13 July, 2010

जब मुर्दों ने आकर काम किया

यदि आपसे कहा जाए किसी गाँव का तालाब गायब हो गया तो शायद आप यकीन न करें लेकिन मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रीठी तहसील में ऐसा हो रहा है. सरकारी दस्तावेज बताते हैं की बक्लेहता पंचायत में दो साल पहले एक तालाब खोदा गया  लेकिन गाँव के लोग हैरान हैं के आखिर यह तालाब है कहाँ?

ग्रामीण इस तालाब को ढूडने में लगे हैं.

एक और मामला सुने इसी जिले की एक ग्राम पंचायत बिलहारी  के अशोक कुमार पिता श्री सुंदर लाल अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन सरकार की माने  तो उन्हें महात्मा गाँधी रष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना यानी मनारेगा   के तहत काम करने के एवज में ६ दिवस कार्य करते दर्शाया गया है और उसे ५४६ रूपये का भुगतान भी किया गया है. जबकि अशोक कुमार का देहांत जनवरी २००९ में हो चूका है.

कटनी जिले की रीठी जनपद पंचायत में पदस्थ सरकारी कर्मचारी निरुन्कुश होकर खुले आम भ्रष्टाचार कर रहे हैं. रीठी जनपद की बख्लेहता ग्राम पंचायत में वर्ष २००७-२००८ में कचियावारे तालाब विस्तार कार्य के नाम से काम कराया गया जिसकी लागत पांच लाख (अनुमानित क्योंकि कहीं भी बोर्ड नहीं लगाये गए हैं) रुपये हैं.
पंचायत सचिव ने जो मास्टर  रोल तैयार किये हैं उसमे २२६ ग्रामीणों ने मजदूरी की है. जाहिर है यदि गाँव में इस नाम के तालाब का काम हुआ ही नहीं तो फिर पैसा अधिकारी डकार गए हैं.

 जनशिकायत में आठ महीने पहले  की गई इस शिकायत पर कलेक्टर ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है. इसी प्रकार कलेक्टर तथा एस  पी के  यहाँ लिखित शिकायत में सामजिक कार्यकर्ता ने बिल्हारी के लक्ष्मण सागर तालाब के उन्नयन कार्य में जल संसाधन विभाग के इंजिनीअर   द्वारा कराये कार्य में मृत व्यक्तियों के नाम से  राशि आहरण करने का मामला प्रकाश में आया है तथा शिकायत करने के तीन महीने बाद भी आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है.

क्षेत्र    के सक्रिय समाज सेवक  अखिलेश उपाध्याय का कहना है के, "यह पूरे जिले में हो रहे मनारेगा काम में आम बात हो गई है. काम नहीं करने वाले जॉब कार्ड धारकों के नाम मास्टर रोल में शामिल कर लिए जाते हैं. उनके बैंक अकाउंट  में कथित काम के पैसे जमा किये जाते है बाद में सचिव, सरपंच तथा इंजिनीअर बैंक जाकर उस राशी का आहरण कर लेते हैं. और अंत में उस राशि को इंजिनीअर से लेकर अन्य अखिकारियों को  उस राशे का कमीशन भिजवा दिया जाता है".

उपाध्याय का दावा है की भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल की जाँच की जाए तो पता चलेगा की इसमें सी ई ओ, सहायक यंत्री, जिला पंचायत सी ई ओ और यहाँ तक की  जिला  कलेक्टर तक को कमीशन पंहुचा दिया जाता है.

इलाके में आम शिकायत है के मनारेगा  के नियमो का जिले में सही तरीके लस पालन नहीं किया जा रहा है. मनारेगा के तहत प्रावधान है की  काम मांगने के पंद्रह दिनों के भीतर काम मुहैया कराया जाए तथा  काम खत्म होने के पंद्रह दिनों के अन्दर मजदूरी का भुगतान किया जाये. लेकिन भुगतान सालों साल नहीं किया जा रहा है. लोग भुगतान पाने के लिए जिले में सालों साल भटक रहें हैं.
इसी के चलते बीते दिनों बडगांव में भूंख से मदन कुशवाहा नाम के व्यक्ति की मौत हो गई.

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को हर वक्त  दबाने की कोशिश की जाती है. कानूनी दाव पेंचों, जान से मारने की धमकी आदि से विरोध करने वालों  को परेशान किया जाता है. इसमें ठेकेदार, अधिकारी और स्थानीय राजनेता होते हैं.
इस सम्बन्ध में सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश अवस्थी बड़े दुखी ह्रदय से कहते है, "कटनी जिले में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में जबर्दस्त भ्रष्टाचार है. कपिल धरा योजना के अंतर्गत खुदने वाले कुओ में लगने वाली सामग्री के फर्जी  बिल वाउचर  लगाकर हितग्राहियों को वेवकूफ बनाया जा रहा है. इस योजना में यदि कोई लाभान्वित हुआ है तो वह है सी ई ओ और उनके चहेते. भ्रष्टाचार के ऐसे मामले में आखिर सरकार कार्यवाही क्यों नहीं करती?

इसके जबाब में क्षेत्रीय ग्रामीण बताते हैं की ये भ्रष्ट अधिकारी अपने इस खेल में गाँव के कुछ लोगों को प्रलोभन देकर अपने साथ कर लेते है और गाँव आपस में बट जाता है. हम वेव्कूफों की तरह आपस में भीड़ जाते हैं जबकि इसका लाभ तो भ्रष्ट अधिकारी ही उठाते हैं.
आप माने या न माने सरकारी कागजों में मृतकों के नाम पर हाजरी भरकर पैसा निकाला गया है. आखिर शिकायत करने पर प्रशाशन मौन  क्यों?