15 September, 2010

दबंगों के कब्जे में समूह


अखिलेश उपाध्याय / कटनी
जिन समूहों को बच्चो को भोजन उपलब्द्ध करने की जिम्मेदारी सौपी गई, वही समूह बच्चो का भोजन डकार रहे है. स्कूलों में बच्चो के लिए आ रहा मध्यान्ह भोजन छुटभैये नेताओं द्वारा बनाये गए स्वयं सहायता समूहों के पेट में जा रहा है.
भोजन उपलब्द्ध करने के लिए बनाए गए यह स्वयं सहायता समूह बच्चो को भोजन उपलब्द्ध करने की चिंता छोड़कर स्वयं की सहायता करने में जुटे है. कटनी जिले में एक भी ऐसा ब्लाक नहीं है जहा सभी स्कूलों में हर रोज बच्चो को मध्यान्ह भोजन उपलब्द्ध कराया जा रहा हो. जिले में ऐसे ढेर सारे विद्यालय है जहा मध्यान्ह  भोजन बन ही नहीं रहा है.
जिले में छेह विकासखंडो में अधिकारिओ  की साठगाथ के चलते समूह संचालक मनमर्जी से मध्यान्ह भोजन की व्यस्था  चला रहे है. भाजपा और कांग्रेस के छुटभैये नेताओ का सरक्षण प्राप्त समूह संचालक बच्चों को भोजन बाटने की बजाये खुद ही उसे डकार जाते है.

मध्यान्ह भोजन में जबसे शिक्षको को मुक्त किया गया है उन्होंने पूरी तरह से अपना नाता मध्यान्ह भोजन से तोड़ लिया है. बच्चो को मध्यान्ह भोजन मिला अथवा नहीं इसकी चिंता शिक्षक नही करते, हालाकि शिक्षक अपना मुह बंद करने के बदले समूह से महीने में खर्चा पानी जरूर वसूल लेते है.
सूत्रों की माने तो मध्यान्ह भोजन व्यस्था की देख रेख करने वाले अधिकारी और कर्मचारी भी समूहों से मिल जाते है और सही रिपोर्ट नहीं देते है. बताया जाता है की कुछ नोडल अधिकारी तो फील्ड में जाने की बजाये  टेलीफोन पर रिपोर्ट कार्ड भरते है.