25 July, 2010

गाँधी जी के तीन बंदरो की बदली हुई परिभाषा

स्लीमनाबाद/कटनी आज के सरकारी तंत्र के अहिकारी रातो रत लखपति बनना चाहते है तभी तो भ्रस्ताचार आब शिस्ताचार बन गया है ऐसे में गाँधी जी के तीन बन्दर याद आते है - पैसा लेते-देते मत देखो, पैसा लेते-देते देख कर भी मत बोलो, पैसा लेते-देते की बात सुनकर भी अनसुनी कर दो.


 कटनी जिले में पंचायती राज व्यस्था में न्याय दिलाने वाला सरपंच पैसे की खातिर किसी  भी हद तक बेईमानी करने पर उतारू हो जाता है. जिले में बैठे कलेक्टर, जिला पंचायत सी ई ओ एवं अन्य अधिकारी जमकर कमीशन लेकर आँख बंदकर चुपचाप सब देख रहे है.
 ऐसे में गाँधी जी के तीन बन्दर याद आते है - पैसा लेते-देते मत देखो, पैसा लेते-देते देख कर भी मत बोलो, पैसा लेते-देते की बात सुनकर भी अनसुनी कर दो.
जनपद पंचायत बहोरीबंद अंतर्गत ग्राम पंचायत सिहुडी के कृषक सोनेलाल पिता भोंदू लाला ने जिला कलेक्टर कटनी, एस डी एम् बहोरिबंद को प्रेषित ज्ञापन में कहा है की मेरी जमीन पर ग्राम सिहुदी की सरपंच, सचिव व उपसरपंच द्वारा रोड निकाला गया और यह कहा गया की इसके बदले आपको इंदिरा आवास योजना का लाभ दिया जाएगा. लेकिन अब सरपंच पति और ग्राम पंचायत सचिव द्वारा पैसो की मांग की जा रही है,
      सोनेलाल का आरोप है की उसको अँधेरे में रखकर उसकी जमीन हड़प ली गई. और सरपंच तथा सचिव अपने वादे से मुकर रहे है,  सोनेलाल ने सम्बंधित उच्चादिकरियो से न्याय  के अपेक्षा की है.