24 August, 2010

अखिलेश उपाध्याय

आई सी डी एस योजना 02 अक्टूबर 1975 को लागू की गई जो अब विश्व की सबसे बड़ी और बच्चो के शैसव काल में विकास के लिए यह एक नायाब कार्यक्रम है.  बच्चो में कुपोषण समाप्त करने, छेह वर्ष से कम उम्र के बच्चो के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाया जा देश भर के शिसुओ के लिए पोष्टिकता वृद्धी का एक  जबरदस्त कार्यक्रम है.


इस योजना में 0 -6 वर्ष तक के बच्चो को पौष्टिक भोजन उपलब्द्ध कराना और उनके स्वास्थ्य का ध्यान  देना मुख्य उद्देश्य है. लेकिन कटनी जिले में इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुलेआम धज्जिया उदा रहे है.  तभी  तो केंद्र सरकार द्वारा भिजवाए जा रहे इस पौष्टिक आहार को बच्चो को न देकर यहाँ-वहा फेका जा रह है 
कटनी जिले में महिला बाल विकास में चल रही योजनाओ की न तो कोई मानीटरिंग  होती है और ना ही यहाँ की आगन वाडिया  रोज ही खुलती है. इसी लापरवाही के चलते रीठी परियोजन अधिकारी के गैरजिम्मेदार रवैया के कारण  पोषण आहार बच्चो को नहीं बाटा  जाता.

दिनांक 23 .08 .2010 को रीठी महिला एवं बाल विकास विभाग में दो ट्रक पोषण आहार उतारा गया और अगले दिन सुबह केन नदी की पुलिया पर पोष्टिक आहार की बोरिया फिकी पड़ी मिली
रीठी - कटनी रोड पर रीठी से महज 1 .5 किलोमीटर डी दूरी पर पोष्टिक आहार की बोरिया कुछ इस तरह फिकी पड़ी मिली 
 
पता नहीं पोष्टिक आहार की बोरिओ को किसने और क्यों फेका ...?

कटनी जिले का महिला एवं बाल विकास विभाग पहले ही सवालों के घेरे में था अब इसकी एक और लापरवाही सामने आई है.

आखिर कब तक इस प्रकार की लापरवाही होती रहेगी.......?