27 August, 2010

सी एम् ओ को कमीशन पंहुचा कर बी एम् ओ खुले आम लूट रहे

अखिलेश उपाध्याय / कटनी

शासकीय योजनाओं को बनाने वाले नीति नियंताओ के  द्वारा नीतिया तो बना दी जाती है लेकिन नीतिओ के कार्यकर्ता शासकीय कर्मचारी सारी योजनाओ को स्वयं डकारने में लगे है. मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेश के लोगो को सामाजिक  सुरक्षा के उद्देश्य से 25 सितम्बर 2004 को दीन दयाल अन्त्योदय उपचार  योजना लागू की. शुरुआत में यह योजना सीमित थी जो केवल गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो एवं एस टी, एस सी के लिए ही बनाई गई थी

इस योजना में शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजो को उपचार एवं जाँच की मुफ्त व्यस्था दी गई थी. योजना का अच्छा प्रतिफल मिला. बाद में इस योजना का विस्तार कर दिया गया और फिर इसमें सभी तबको के बी पी एल कार्ड धारको को शामिल कर लिया गया. तबसे इस योजना में नाम दर्ज कराने  वालो की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है.

वर्तमान में प्रदेश के ५७ लाख बी पी एल कार्ड धारक इस योजना से जुड़ चुके है. अभी जबकि कई जिली में बी पी एल सूची का पुनरीक्षण चल रहा है तो अनुमान है की जल्द ही नई सूची के बाद ६५ लाख लोग इस योजना से जुड़ जाएगे.

योजना में दिए जाने वाले फायदे
इस योजना के तहत बीस हजार रूपये तक का इलाज एक परिवार को एक शासकीय वर्ष में दिया जाएगा यह सुविधा सभी शासकीय अस्पतालों में उपलब्द्ध कराई गई है. सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजो को ही इसका लाभ मिल पायेगा. एक परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक हजार का लाभ मिले सकेगा जबकि पूरे परिवार का उस वर्ष का उस योजना का कुल खर्च बीस हजार तक का हो. 

दीन दयाल उपचार योजना में दवा और जांच का खर्च भी शामिल किया गया है. सभी प्रकार के रोगों में इस योजना का लाभ दिया गया है जिसमे  प्रसव भी शामिल है. विशेस परिस्थितियों में गंभीर  रोगियों के लिए यह राशी बढ़ा कर तीस हजार तक भी दी जा सकती है. 

इस योजना का सञ्चालन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा किया गया है. प्रत्येक जिलो के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अधिकार दिए गए है की वे बी पी एल सूची के अनुसार कार्ड जारी करे, दवाए खरीदे, फंड को खर्च करे और जिले में मानिटरिंग करे.


 लेकिन दीन दयाल अन्त्योदय उपचार योजना में दवाओ की खरीदी सी एम् ओ के द्वारा करी जाती है जिसमे  अच्छा कमीशन  देने वालो से ही दवाए खरीदी  जाती है. इन दवाओ पर नाट फार सेल नहीं लिखा होता जिसका लाभ स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पूरी तरह उठा रहे है  वे इन दवाओ को स्थानीय दावा विक्रेताओ को आधी कीमत पर बेच देते है और फिर दल्टर इन दवाओं को  ही मरीजो को लिखते ताकि दवा विक्रेता का माल जल्दी निकल जाए और फिर नए आने वाली दवाओं को ठिकाने लगाया जाए.

दीन दयाल के कार्ड धारको को इसका लाभ कटनी जिले में तो जरा भी नही दिया जा रहा  है. इन मरीजो को भी दवाए खरीकर ही उपचार कराना पड़ रहा है. कुत्ते काटने के इंजेक्सन हो  चाहे जगली शियार  ने कटा हो दीन दयाल उपचार योजना का कार्ड होने के वावजूद भी मरीज दावा विक्रेता से दवाये लेने मजबूर है.

सी एम् ओ को कमीशन पंहुचा कर बी एम् ओ खुले आम लूट रहे है. कटनी जिले में छेह स्थानों पर - बडवारा, ढीमर खेडा, बहोरिबंद, रीठी, विजय राघव गढ़ खंड चिकित्सा अधिकारी बैठते है. इनके द्वारा ही भ्रस्टाचार किया जा रहा है.



स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आकड़ो के अनुसार इस योजना में वर्ष 2004 -05 में 1 .50 करोर रुपया आवंटित किया गया जिसमे मात्र 25 लाख रूपये ही खर्च हो सके. वर्ष 2005 -06 में 17 .72 करोड़  में से 3 .78 करोड़ , 2006 -07 में 19 .42 करोड़  में से 7 .58 करोड़ , वर्ष 2007 -08 में 39 .50 करोड़  में से 17 .14 करोड़  और वर्ष 2008 -09 में 15 करोड़  में से 14 .33 करोड़  रुपया खर्च किया गया.

इन आकड़ो से स्पष्ट है की शुरात  में जब योजना लागू की गई थी तब विभाग के अधिकारिओ  को  इसे हजम करने की तरकीब मालूम नहीं थी लेकिन जैसे-जैसे इसकी जानकारी अधिकारिओ को  मालूम चलती गई  तब उपरोक्त आकडे बताते है की प्रदेश स्तर पर इस योजना में कितना बड़ा फर्जीवाडा किया गया है.

देखना यह की जन हितेषी इस योजना का लाभ हितग्राहियों  को कब सही रूप से मिलेगा..... मिलेघा भी या इसी तरह से सरकारी तंत्र के लोग लूटते रहेगे....?