16 September, 2010

हर साल लौटने पड़ रहे है अठारह करोड़

मध्य प्रदेश में 453  आई सी डी एस परियोजनाए संचालित है. इन परियोजनाओं के माध्यम से ही आगन वाडिया
संचालित होती है. वर्तमान में परियोजना में 3154 पर्यवेक्षक कार्यरत है और अमले पर खर्च होने वाली राशी केंद्र सरकार वहन करती है परन्तु राज्य सरकार उक्त राशी उपयोग करने में असफल है. यही वजह है की हर साल केंद्र को 18 करोड़ लौटाने पड़ रहे है..
प्रदेश में संचालित 74 हजार आगंबाडियो के सञ्चालन की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आई सी डी एस परियोजनाओं को सौपी गई है. 20 से 25 आगंवाडियो पर एक सुपरवाइजर कार्यरत है और प्रदेश में संचालित 453 आई सी डी एस परियोजनाओं के सञ्चालन के लिए केंद्र से प्रत्येक वर्ष लगभग 400 करोड़ की सहायता मुहैया कराई  जाती है. पूर्व में केंद्र द्वारा शत प्रतिशत राशी इनके सञ्चालन पर व्यय की जाती थी लेकिन कुछ वर्षों से केंद्र इस योजना में 90 फ़ीसदी तथा 10 प्रतिशत राशी राज्य के बजट से खर्च होती है. आई सी डी एस परियोजना के सञ्चालन में कार्यरत अमले पर केंद्र से मिलने वाली राशी का भरपूर उपयोग नहीं हो पा  रहा है.
केंद्र की गाइड लाइन के तहत 20 से 25 आगंवाडियो पर एक पर्यवेक्षक सुपरवाइजर की पोस्टिंग होनी चाहिए  और केंद्र से प्रत्येक सुपरवाइजर के लिए 18 से 20  हजार वेतन निर्धारित है लेकिन राज्य सरकार सुपरवाइजर की रेगुलर पोस्टिंग की अपेक्षा संविदा पर रख रही है  सविदा आधार पर अभी तक 1200 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है और इस वर्ष भी लगभग 750 की नियुक्ति की जानी है. यदि रेगुलर सुपरवाइजर की पोस्टिंग की जाती है तो उसे 18 से 20 हजार का वेतन देना पड़ेगा और संविदा पर केवल पांच हजार का वेतन देकर सरकार राशी तो बचा रही है मगर उसे प्रत्येक माह डेढ़ करोड़ यानि हर वर्ष अठारह करोड़ रूपये  केंद्र को लौटने पड़ रहे है.