14 July, 2010

कागजों में चल रहे मानरेगा के काम

प्रदेश भर में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है. कागजों में काम दिखाकर निजी तिजोरिया भरी जा रही हैं. दबंगों के डर से ग्रामीण गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ आवाज तक नहीं उठा पा रहे है. जिम्मेदार  अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की बजाये बहती गंगा में हाँथ  धोने में लगे है.

मनरेगा के तहत किये जा रहे कार्य मध्य प्रदेश के कटनी जिलेमें bhrashtaachaar  की भेंट चढ़ रहे हैं. स्वीकृत योजनाओं एवं चल रहे कार्य के बोर्ड तक नहीं लगाये जाते. मजेदार बात तो यह है की ग्रामीणों को तो यह तक पता नहीं की उनके गाँव में कौन  से कार्य स्वीकृत हैं और कौन  से कम चल रहे हैं.

कटनी जिले की ही एक जनपद पंचायत बहोरीबंद में आर ई एस के माध्यम से बनाये गए जुजावल में लगभग उनतीस लाख की लागत से दो तालाबों की यदि सही रूप से खर्च की जाँच की जाये तो यह कुल तीन लाख मात्र ही निकलेगी. यहाँ   पदस्थ इन्जिनीर ईकबाल खान व एस डी ओ एवं कटनी में बैठे आला अखिकारी एवं स्ववं जिला कलेक्टर इस पूरे खेल में सामिल हैं.







कई क्षेत्र  ऐसे हैं जहाँ इस साल सड़क निर्माण का कार्य नहीं कराया गया है. दुर्भाग्यपूर्ण पहलू तो यह है की एक ही मार्ग को दो जगह दर्शाकर राशि निकल ली जाती है. करीब दस साल पहले बनाये गए मार्ग को अभी का बताकर पैसे निकल लिए गए है जबकि इस पर इन पर एक भी पैसे का काम नहीं हुआ है.

इसी प्रकार  कपिल धरा योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों में कुए खुदवाए जा रहे हैं लेकिन अधिकारीयों  की मिलीभगत के चलते किसानों से जिस राशी पर अंगूठा या दस्तखत कराये जाते हैं उससे बहुत कम पैसा किसानों को दिया जाता है.

नाम न लिखने की शर्त पर एक किसान  ने बताया की उसके कुए के लिए एक लाख साथ इक्यान्नावे हजार रूपये मंजूर हुए लेकिन सम्बंधित किसान के कुए पर मात्र अस्सी हजार रूपये का काम कराया गया. एक अन्य किसान ने बताया की उनके कुए में तो मात्रा सत्तर हजार का काम किया गया है और हस्ताक्षर पूरी राशी के कागजों पर करा लिए गए है.

ग्रामीणों   के मुताबिक दबंगों दे भय से वे इन सब विसंगतियों  की शिकायत तक नहीं कर पाते . बताया जाता है के मनरेगा के अंतर्गत कराये जा रहे कार्यों  में जनपद पंचायत के सी ई ओ, बाबू, सचिव, इंजिनीअर एवं उनके चमचे मिल बाँट कर मलाई मार रहे है. स्थानीय सरपंचों की भी इनके सामने नहीं चलती है. राजनीतिक दबाव से इनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं कर पाते.