20 July, 2010

क्या जिला पंचायत कटनी इस विषय पर जरा भी सर्मिदा है?

कटनी. बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड योजना के अंतर्गत कटनी जिले की सभी चार सौ सात ग्राम पंचायतो में टेलेफोन सुविधा उपलब्ध करी गई थी. बी एस एन एल, ऐअर तेल, आइडिया कंपनी के माध्यम से जिले की सभी पंचायतो में म म रे गा के लिए ग्रामीणों एवं अधिकारिओ तथा मीडिया के सीधे संपर्क के लिए ग्राम पंचायत के मुख्य्लायो पर लैंड लें सुविधा हेतु टेली फोन की सुविधा दी गई.

मार्च-अप्रेल २००८ से लागू इस दूर संचार व्यस्था ने अब दम तोड़ दिया है. जिले की अधिकांस पंचायतो के फोन या तो आऊट आफ रंगे बताते है, या फिर सीधा सुनने को मिलता है नत इन सर्विस. जनपद रीठी की बहुत सी पंचातो के फोन अन्य शहरो में लग रहे है.
जब ग्राम पंचायत बख्लेता को इस व्यस्था के फोन पर नंबर डायल किया तो ईन्दोर में किसी ने बाट की. इसी तरह ग्राम पंचायत बंधा के नम्बर पर कई गुना से बाट करता मिला.. अधिकांस पर तो यही सुनने मिलता है नाट इन सर्विस.
वर्ष २००८ में जब इन फ़ोनों को ग्राम पंचायत में लगाया गया था तो इसकी लागत छेह हजार के लगभग थी. तब से अब तक प्रत्येक महीने हर ग्राम पंचायत को छेह हजार रूपये वार्षिक बतोर फोन खर्च के लिए दिया जा रहा है,

इस तरह से वर्ष २००८ से आज तक इस योजना में लाखों रूपये का चूना लगाया जा चूका है.  लगते समय जनपद पंचायत के सी ई ओ ने उन दलालों को ठेका दिया था जो उनके करीबी थे.

जाहिर है खुले आम इस भ्रष्टाचार में जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक के व्यक्ति शामिल है. कटनी जिले की अधिकारिक वेबसाईट पर दिए गए ये सारे फोन आम जनता को वेवकूफ मात्रा बनाने के लिए है.

क्या जिला पंचायत सी ई ओ और जनपद के सी ई ओ को ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से बाट करने के लिए इसी फोन का प्रयोग होता है, यदि ऐसा होता तो कब का इन फोन को चालू करवा लिया गया होता लेकिन वह री सरकार और इसके सरकारी कर्मचारी. सरकारी कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति की आत्मा मर जाती है.

क्या जिला पंचायत कटनी इस विषय पर जरा भी सर्मिदा है?