28 August, 2010

भजन करते-करते म्रत्यु हो गई.

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
 रक्षाबंधन के दिन मोहांस मंदिर दवा लेने आये एक व्यक्ति की  मंदिर में भजन करते-करते म्रत्यु  हो गई. जनम - जनम के पुण्यो के बाद ऐसा करोडो में कोई विरला  होता है जिसके प्राण भगवद भजन करते निकले.

चूकी यह पुलिस केस था इसलिए मोके पर रीठी पुलिस भी पहुची और अपनी प्रारंभिक जाँच में पुलिस को मृतक के जेब से हटा से मोहास का टिकिट मिला जिससे यह अनुमान लगाया गया की मृतक हटा या हटा के आस-पास का होगा. डेड बाड़ी को दोपहर दो बजे पोस्ट मार्टम  के लिए रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया.

रीठी में इस मृतक की लाश चोबीस घंटे तक राखी रही और अगले दिन बड़ी मुस्किल में उसका पी एम् हो सका. यह कोई नया मामला नही है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में ऐसा आये दिन होता रहता है. रीठी अस्पताल में अराजकता का माहोल पिछले एक बर्ष से है जब से यहाँ बी एम् ओ गुलाब तिवारी इस पड़ पर बैठे है तब से यह पर गड़बड़िया और भ्रस्ताचार चरम पर है.

रोगी कल्याण का पैसा विकास में न लगकर बी एम् ओ की जेब में जा रहा है. अस्पताल में गंदगी चरम पर है. दीवालों की टाईल्स उखड चुकी है. नल में टोंटी नहीं है. पानी दिन भर बहता रहता है.

इस प्रकार से तीस बिस्तरों का यह अस्पताल कबाड़ घर  नजर आता है. मरीजो को बिछाने के लिए चादर कभी नहीं दी जाती.

यहाँ के बी एम् ओ डाक्टर गुलाब तिवारी की लिखावट शायद स्वर्ग के देवता ही पढ़ सके इतनी गंदी लिखावट में लिखते है. स्पष्ट रूप से इनकी किसी एक दवा विक्रेता से कमीशाबाजी चल रही है.

पांच डाक्टर के पद में से मात्र तीन ही डाक्टर यहाँ पदस्थ है और वे भी अपनी ड्यूटी पर नहीं मिलते. डाक्टर के समय पर ने मिलने पर मरीज बहुत परेशान हो जाते है और मजबूरन झोलाछ्प डाक्टरों के चक्कर में लम्बी रकम गवाते है.

अस्पताल की पर्चियो की दवाईया यहाँ ड्राईवर के द्वारा बाटी  जा रही है. सफाई कर्मचारी मरीजो को ड्रिप चढाते है.  कुल मिलाकर जमकर भार्रासाही  मची है रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में. सी एम् ओ को कुछ लेना देना ही नहीं है क्योकि इनको इनका कमीशन घर पर पंहुचा दिया जाता है.

आखिर गरीबो को फिर कैसे स्वास्थ्य लाभ मिलेगा.....?