25 September, 2010

महीनो से नहीं मिला मध्यान्ह भोजन

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
कटनी. विशेष बाल श्रम विद्यालयों में अध्ययनरत हजारो बच्चो को यदि मध्यान्ह भोजन नहीं मिल रहा है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार  है. केंद्र और राज्य सरकार की मंशा स्कूलों में पढने वाले बच्चो को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन देने की है लेकिन जिले  में पिछले करीब ढाई महीने से बच्चो को मध्याह्न भोजन नहीं मिल रहा है. मध्याह्न भोजन व्यवस्था को सुधारने और इसकी समीक्षा करने के उद्देश्य से अपर कलेक्टर आर आर बाथम की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना की बैठक में स्वयं सेवी संगठनों के पदाधिकारियो ने एक स्वर में यह मुद्दा उठाया.
एन जी ओ  संचालको ने कहा है की केंद्र सरकार द्वारा बच्चो को मध्याह्न भोजन देने के लिए राशी भेजी जा रहे है इसके बाबजूद बच्चो को मध्याह्न भोजन नही मिल पा रहा है. जिस पर ऐ डी एम् ने बात को स्वीकार  किया की  बच्चो को मध्याह्न भोजन न मिलना गंभीर मुद्दा है.
 अत यह काम सुचारू रूप से चले इसके लिए जिम्मेदारिया तय की गई है. उन्होंने कहा की मध्याह्न भोजन व्यस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर के माध्यम से राज्य शासन को भेजा जाएगा जिसमे पूर्व की तरह मध्याह्न भोजन की व्यस्था का जिम्मा एन जी ओ को सौपे जाने के सम्बन्ध में सुझाव होगा.
अपर कलेक्टर की पहल का एन जी ओ सहित समस्त सदस्यों ने स्वागत करते हुए कहा की पहले एनजीओ द्वारा की जाने वाली व्यवस्था बेहतर रूप से संचालित होती थी. बैठक में श्रम पदाधिकारी भागवत प्रसाद, परियोजना निदेशक रूपल  परोहा, जिला शिक्षा केंद्र समन्वयक शिव कुमार चौरसिया सभी विकास खंडो के बी आर सी एवं एन जी ओ के संचालक भी थे.
बैठक में एनजीओ के पदाधिकारियो ने कहा की राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के अंतर्गत संचालित विशेष बाल  श्रम बिद्यालायो में व्यस्थाओ के लिए सम्बंधित एनजीओ को कंटनजेंसी    की राशी दी जाती थी लेकिन पिछले दो साल से यह राशी एनजीओ को नही दी जा रही है. एनजीओ का यह भी कहना था की यदि केंद्र सरकार से यह राशी आ रही है तो फिर कहा जा रही है  ?