भी होता है जिसके कारण इसमें गोबर आदि गंदगी भी डाली जाती है जिससे पानी प्रदूषित हो जाता है.

चन्दोबाई ने वार्ड की अपनी इस समस्या को कई बार सरपंच श्रीमती आशा  वर्मा को मौखिक रूप से बताया तो सरपंच ने जबाब दिया की वह कुछ नहीं कर सकती.

एक हरिजन होने के नाते वह सरपंच की ड्योढी के बाहर जाकर अपनी मर्यादाओ  में रहकर सरपंच से  अपनी गुहार लगाती रही जिसे आज तक सरपंच ने उनकी इस गंभीर समस्या को नहीं समझा.

चंदो बाई के अनुसार ग्राम पंचायत बिलहरी की  सरपंच आशा वर्मा के देवर कैलाश वर्मा ही पंचायत का सञ्चालन कर रहे है. क्योकि सरपंच ने कहा की वह उनके देवर से मिले.

कैलाश वर्मा जो पूर्व में भी सरपंच रह चुके है उन्होंने भड़कते हुए कहा की पानी की समस्या कोई बड़ी बात नहीं है. तुम लोग तालाब का पानी पीते चले आ रहे हो और पीते रहो तुम्हारे चोधरी मोहल्ला में कोई हेंडपंप नहीं खुदेगा.
पंचायत के संचालक सरपंच से आहात और निराश  होकर ग्राम पंचायत की पंच चंदो बाई ने उक्त शिकायत जनपद पंचायत रीठी अध्यक्ष प्रीति सिंह को दी है. मामले की गंभीरता को समझते हुए अध्यक्ष प्रीति  सिंह ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सरपंच को तत्काल इस वार्ड में हेंड पम्प खुदवाने के निर्देश  दिए है.






14 December, 2010

विद्युत् संकट से जूझ रहे किसान

पर्याप्त वोल्टेज  नहीं होने से सिचाई करने में हो रही परेशानी

इन दिनों प्रदेश के किसानो की हालत बदहाल है. एक तो मौसम की मार और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित पर्यावरण के चलते समय पर वर्षा एवं ठण्ड के न पड़ने से भारतीय किसान पहले से ही परेशान है उसी पर प्रदेश के किसानो को भीषण बिजली  के संकट से जूझना पड़ रहा है.

कटनी जिले की तहसीलों में स्थिति तो और भी बदतर है खासकर रीठी बहोरिबंद क्षेत्र के किसानो की तो और भी दुर्गति है. क्षेत्र  के किसानो को   इन दिनों भीषण विद्युत् संकट का सामना करना पड़ रहा है. विद्युत् विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों से लगातार शिकायत के बाद भी आज तक ग्रामीणों की इस स्थाई समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है.

ग्राम पंचायत करहिया के किसान मिट्ठू लाल पटेल ने बताया की दिन में ग्रामीण क्षेत्रो में तो वैसे भी बिजली नहीं रहती है यदि किसान रात में सिचाई करने की भी सोचता है तो बार-बार बिजली गुल होने एवं पर्याप्त वोल्टेज न रहने  के कारण एक एकड़ के खेत को सीचने में इस समय पाच से छेह दिन का समय लग रहा है.

जनपद पंचायत बचैया के किसान सोनेलाल ने बताया की वर्तमान में  इस संकट के कारण किसान न ही थ्रेसर चला पा रहे है और न ही kheto  में उचित मात्रा में सिचाई हो पा रही है. शिचाई पम्प के चालू रहने की स्थिति में वोल्टेज कम होने पर घरो में जुगनुओ की तरह बल्ब जलने लगते है.

बिजली न मिलने तथा कम वोल्टेज  से प्रताड़ित रमेश रजक ने बताया की किसान का बेटा कहने वाले प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के समय में यदि कोई सबसे ज्यादा परेशान, दुखी , उपेक्षित और  प्रताड़ित  है तो वह है मध्य प्रदेश का किसान.

बिजली की समस्या से न केवल किसान बल्कि व्यापारी, विद्यार्थी, गृहणिया सभी परेशान है. इस समय बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थी शाम के समय बिजली के न रहने तथा बार-बार गुल होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. रीठी में बिजली जाने और आने का तो जैसे कोई समय ही नहीं है शाम को पहले जहा छेह बजे बिजली आती थी अब तो कोई ठिकाना भी नहीं है की बिजली आएगी भी या नहीं और यदि आएगी भी तो कितनी देर रहे इसका किसी को कोई पता नहीं होता

हालाकि  विद्युत् विभाग ने तहसील मुख्यालय के लिए कटौती की समय सीमा तय कर रखी  है लेकिन रीठी तहसील मुख्यालय में पदस्थ कर्मचारी कटौती के समय के अलावा भी बिजली काट रहे है क्योकि ऐसा पता चला है की जो कर्मचारी जितनी ज्यादा कटौती करेगा उसे विद्युत विभाग से अतिरिक्त लाभ मिलेगा.

जनप्रतिनिधियों  की उदासीनता के चलते रीठी तहसील में बिजली की भारी किल्लत से लोग परेशान है. यहाँ के विधायक निशित पटेल कांग्रेसी है और बड़े उद्योगपति है उन्हें अपने व्यापार से फुर्सत नहीं भला वो क्या जनता की सुध क्यों लेगे.

रही बात सांसद की तो खजुराहो संसदीय क्षेत्र के सांसद जीतेन्द्र सिंह बुंदेला तो ईद का चाँद हो गए है. धोखे में यहाँ के लोगो ने भा जा पा के प्रत्याशी की जिता तो दिया लेकिन अब जनता अपने इस निर्णय पर पछता रही है.


रीठी तहसील के किसानो ने जिला अध्यक्ष एवं विद्युत् विभाग के कर्मियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए इस समस्या  के स्थाई निराकरण की मांग की है. गौरतलब है की लोड बढ़ने पर यहाँ पर बार-बार फ्यूज जाने की लगातार शिकायत मिल रही है समस्त ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने इस समस्या के शीघ्र निराकरण  की मांग की है

आखिर गरीब किसानो की बदहाल स्थिति पर कौन और कब सोचेगा......?




सड़क के नए नियम

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एक आदेश के तहत महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना में अब सौ फ़ीसदी राशी का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रो में सीमेंट कंक्रीट रोड का निर्माण नहीं किया जा सकेगा. यह कार्य अब म न रे गा के अलावा अन्य मदों की राशी के सहयोग से ही किया जायेगा.

अब शासन के नये निर्देशों के अनुसार महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम की शत-प्रतिशत राशी का उपयोग करते हुए ग्रामीण क्षेत्रो में सीमेंट कंक्रीट रोड का निर्माण नहीं किया जा सकेगा. यदि पूर्व में सी सी रोड के ऐसे कोई कार्य जो सौ फ़ीसदी म न रे गा की राशि  से स्वीकृत है एवं अप्रारम्भ है, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव  आर परशुराम ने दिए है.

अपने निर्देश में अपर सचिव ने स्पष्ट कहा है की राशी के साथ अन्य मद की राशी के सहयोग से सीसी रोड के मात्र ऐसे कार्य ही स्वीकृत किये जाये जिनमे म न रे गा के कार्यो हेतु प्रावधानित मजदूरी और सामग्री का अनुपात 60 :40 की सीमा के अलावा शेष राशी विधायक निधि या अन्य किसी शासकीय मद से व्यय किया जाना सुनिश्चित होगा.

यह सड़के ग्रामो के आतंरिक मर्ग अथवा 500 मीटर तक की दूरी होने के फलस्वरूप प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सम्मिलित नहीं किये गए ग्रामो का चयन सी सी रोड हेतु किया जा सकेगा. कार्य का क्रियान्वयन म न  रे गा के प्रावधानों का पालन करते हुए मस्टररोल पद्धति से कराया जायेगा. कार्य में मानव श्रम के बदले मशीनरी  का उपयोग एवं ठेकेदारी प्रथा पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी. अंतिम मस्टररोल के भुगतान के 15 दिनों की सीमा में पूर्णता   प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य होगा.

मूल्यांकन का कार्य साप्ताहिक आधार पर होगा. इसी तरह भुगतान 15 दिवस की सीमा में होगा. कम्प्रेसिव स्ट्रेंग्थ का प्रयोगशाला परीक्षण होगा. कार्य संपादन के दौरान उपयंत्री को मौके पर उपस्थित रहकर गुणवत्ता पूर्वक   कार्य संपादन करना सुनिश्चित करेगे. समय-समय पर नमूने एकत्रतित कर प्रयोगशाला भी वे ही भिजवायगे. सहायक यंत्री को दिन में एक बार निरीक्षण अनिवार्य होगा. साइड आर्डर बुक में उन्हें टीप भी अंकित करना होगा. भौतिक सत्यापन समिति करेगी.

सडको में क्या खासियत रहेगी
  • अधिक आबादी व पानी के भराव वाले ग्रामो को मिलेगी प्राथमिकता
  • सी सी रोड की चौडाई सामान्य तीन मीटर रखी जाएगी इससे कम नहीं
  • सी सी  रोड के दोनों ओर होगी नालिया, आकार होगा वी शेप
  • प्रत्येक 100 मीटर के अंतराल पर होगा 100 एम् एम् का पाइप
  • सी सी रोड की पूरे 28 दिन करना होगा तराई

13 December, 2010

रेल कर्मचारियों की जमा पूजी में हुआ घोटाला

 डीजल शेड न्यू कटनी के सैकड़ो कर्मचारियों की खून पसीने बहाकर जमा की गई पूजी पर डाक और रेल विभाग के कर्मचारियों ने लगभग चार साल पहले डाका डाला था. घोटाला शुरू  होने के  दो साल बाद 2007 में इसका खुलासा होने दी बाद दोनों विभागों ने जाँच शुरू की थी जो अब तक पूरी नहीं हुई है.

हासिल जानकारी के अनुसार हाल ही में डाक विभाग द्वारा कर्मचारियों को भेजे गए पत्रों से नया खुलासा हुआ है. इस पत्र के साथ लगे आहरण पत्रको से जानकारी मिली है की कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखो रूपये उनके खाते से निकाल लिए गए है. इतना ही नहीं कई रेल कर्मचारियों को तो पता भी नहीं है की उनके नाम से और कितने  खोले गए है.

इन फर्जी खातो में अब भी नाममात्र की रकम शेष दर्शाई गई है. यह देखने के बाद कर्मचारियों के होश उड़े हुए है. जबकि विभागीय जाँच अधिकारी मामले को जल्द निपटाने की बजाय इसे लम्बा खीच कर आरोपी कर्मचारियों को बचाने का प्रयास कर रहे है.

कटनी डीजल शेड में कार्यरत एक हजार से अधिक कर्मचारियों के अल्प बचत योजना के तहत एन के जे उप डाकघर में खाते खोले गए थे. जिसमे  प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से हर माह तीन सौ रूपये काट कर जमा कराये जाते थे. यह कार्य लोको  फोरमैन को सौपा गया था.

अक्टूबर 2007 में रूपये की जरूरत पड़ने पर काफी संख्या में कर्मचारी अपना जमा धन निकालने पहुचे तो उन्हें पता चला की खाते में रकम ही नहीं है, जिसकी शिकायत रेल विभाग समेत पुलिस को की गई.
प्रारंभिक जाँच में लोको फोरमैन व्ही के श्रीवास्तव, ट्रेड पेंटर सुरदर्शन रजक, बी एल राय, पोस्ट मास्टर श्यामलाल गौड़, यू के चतुर्वेदी, डाक निरीक्षक एस के जैन के नाम  सामने आये थे. जिसमे 23 लाख का गबन पकड़ा गया था. तब से पुलिस और रेलवे की जाँच जारी है जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है. खुलासे के बाद कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था

कार्यरत और रिटायर हो चुके रेल कर्मचारियों ने बताया  की उनके खातो की संख्या अचानक बढ़ गई है. डाक विभाग ने जो पत्र उन्हें भेजे है उनमे कई खाते उनके नाम से खुले बताये गए है. जबकि उन्होंने वास्तव में उतने खाते ही नहीं खोले थे. इनमे से कुछ को तो विभाग ने खाते में जमा बताई जा रही रकम का भुगतान भी यह बताने के बावजूद कर दिया है. जिससे रेल अधिकारियो व डाक विभाग की साथ-गाठ  से किये गए गोलमाल के पुख्ता प्रमाण सामने आ गए है. कर्मचारियों ने बताया की आहरण पत्रक पर किये गए फर्जी हस्ताक्षर को डीजल शेड के फोरमैन ने भी अपनी सील व हस्ताक्षर से प्रमाणित किया है.

डाक विभाग ने कुछ दिन पहले एन के जे डीजल शेड में खाता धारको की एक सूची व नाम  खाता नम्बरों के साथ चस्पा की है.  इस सूची को दिन भर कर्मचारी टटोल रहे है. मगर इसमें रकम की जानकारी न होने से कर्मचारियों में चिंता बनी हुई है. सूची में अपना नाम तलाश रहे कर्मचारयो ने बताया की अब तक उनके खातो से गबन की गई रकम वापस लौटा दिए जाने की सूचना नहीं मिली है.

जबकि यह रकम उन्हें घोटाला उजागर होने के तत्काल बाद डाक विभाग द्वारा लौटा दी जानी चाहिए थी. इसके अलावा ब्याज मिलेगा या नहीं यह भी अभी तय नहीं है.

सिम का असामाजिक तत्व कर सकते है उपयोग


आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियों द्वारा इन दिनों तरह-तरह के प्रलोभन देकर लोगो को बहुत ही कम दरो पर सेल फोन की सिम बेचीं जा रही है. कीमत से अधिक बैलेंस देने  की बात कई कंपनियों द्वारा इंटरनेट और थ्री जी कीसुविधा भी दिए  जाने की बात की जा रही है.

बड़ी आसानी से कई सुविधायुक्त  इन सिमो के गलत उपयोग की भी ज्यादा सम्भावना है. हाल ही में कई आतंकवादी घटनाओं में भी आतंकवादियों द्वारा इन्ही फर्जी सिमो का उपयोग किये जाने की बात सामने आई थी. टू जी स्पेक्ट्रम घोटालो की वजह से ही कई कंपनिया बाजार में आई और आगे होने के चक्कर में नियमो को ताक पर रखकर बेधड़क इनकी बिक्री की जा रही है.

वास्तव में सैकड़ो की तादाद में प्रतिदिन बिक रही इन सिमो की बिक्री पर नजर और साथ ही ग्राहक द्वारा जमा किया गए दस्तावेजो की जाँच भी की जानी चाहिए,इन फर्जी सिमो की वजह से आये दिन लोगो के मोबाइलों पर असामाजिक तत्वों द्वारा गलत सन्देश व फोन कर परेशान किया जाता है.

साथ ही हाल ही में शुरू हुई 108 सेवा में भी गलत सूचनाये  इन सिमो के माध्यम से सेवा में लगे कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है. मजनुओ द्वारा इन फर्जी सिमो से महिलाओं को परेशान किया जा रहा है. वही युवा भी इन सस्ती और फ्री टू  फ्री सेवा का जमकर उपयोग कर रहे है.

इन दिनों फर्जी सिमो का व्यवसाय धड़ल्ले से चल रहा है. सिम की कीमत से कई गुना बैसेंस देने के लालच के चलते प्रतिदिन सैकड़ो की तादाद में सीमो की बिक्री हो रही है. इन सिमो की बिक्री के दौरान जमा किये जाने वाले दस्तावेज भी फर्जी लगाये जा रहे है.

देखा जाए तो इन सिमो का सबसे ज्यादा उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है. मगर इन सबसे बेखबर प्रशासन गफलत की नीद में सो रहा है. वही इसका खामियाजा शरीफ लोगो को भुगतना पड़  रहा है.

 पिछले लम्बे समय से विभिन्न कंपनियों की सिम कीमत से अधिक बैलेंस देने की बात कहकर बेचीं जा रही है. पांच और दस रूपये का बैसेंस दिया जा रहा है. शहरो के मुख्य बाजारों सहित गाँव की गलियों तक में इन कंपनियों द्वारा सिम बिक्री के स्टाल लगाए जा रहे है. 

लोगो द्वारा सस्ती दर पर मिलने वाली इन सिमो को खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेजो का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. वही दूकानदार भी अधिक बिक्री के चक्कर में दस्तावेजो का निरिक्षण न कर स्वयं इसे बढ़ावा दे रहे है.

ग्राहक द्वारा परिचय पत्र के साथ जमा की गई फोटो को स्केन कर कई दुकानदार दूसरे परिचय पत्र में इन फोटो को लगाकर सिम बेच रहे है. चूकी यह सिमे उपयोग कर फेक दी जाती है इसलिए दूकानदार और ग्राहक द्वारा सिमे चालू करने के उद्देश्य से ही कंपनी को  यह फर्जी दस्तावेज जमा किये जाते है. इन दस्तावेजो की जाँच होने तक यह सिमे बंद कर दी जाती है.

इन सिमो की बिक्री  पर नजर डाले तो शहर में प्रतिदिन विभिन्न कंपनियों की लगभग डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा सिमे बिकती है.  शरीफ व्यक्ति एक बार नंबर लेने के बाद दोबारा उसे नहीं बदलता मगर असामाजिक तत्वों द्वारा बड़ी संख्या में इन सिमो को खरीदकर  उसका गलत उपयोग कर फैक दिया जाता है. इन सिमो का सबसे ज्यादा उपयोग सटोरिये, जुआरी, वाहन चोर और मजनुओ सहित असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है.

जब कार्यपालन यात्री ने शासकीय राशी अपने नाम की

इस समय कटनी जिले में शासकीय जनहितैषी योजनाओं में क्षेत्र का विकास कम इन योजनाओं में आई राशी से अपना विकास अधिकारी कर्मचारी करते ज्यादा देखे जा सकते है. कटनी कलेक्टर  की विशेष कृपा से चल रहे ग्रामीण स्वस्थ्य यांत्रिकी विभाग कटनी में व्याप्त अनियमितताए ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है.

ऐसा ही एक मामला प्रकश में आया है पूर्व कार्यपालन यंत्री ने अपने नाम से पच्चीस सरकारी चेक काटकर 41 लाख से ज्यादा की राशी निकाल ली. कलेक्टर ने दोषी ई ई आर ई एस को शो काज नोटिस दिया और जबाब न मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और हमेशा की तरह फाईल ठन्डे बस्ते में चली गई.

इस मामले का खुलासा युवा जनता दल यूनाइटेड के प्रातीय उपाध्यक्ष राजेश नायक ने किया है और बताया की महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जिला कटनी के अंतर्गत श्री खेडकर कार्यपालन यात्री  आर ई एस द्वारा 13 अक्टूबर 2009 तक की अवधि में एन आर ई जी एस के कार्यो का भुगतान 25 सेल्फ चेको के माध्यम से 41 लाख 22 हजार 684 रूपये का आहरण किया गया है. जो एक गंभीर वित्तीय  कदाचरण है क्योंकी शासन का स्पष्ट निर्देश है की एन आर ई जी एस अंतर्गत नकद भुगतान नहीं किया जा सकता है.

 इस सम्बन्ध में कलेक्टर द्वारा 10 मार्च को पत्र जारी कर के ई ई आर ई एस से स्पष्टीकरण चाहा गया था किन्तु कलेक्टर की
नोटशीट दिनांक 20 अप्रेल के बाद फ़ाइल कैसे और क्यों बंद कर  दी गई यह गंभीर चिंता का विषय है.

भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों से घिरे तत्कालीन ई ई आर ई एस खेडेकर के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाही राज्य शासन के समक्ष प्रस्तावित नहीं की गई है. इस सम्बन्ध में उचित कार्रवाई करने हेतु मध्य प्रदेश के मुख्यमंती एवं कलेक्टर को पत्र लिख कर जनता दल यू ने मांग की है.

इस सम्बन्ध में कलेक्टर कार्यालय के पत्र क्रमांक 8545 म न रे गा लेखा 10 मार्च में कलेक्टर  को महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जिला कटनी के अंतर्गत आर ई एस के कार्यपालन यंत्री श्री खेडेकर द्वारा अवधि 13 अक्टूबर 2008 से 24 जून 2009 तक किये गए सेल्फ चेको से राशी आहरण की पुष्टि  जिला पंचायत के म न रे गा अधिकारी  ने की  है.

रिपोर्ट का परिक्षण पर श्री खेडकर द्वारा राशी 41 ,22 ,684 रूपये का आहरण 25 चेको द्वारा दिया जाना पाया गया है जिसमे से राशी
39,40 ,732 बैंक-पोस्ट आफिस में नकद जमा किया जाना एवं शेष राशी का उपयोग विविध एवं आकस्मिक व्यय के लिए किया गया है.

इसे कलेक्टर ने अत्यंत आपत्तिजनक एवं गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी का कदाचरण माना है क्योकि शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए  है की महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत नकद भुगतान नहीं किया जा सकता है.

इस आधार पर कलेक्टर ने श्री खेडकर को नोटिस  देकर चेतावनी दी थी की उक्त अनियमितता के सम्बन्ध में वे  अपना स्पष्टीकरण तीन दिवस  में देना सुनिश्चित करे. इसके बाद से उक्त कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी..

जनता  दल यू ने गत दिवस कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर अग्रिम कार्रवाई की मांग उठाई है.

.........ताकि बेरोजगारों के साथ फिर अन्याय न हो सके.

जनपद पंचायत रीठी में महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक संविदा भरती हेतु तत्कालीन सी ई ओ सुरेश कुमार झारिया ने जमकर फर्जीवाडा कर सैकड़ो बेरोजगार युवक-युवतियों से लाखो रूपये बतौर रिश्वत बसूल किये एवं योग्य उम्मेदवारो  को रोजगार के अवसर से वंचित कर अयोग्य व्यक्तियों का चयन किया गया है.

ग्राम पंचायत घनिया से इस पद के लिए आवेदन देने वालो में से एक शैलेश कुमार चौरसिया ने कलेक्टर, एस पी, पंचायत मंत्री, मुख्य मंत्री  सभी को  तब से लेकर अब तक दर्जनों शिकायते की है लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्रवाही नहीं की गई.

शैलेश चौरसिया ने एक बार फिर कटनी कलेक्टर तथा  एस पी से मांग की है की जैसे अनूपपुर में संविदा शिक्षको की भरती में भ्रष्टाचार के चलते दोषी सी ई ओ के विरुद्ध कार्रवाई कर गिरफ्तारिया की है उसी तरह रीठी 
 जनपद में भी सी ई ओ सुरेश झारिया  के ज़माने में हुए भ्रसटाचार की जाँच होनी चाहिए एवं परदे के पीछे  कार्य करने वाले मस्टर माइंड गिरोह पर तथा नियुक्त किये गए फर्जी अंकसूची धारको के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में बेरोजगार युवक युवतियों के साथ  फिर अन्याय न हो सके.
 गौरतलब है की ग्राम रोजगार सहायक भरती प्रक्रिया में अभी भी आठ मामले कोर्ट में चल रहे है तथा शेष चयनित आवेदकों की अंकसूचियो के फर्जी होने की चर्चाये क्षेत्र में जोर शोर से चल रही है.

12 December, 2010

सौ दिनों की बंदिश में लटकी मनरेगा योजना

केंद्र शासन द्वारा संचालित रोजगार गारंटी योजना में सौ दिनों की बंदिश होने के कारण ग्रामीण मजदूरों को काम के लिए भटकना पड़ता है. मजदूरों की कमी से काम अधूरे रह जाते है, जिसके कारण कार्य पूर्ण होने में विलम्ब होता है.

देश  में महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना को अधिनियम के रूप में लागू किया गया है. इस अधिनियम के तहत मजदूरों को रोजगार उपलब्द्ध कराया जाता है. इसके तहत ग्राम पंचायत के पंजीकृत परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का कार्य प्रदान किया जाता है.

वितीय वर्ष में सौ दिन पूर्ण होने पर मजदूरों द्वारा अगले वित्ते वर्ष दी लिए मजदूरी के लिए इन्तजार करना पड़ता है. इस बीच उन्हें काम के लिए महानगरो एवं अन्य जगहों के लिए भटकना पड़ता है, जिससे उनके समक्ष रोजी-रोटी  की समस्या आ खडी  होती है.

गौरतलब है की प्रत्येक ग्राम में रोजगार गारंटी योजना के तहत पंजीकृत परिवारों की संख्या के अनुसार कार्यो का आवंटन किया जाता है, जिसमे कार्य नहीं करने वाले मजदूर भी शामिल होते है. इस तरह गाँव में काम करने वाले मजदूरों को मिलने वाली पारिश्रमिक से अधिक राशी मिलती है. लिहाजा वह राशी पंचायत के खाते में अतिरिक्त पड़ी रहती है. सौ  दिन के पूर्ण होने के पश्चात स्वीकृत काम कराने में पंचायत को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.  अन्य स्थानों से मजदूरों का आना भी असंभव हो जाता है, जिसके कारण प्रारंभ किये गए कार्यअधूरे  हो जाते है.

ग्रामीण अंचलो के ऐसे परिवार जिन्हें हर समय काम की आवश्यकता होती है, उन्हें इस योजना का लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पाता. यहाँ यह बताना लाजिमी होगा की 15 अक्टूबर के पश्चात काम प्रारंभ किया जाता है जो 15 जून तक जारी  रहता है. 15 जून के बाद कृषि कार्य शुरू होने के कारण मजदूर बेकाम हो जाते है. वही रोजगार गारंटी से मिलने वाले सौ दिन महज डेढ़ दो माह में मजदूरों द्वारा कार्य  पूर्ण कर लिया जाता है. शेष बचे समय में वे बेरोजगार हो जाते है, जिसके कारण पलायन की स्थिति भी निर्मित होती  है.

यह विसंगति महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के नीतिनियांताओ द्वारा इस योजना के लागू  करते समय विचरना था.

11 December, 2010

बिना डिग्री डाक्टर लिखा तो खैर नहीं

उक्त समाचार पढ़कर आप चौकिये नहीं स्वस्थ्य विभाग के ताजा निर्देश के अनुसार वैध डिग्रीधारी ही अपने नाम के आगे डाक्टर की उपाधि लिख सकेगे. विभाग ने एक सूची जारी की है जिसमे स्पष्ट रूप से लिखा  है की इस उपाधि का उपयोग कौर कर सकता है और कौन नहीं ?

स्वस्थ्य विभाग ने उन लोगो पर कार्रवाई करने का मन बना लिया है जिनके पास डिग्री नहीं ही लेकिन वे अपने नाम के आगे डाक्टर लिख रहे है. चिकित्सा व्यवसाय को बदनाम करने वालो को अब कानून के दायरे में लिया जाएगा. इस शब्द का कौन उपयोग कर सकता है इसकी भी परिभाषा निर्धारित कर दी गई है.

संचनालय स्वस्थ्य सेवाए भोपाल ने एक परिपत्र जारी कर इस शब्द के दुरूपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किये है. डाक्टर जैसे सम्मानीय शब्द की गरिमा बनाये रखने और इसके दुरूपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस नियम का पालन नहीं करने वालो को चिकित्सा अधिनियम की धारा के तहत तीन साल का कारावास  और पचास हजार रूपये के जुर्माने का प्रावधान है.
चिकित्सा सेवा से सम्बंधित व्यक्तियों की सुरक्षा को लेकर सिर्फ बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त  पंजीकृत व्यक्ति ही नाम के आगे डाक्टर शब्द का उपयोग कर सकेगे,

 इस दायरे में मान्यता प्राप्त आयुर्विज्ञान पद्धति मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद्, मध्य प्रदेश राज्य होम्योपैथिक परिषद्, मध्यप्रदेश आयुवेदिक यूनानी और प्रकृति चिकित्सा से पंजीयन प्राप्त व्यक्ति ही डाक्टर शब्द का उपयोग कार सकते है. इनके  अलावा अन्य व्यक्तियों के द्वरा डाक्टर की उपाधि अपने नाम के आगे लगाना गैर कानूनी समझा जायेगा एवं ऐसा  करने वालो को सख्त सजा मिलेगी. उम्मीद है की स्वस्थ्य विभाग इसे कागजो से निकालकर karyroop  में क्रियान्वित  करने का पूरा प्रयास करेगा.

डाक्टर लिकने से जो अपात्र है -
bee  एस सी न्युत्रिसन, एम् ऐ मनोविज्ञान, रेडियोग्राफर, फिजियोथैरेफिस्ट, निजी चिकित्सालयों  या नर्सिंग होम में कार्यरत कर्मचारी  और गैर डिग्रीधारी क्लिनिक संचालक अपने नाम के आगे डाक्टर शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते है. ऐसा करने  पर उन्हें कानून का उल्लघन करने का दोषी मानकर कार्यवाही की जायेगी.

लक्जरी कारे निजी परमिट पर टेक्सी में चल रही

इस समय जिले में निजी कार मालिक अपनी गाडियों को टेक्सी के रूप में धड़ल्ले  से चला रहे है जबकि इनके  पास टेक्सी परमिट नहीं है. परिवहन विभाग के अधिकारी आखे बंद किये मौन सबकुछ साक्षी भाव से देख रहे  है. इस लापरवाही का परिणाम  यह है की नागरिको से टेक्सी संचालको द्वारा मनमानी वसूली की जा रही है.

यातायात पुलिस भी वाहनों में ओवर लोडिंग  होने को अनदेखा कर देती है और मामूली चालानी कार्रवाई का मामला निपटा कर अपने कार्य से इतिश्री कर लेती है जबकि परिवहन केअधिकारी  तो इस ओर देखने तक की जहमत नहीं उठाते है. परिवहन की उदासीनता के चलते ही जहा नागरिको को भारी भरकम किराया  देने विवश होना पड़ रहा है वही हर माह राजस्व की भी हानी हो रही है.

शहर में तीन दर्जन से अधिक लक्जरी कारे निजी परमिट होने के बावजूद भी धड़ल्ले  से टेक्सी में चल रही है. इनके संचालक द्वारा परिवह विभाग से टेक्सी परमिट लेना तो दूर इस बारे में सोचना भी उचित नहीं समझते है. यही कारण है की परिवहन विभाग को जहा चूना लग रहा है वही परिवहन विभाग कार्रवाई करने के बजाय टेक्सी परमिट जारी करने की मुहिम चलाने में कोई रूचि नहीं ले रहा है.

इस सम्बन्ध में जब जिला परिवहन कार्यालय कटनी से जब टेक्सी परमिट वाली लक्जरी गाडियों टाटा इंडिका, बोलेरो, स्कार्पियो, ईनोवा, तवेरा गाडियों के बारे में जानकारी मांगी गई तो परिवहन विभाग के अधिकारी जानकारी देने में ही कतराते नजर आये. परिवहन विभाग के पास टेक्सी  में चलने वाली लक्जरी वाहनों की जानकारी ही नहीं थी. अंदाज से उन्होंने बता दिया की कुछ गाडियों  के संचालको ने टेक्सी परमिट लिए है लेकिन कितने पता नहीं.

टेक्सी में चल रही निजी परमिट के लक्जरी वाहनों पर परिवहन विभाग का नियंत्रण नहीं होने से वाहनों के संचालको द्वारा जरूरतमंद नागरिको को मनमाने ढंग से लूटने का काम किया जा रहा है. वाहन संचालको द्वारा अपनी मनमर्जी से किराया भी निर्धारित कर लिया गया है इंडिका कार  का किराया ही सौ किलोमीटर का पंद्रह सौ रूपये माँगा जाता है ऐसे में संचालको द्वारा नागरिको को लूटने का कार्य किया जा रहा है लेकिन परिवहन विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे बैठा हुआ है.

निजी परमिट होने के बाद टेक्सी में चल रहे आधा सैकड़ा से अधिक लक्जरी वाहनों पर यदि परिवहन विभाग द्वारा मुहिम चलाकर कार्रवाई की जाती है तो निश्चित रूप से परिवहन विभाग को राजस्व की अच्छी आय हो सकती है लेकिन इस दिशा में परिवहन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने से विभाग को हर माह राजस्व की हानी उठनी पड़ रही है.

परिवहन विभाग द्वारा न तो टेक्सी में चल रही निजी परमिट के वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है और न ही किराया निर्धारित किया जा रहा है ताकि वाहन संचालको के इस लुतेरूपन से नागरिक बच सके.

कुलमिलाकर परिवहन विभाग द्वारा रूचि  नहीं लेने के कारण ही नागरिको को मनमाना किराया देने मजबूर होना पड़ रहा है. नागरिको ने जिला  कलेक्टर से परिवहन विभाग को निर्देशित करने की गुहार लगाईं है ताकि किराया निर्धारित हो सके एवं निरंकुश तरीके चल रहे निजी वाहनों को टेक्सी में चलाये जाने पर रोक लग सके.

10 December, 2010

फर्जी हाजिरी भरकर हो रहा काम

ग्राम पंचायत घनिया में पदस्थ मेट भान सिंह एवं उत्तम सिंग द्वारा धर्मेन्द  बर्मन उपसरपंच ग्राम पंचायत घनिया के विरुद्ध मस्टर रोल में फर्जी हाजिरी भरे जाने सम्बन्धी शिकायत जनसुनवाई में की गई थी.  शिकायत की जाँच उपयंत्री त्रिभुवन सिंह से कराई गई. जिसमे सम्बंधित शिकायतकर्ता भानसिंह एवं उत्तमसिंह, मेट ग्राम पंचायत घनिया को ही फर्जी हाजिरी भरे जाने का दोषी पाया गया.

कार्यक्रम अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत रीठी ने सरपंच सचिव ग्राम पंचायत घनिया को निर्देशित किया है की आप तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषी मेटो भानसिंह एवं उत्तमसिंह को मेट पद से प्रथक करने की कार्रवाई करे तथा कृत कार्रवाई से कार्यालय को अवगत कराना सुनिश्चित करे.

इस सम्बन्ध में उपसरपंच धर्मेन्द बर्मन का कहना है की जब जनसुनवाई में प्रस्तुत आवेदन के सम्बन्ध में उपयंत्री  त्रिभुवन सिंह द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन में शिकायत झूठी पाई गई और स्वयं शिकायत करता ही फर्जी हाजिरी भरकर पंचायत में की जा रही गड़बड़ियो में लिप्त पाए गए लेकिन १२.१०.१० को जारी पत्र के बाद भी ग्राम पंचायत घनिया सचिव पुष्पेन्द्र मिश्र ने आज दिनांक तक दोषी मेटो नहीं हटाया है.

लगता है इसमें सचिव की मिली भगत से सबकुछ अनियमितताए चल रही है. उपसरपंच धर्मेन्द बर्मन ने कलेक्टर से सचिव की इस घोर लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की है एवं दोषी मेट को तत्काल प्रभाव से हटाये जाने की करवाई करने की मांग की है.

09 December, 2010

पूर्व सरपंच ने हडपा कर्मचारी का वेतन

जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचयत सिम्डारी के सुकरत पिता ललिया बसर   ने जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह को सिम्डारी  पंचायत के पूर्व सरपंच राजेंद्र विश्वकर्मा के कार्यकाल के दौरान तेरह माह के वेतन हड़प जाने की एक लिखित शिकायत की है.
अपने शिकायती पत्र में सुकरात ने  पूर्व सरपंच राजेन्द विश्वकर्मा पर आरोप लगाया है विछले पंचवर्षीय में राजेन्द सरपंच रहा एवं  उसके कार्यकाल में तेरह माह का वेतन सुकरत को नहीं दिया गया. सैकड़ो बार निवेदन करने पर भी इस अवधि का भुगतान सरपंच ने उसे नहीं किया. सुकरत का आरोप है की पूर्व सरपंच ने उक्त अवधि का पैसा स्वयं हड़प लिया है.

सुकरत बसोर ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के गद्मान्य नागरिको से  अनेको बार अपनी शिकायत की  एवं उसे अपना पैसा दिलवाने के लिए निवेदन भी किया लेकिन इन जनप्रतिनिधियों ने या तो पूर्व सरपंच से कहा ही नहीं या फिर साठ-गाठ कर समझौता करके स्वयं पैसा लेकर मामला रफा दफा कर दिया.

अपने इस शिकायती पत्र में सुकरत ने आरोप लगाया है की पूर्व सरपंच राजेंद्र विश्वकर्मा ने उसे जातिसूचक गन्दी गलिया भी दी है एवं वह तो पैसा देने से स्पष्ट मना कर रहा है. सुकरात ने बताया की उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया है.
गरीब हरिजन के साठ इस हो रही ज्यादती के लिए उसने नयन के अपेक्षा की गुहार अध्यक्ष से लगाई  है.

गरीब मेला में उमड़ी भीड़


शिवराज सरकार  की मंशा के अनुरूप इस समय जनपद पंचायत रीठी में गरीब मेला का आयोजन किया जा रहा है. सप्ताह के प्रत्येक बुधवार को लगने वाले इन गरीब मेलो में ग्रामीण जनता बड़ी संख्या में अपनी समस्याए लेकन अपने आवेदन जमा करने उत्साहित दिख रहे है.जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने लाडली लक्षिम के चैक इस शिविर में आई लाडलियो की माताओं को बाटे


अभी तक रीठी तथा बडगांव में इन शिविरों में अच्छे  खासे आवेदन ग्रामीणों ने जमा करे है. आगामी 15 दिसंबर को गरीब मेला बिलहरी में आयोजित होगा.
इस बार ग्राम पंचायत देवगांव में देवगांव, जमुनिया, मढ़ा देओरी, सिमरा नंबर एक, रायपुर , सुगवा, मझगवा, मह्गावा , मूर्पार , nitarra  , इम्लाज, बिरुहली  इन सभी ग्रामो के ग्रामीण अपनी-अपनी समस्याओ को लेकर आये थे.


जनपद रीठी के सी ई ओ पंकज जैन ने विस्तार से शासन की सभी योजनाओं को ग्रामीणों को समझाया.


इस बार भी हर बार की तरह बी पि एल सूची में नाम जुडवाने को ही आवेदन सर्वाधिक 574 रहे जबकि एक भी आवेदन इस योजना से नाम कटवाने के लिए नहीं आया.

08 December, 2010

फर्जी मूल्यांकन कर निकला पैसा

सामने आ रही अनियमितता
म न रे गा के कार्यो में व्याप्त भ्रस्टाचार एवं लापरवाह अधिकारी कर्मचारी पर अंकुश लगाने की दिशा में जनपद पंचायत अध्यक्ष रीठी श्रीमती प्रीति सिंह ठाकुर इस समय विगत वर्षों में विकास कार्यो का लेखा जोखा लेने पंचायत के भ्रमण पर है. इसी सिलसिले में भ्रमण के दौरान अध्यक्ष को अनेको अनियमितताए देखने को मिल रही है.

इस समय रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष के कार्य कलाप से क्षेत्रीय जनता में विश्वास जाग्रत हुआ है एवं अब ग्रामीण उन्हें अपनी समस्याओं  एवं विकास कार्यो में हुए भ्रस्टाचार की शिकायत करने लगे  है जिनपर अध्यक्ष द्वारा तत्काल मौके पर पहुच कर जाँच पड़ताल की जा रही है.

ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत कैना में म न रे गा के अंतर्गत  कराये गए काम का प्रकाश में आया. ग्रामीणों ने एक शिकायत में बताया की इस पंचायत में बड़ा तालाब एवं बंधान विस्तारीकरण  का कार्य डहरिया नाला से स्टाप डेम का निर्माण हेतु म न रे गा के तहत स्वीकृत हुए थे लेकिन सरपंच, सचिव द्वारा कार्य  नहीं कराया गया एवं उपयंत्री बी बी गुप्ता  एवं सहायक यंत्री उद्दे  द्वारा फर्जी मूल्यांकन कर आहरण कर लिया गया है.

इस सम्बन्ध में जब जनपद अध्यक्ष द्वारा शिकायत की जाँच की गई तो शिकायत सही पाई गई और सरपंच एवं सचिव से डेढ़-डेढ़ लाख रूपये की बसूली कर राशी जमा कराई गई है

लेकिन मजेदार बात यह की म न रे गा का कार्य देख  रहे उपयंत्री श्री बी बी गुप्ता द्वारा मूल्यांकन करके इन दोनों कार्यो का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है.

अध्यक्ष ने उपयंत्री के इस फर्जी मूल्यांकन की  लिखित शिकायत संभागायुक्त श्री प्रभात पराशर, कलेक्टर, एस दी एम्  को की है अपने पत्र में अध्यक्ष ने लिखा  है की सरपंच सचिव से राशी बसूलने का मतलब है की उपयंत्री  एवं सहायक यंत्री द्वारा फर्जी मूल्यांकन कर दोनों कार्यो की लगभग साढ़े आठ लाख की राशी का आहरण कर गबन किया गया है.

इसके पूर्व भी कटनी कलेक्टर एम् एशेल्वेंद्र को जाँच प्रतिवेदन की प्रति लगाकर इस सम्बन्ध में एक महीना पहले भी शिकायत की थी लेकिन उनके द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए पुनः इन प्रमाणित तथ्यों के आधार पर अध्यक्ष ने सम्बंधित उपयंत्री  एवं सहायक यंत्री के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने के लिए लिखा है. 

आस्था से खिलवाड़ करते मोबाइल

आज के आधुनिक  युग में भी अंधविश्वास लोगो का पीछा नहीं छोड़ रहा है. इतना ही नहीं इसका तरीका भी आधुनिक होता जा रहा है. आस्था की आड़ में भावनात्मक सन्देश भेजकर किसी स्थान विशेष का प्रचार प्रसार या अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कंपनिया  एस एम् एस का माध्यम अपना रही है. खास बात यह है की शिक्षित  और समाज के जिम्मेदार लोग  भी इस अन्धविश्वास में उलझ जाते है.

पेशे से शिक्षक राकेश कोरी ने बताया की उनके पास भी एक नए नंबर से एस एम् एस आया जिसमे सन्देश के साथ लिखा था की आप भी कम से कम दस लोगो को तो यह एस एम् एस भेजे अन्यथा अनिष्ट हो जायेगा.
उन्होंने कहा की कई लोग भय और अन्धविश्वास के कारण अन्य लोगो को भी एस एम् एस करके समय  और पैसा तो बर्बाद करते ही है साथ ही दूसरो  को भी भ्रमित कर देते है.

'जय माँ शेरावाली' यह सन्देश वैष्णो देवी जम्मू से चलकर आया है.इस सन्देश को  नौ लोगो को भेजो तो 48 घंटे के अन्दर तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी. लेकिन इस श्रंखला को तोड़ने पर  आपके साथ कुछ अनिष्ट भी हो सकता है. इसलिए इसे अवश्य नौ  लोगो को भेज देना.

हुनमान के इन 6 नामो को 12 लोगो को भेजो अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, रामदूत, बजरंगबली, महाबली, इस शनिवार तक अच्छी  खबर मिलेगी. श्रद्धा और आस्था से भरे ऐसे  मैसेज आजकल हर मोबाइल उपयोगकर्ता के इनबाक्स में आते ही रहते है.

कई लोग पूरी आस्था के साथ इन्हें दूसरे लोगो तक पहुचाते भी है. इस उम्मीद के साथ शायद उनके ऐसा करने से उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाए, उनकी इस आस्था  का कोई गलत फायदा उठा रहा है और उनकी इन भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है.

कभी शिर्डी से, कभी रामेश्वर से, कभी अमरनाथ आदि और भी अन्य  पवित्र स्थलों  से भक्तो द्वारा भेजे जाने वाली मुरादो को पूर्ण करने वाले इन मैसेज में मनोकाम पूर्ण करने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से श्रंखला तोड़ने पर कुछ गलत होने की चेतावनी भी रहती है. इसके  चलते लोग कुछ गलत न हो जाए इस डर से यह मैसेज अपने मित्रो, रिश्तेदारी को भेज देते  है ताकि वे किसी दैवीय कोप से बचे रहे.

इस विषय पर बहोरिबंद निवासी राजेन्द यादव ने बताया की पहले पोस्टकार्ड के मध्यम से आस्था से भरे हुए ऐसे सन्देश लोगो द्वारा भेजे जाते थे. जिनमे भी इश्वर की स्तुति उपरांत पूर्ण होने वाली मनोकामना के उल्लेख के साथ भी ऎसी अप्रत्यक्ष धमकी रहती थी लेकिन अब उन पोस्टकार्ड की जगह मोबाइल के इन भक्ति मैसेज ने ले ली है, जिसके चलते मनोकामना पूर्ण होने एवं बड़ा पुन्य लाभ कमाने की चाहत ने मोबाइल पर ऐसे संदेशो की बाढ़ सी ला दी है. जो लोगो में एक झूठी आस तो बांधते ही है वही इस तरह के मैसेज से तकनीक का गलत उपयोग भी हो रहा है.

आस्था  के खिलवाड़ में यह कोई नई बात नहीं है. सूचनाक्रांति के इस युग में मोबाइल का उपयोग किया जाने लगा है तो पहले पत्रों के मध्यम से यह होता था. कोई पोस्टकार्ड इस्तेमाल करता था तो चिट्ठी-पत्री को मध्यम बनाताथा. मौजूदा समय में मोबाइल जैसे महत्वपूर्ण उपकरण को और भी कई ऎसी बातो के लिए दुरूपयोग किया जा रहा है जिससे समाज में विकृति फ़ैल  रही है. आस्था के मामले में लोग एक दूसरे को भ्रमित कर रहे है.

धार्मिक संदेशो का यह फलसफा कुछ देर के लिए तो खुशिया देने वाला होता है. इस पर विचार किया जाए तो निश्चित ही भेजने वाले को इसकी अहमियत समझ आ जायेगी. लोगो की आस्था से जुड़े ये सन्देश मजाक के पर्याय बन रहे है. अपने फायदे या फिर लाभ के लिए इनका इस्तेमाल करने वाले लोग या फिर यह कंपनियों की सुनियोजित चाल है  जिसका इस्तेमाल करने लोग बाज नहीं आ रहे है.

युवाओं में यह चलन ख़ास होता जा रहा है, कुछ देर की हंसी, मजाक के लिए धार्मिक आस्थाओं को ताक पर रख रहे युवा ऐसे संदेशो को भेजकर तो आनंदित  होते है लेकिन स्वाभाविक तौर पर देखा जाए तो युवा आधुनिकता की होड़ में यह भूल जाते है की वे खुद अपनी धार्मिक भावनाओ को संदेशो के मध्यम से व्यक्त कर रहे . इस संदेशो को भेजने वालो की धारणा भी जाहिर तौर पर पता लग जाती है वे अपने आराध्य को पूजने के बजाये उन्हें मजाकिया रूप से पेश कर रहे है.ये खुद भेजने वाले  की संकुचित सोच का नतीजा होते है.

साईं वावा, दुर्गा  माँ, भगवान् गणेश, शंकर, हनुमान, राम आदि के नाम  से आने वाले मैसेज को पढने के बाद लोगो के मन में भ्रम जरूर बैठ जाता है, जिसके चलते वह अपने इस अन्धविश्वास के नाम दस या बीस मैसेज तो लोगो को भेज ही देते है. यह कहना है जगदीश पटेल का जिनके अनुसार इस तरह के सन्देश लोगो को भ्रमित करते है तो वही लोगो के अन्धविश्वास को भी बढ़ाते है. क्योकि जो लोग इन मैसेज को ट्रांसफर नहीं करते है और उनके साथ कुछ बुरा हो जाता है तो वह उस घटना को इन्ही संदेशो का दुष्परिणाम मानते है.
गेहू खरीदी में ५६ लाख का घोटाला
किसानो को लाभ पहुचाने उनका अनाज समर्थन मूल्य में खरीदने की सरकारी व्यस्था पर सहकारी समितिया और बैंक प्रबंधक मिली भगत कर इसका लाभ व्यापारियों को दिलाने पर आमादा है. व्यापारियों को गेहू खरीद कर किसानो के फर्जी नामो से चेक जारी कर उसका भुगतान करने के लगभग 56 लाख रूपये के घोटाले का एक मामला कुठला पुलिस थाने में दर्ज हुआ है.

जिसमे कटनी सहकारी बैंक प्रबंधक हुब्बीलाल पटेल, कन्हावारा चाका सहकारी समिति प्रबंधक राधाकृष्ण मिश्र, नारायण सेन, समिति सेवक लखन साहू सहित एक दर्जन लोगो के विरुद्ध धारा 420 , 467 , 468 भा दंड विधान के तहत मामला कायम कर जाँच में लिया गया है. नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक संजय सिंह भी नियमो को नजरअंदाज कर कार्य करने  के आरोप जाँच के दौरान सामने आ रहे बताये गया है.

इस पूरे मामले में कैल्वारा हरदुआ खरीदी केंद्र जाँच के प्रमुख बिन्दुओ  में से एक है. जून माह में एक बेयर हाउस में छापे में अनलोड हो रहा 520 बोरा गेहू संदेह पर जब्त किया गया था. वेयर हाउस संचालक ने गेहू मालिको के नाम खाद्य विभाग की पूछताछ के दौरान बताये  थे.

 विभागीय स्तर पर जाँच जारी ही थी की कैल्वारा हरदुआ खरीदी केंद्र में उपज बेचने वाले कृषको ने खाद्य विभाग को शिकायत दी की खरीदी में तीन रूपये प्रति बोरा कमीशन लिया जा रहा है व उसके नाम से गलत चैक जारी हुए है.

जाँच के दौरान कटनी सहकारी बैंक प्रबंधक हुब्बीलाल पटेल से पूछताछ के बाद बैंक से 55  लाख रूपये में वे चेक जप्त किये गए जिन्हें  कन्ह्वारा चाका सहकारी समिति के प्रबंधक राधा  कृष्ण मिश्र ने कृषको के नाम से जारी किया था  और बैंक ने उसका भुगतान भी कर दिया.
खरीदी केंद्र के क्रश्नो से पूछताछ के दौरान पता चला की 15  कृषको के नाम से तीन हजार 232  क्विंटल गेहू की फर्जी खरीदी की गई  थी. किसानो ने बताया  की कुछ किसानो से दस क्विंटल  तक गेहू खरीदा गया, उनके नाम से 40 -50  क्विंटल  गेहू खरीदने सम्बन्धी चैक जारी हुए. ऐसे फर्जी किसानो के नाम भी सामने आये है जिनके नाम से सौ दो सौ बोरा गेहू खरीदी दर्शाकर  चेक  जारी किये गया  है.

खाद्य विभाग ने कलेक्टर एम् सेल्वेंदारण के समक्ष जब यह समूचा  घोटाला प्रस्तुत किया तो उनके निर्देश पर खाद्य विभाग ने कुठला थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

इस सम्बन्ध में खाद्य अधिकारी श्री चौबे ने बताया की इस सारे घोटाले में सहकारी बैंक प्रबंधक की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योकि उनके द्वारा ही फर्जी किसानो के नाम पर एकाउंट खोलकर सहकारी समिति द्वारा जारी चेको का भुगतान किया गया. यह जाँच का विषय है की बैंक प्रबंधक ने किन-किन लोगो को फर्जी भुगतान किया.

कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने  बताया की मेरे समक्ष सहायक आयुक्त सहकारिता  व खाद्य अधिकारी द्वारा की गई जाँच रिपोर्ट आई थी और मैंने उन्हें मामला दर्ज करने के निर्देश दिए है और शीघ्र ही आरोपियों  के विरुद्ध कार्रवाई होगी.

जिन किसानो  के नाम से समर्थन  मूल्य पर फर्जी खरीदी हुई वे है -  प्रेम सिंह  (खडोला) - 400 क्विंटल हरदुआ समिति, हिम्मत सिंह (खडोला)-410 क्विंटल कैल्वारा कला समिति, हिम्मत सिंह ( खडोला)-225  क्विंटल  हरदुआ समिति , गुलाब सिंह (चनेहती) - 247  क्विंटल  कैल्वाराकाला समिति, प्रेम सिंग ( चनेहती) - 200  क्विंटल  कैल्वारा कला समिति, गुलाब सिंह ( चनेहती) - 190  क्विंटल  कैल्वारा कला.

06 December, 2010

कपिलधारा कूप में अधिक व्यय की वसूली होगी

झारिया के जाने के बाद खुल रहे मामले
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की उपयोजना कपिलधारा कूप योजना में पंचायतो द्वारा निर्धारित राशी से अधिक मनमाना खर्च करना अब महगा पड़ने वाला है. निर्धारित से अधिक खर्च की वसूली के लिए रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ठाकुर के निर्देशानुसार एक-एक कुए की जानकारी एकत्रित की जाएगी. ताकि कुए में व्यय अधिक राशी की बसूली अधिकारी-कर्मचारी से जल्द ही की जा सके.

म न रे गा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी  रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को कपिलधारा कूप योजना के तहत कुआ तैयार कर दिया जाता है. शुरुआत में एक कुए के लिए शासन द्वारा 41 हजार रूपये की राशी दी जाती थी. समय-समय पर इसमें वृद्धि होती  रही और 73000 ,  81000 , 91000 , 110000 , 116000 , 126000 होते हुए वर्तमान में कुए के लिए 140000 रूपये प्रदान किये जाते है. योजना शुरू होने के बाद से अभी तक लगभग 800 कुओ का निर्माण किया गया है. हर योजना की तरह कपिलधारा कूप योजना में भी जमकर धांधली और अनियमितता की गई. सरपंच और सचिवो ने निर्धारित राशी के मुकाबले 5 से लेकर 25 हजार रूपये तक अधिक खर्च कर दिए है.

होगी एक-एक कुए की जाँच
वास्तव में अधिक खर्च हुआ है या नहीं यह तो सरपंच और सचिव ही जाने लेकिन दस्तावेजो में तो यह स्पष्ट नजर आ रहा है और इसी के अनुसार राशी खर्च होना भी बताया जा रहा है. थोकबंद ऐसे मामले सामने आने पर जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह द्वारा एक-एक कुए के दस्तावेजो की जाँच एस डी ओ और उपयंत्रियो से करवाई जाएगी. निर्माण किये गए हर कुए की प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति,एस्टीमेट, मूल्यांकन पुस्तिका आदि का गहन निरिक्षण किया जाएगा.

जमकर हुई धांधली
जबकि अधिकारियो के  अनुसार जिन कुओ  में निर्धारित राशी से अधिक खर्च किया गया है उनमे ऐसी स्थिति में रिवाइज एस्टीमेट प्रस्तुत कर उसे मंजूर करवाना  पड़ता है और इसमें भी एक निर्धारित प्रतिशत तक ही राशी बढाई जा सकती है. रिवाईज एस्टीमेट को सक्षम अधिकारी  की मंजूरी मिलने के पश्चात् ही अधिक राशी व्यय की जा सकती है, मगर यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और सरपंच सचिव द्वारा अपने मन से अधिक राशी धड़ल्ले  से खर्च कर दी गई.

हो गया मूल्यांकन
मजे की बात यह है की ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए खासतौर से तैनात तकनीकी अमला भी इस पूरे मामले की ओर से आखे मूदे रहा. समय- समय पर हुए मूल्यांकन में उपयंत्रियो ने इस बात को पकड़ कर सरपंच सचिवो को हिदायत देना जरूरी समझा और न आला अधिकारियो को अवगत करवाना जरूरी समझा. यही कारण है की सरपंच सचिव बेपरवाह होकर मनमानी राशी खर्च करते रहे. अधिकारियो की उदासीनता के चलते ही अतिरिक्त व्यय की गई  राशी का भुगतान भी किया जा चुका है.

बड़ी संख्या में ऐसे कुए  भी है जिनमे अधिक राशी खर्च होने के बाद भी अभी तक काम पूर्ण ही नहीं हुआ है. बहुत सारे कुए ऐसे है जिनका काम भी पूरा  हो चुका और उपयोग में भी लिए जा रहे है मगर अभी तक उनकी सी सी जारी नहीं हुई.

 जल्द ही जाँच दल इसपर जाँच शुरू करने वाला है एवं संबंधितो को नोटिस  जारी करके रिकवरी शुरू की जाएगी. इस कार्य में जिस किसी ने भी गैरजिम्मेदारी पूर्ण कार्य किया है उसे बख्सा नहीं जाएगा. इसमें बहुत हद तक उपयंत्री  भी जिम्मेवार है क्योकि मूल्यांकन का कार्य उन्होंने ही  किया है और अधिक खर्च पर उन्हें ध्यान रख्हना  था.

05 December, 2010

अव्यवस्थाओ का केंद्र बने डाकघर

डाकघरों से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंसन, रोजगार गारंटी का भुगतान, निराश्रित पेंसन आदि के वितरण में इस समय पोस्ट आफिस में बैठे ग्रामीण स्तर के कर्मचारी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है. छोटे बड़े हर भुगतान पर दस रूपये से लेकर पचास रूपये तक लेकर हितग्राहियों को लूटा जा रहा है.

कटनी जिले की रीठी तहसील के बडगांव पोस्ट आफिस में तो वर्षों से जमे पोस्ट आफिस के कर्मचारी ने अराजकता फैला रखी है. यहाँ पदस्थ लखन सोनी की मनमानी के चलते भुगतान के लिए आया पैसा समय पर नहीं दिया जाता इसी के चलते गर्मियों में मदनलाल कुशवाहा की भूख से मौत हो गई थी.

इस निर्मम मौत के बाद भी कटनी कलेक्टर के कान पर जू नहीं रेंगी और यह फिर से लूट खसोट बदस्तूर जारी है. प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अभी भी लखन सोनी लोगो का रोजगार गारंटी का भुगतान और हर तरह की पेंसन के भुगतान में लेट लतीफी कर रहा है. छेह-छेह महीने के भुगतान का पेंसन धारियों को हिसाब ही नहीं मिलता और उन्हें खाते में राशी न आने की बात हमेशा कही जाती है.

एक ऐसी ही शिकायत में बडगांव पोस्ट आफिस में निराश्रित पेंसन पाने वाली  हीराबाई पति सरजू चमार ने बताया की उसे एक साल से किसी भी प्रकार की राशी नहीं दी गई है पोस्ट आफिस जाने पर लखन सोनी डाट डपटकर भगा देता है.
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ऐसा नहीं है की इस प्रकार की शिकायत यह अकेली महिला है लखन सोनी के नाम पर तो हर वह व्यक्ति परेशान है जिसका पाला इस पोस्ताफिस से भुगतान लेने में पड़ा हो लखन सोनी की शिकायत करने वाले इस क्षेत्र के हर गाँव में मिल जायेगे उससे तो  लगभग हर एक गाँव के हितग्राही परेशान है.

लेकिन इन परेशान हितग्राहियों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है. कटनी कलेक्टर तो इस तरह की विसंगतियों पर जैसे ध्यान ही नहीं देते. आखिर गरीबो की कौन सुनेगा...... 

04 December, 2010

मध्य प्रदेश की भा जा पा सरकार ने जितनी  भी जनहितैषी योजनाये  चलाई जा रही है उनपर नौकरशाह हावी है. अधिकारियो में जरा भी डर भय नजर नहीं आता इसीलिए चाहे आगनवाडियो  के खस्ताहाल की बात हो या फिर चरमराई  हुई स्वास्थ्य सेवाओं की बात करे सभी योजनाये लालफीतासाही के चलते भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई है.

एक बहुत ही अच्छी सरकार की जनहितैषी योजना  है दीनदयाल उपचार योजना जो दीन दुखियो के लिए वरदान है अगर उसे ईमानदारी  से राज्य के  स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अमल करे तो.......
लेकिन इस योजना में जमकर घपलेबाजी चल रही है. इस योजना के कार्ड धारको के कार्ड पर तो राशी चढ़ा दी जाती है लेकिन यथार्थ में उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है.

जब इस योजना के तहत हर महीने लाखो रूपये की दवाये स्थानीय दुकानदारो से खरीदी जा रही है तो फिर प्रश्न  यह है की दवाओं और ईलाज के नाम पर यह राशि  जब मरीजो के काम नहीं आ रही है तो फिर कहा जा रही है....:?
दीनदयाल कार्ड धारको को इस योजना के तहत बीस हजार तक की चिकित्सा मुफ्त देने का प्रावधान है.

कटनी जिले के सामुदायिक  स्वास्थ्य केन्द्रों में भरती बी पी एल कार्ड धारक मरीजो  के दीनदयाल उपचार कार्ड होने के बाद भी  कटनी, रीठी, बहोरिबंद, विजयराघवगढ़  सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजो को दवाओं और आपरेशन सामग्री की लम्बी सूची थमा दी जाती है जिसमे गरीब मरीज के परिजन कर्ज लेकर बाजार से दवाये खरीदते है.

सामुदायक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में इलाज के लिए आये दीनदयाल कार्डधारको को जानकारी मागने पर बी एम् ओ डाक्टर गुलाब तिवारी बदतमीजी से बात करते है. अस्पतालों में दीनदयाल उपचार योजना के नाम पर सिर्फ छलावा किया जा रहा है.

मरीजो के परिजनों को यह नहीं बताया जाता है की उनके मरीज को कौन सी दवाये दी जा रही है. जब इन मरीजो के पास यह कार्ड होता है तो फिर उनसे दवाये और आप्रेसन का सामन बाहर से क्यों मगाया जा रहा है.

बर्तन न धोने के कारण मध्यान्ह भोजन बंद

मध्यान्ह भोजन में हरिजन बच्चो से थाली धुलवाई जाती है 

कटनी / दुनिया ने  कितनी भी तरक्की कर ली हो लेकिन हमारे समाज में व्याप्त जाती-पाती और छुआ छूत ने इस कदर घर किया हुआ है की आजादी के तिरेसठ वर्षों के बाद भी सरकार अस्प्रश्यता को मिटा  पाने में अभी तक असमर्थ है. अस्प्रश्यता की यह बात तब सामने आई जब एक शिकायत पर जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति  सिंह ने बरजी प्राथमिक शाला के बच्चो से स्वयं जाकर मध्यान्ह भोजन के हालात जाने

जनपद अध्यक्ष को एक लिखित शिकायत में ग्राम बरजी के लोगो ने प्राथमिक शाला में मध्यान भोजन चला रहे  शंकर बकरी पालन स्वसहायत समूह पर हरिजनों के साथ छुआ छूत का आरोप लगाया था. शिकायत में लिखा था की हरिजन बच्चो की थाली समूह द्वारा न धोने के कारण कई दिनों तक मध्यान भोजन बंद रहा.

शिकायत की जाँच के दौरान जब प्राथमिक शाला बरजी के छात्र-छात्राओं से पूछा  गया तो उनके जबाब सुनकर अध्यक्ष भी दंग रह गई.
 कक्षा पाचवी की छात्र  सविता  चोधरी ने बताया की हमारी थाली में समूह की महिलाये दूर से पानी ड़ाल देती है, जबकि इसी स्कूल के एक छात्र छोटा चोधरी पिता इमरत चोधरी ने बताया की बर्तन धोने न धोने के विवाद के चक्कर में पिछले कई दिनों से मध्यान भोजन बंद पड़ा है. विद्यालय के अन्य छात्र अमन चोधरी पिता ब्रजेश चोधरी ने बताया की पीने के पानी में भी हमें दूर से पानी डाला जाता है और भेदभाव किया जाता है.

इस सम्बन्ध जब समूह की महिलाओ से पूछा गया तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया की वे बर्तन बच्चो से धुलवाती है. समूह की सचिव आशाबाई पांडे ने बताया की पूर्व से ही बच्चो से बर्तन धुलवाने की परंपरा स्कूल में चली आ रही है और बरजी माध्यमिक शाला में चल रहे मध्यान्ह भोजन में भी बच्चे ही बर्तन धुलते  आ रहे है इसलिए हमने भी ऐसा ही किया.

समूह की अध्यक्ष ने बताया की यहाँ की प्रभारी मिथलेश मेडम  को जब तक हम हर माह पंद्रह सौ रूपये और एक कट्टी गेंहू  देते रहे तब तक उन्होंने कोई शिकायत  नहीं की और पिछले दो माह से उनका कमीशन बंद कर दिया तो हमें परेशान किया जा रहा है तथा बच्चो को सिखा कर छुआ-छूत जैसे मुद्दे को बनाकर हमे तंग किया  जा रहा है.
बर्तनों की कम संख्या पर समूह की महिलाओं ने बताया की जब उन्हें चार्ज  दिया गया था तब मात्र पंचान्न्वे थाली उन्हें मिली थी बाद में उन्होंने स्वयं के खर्च से दीवाली पर पच्चीस थालिय खरीदी.

बर्तनों की कमी कोई नई शिकायत नहीं है लगभग पूरे जिले में सभी विद्यालयों में स्वयं बच्चे बर्तन धोते हेंडपम्पो  पर, बिना कतार मैदान में भिखारियों की तरह हाथ में रोटी लेकर खाते देखे जा सकते है.जबकि  शिक्षको की जिम्मेवारी है की वे विद्यार्थियों को अनुशासन पूर्वक बिठा कर उन्हें भोजन करने में स्वसहायता समूहों की मदद करे





जनपद में बैठे अधिकारी कर्मचारी मौज मस्ती में मशगूल है. अधिकांस कर्मचारी अप डाउन में अपना समय लगाते है ऐसे में फिर शासन की योजनाओ का इसी तरह से मजाक उड़ाया जाता रहेगा. सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल चले हम का ढिढोरा पीटने के बाद भी स्कूलों की हालत नहीं सुधर रही है

01 December, 2010

आत्महत्या के मजबूर हो रहे किसान

कटनी / पिछले तीन सालो से लगातार सूखे की मार झेल रहे किसानो की हालत दयनीय हो गई है. जिले के किसान साहूकारों और सहकारी बैंको के कर्ज के दलदल में गले तक डूब गए है. अफसरशाही और दलाली के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार की कर्ज माफ़ी योजनाओं का लाभ भी किसानो को नहीं मिल पा रहा है. बैंक किसानो को वर्षों पुराने रिणों की वसूली का नोटिस भेज कर किसानो की फजीहत किये है. इस समय विद्युत् मंडल हजारो के बकाया बिलों की अदायगी न होने  पर किसानो को जेल भेजे जाने की धमकी दे रहे है. इस सबसे स्थिति इतनी विकट हो गई है की किसानो के पास आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.

कर्ज और बकाया बिजली के  बिलों के इस दुश्चक्र में फसे एक किसान ने बीती 29 -30 नबम्बर की दरम्यानी रात आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. कृषक गुलजार सिंह गोंड की आत्महत्या की जाँच कराये जाने के बजाये प्रशासन और पुलिस अब उसकी मौत पर लीपा पोती का प्रयास कर रही है.

कटनी जिले की बडवारा विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमकुही हरदी  निवासी 45 वर्षीय कृषक गुलजार सिंह गोंड ने 29 नवम्बर की रात अपने खेत की मेढ़ पर स्थित  नीम के पेड़   में रस्सी का फंदा डालकर फांसी लगा ली थी. सुबह पेड़  से लटकती गुलजार सिंह की लाश सबसे पहले उसकी पत्नी  ने देखी कुछ ही देर में पूरे गाँव में गुलजार सिंह द्वारा आत्महत्या किये जाने की खबर फ़ैल गई और पूरा गाँव उसके घर पहुच गया.

 बताया गया की गुलजार सिंह को 25 हजार से अधिक का बिल विद्युत् मंडल द्वारा उसे दिया गया था. गुलजार सिंह की स्थिति ऐसी नहीं थी की वह 25 हजार  का बिजली का बिल अदा कर पाता. बिल माफ़ करने के लिए गुलजार सिंह अधिकारियो के चक्कर लगाता रहा पर उसे कोई राहत नहीं प्रदान की गई उलटे विद्युत् मंडल के अधिकारी कर्मचारी बिजली बिल जल्द जमा नहीं करने की स्थिति में उसे जेल भेज देने की धमकी देते रहे.

कहा तो यह तक जा रहा है की पुलिस के द्वारा भी बकाया बिल की अदायगी के लिए उसे धमकाया जाता रहा है. इन्ही हालातो से तंग आकर गुलजार सिंह ने अपना जीवन समाप्त करने का फैसला कर लिया और फांसी के फंदे में झूलकर  अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.

इस सम्बन्ध में मृतक के पुत्र होशियार सिंह का कहना है  जब से बिल आया तब से ही पिताजी परेशान थे. दो दिन पहले बिल जमा करने की बात को लेकर पुलिस वाले घर आये  थे और गाली गलौज करते हुए मेरे पिता को जेल भेजने की धमकी दे रहे थे. पुलिस वालो की धमकी  के कारण ही मेरे पिता ने फांसी लगा ली.

वही मृतक की पत्नी श्याम बाई ने बताया की सुबज जब मै खेत गई तब मैंने उन्हें पेड़  पर लटकता देखा. कुछ दिन पहले पच्चीस हजार का बिल आया था. बिल आने के बाद से ही पुलिस वाले उसे जेल भेजने की धमकी दे रहे थे. रात को खेत आने से पहले भी उसने अपनी परेशानी का जिक्र किया था.

 जबकि उमरियापान थाना प्रभारी ऐ एस आई  एस के झारिया का कहना है की किसान बिल के कारण परेशान था. इस मामले से पुलिस का कोई लेना देना नहीं था. पुलिस ने उसे कभी धमकी नहीं दी थी  विधुत विभाग के कर्मचारी खाकी वर्दी पहनते है हो सकता है उन्होंने ही बिल अदा करने को लेकर उससे कुछ कहा हो.

कृषक की आत्महत्या के इस मामले को न तो क्षेत्रीय विधायक ने गंभीरता से लिया न ही प्रशासन ने. पुलिस ने भी मात्र औपचारिकता निभाते हुए 174 के तहत मर्ग कायम किया है. जिले में किसान द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने की यह पहली घटना नहीं है इसके पहले भी कई किसान कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर चुके है. यह बात सरकार ने भी विधानसभा  में स्वीकार की है कि  प्रदेश  में किसानो के आत्महत्या  की घटनाएं बाद  रही है. इसके बावजूद बैंको के कर्ज और भारी भरकम विद्युत् विलो से किसानो को राहत दिलाने कोई कदम नहीं उठाये जा रहे.

किसानो को राहत दिलाने की बजाय राज्य सरकार गौरव दिवस जैसे आयोजनों में करोडो रूपये खर्च कर विरोधियो  को अपनी शक्ति का एहसास दिला रही है. आखिर किसानो के हित की बात करने वाला प्रदेश में कौन है....?