20 August, 2010

आखिर कब तक न्याय मिल पाएगा....?

अखिलेश उपाध्याय / कटनी

भारत सरकार के राष्ट्रीय सामजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना प्रदेश में दो अक्टूबर १९९५ से प्रारंभ की और १५ अगस्त १९९५ से प्रभावशील है. योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के मुखिया की म्रत्यु उपरांत उसके परिवार को एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान करना है.

सारी योजनाओं को सरकार तो बना देती है लेकिन इसको संचालित करने वाले सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारी और बाबू योजनाओ को हितग्रहियो तक पहुचने का कमीशन लेते है. इसी का परिणाम है की विधवा मीरा बाई एक साल से राष्ट्रिय परिवार सहायता में पति के मरने के बाद मिली सहायता के चेक के लिए भटक रही है.

ग्राम पंचायत खम्हरिया जनपद पंचायत रीठी की निवासी मीरा बाई को पति की म्रत्यु  के बाद पंचायत  एवं जनपद के माध्यम से दस हजार का चेक राष्ट्रिय परिवार सहायता के तहत जारी किया गया. उसने चेक क्रमांक 308946 को स्टेट बैंक आफ इंडिया शाखा रीठी में दिनांक 01 .08 .2008 को जमा किया. लेकिन उसके बाद से आज तक वह विधवा बैंक के चक्कर लगा रही है और उसे भुगतान नहीं किया गया.
ग्राम पंचायत खम्हरिया के ग्राम कुदरी की बेबा मीराबाई यादव पति स्वर्गीय शोकल यादव तबसे सैकड़ो बार रीठी  एस बी आई के चक्कर काट-काट कर हैरान हो गई है और इस गरीब, मजदूर महिला ने कैसे एक हजार रूपये उधार लेकर रीठी आने-जाने में खर्च किया वह तो स्वयं उसके घर की दयनीय हालत बताती है.

जबकि इस योजना के नियम में स्पष्ट उल्लेख है की इसमें वे  व्यक्ति सहायता के पात्र होगे जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हो, परिवार के ऐसे सदस्य की म्रत्यु  हो जाए जिसकी कमाई से ही अधिक गुजारा चलता हो. योजना के अंतर्गत प्राकृतिक अथवा अप्राकृतिक रूप से म्रत्यु होने पर दस हजार रूपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है.

मीराबाई यादव का यह चेक आज तक भुगतान नही किया गया. वह हैरान है की आखिर उसका भुगतान कब होगा. जबकि बैंक वालो का जबाब गोल मोल होता है. एक साल से भटक रही इस गरीब महिला को आखिर कब तक न्याय मिल पाएगा....?