01 September, 2010

अखिलेश उपाध्याय / रीठी
स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी जनहितैषी योजनाओ को जनता तक न पंहुचा कर कमीशनखोरी में लगे है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में पदस्थ बी एम् ओ डाक्टर गुलाब तिवारी जब से इस पद पर बैठे है तब से तो रीठी अस्पताल कबाड्घर बन गया है. चारो ओर गंदगी का आलम है फटे गद्दे है जिनपर चादर कभी भी नहीं बिछाई जाती जबकि ऐसा नहीं है की अस्पताल में यह सब आता न हो.
यहाँ आये मरीजो को दवाये तो हमेशा बाहर से ही खरीदनी  पड़ती है फिर चाहे वह एक्सपायर होने के बाद जला क्यों न दी जाए. दीन दयाल योजना के मरीजो को भी बाहर से ही दवाये खरीदना पड़ती है. मरीजो को छोटे - छोटे  पुरजो पर लिखकर दवाये बाहर से मगाई जाती है

और बी एम् ओ डाक्टर गुलाब तिवारी के लिखे पर्चे पढने के लिए नयी भासा सीखनी पड़ेगी क्योकी उनका लिखा परचा दवा विक्रेता पढ़ सके यह तो मुमकिन ही नहीं है. हा शायद उनकी किसी एक दवा विक्रेता से सेट्टिंग हो तभी तो घटिया कम्पनी की महगी दवाये मरीजो को लिखी जा रही है जबकि वही दवा अच्छी कम्पनी की सस्ते दामो पर मिल जाती है.

डाक्टर के लिखे पर्चे को शायद स्वर्ग के देवता ही पढ़ सकते है.