29 July, 2010

आदिम जाती विभाग स्वयं आदिवासिओ का शोषण कर रहा

आदिम जाती कल्याण विभाग द्वारा संचालित चिखला बालक आश्रम शाला  का भवन विभागीय देख-रेख एवं मरम्मत के आभाव में खस्ताहाल हो गया  है, जनपद पंचायत रीठी जिला कटनी के आदिवासी अंचल में दुसूर एकांत में स्थापित इस छात्रावास के बालक जिस भवन में रह रहे है वह भवन आज जीर्ण शीर्ण हो चूका है,

दरवाजे खिडकिय टूटे हुए -
छात्रावास भवन के दरवाजे खिडकिया टूट चुके है, जगह-जगह से भवन में दरारे आ चुकी है तथा फर्श तो कब का उखड चूका है,  छात्रावास में रह रहे कक्षा चौथी के छात्र  पंचम सिंह ने बताया की निर्जन वीरान में बने इस छात्रावास में हमेशा विषैले जीव जन्तुओ का भय बना रहता  है क्योकि दरवाजे के पल्ले टूट चुके है एवं खिडकिया भी उखड चुकी है.

यहाँ साप बिच्छू, गुहेरा जैसे विषैले जीव जन्तुओ का निकलना आम बात है और गाहे-बगाहे ये जहरीले जीव छात्रावास के इन टूटे  दरवाजे, खिडकियों दे रस्ते अन्दर घुस आते है.

आदिम जाती विभाग में पैसा पानी की तरह आता है लेकिन ऊपर से नीचे तक के अधिकारी कर्मचारी इस पैसे को ठिकाने लगाने  में ही अपना समय और बुद्धि लग्ताते  है, उन्हें न तो आदिवासी छात्रो के विकास से कोई लेना देना है और न सरकार की नीतिओ से.  
 चिखला आश्रम शाला का फर्श बुरी तरह जगह-जगह से उखड चूका है. इस सम्बन्ध में कक्षा आठवी के यहाँ रहने वाले छात्र दिलीप सिंह ने बताया  की इस छात्रावास में फर्श उखड़ा हुआ है तथा यहाँ कमरे भी बहुत कम संख्या में है. भोजन के लिए कोई कमरा भी नहीं बनाया गया है छात्रो को अधीक्षक के कार्यालय में भोजन कारण पड़ता है. लेकिन वह भी इतना छोटा है की बच्चे वहा एक बार में तो बैठ कर भोजन कर ही नहीं सकते है,
पानी के लिए परशान छात्रावासी
इस क्षेत्र   में पानी की समस्या सदा ही बनी रहती है. छात्रावास के छात्रो को नहाने धोने के लिए एक मात्र हैण्ड पम्प पर निर्भर रहना पड़ता है हालाकि यहाँ बाथरूम तक पानी पहुचने के लिए प्लास्टिक की टंकी कई वर्षों से पड़ी है लेकिन थ्री फेस की विद्यत आपूर्ति न होने के कारण सबमर्सिबल पम्प के लोड न उठाने के कारण यह टंकी बगैर कनेक्सन के वर्षों से पडी है.
 पानी के समस्या से जूझ रहे इस छात्रावास के अधीक्षक कुंज बिहारी परोहा का कहना है की    छात्रावास में पानी की भीषण समस्या है. वर्तमान में हैंडपंप भी बिगड़ा है. विभाग से भेजी गई टंकिया और सबमर्सिबल पम्प वर्षों से पड़े ख़राब हो रहे है क्योकि सिंगल फेस  की लाईट सप्लाई होने के कारण यहाँ बोर के पानी की सुबिधा होते हुए भी बच्चे इससे बंचित  है, 
         
         अभी तक कटनी जिले में आदिम जाती विभाग के जिला संयोजक जमकर पैसे खाते रहे है, जानकार सूत्रों की माने तो प्रत्येक छात्रावास से वार्षिक बीस हजार रूपये तक जिला संयोजक द्वारा बसूले जाते रहे है. ऐसे में गरीब आदिवासिओ के हित में आया पैसा अधिकारिओ की जेब भरने का साधन बन गया है,  करोडो रुपया आदिवासियों के हित के लिए आते है लेकिन क्या यह पैसा इन तक पहुच पता है और अगर पहुचता भी है तो कितनी मात्र में यह पड़ताल का विषय है.