25 October, 2010

चाँद के दीदार का रहेगा इन्तजार

पति की दीर्घायु का महत्वपूर्ण करवा चौथ व्रत आज मनेगा. महिलाए निर्जला रहकर चाँद के दीदार का इन्तजार करेगी. इसके पूर्व करवा चौथ के व्रत को लेकर महिलाओं में खासा उत्सास देखने को मिला. बाजार में महिलाए परिधान सहित आभूशनो   की खरीदारी करती दिखी.

दुकानों में रही रौनक
करवा चौथ के मौके पर हर पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत का पालन पूरे विधि विधान से करती है. इसलिए बाजार में वे मनपसंद कपडे व ज्वेलरी खरीदती देखी गई. दुकानों पर साड़ियो की मांग सर्वाधिक रही. वही कलात्मक  ज्वेलरी व् चूडिया  भी महिलाओं की पहली पसंद रही. साडी की मेचिंग ज्वेलरी की मांग अधिक देखी गई. कांच व डिजाईनर  चूड़िया बहुतायत में खरीदी गई. महिलाओं ने व्रत की तयारी के लिए अपने हाथो में मेहँदी लगवाई. दिन भर बाजार में रौनक रही वही ब्यूटी पार्लर भी भीड़ से खचाखच देखे गए. महिलाओं ने अपनी पसंद के अनुसार पार्लर में जाकर तयारी की शायद ऐसा लग रहा है की महिलाए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.  

ऐसे करे पूजा
करवा चौत के दिन भगवान् शिव माता पारवती भगवान् कार्तिक, चन्द्रमा देव  और भैरो देव की पूजा की जाती है. सर्वप्रथम सुबह पूजा कर पति के चरण  स्पर्श कर व्रत को आरम्भ करे. व्रत के लिए मिटटी के कलश जिसे करवा कहते है उसके ऊपर दीपक जलाए. उसके बाद घर के आगन में गोबर से पूजा का स्थान लीप कर आटे से चौक बना ले. जेसमे  एक चौक करबा माता का तथा दूसरा अपना  बनाए उसके ऊपर करबा को रखे. करबा से कांसो को लगाए. भगवानको नारियल, जनेऊ, खोवा, हल्दी, सिन्दूर, कांच की चूडिया, टिकली, चावल, फूल, बेल्पती, धुप दीप नैवेध्य अर्पण  करे. उसके बाद आटे व खोवे के तेरह लड्डू चढ़ाये. पूजन स्थल पर पीपल की डाल अवश्य रखे या डाल न मिलने पर मिटटी से पीपल के वृक्ष की आकृति बना ले. चन्द्रमा के निकलने पर चलनी से चंद्रमा के दर्शन करे तथा उसके बाद अपने पति को उसी चलनी से देखे. उसके बाद भगवान चंद्रमा की पूजा करे व पति की भी आरती उतारे. अंत में करवा माता कलश से सात बार फेरे लगाते हुए कलश की जगह बदले. उसके बाद पति के चरण  स्पर्श कारे पति को अपने पत्नी का मीठे  पकवान व पानी पिला कर पारण  करना चाहिए. इस तरह यह व्रत पूरा हो जाता है. करवा माता की कहानी भी अवश्य सुने. सुहागन स्त्रियों को सास को वस्त्र, फल फूल दान करना चाहिए. ऐसे न करने से व्रत अधूरा माना जाता है. सास व ससुर के चरण स्पर्श अवश्य करे क्योकि  सुहागन के परमेश्वर सास ससुर के पुत्र है जो पूज्यनीय होते है.