20 August, 2010

ऐसे में क्या लोक कल्याण हो पायेगा ?

कटनी
प्रदेश सरकार की जनहितैषी योजनाओं को अंजाम देने में यदि कोई रोड़ा है तो  वह है शासकीय  कर्मचारी.  ऐसा लगता है की भाजपा सरकार इन सात वर्षों में प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी पर अंकुश लगा पाने में अक्षम रही है. इसी का नतीजा है की दिनांक 20 .08 .2010 को जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचायत सिम्डारी  में लोककल्यान शिविर का आयोजन पूर्णतः असफल रहा.

इस शिविर में जिले और जनपद का कोई भी उच्च अधिकारी नहीं पंहुचा. लोककल्याण शिविर को मजाक बना देने वाले ये सरकारी कर्मचारी न मालूम करते क्या है ? जब देखो तो मीटींग और सेमीनार में लगे ये शासकीय कर्मचारी जनता से सीह्हे  संवाद से आखिर क्यों कतराते है ?

सिम्डारी के इस लोक कल्याण शिविर में जिले से कोई भी बड़ा अधिकारी नही पंहुचा . इसमें पहुचे तो सिर्फ पंचायत इन्स्पेक्टर तिग्नाथ, कृषि विभाग से  एस के दुबे,  सी एल पटेल ग्रामीण विस्तार अधिकारी, जल संसाधन से चम्मू  सिंह अमीन,  वन विभाग से नवल सिंह धुर्वे वन आरक्षक, पशु चिकित्सा से बी एल राय, खनिज विभाग से के पी  मोर, राजस्व से पटवारी, पंचायत सचिव, अध्यापक उपस्थित रहे.

इस लोक कल्याण शिविर में सचिव, पटवारी, शिक्षक अर्थात तृतीय श्रेणी कर्मचारी ही उपस्थित थे. कलेक्टर, एस डी एम्, जिला पंचायत सी ई ओ, जनपद सी ई ओ जैसे अधिकारिओ ने इसमें पहुचना मुनासिब नहीं समझा.
इस शिविर के आयोजन में हजारो रूपये खर्च हुए. नतीजा क्या निकला ? क्या पैसा बर्बादी करना ही लोक कल्याण शिविर है ? 
 ऐसे में जनता का  क्या वास्तव में  लोक कल्याण  हो पायेगा.