15 July, 2010

आवश्यकता है घोटालों को ईमानदारी से उठाने वाले व्यक्ति की

  महात्मा गाँधी राष्ट्रिय रोजगार गारंटी योजना को तमाम प्रशासनिक अनुभवों को ध्यान में रखते हुए बहुत ही उपयुक्त बनाया गया है. आम तौर पर योजनाओ में यह होता आया है की योजनाओ की अव्यवस्थाओ और वेतन भत्तों पर योजना का अस्सी से नब्बे प्रतिशत भाग तक खर्च किया जाता था. और योजना के मूल कार्य व उद्देश्य पर मात्र दस से बीस प्रतिशत फंड खर्च होता था, लेकिन म न रे गा योजना में यह व्यवस्था की गई की योजना की व्यवस्थाओं पर मात्र चार प्रतिशत आवंटित राशी खर्च की जायेगी और छियान्नावे प्र्रतिशत रूपया म न रे गा के मूल कार्य पर खर्च होगा. इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक आर्थिक सुधार आना चाहिए था. इस योजना में जो खराबी या कमिया नजर आ रही है वह योजनाओ के कार्यस्थल पर अधिकारियों का भ्रष्टाचार है. फर्जी मस्टर रोल, कम मजदूरी देना, मजदूरी बुगतान में अत्यधिक विलम्ब, ठेकेदारों व मशीनों के जरिये काम कारन आदि.  इसका एक ज्वलंत उदहारण कटनी जिले की बहोरीबंद जनपद पंचायत में जुजावल नवीन talab  के ईन्जीनिअर इकबाल खान एवं आर ई एस के उच्चाधिकारियों की मिली भगत से हो रहा है.

सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुजावल नवीन तालाब के निर्माण कार्य में कुल स्वीकृत अकुशल श्रमिक हेतु बीस लाख सत्रह हजार एवं सामग्री हेतु आठ लाख अन्ठान्न्वे हजार की राशी काम हेतु स्वीकृत की गई.

जिसमे पहले साल ३१.०३.२००९ तक के काम में बारह लाख पंचान्न्वे हजार की मजदूरी एवं आठ लाख उनंचास हजार की सामग्री लगाई  गई. इस प्रकार पहले साल कुल ईकीश लाख चवालीस हजार रूपये खर्च हुए. लेकिन स्थल निरिक्षण कुछ और ही कहानी कहता है. देखे तस्वीर-

तालाब की मेड पर झाडिया एवं पोधे उंग आये है. कहीं पर भी सीमेंट  से पिचिंग का काम नहीं कराया गया

जानकार सूत्रों की माने तो तीन  सो रुपये ट्राली मार्बल खदानों का कचरा इस तालाब में डलवाया गया है.

मेड पर मिटटी डालने के बाद पानी का छिडकाव नहीं किया गया न ही कुटाई कराइ  गई.

चार हजार तीन सौ से भी अधिक मजदूरों ने मजदूरी की है.  जिनमे नाबालिग, मृत भी शामिल है. आठ से दस किलोमीटर से भी अधिक दूर के मजदूरो ने काम किया लेकिन नियमानुसार उनको अतिरिक्त दस प्रतिशत का भुगतान नहीं किया गया.

वर्ष २०१० मार्च में सात हजार की सामग्री लगाई गई कुल मिलाकर पंद्रह लाख चोरासी लाख की मजदूरी एवं नो लाख अठारह हजार की सामग्री लगाकर काम पर कुल पच्चीस लाख दो हजार का खर्च दिखाकर कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया है.
जबकि वस्तु स्थिति यह है की इस काम में बमुश्किल तीन  लाख रूपये ही खर्च हुए दीखते है.
शिकायत करने पर कटनी जिले के आला अखिकारी ने आज तक कोई कठोर कार्यवाही की हो ऐसा उदाहरण किसी अधिकारी  ने पेश नहीं किया है. यहाँ  पर शिकायतों को कलेक्टोरेट, जिला पंचायत एवं जनपद कार्यालय द्वारा दबा दिया जाता है. कटनी जिले में स्वच्छ  राजनेताओ एवं राजनीती का नितांत आभाव है. दिशाहीन, स्वार्थ में लिप्त राजनीत में लिप्त राजनीती  से जुड़े लोग अपने स्वार्थ साधने में लगे है. यही वजह है के कटनी जिले के सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारी कर्मचारी निर्भय होकर शासकीय  राशी को आराम से डकार रहे हैं. आवश्यकता है यहाँ म न रे गा में चल रहे घोटालों को ईमानदारी से उठाने वाले व्यक्ति की.