20 October, 2010

कहा गायब हो गए नियम और कायदे कानून...

बिना हवा और पानी के चल रहे पेट्रोल पम्प
अखिलेश उपाध्याय
कटनी/ जिला मुख्यालय सहित जिले भर में सभी पेट्रोल पम्प के सञ्चालन में भारत पेट्रोलियम और इंडियन आयल ने जो शर्ते रखी थी उनका पालन जिले में न के बराबर पेट्रो पम्पसंचालक कर रहे है. हैरत की बात है की सम्बंधित विभाग इस मामले में क्यों कोई कार्यवाही नहीं कर रहा जिससे वाहन संचालको को आवश्यकता पड़ने पर दिक्कतों का सामना करते हुए अपनी जेब हलकी करने मजबूर होना पड़ रहा है.
पेट्रोल पम्प के विषय में जानकारों का कहना है की किसी भी स्थान पर पेट्रोल पम्प के संचालक से पूर्व खाद्य विभाग, नापतौल विभाग और सम्बंधित कंपनी द्वारा शासन के नियमानुसार एक नियमावली तैयार की जाती है इन शर्तो के पालन के बाद भी किसी स्थान पर पेट्रोल पम्प संचालित होते है लेकिन देखने में आ रहा है की  जिले में इक्का दुक्का पेट्रोल पम्प को यदि छोड़ दिया  जाए तो कोई भी पेट्रोल पम्प संचालक इन नियमो का पालन नहीं कर रहा है. इसके बावजूद भी इससे सम्बंधित विभाग कार्यवाही से कोसो दूर नजर आ रहे है.

तीन  माह में होती जाँच
नियमानुसार खाद्य विभाग द्वारा प्रत्येक तीन माह के दौरान जिले के पेट्रोल पम्पो पर सेम्पलिंग की जाती है इस दौरान यदि किसी पट्रोल पम्प पर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाती है लेकिन क्या हकीकत में विभाग अपने इस कर्त्तव्य का द्रध्तापूर्वक पालन कर रहे है. जबकि शहर में ही करीब एक दर्जन पेट्रोल  पम्प संचालित है जो नियम को ताक पर रख संचालित किये जा रहे है.

नापतौल विभाग  बेफिक्र
पेट्रोल पम्पो पर मिलने वाले डीजल, पेट्रोल के मानको एवं सही नापतौल की जाँच के लिए नापतौल विभाग को एक निश्चित समयावधि के दौरान जाँच करनी होती है लेकिन शायद विभाग इसमें उदासीन भाव दिखाता  है. उपभोक्ताओं के वाहनों में कितना  डीजल और पेट्रोल पम्प से भरा जा रहा है यह मात्र मीटर देखकर ही महसूस किया जा सकता है. पेट्रोल पम्प से कम पेट्रोल एवं डीजल देने की आये दिन घटनाएं सामने आती है बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं होती है.

वाहनों पर फूटता ठीकरा
आम इंसान अपनी गाढ़ी कमाई से वाहनों में ईधन भरवाने के लिए पेट्रोल पम्प पर तो पहुचता है लेकिन उसकी गाडी उतना माइलेज नहीं देती है  जितने  के विषय में प्रचारित किया जाता है. वाहन संचालक भी पेट्रोल पम्प पर विवाद करने के बजाय स्वयं की गाडी का रख रखाव  सही नहीं होने का ठीकरा फोड़ते हुए चुपचाप जितना पम्प से ईधन दिया जाता है उसके अनुसार मिलने वाले माइलेज से ही संतुष्ट हो जाता है. वैसे भी लोगो की सोच  यह रहती है की जरा-जरा सी बातो के लिए अब क्या विवाद करना. कई लोग जल्दबाजी के चलते भी बहस आदि में समय गावाना फिजूल समझते है. इसी का फायदा पेट्रोल पम्प संचालक उठाते है.

न हवा है न पानी और न छाया
शहर के अधिकांस पेट्रोल पम्प ऐसे है जहा निःशुल्क हवा पानी की व्यस्था ही नहीं है जबकि जानकारों का कहना है की इंडियन  आयल एवं भारत पेट्रोलियम के जितने भी पम्प है उन्हें वाहन चालको  एवं संचालको के लिए हवा और पानी की पर्याप्त व्यस्था करना आवश्यक है लेकिन नियमो का कही भी पालन होता नजर  नहीं आ रहा है. पानी की तो उतनी जरूरत नहीं पड़ती मगर हवा की और छाया की जरूरत तो जरूर पड़ती है पर हर पेट्रोल पम्प पर हवा के उपकरण अक्सर खराब ही रहते है. कभी बिजली नहीं होने का तो कभी अन्य कोई कारण बता कर पीछा छुड़ा लिया जाता है.

क्या  कहते है वाहन चालक
पेट्रोल पम्प से वाहन की टंकी में कितना पेट्रोल दिया  जा रहा है यह प्रमाडित ही नहीं होता है. बस मीटर देखकर ही संतुष्टि कर ली जाती है की जितने पैसे दिए है उतना पेट्रोल मिल गया है. 
- याजुवेंद्र सिंह राजपूत, रीठी
सब काम अंदाज पर चलता है. मेरे द्वारा एक बार कम पेट्रोल दिए  जाने का विरोध करने पर पम्प कर्मचारियों द्वारा पुनः मशीन खराब होने का हवाला देकर पेट्रोल दे दिया गया था. ऐसे भी बहुत से उपभोक्ता है जो विरोध नहीं करते
- जीतेन्द्र यादव, कटनी
जिले के पेट्रोल पम्पो की हालत यह है की यहाँ पर न तो शौचालय है और न ही पीने के पानी और टायरो में हवा भराने की व्यस्था है. सम्बंधित विभाग को समय-समय पर नागरिको के हित में निरिक्षण करना चाहिए
- सुरेश सकवार, जिला पंचायत सदस्य कटनी 
पेट्रोलियम कंपनी की गाइड लाइन में प्रत्येक पेट्रोल पम्प संचालक को शौचालय हवा, पानी और छाया की व्यस्था करने के साथ-साथ अग्निशमन यन्त्र भी लगाना आवश्यक है लेकिन नियमो का पालन कही होता नजर नहीं आता है.
- हरिशंकर दुबे, कटनी