12 October, 2010

नियम से बाहर नंबर ट्रेफिक नियमो का मखोल

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
शहर में कानून व्यस्था नाम की कोई चीज ही नहीं बची है. वाहन चालक सरेआम ट्रेफिक नियमो को मुह चिढाते नजर आ रहे है लेकिन किसी की मजाल है की उन्हें रोक ले. लोगो ने दो पहिया से लेकर चार पहिया वाहनों पर मनमाने ढंग से नंबर प्लेटे लगवा रखी है. ऐसे वाहन दिनभर शहर में दौड़ते रहते है, पर उन्हें रोककर कोई पूछने वाला तक नहीं मिलता. ट्रेफिक पुलिस को अपनी जेब भरने से ही फुर्सत नहीं मिलती.


शहर में देखा जाए तो रजिस्टर्ड  वाहनों की संख्या हजारो में है. इनमे से कई वाहन चालक ऐसे है जिन्होंने अपने वाहनों पर गलत ढंग से नंबर लिखवा लिए है और शहर में बेख़ौफ़ घूम रहे है. ऐसे चालको पर चेकिंग  के दौरान ही कार्यवाही करते हुए यातायात पुलिस नजर आती है. वही, परिवहन विभाग तो इस ओर ध्यान देने की भी जहमत नहीं नहीं उठाता. विभाग तो नंबर देकर भूल जाता है

नियमो की अनदेखी
शहर में दौड़ने वाले दुपहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन चालको द्वारा  अलग-अलग  तरीके से नंबर प्लेट पर नंबर लिखवाये जाते है. जो देखने में तो आकर्षक लगते है लेकिन  नियमो के अनुसार यह गलत है. कई वाहन स्वामियों द्वारा इसका मखोल बनाया जा रहा है, कई वाहनों पर गलत तरीके से लिखी नंबर प्लेट  लगी देखी जा सकती है. जिस पर यातायात पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है. जिसके चलते चालको द्वारा नियमो की अनदेखी करते हुए वाहनों पर गलत तरीके से नंबर प्लेट पर नम्बरों से लिखवा लिया जाता है.

क्या है नियम
केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 की धारा 50 के तहत दिया गया है की दोपहिया, चार पहिया व अन्य वाहनों पर किस आकर प्रकार में नंबर लिखवाना चाहिए. वही केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 177 के अंतर्गत प्लेट पर गलत तरीके से नम्बरों को लिखवाए जाने पर चालानी कार्यवाही की जाती है.

विभाग में होता है नम्बरों का खेल
अधिकतर  वाहन स्वामियों को अपने वाहनों पर अच्छे नंबर लिखे होने की लालसा होती है. इसके लिए वह परिवहन विभाग में अच्छे नम्बरों  को देने वाले को ढूढ़ते है इस खेल  में नेता भी पीछे नहीं है. विभाग के लोगो की माने तो कुछ दिन छोड़कर कोई न कोई व्यक्ति किसी न किसी नेता की या बड़े आदमी की सिफारिश लेकर आ जाता है और कहता है की विशेष या कहे तो व्ही आई पी नंबर चाहिए.
प्लेट बनाने वाले की मौज
नाम न बताने की शर्त पर प्लेट पर नंबर लिखने वाले ने बताया की रोजाना कई दोपहिया वाहन लेकर ग्राहक आते है जो अपने वाहन पर अलग  तरीके से नंबर लिखवाते है. किसी को मोटे अक्षर में लिखवाना रहता है तो किसी को कोई नंबर छोटे आकर में लिखवाना पसंद आता है, कुछ को तो नम्बरों में उभरे हुए तरीके से लिखवाया जाता है. इसके अलावा कुछ ग्राहकों  द्वारा विशेष नंबर प्लेटे भी बनवाई जाती है. कुछ ग्राहकों द्वारा नंबर प्लेटो पर लाईटे भी लगवाई जाती है. इन नंबर प्लेटो की कीमते भी अलग-अलग होती है. साधारण से विशेष नंबर प्लेटो की कीमत दो सौ रूपये से लेकर पंद्रह सौ रूपये होती है, वही चार पहिया वाहनों पर इन प्लेटो के दाम बढ़ जाते है.

हिंदी में लिखना भी गलत
यातायात विभाग की माने तो नंबर प्लेटो पर हिंदी में भी नंबर लिखवाना नियमो के विरुद्ध है, वाहनों की नंबर प्लेट पर वाहन चालको द्वारा अपना नाम या इस तरह  का कुछ लिखवाना भी गलत है. इसके अलावा देवी देवताओं के नाम चित्र भी नंबर प्लेट पर अंकित कराना नियम विरुद्ध है.

विभाग नहीं दिखा रहा सक्रियता
शहर में दौड़ने वाले वाहनों पर गलत तरीके से लिखे नम्बरों के  खिलाफ परिवहन विभाग द्वारा कोई सक्रियता नहीं दिखाई जाती है और न ही कोई विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाता है. विभाग द्वारा जो अभियान चलाया जाता है उसमे भी बढे वाहनों के कागजात और परमिट, बीमा, फिटनेस की जाँच की जाती है, लेकिन नंबर प्लेटो पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है.