10 September, 2010

शाम होते हे अँधेरा छा जाता है.

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
सार्वजानिक वितरण प्रडाली यानि पी डी एस पर जिला प्रशासन का बिलकुल भी नियंत्रण नहीं है इस प्रडाली पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्यवाही तुरंत करना जनहित में अनिवार्य है लेकिन दो माह से कछारी  ग्राम पंचायत के हजारो ग्रामीणों को राशन का खाद्यान्न शक्कर, मिटटी का तेल  वितरण नहीं किया जा रहा है. प्रतिदिन सैकड़ो निर्धन दूकान पर आते है, बारिश धूप में बैठकर दिन भर इन्तजार करते है मगर दुकान नही खुलती वे सब खली हाथ घर लौट जाते है.

इसकी शिकायत जनपद कार्यालय तक पहुचाई गई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. लगभग एक सौ रूपये किराया चुकाकर कटनी कलेक्टर कार्यालय जाकर शिकायत सुनाने की हैसियत गरीबो की नहीं है. गत दिवस भी लाचार नागरिको का जत्था खाली हाथ घर लौटा था.
ग्राम पंचायत कछारी में सलग्न दो अन्य गावो के राशन कार्डधारी उपभोक्ताओं ने बताया है की दो माह यानि जुलाई-अगस्त से दूकान नही खुली. न अनाज मिल पाया न शक्कर और न ही मिटटी  का तेल जबकि आसपास ही हर दुकानों में राशन का वितरण हर माह हो रहा है.. गत 6 सितम्बर को बारिश  में भीगकर इन्तजार कर रहे ग्रामीणों में से एक ने समिति संचालक हेतराम पटेल को फोन लगाया पर वह नहीं आया. शेरा सिंह, प्रताप सिंह, सिव लाल, मुन्ना लाल यादव ने बताया की कछारी के हिस्से की राशन सामग्री पथवारी बागीच मोड़ पथरा में ही ब्लेक हो रही है.
रात-रात भर गावो में बिजली गुल रहती है. इन परिस्थियों में मिटटी तेल की उपयोगिता ग्रामीणों के लिए सोने जैसी हो जाती है. अशिक्षित हरिजन बी पी एल कार्डधारी गोमती झपी, हल्ला बाई, गीता बाई तथा विशाली ने खली हाथ घर लौटने के पूर्व कहा की दो लीटर मिटटी का तेल मिलना भी दूभर है पहले तो इतना ही मिल जाता था लेकिन अब वह भी बंद हो गया है. घरो में शाम होते हे अँधेरा छा जाता है.
ग्रामीणों ने बताया की जनपद के बाबू को एक अर्जी पिछले महीना दे आये थे लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं की गई है. यदि हम शिकायत करने कटनी जाते है तो हमारी खेती, मजदूरी का भी हर्जा होता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपेक्षा की है की उन्हें दूसरी राशन दूकान से अनाज बत्वाया जाए.
इस सम्बन्ध में खाद्य शाखा कटनी आफिस से संपर्क करने पर बाबू ने बताया की उनके कार्यालय में इस गाँव की कोई भी शिकायत नहीं आयी है शिकायत आने पर अवश्य कार्यवाही की जायेगी.