30 August, 2010

औषधि संग्रहण केंद्र में मची लूट

अखिलेश उपाध्याय  / कटनी
वन विभाग द्वारा संचालित औषधि संग्रहण एवं प्रसंसकरण केंद्र में इन दिनों भ्रष्टाचार  का बोलबाल है . लगभग बीस करोड़  रूपये की राशी औषधियो के निर्माण और इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रो में पहुचाने के लिए खर्च तो की गई लेकिन इसका वास्तविक लाभ कितनो को मिल पाया यह जाँच का विषय है. योजना पर अमल लघु वनोपज समितियों के माध्यम से नियमानुसार नही हो पा रह/ सरकारी राशी डकारने  योजना से जुड़े अधिकारिओ में होड़ मची है. फर्जी मेडिकल बिलों और यात्रा भत्तो से  हर माह जेबे गर्म की जा रही है.

करोडो खर्च करके भी लाभ नहीं
वनस्पति वन योजना के अंतर्गत संचालित राजा सलैया नर्सरी बहोरिबंद तथा  झिरिया नर्सरी बडवारा परिक्षेत्र में भी अनियमितताओं का बोलबाला है. जिन मजदूरे से यहाँ काम लिया  जा  रहा है वे शोषण के शिरकर है. ज्यादा मजदूरी पर दस्तखत कराकर उन्हें केवल पंद्रह सौ या  अधिकतम दो हजार रूपये तक ही दिए जा रहे है. लेखापाल ने khdara    समिति  में नियम विरुद्ध अपने पुत्र को नियुक्ति दिला रखी है. आरोप तो यह भी है की उनके प्रमाण पत्र भी सही नहीं है.
 शिकायत तो यह भी है की लेखापाल स्वयं केमिस्ट बनकर फर्जी प्रमाणपत्रो के जरिये मानदेय  उठा रहे है. इसी तरह बिल वाऊचारो में भी हेरफेर कर लाखो कमाए जा रहे है. अगर पिछले पांच वर्ष के बिल वाऊचर मेडिकल बिल यात्रा भत्ता आदि की जाँच हो तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. आयुर्वेद विभाग से सामान्य वन मंडल जिला यूनियन में प्रतिनियुक्ति पर आये डाक्टर आर के सिंह इस पद पर रहने  के बाबजूद एल आई सी कार्यालय में भी अपनी सेवाए देकर मेडिकल बिलों का लाभ कमा  रहे है. शासन से वेतन में एक बड़ी राशी प्रतिमाह पाने के बाबजूद इनकी सेवाए प्रसंस्करण केंद्र को बमुश्किल घंटे  दो घंटे ही मिल पा रही है.

कौन करवाए  नियमो का पालन
औषधि बनाने के लिए जो वर्कशाप तैयार की गई थी, उसमे ड्रग एक्ट के किसी भी नियम का पालन  नहीं किया गया. औषधि के निर्माण में जिस पानी का उपयोग किया जा रहा है, वह भी निर्धारित मानको के हिसाब से  नहीं होता. नियमानुसार पानी की टेस्टिंग समय समय पर होती रहनी  चाहिए. ताज्जुब तो इस बात पर है की जिस पानी से बाग़  बगीचों की सिचाई होती  है वही पानी दवाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है. करोडो  रूपये व्यय करने के बाद भी यहाँ प्रसंस्करण केंद्र में स्वयं का बिजली मीटर तक नही लग पाया है. शिकायतों में तो यहाँ तक कहा गया है की मशीने चोरी की बिजली से चल रही है जिसके  जरिये विद्युत् मंडल को भी चूना लगाया जा रहा है.