01 September, 2010

दलालों अब मैदान छोड़ दो नहीं तो खदेड़कर मारे जाओगे.

अखिलेश उपाध्याय / रीठी
झारिया राज का अंत
पंचायती राज व्यस्था में जन हितैषी योजनाओ को अधिकारी  कर्मचारी चूना लगा रहे है. खुले आम बसूली चल रही है और जनप्रतिनिधि इसका हिस्सा बनकर खेल में शामिल है. पंचायतो के विकास के लिए आया पैसा पहले जनपद और जिला में बैठे अधिकारी और बाबू की कमीशन  की भैट  चढ़ता है उसके बाद सचिव और सरपंच इसे डकारते है.

जनपद पंचायत रीठी में यही सब कुछ हो रहा था. यहाँ खुले आम लुटाई मची है और कोई भी, न तो जन प्रतिनिधि ही कुछ बोलता है और न ही जिला पंचायत सी ई ओ और कलेक्टर. सभी इसका हिस्सा बनकर मजे से लूट रहे है. जनपद में पिछले कई वर्षों से चल रहा झारिया राज अब समाप्त हो चुका है क्योकि यहाँ के भ्रष्ट सी ई ओ झारिया  का स्थानांतरण हो चुका है.

लोग बड़े प्रसन्न है सबसे खुश सरपंच है क्योकि उनको लम्बी  रकम भेंट स्वरूप जो चढ़ानी पड़ती थी अब वे इससे मुक्त हो गए. . और यदि कोई मायूस  है तो वे है सचिव क्योकि रीठी सी ई ओ झारिया इनको सरक्षण देता रहा है. तीन तारिख को सचिवो ने विदाई समारोह रखा है जिनमे बहुतो ने लम्बे भासण  लिख रहे है भ्रस्त सी ई ओ के गुडगान करने  के लिए.

और दुखी है वे दलाल जिनकी दुकान तीन तारिख से बंद हो जायगी क्योकि जनपद अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह का स्पष्ट कहना है की वे रीठी जनपद को भ्रस्टाचार से मुक्त करने के लिए कृत संकल्पित है. तो दलालों  अब मैदान छोड़  दो नहीं तो खदेड़कर  मारे जाओगे.