19 October, 2010

महीनो बाद भी पूरी नहीं मिलती पेंसन


अखिलेश  उपाध्याय / कटनी
महीनो बीत जाने के बाद भी पेंसन की राशी पूरी नसीब नहीं होती. जितनी होती ही उसके लिए भी सुबह से शाम तक बैंक में खड़े रहना पड़ता है. यह कहना है उन बुजुर्ग और असहायों का जो सरकार की विभिन्न पेंसन योजनाओं के तहत अपने अधिकारों के लिए हैरान परेशान है. इन थके हरे लोगो में अब इतनी कुब्बत भे नहीं बची की अपनी आवाज उठा सके. आगे शिकायत करने कहा और किसके पास जाना है ? इसका भी इन्हें कोई अत पता नहीं. लिहाजा ये जब भी जितना पैसा मिलता है उसी में मन मसोसकर रहा जाते है. 

क्या कहते है बुजुर्ग
किसी  महीने दो सौ रूपये पकड़ा दिए जाए है तो किसी मही सौ रूपये ही दिए जाते है. हर महीने पैसे दिए भी नहीं जाते. कभे कम्पुटर ख़राब होने का बहन बनाकर भगा दिया जाता है. गाँव के पोस्ट आफिस में बैठे पोस्टमास्टर पांच से दस रूपये प्रति भुगतान पर लेते है. दो-दो तीन-तीन महीने बाद पैसा मिलता है. पासबुक में जितना लिखा होता है उतना नहीं दिया जाता. 

कितना होना चाहिए भुगतान
सामाजिक सुरक्षा पेंसन १५० रूपये प्रति माह
निःशक्त पेंसन योजना १५० रूपये प्रति माह
विधवा पेंसन योजना १५० रूपये प्रति माह
विधवा पेंसन (दितीय ) २०० रूपये प्रति माह
वृद्धावस्था पेंसन २७५ रूपये प्रति माह

यह  हो रहा है
भुगतान के लिए कोई तारिख तय नहीं
बन्हने बनाकर चलता कर दिया जाता है
पासबुक में महीनो तक एंट्री नहीं होती
बैंककर्मी दन्त फटकार करते है
हर माह भुगतान नहीं किया जाता
पेंसन धरी आगे शिकायत नहीं कर पाते
दिन  भर भूखे प्यासे खड़े रहते है
जितनी एंट्री उतना भुगतान नहीं होता