11 August, 2010

सी ई ओ पर धोखाधड़ी के आरोप

अखिलेश उपाध्याय
कटनी. रोजगार गारंटी योजना के तहत केंद्र सरकार की मंशानुसार ग्राम रोजगार सहायक संविदा भरती हेतु जनपद पंचायत रीठी में कुल तेतीस पद की नियुक्ति की गई है. धीरे-धीरे अब हर नियुक्ति पर उंगलिया उठ रही है. सूचना के अधिकार में प्राप्त दस्तावेजो में फर्जी दस्तावेजो को कैसे रीठी सी ई ओ ने नकली को असली साबित किया है इसका एक खुलासा हुआ है.

रीठी सी ई ओ की कारगुजारी का खुलासा तब हुआ जब ग्राम पंचायत अमगवा के कमलेश सेन पिता सोहनलाल सेन निवासी सलैया ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजो के आधार पर कटनी पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत में आरोप लगाया की किस प्रकार जाली अंकसूची के आधार पर रीठी सी ई ओ की सहमती से ग्राम रोजगार सहायक की भरती में रीठी जनपद में भ्रष्टाचार के माध्यम से भरती की जा रही है.

अपने शिकायती पत्र में कमलेश सेन ने आरोप लगाया है की ग्राम पंचायत अमगवा में विगत दिनों ग्राम रोजगार सहायक संविदा के पद पर उसने भी आवेदन किया था. जिसमे ग्राम के सरपंच मिल्लू लाल चक्रवर्ती के भतीजे प्रहलाद सिंह कुम्हार का चयन किया गया.

कमलेश सेन

पत्र में कमलेश ने आगे लिखा है की प्रहलाद कुम्हार ने अपने दस्तावेजो में ज्यादा अंक प्राप्त करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र, सागर मध्य प्रदेश द्वारा प्रदत्त सर्वेयर ट्रेड की अंकसूची लगाई है जो की पूर्णतः कूटरचित फर्जी है. इसकी शिकायत कमलेश ने चयन के तत्काल बाद जनपद रीठी  सी ई ओ, सरपच अमगवा एवं कटनी कलेक्टर को भी की  थी किन्तु शिकायत पर कोई अमल न कर प्रह्लाद सिंह कुम्हार के दस्तावेजो की समुचित जाँच किये बगैर उसकी नियुक्ति कर दी गई.

गौरतलब  है की ग्राम रोजगार सहायक के पद पर चयनित प्रह्लाद  कुम्हार ग्राम पंचायत अमगवा के सरपंच का भतीजा है. कमलेश सेन को आशंका है की मिल्लुलाल चक्रवर्ती ने सांठ -गांठ कर फर्जी अंकसूची के आधार पर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित कर उसका अनुमोदन करके जनपद पंचायत कार्यालय से उसकी नियुक्ति हेतु आदेश जारी करवा लिया.

जब कमलेश सेन को सूचना के अधिकार की लम्बी लड़ाई के बाद दस्तावेज मिले और वह सम्बंधित सन्सथानो में इनकी पुष्टि के लिए पूछने  पंहुचा तो चौकाने वाले तथ्य सामने आये. इसके आधार पर कमलेश ने एस पी कटनी को लिखित शिकायत करी और उसमे स्पस्ट लिखा की प्रहलाद सिंह कुम्हार द्वारा फर्जी अंकसूची औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सागर के नाम पर बनवाई गई है एवं उक्त अंकसूची के सत्यापन हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी रीठी के नाम एक कूटरचित पत्र भी प्राचार्य औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र संस्था सागर की सील एवं हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त होना दिखाया गया है. जो पूर्णतः कूटरचित है.

जब कमलेश आई टी आई सागर में प्राचार्य से इस संबंद्ध में पूछने गया तो प्राचार्य महोदय ने मौखिक तौर पर अवगत कराया की इस संस्थान में सर्वेयर नाम की ट्रेड है ही नहीं. और जो अंकसूची के सत्य होने की पुष्टि के प्रमाणपत्र  में जो हस्ताक्षर है वे भी फर्जी है. इस तरह का कोई प्रमाणपत्र  इस कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया.

सी ई ओ की भूमिका संदिग्ध
रीठी में पदस्थ सी ई ओ सुरेश झारिया ने जब से पद संभाला है तब से जनपद रीठी में दलालों के माध्यम से सारे काम ले देकर निपटाए जाते है. प्रश्न यह है की जब सागर आई टी आई में सर्वेयर नाम की ट्रेड है ही नहीं तो फिर रीठी सी ई ओ ने पत्र क्रमांक 94 -4 /5 /10 कब और कहा लिखा और उनको आई टी आई सागर का उक्त सन्दर्भ का जबाब एवं प्रनाम्पत्र  की पुष्टि का पत्र कैसे प्राप्त हुआ. स्पष्ट तौर पर इसमें रीठी  सी ई ओ की भूमिका भी शक के दायरे में है.

सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की खुलेआम अवहेलना
कमलेश सेन ने अपने साथ हुए अन्याय एवं प्रहलाद कुम्हार की नियुक्ति कैसे हुई इस सम्बन्ध में  जनपद कार्यालय रीठी में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उसे दुत्कारा  गया जिसकी अपील उसने कलेक्टर  कटनी के यहाँ की जिसमे उसने लिखा की रीठी सी ई ओ सुरेश झारिया के आदेश से वर्षा जैन, राजीव चौदहा  व बसंत मधोरिया के द्वारा यह कहकर मना कर दिया गया की इससे किसी व्यक्ति की व्यग्तिगत स्वतंत्रता का हनन होता है. तीन महीने भटकने तथा अपील की सुनवाई के बाद मजबूरन उसे प्रह्लाद कुम्हार के द्वारा आवेदन में लगाये दस्तावेज उपलब्द्ध कराये.

इन पूरे दस्तावेजो को प्राप्त करने के बाद तथा स्वयं जाकर सम्बंधित संस्थानों में पुष्टि के बाद कमलेश  सेन ने कटनी एस पी के यहाँ शिकायत की एवं उक्त विषय पर रीठी थाने से प्रथक कटनी जिले के किसी निरीक्षक, अधिकारी से जाँच कराये   जाने की मांग की क्योकि प्रह्लाद कुम्हार का चाचा मिल्लुलाल वर्तमान में ग्राम का सरपंच तथा प्रभावशी पैसे वाला व्यक्ति है.

अब जबकि सारे प्रमाणपत्र फर्जी होने के आरोप कमलेश सेन ने लगाये है तो कटनी एस पी द्वरा नियुक्त डी एस पी रश्मि धुर्वे की जाँच के बाद इस मामले में क्या होता है ? क्या प्रह्लाद की नियुक्ति रद्द कर प्रतीक्षा सूची वालो को अवसर दिया जाता है ? क्या रीठी सी ई ओ पर कोई दंडात्मक कार्यवाही होती है और कोई  मामला कायम होता है ?
 पैसे में बहुत दम होती है कही यह जाँच भी भ्रस्टाचार  की भेट न चढ़ जाये.