02 August, 2010

पोलिओ मौत का कारण ?

सरकार की मंशा पोलिओ के प्रति स्पष्ट है की देश से पोलिओ का पूरी तरह से खत्म हो. लेकिन इसे या तो सरकारी तंत्र की विफलता कहे या फिर पोलिओ वेक्सिन के रखरखाव में गड़बड़ी. आखिर क्या कारण है की कटनी जिले की रीठी तहसील के पटी के आदिवासी परिवार के बच्चे ने रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दम तोड़ दिया.

पटी के हरी सिंह  गोंड के तीन वर्षीय पुत्र राजू को पिछले पंद्रह  दिनों पूर्व लकवा मार गया था. डाक्टर उसे पोलिओ से प्रभावित समझ रहे थे एवं उसके स्टूल (मल) परिक्षण की लिए डाक्टर ने सलाह दी थी लेकिन मल परिक्षण के लिए विभाग ने कोई गंभीर प्रयास किये हो ऐसा नहीं लगता. इसलिए उसकी आज सुबह तबियत ज्यादा बिगड़ गई और परिवार वाले  उसे पटी से रीठी अस्पताल ले आये.


डाक्टर ने देखकर उसे गंभीर हालत के कारण कटनी के लिए रिफर  किया लेकिन हरिसिंह द्वारा एम्बुलैंस मांगने पर ढाई घंटे  तक उसे एम्बुलेंस नहीं दी गई और अंततः बच्चे ने दम तोड़ दिया.

जैसे ही बी एम् ओ को पता चला की कोई पत्रकार आकार पूछ ताछ कर रहा है तो उन्होंने बच्चे के इलाज की पर्ची मंगा कर रख ली. क्योकि यहाँ मरीजो को अस्पताल में उपलब्द्ध दवाओ को एक्सपायर होने दिया जाता है और फिर फेक दिया जाता है. मेडिकल स्टोर वालो से कमीसन के बदले घटिया कंपनी की महगी प्रिंट की दवाइया लिखकर अपना तथा मेडिकल मालिक का लाभ ज्यादा देखा जाता है.

रीठी अस्पताल की व्यस्था चोपट है. अस्पताल में चारो ओर गंदगी है. पलंग पर चद्दर नहीं है. गद्दे फटे हुए है, डाक्टर राउंड पर मरीजो को चेक करने नहीं आते.
यहाँ जननी के चेक वितरण के लिए देवरी के एम् पि डब्लू देवेन्द्र राय खुले रूप से प्रति चेक सौ रुपया वसूल रहा है. इसमें बी एम् ओ का कमिसन भी माना जा रहा है तभी तो शिकायत करने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया जाता.

रोगी कल्याण के मद में आने वाला पैसा कहा और किस प्रकार से प्रयोग किया जा रहा है सभी जाँच  के दायरे में आते है.

जो भी हो रीठी तहसील में अभी भी यदि कोई बच्चा पोलिओ ग्रस्त पाया जाता है तो यह एक गंभीर समस्या है और इसमें निश्चित तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है. इस मौत की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए.