09 August, 2010

अब स्वाध्याई छात्रो को भी छात्रवृत्ति

पन्ना. शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय शाहनगर में सत्र 2009 -10 में अध्ययनरत  नियमित छात्रो को दसवी की परीक्षा में स्वाध्याई रूप से परीक्षा में बैठने दिया गया. इनमे शाहनगर के छात्रावासों  में दर्ज छात्रावासी छात्र-छात्राए भी शामिल है. आदिम जाती/ हरिजन छात्रावास में जिन छात्रो को सालभर उपस्थित दर्शाया गया फिर परीक्षा के दौरान उन्ही छात्रो  को पचहत्तर प्रतिशत  से कम उपस्थिति कम होने के कारण कैसे स्वाध्याई बना दिया गया ?

हरिजन एवं आदिवासी विद्यर्थियो को मिलने वाली छात्रवृत्ति दी जाती है लेकिन यह छात्रवृत्ति तभी दी जाती है जब की छात्र नियमित रूप से शाला में उपस्थित रहा हो. इन नियमित अध्ययनरत छात्र-छात्राओं  को जब स्वाध्याई किया गया तो फिर शासन द्वारा छात्रवृत्ति क्यों दी गई ? .

इस प्रकरण में शाहनगर उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य सुलेमान खान, चारो छात्रावासों के अधीक्षकों - शिवप्रसाद  अहिरवार, जगतबाई अहिरवार, दीपिका उइके तथा श्री पांडे  की भूमिका संदिग्ध है. यदि जिन छात्र-छात्राओं की उपस्थिति पंजी में मानक नियम के अनुरूप उपस्थिति कम थी और उन्हें नियमित की बजाये स्वाध्याई छात्र के रूप में परीक्षा में समिलित होने दिया तो फिर उन्हें शासन द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति क्यों दी गयी ?

प्रश्न यह है की यदि विद्यालय में इन छात्रो को उपस्थिति कम रही जिसके चलते उन्हें स्वाध्याई रूप से परीक्षा में बैठने दिया गया तो आदिम जाती एवं हरिजन छात्रावासों में उपस्थिति दर्शाकर अधीक्षक छात्रावास के रिकार्ड में से कैसे पैसे का आहरण करते रहे ? स्पष्ट रूप से पन्ना जिले में चलाये जा रहे आदिमजाति विभाग के छात्रावास फर्जी रूप से चल रहे है. शाहनगर में तो यह स्पष्ट हो गया है की यहाँ के अधीक्षकों ने फर्जी रूप से उत्कृष्ट बालक छात्रावास, उत्कृष्ट कन्या छात्रावास, प्रिमेत्रिक कन्या छात्रावास, प्रिमेत्रिक बालक छात्रावास में उपस्थिति दर्शाकर छात्रावास चला रहे है. 

दूसरा गंभीर प्रश्न यह है की उत्कृष्ट छात्रावासों में रह रहे छात्रो  को कोचिंग की भी व्यस्था दी गयी है जिसमे शासकीय शिक्षको द्वारा कोचिंग दी जाती है. जब उत्कृष्ट विद्यालय में क्ष दसवी के १६९ छात्र-छात्राव को नियमित से स्वाध्याई किया गया तो यह साफ़ हो जाता है की इन छात्रावासों में बच्चे नहीं रहते.  फिर इन छात्रावासों में कोचिंग देने वाले  शिक्षको को कोचिंग का पैसा क्यों और कैसे दिया ?

छात्र जब स्वध्याई रूप से परीक्षा में शामिल हुए तो उनको छात्रावासों में प्रवेश क्या फर्जी रूप से था ? क्या यहाँ के सभी  छात्रावास फर्जी रूप से चलाये जा रहे है ?

तस्वीर बिलकुल साफ़ है पन्ना जिले में आदिमजाति विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में अधीक्षकों, जिला  संयोजक तथा शिक्षको की मिलीभगत से सारा खेल चल रहा है जो गंभीर जाँच का विषय है. आखिर हरिजन आदिवासिओ के हित में आये योजनाओ का लाभ उन तक कब तक पहुच पायेगा ?

शाहनगर से मदन तिवारी के साथ अखिलेश उपाध्याय