29 August, 2010

ठगी का नया तरीका

अगर आप स्टेसन पर यात्रा करने के लिए अनारक्षित टिकिट खरीदने वाले यात्री हो  या खाद्य सामग्री खरीदने वाले ग्राहक, टिकिट खिड़की पर कर्मचारी और प्लेटफार्म  पर लगे फास्ट फ़ूड के स्टाल संचालक खुले पैसे के नाम पर लगातार चूना लगा रहे है. यह खेल एक साल से बदस्तूर चालू है.

अगर आप रेलवे स्टेसन पर जल्दी में हो और सामान्य दर्जे का टिकिट खरीदने जा रहे हो, पार्किंग में वाहन खड़ा कर रहे हो या फिर प्लेटफार्म पर खाद्य सामग्री खरीद रहे हो, अपने साथ खुल्ले पैसे जरूर  लेकर जाए, क्योकि आपको शायद ही बकाया के पैसे वापस दिए जाए. इन जगहों पर एक से लेकर पांच रूपये तक  खुल्ला न होने के नाम पर वसूले जा रहे है. स्टेसन पर हो रहा यह गड़बड़झाला रेल मंडल की वाडिज्य विभाग की टीम को भी पता है इसके बाद भी यात्री को प्रतिदिन लगभग एक जंक्सन जैसे स्टेसन पर दो से ढाई लाख का चूना लगाया जा रहा है.

कटनी में अन्य स्थानों से यात्रा करने वाले लगभग चालीस से पचास प्रतिशत यात्री स्टेसन पर पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक्स , चाय तथा अन्य सामन खरीदते है. यह सामग्री दो से तीन रूपये अतिरिक्त दर पर विक्रय की जा रही है.

जबकि इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म  कारपोरेसन ने स्टेसन पर विक्रय किये जा रहे खाद्य पदार्थो के दाम निर्धारित किये है लेकिन फ़ूड स्टाल संचालको ने सामान विक्रय करने के लिए अनाधिकृत रूप से कीमत तय कर रखी है. सब कुछ नजर के सामने होने के बाद भी प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा है.

टिकिट खिड़की पर लग रही चपत
दमोह   की ओर जाने वाले कमलेश साहू सामान्य दर्जे की टिकट लेने खिड़की पर खड़े लाइन में लगे थे, उसी समय ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर खडी हो गई और टिकट बिनडो पर बैठे टिकिट बाँटने वाले क्लर्क ने टिकिट बाटने की रफ़्तार कम कर दी. जैसे ही कमलेश का नंबर आया तो उन्होंने टिकिट के लिए पचास रूपये का नोट दिया बाबू ने उनसे तीन रूपये खुल्ले मांगे मजबूरी में उन्होंने पांच रूपये वापस लेकर तीन रूपये छोड़ दिए. इस तरह सैकड़ो यात्रिओ को एक, दो और तीन रूपये छोड़कर जाना पड़ता है. और यह अतिरिक्त रकम बुकिंग क्लर्क की जेब में चला जाता है.

स्पष्ट तौर पर खुल्ले पैसे न होने की बात करना बुकिंग क्लर्क, दूकानदार द्वारा ठगी का नया तरीका अपनाया  जा रहा है. जिसमे दूकानदार को एक से पांच रूपये का फायदा हो रहा है. एक तो पहले ही रेलवे स्टेसन पर चीजो के दाम बढ़ाकर विक्री की जा रही है वही दूसरी ओर चेंज के नाम पर अनावश्यक ठगी का व्यापर धड़ल्ले से चल रहा है.

क्या इस विषय में रेल विभाग के  अधिकारी कोई ठोस कदम उठायेगे....?