04 September, 2010

योजनाओ का नहीं मिल रहा लाभ

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
जिले में इस समय पंचायतो में शासकीय नियमो निर्देशों को एक तरफ रखकर सरपंच-सचिव अपने मनमाने तरीके से योजनाओ को मूर्त रूप देने की पूर्ण  मंशा से काम करते है. जिले की बड़ी जनपद पंचायतो की कई ग्राम पंचायतो में जमकर जहा पलायन हो रहा है. विभागीय अधिकारी कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए है. सरपंच सचिवो की नरेगा के तहत जारी कार्य स्थलों पर सूचना पटल तक नहीं लगाए जाते.

आखिरकार जब काम में लागत और मद का पता नहीं चलेगा तो गाँव वालो को जानकारी ही क्या होगी. पंचायतो में महिलाओं के  सशक्तिकरण की दिशा में पचास प्रतिशत आरक्षण  तो दे दिया गया, लेकिन जहा महिला सरपंच अनपढ़ है तथा उनके पति भी जहा सीधे -सादे है वहा सचिव  चाँदी काट रहे है.

नहीं दी जाती जानकीर
सरकार की ओर से सूचना के अधिकार की सुविधा जन-जन को प्राप्त है ताकि जीने के अधिकार के साथ -साथ जानने के अधिकार से भी कोई वंचित न रहे, लेकिन सार्वजनिक स्तर की सूचना देने से परहेज व गुरेज बदस्तूर जारी है.

महिला सरपंचो की मजबूरी
महिलाओं के संपत्ति के सशक्तिकरण की दशा में महिलाओं के पचास प्रतिशत आरक्षण की नीति से वहा सचिव धल्ले से चाँदी काट रहे है. जहा महिला सरपंच अनपढ़ है उसका पति भी अनपढ़ व कम जानकारी रखने के करण असहाय है. जो गाँव जितना पिछड़ा है वहा मस्टररोल के फजी कारनामे और पेट की लड़ाई लड़ने वाले की लिस्ट में उनके भी नाम चल रहे है, जो मालदार या मालगुजार कहलाते  है. ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारी कर्मचारी और सरपंच सचिवो की मिलीभगत से बंदरबाट के सिलसिले का क्रम जारी है.

सरपंच -सचिव और उपसरपंच की संपत्ति की जाँच हो
ग्राम पंचायत  के सरपंच सचिव और उप सरपंचो  के पास तक  पद पर आने के पहले नाममात्र की संपत्ति रहती है पर पद पर आने के बाद इनकी गिनती क्षेत्र  के रईस लोगो में होने लगती है. इतनी संपत्ति कहा से आ गई ? जाँच हो तो पता लगेगा की कई सरपंच और सचिव कैसे पांच साल में चार पहिया वाहनों के मालिक बन जाते है, आखिर  कैसे ?

नहीं रुक रहा मजदूरों का पलायन
म न रे गा योजना का मुख्य उद्द्येश्य ग्रामीणों को गाँव में रोजगार देकर बड़े शहरो में पलायन करने से रोकना है लेकिन सरपंच सचिव इस योजना में इस कदर भ्रष्टाचार कर रहे है की मजदूरों को कई-कई महीनो मजदूरी के लिए बाहर मजदूरी करने विवश होना पद रहा है.
शिकायते बनी आय का जरिया
जब भी कोई शिकायतकर्ता सरपंच सचिव उपसरपंच के खिलाफ शिकायत करने जाता है तो सम्बंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी शिकायतकर्ता को कार्यवाही का आश्वासन देकर समझा देता है और उक्त शिकायत को आरोपी से पैसे लेकर रफा-दफा कर देते है.