18 August, 2010

म न रे गा में भ्रष्टाचार की गारंटी

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में जाब कार्ड बनाने से लेकर मजदूरी भुगतान तक में किस हद तक भ्रष्टाचार किया  जा रहा है इसका एक बड़ा उदहारण जिला मुख्यालय से लगी कटनी जनपद की ग्राम पंचायत छहरी में देखा जा सकता है यहाँ कुल 565 ग्रामीणों को जाब कार्ड जारी किये गए है और 449 जाबकार्डधारीओ ने काम किया है.

जब ग्रामीण अपने जब कार्ड की जानकारी मांगते है तो सरपंच और सचिव उन्हें कोई भी जानकारी देने से स्पष्ट मना कर देता है. लेकिन म न रे गा के सारे काम तो इन्टरनेट पर भी मिलते है तो कुछ पढ़े -लिखे नागरिको ने जब इसकी जानकारी नेट से निकवई  तो जो जानकारी मिली  उससे वे सब दंग रह गए.

गाँव वालों ने बताया की छहरी पंचायत में नेट से प्राप्त जानकारी में सरकारी कर्मचारियो, नाबालिग बच्चो एवं मृत व्यक्तिओ के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है. कुछ काल्पनिक नामो से भी जाब कार्ड बनाये गए  है. मस्टर रोल में फर्जी हाजिरी भरकर मजदूरी का भुगतान दर्शाया गया है. जबकि ग्रामीणों के कार्ड कोरे पड़े है लेकिन उनकी भी फर्जी हाजिरी भर कर भुगतान निकला  जा चुका है.

अपने स्तर पर जानकारी एकत्र करने के बाद ग्रामीणों की ओर से एक शिकायत जिला कलेक्टर कटनी को सौपी गई जिसमे एक काम में छोटेलाल पिता रामदास का नाम है जबकि छोटे लाल नगर मिगम कर्मचारी है और वर्तमान में कलेक्टर आवास में पदस्थ है. इसी कार्ड में एक नाम दिग्विजय सिंह का है जबकि इस नाम का कोई भी व्यक्ति छहरी ग्राम पंचायत में निवास ही नहीं करता. एक और नाम दिलराज सिंह  का है जो वर्ष १९९१ में म़र चूका है. इसी प्रकार सुखदेव वल्द जगदीश प्रसाद नगर निगम में लिपिक है, अनिल कुमार वल्द महेश प्रसाद विद्युत् मंडल में सुरक्षाकर्मी है. रेल पुलिस में नौकरी कर रहे आशीष वल्द विष्णु के नाम पर भी भुगतान किया गया है.

शासकीय कर्मचारियो की लम्बी फेहरिश्त है जिनमे प्रशांत परोहा-न्यायलय कर्मचारी, राजेश मिश्र, नाबालिग सोम्बती जिसकी उम्र ग्यारह वर्ष दर्ज है, पहाड़ी में पदस्थ शिक्षक राजकुमार उरमलिया, आयुध निर्माणी कर्मचारी हरी प्रसाद यादव, आरती स्वसहायता समूह के अध्यक्ष अशोक सिंह, मंजू स्वसहायता समूह के अध्यक्ष शिवपाल सिंह,  आगनवाडी सहायिका गुलाब बाई आदि.

मजेदार बात तो यह है की इस फर्जीवादे   में जाब कार्ड तो कोरे है लेकिन मस्टर में इन कार्डो  के आधार पर हाजिरी दर्ज कर मजदूरी निकाली जाती रही. ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में यह भी बताया की केवल जाब कार्ड के माध्यम से फर्जी  भुगतान ही नहीं किया जाता बल्कि योजना के तहत कराये जा रहे निर्माण कार्य भी घटिया स्तर पर कराये जा रहे है.

गरीब मजदूरों को उनके गाँव में ही रोजगार मिल सके इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रोजगार गारंटी कानून बनाया था लेकिन केंद्र की यह अच्छी योजना में वास्तविक लोगो को इसका लाभ जरा भी नही मिल रहा है. इसकी वास्तविक जिम्मेदारी तो राज्य सरकारों की है पर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार इस दायित्व  का सच्चाई और ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रही है यही वजह है की यह योजना अब रोजगार की गारंटी भले  न दे भ्रष्टाचार की गारंटी अवश्य देती है.