27 October, 2010

दिवाली पर कबाडियो की बल्ले-बल्ले

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
दिवाली का त्यौहार आते ही कबाडियो का धंधा क्रमशः गति पकड़ने लगा है. इन दिनों व्यर्थ घरो से निकला लोहा-लंगड़ एवं अन्य रद्दी सामन  खरीदने के लिए कबाड़ी शहरों, कस्बो, गांवो की गालिओ में फेरी लगाते दिखने लगे है. ज्यो-ज्यो दिवाली नजदीक आती जाएगी कबाडियो का व्यापार तेजी पकड़ता जाएगा.

शहर में छोटी- बड़ी मिलाकर करीब डेढ़ सैकड़ा दुकाने है जहा कबाड़े का जमकर  व्यापार होता है. शहर में करीब सौ लोग है जो कबाड़ के व्यापार से अपना पेट पालते है. दीपावली के त्यौहार पर साफ़-सफाई की जाती है और इन घरो से निकलने वाले कबाड़ को यह कबाड़ी घर-घर जाकर खरीद रहे है. सुबह से लेकर शाम तक इनका हाँथ ठेला शहर में घूमता रहता है. जो लोगो से कबाड़ खरीदकर उन्हें सामान के दाम चुकाते है. बस स्टैंड में थोक का व्यवसाय करने वाले रिंकू कबाड़ी बताते है की इस समय कई कबाडियों की दुकाने तो अच्छी चल रही है लेकिन कुछ दूकानदार निराश है. अभी यह धंधा मंदा चल रहा है, एक दूकानदार के पास तीन दिन में करीब एक ट्रक कबाड़ एकत्र हो रहा है. जबकि दिवाली के तीन चार दिन पहले एक दिन में दो ट्रक कबाड़ा एकत्र हो जाता है. मंदी का एक कारण यह भी है की अभी कई घरो में साफ़ सफाई का काम शुरू ही नहीं हुआ है. लोग दिवाली के चार दिनों पहले से सफाई करते  है इसके साथ ही कई लोगो को अभी तनख्वाह भी नहीं मिली है जिससे वे घरो की साफ़-सफाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे है.

कहाँ  जाता है कबाड़
यह कबाड़ का सामान अधिकतर इन्दोर, मंडीदीप भोपाल, जबलपुर आदि में पहुचाया जाता है, कबाडियो के मुताबिक दीपावली के समय एक दूकानदार करीब तीन ट्रक कबाड़ इन मंडियों  में भिजवाता है. जबकि बगैर सीजन के एक सप्ताह में एक ट्रक बड़ी मुश्किल से माल हो पाता है. उल्लेखनीय है की शहर में ऐसे कई गरीब वर्ग के युवक व बच्चे है जो कबाड़े का व्यवसाय कर अपना रोजगार चलाते है, कबाड़ी सरकू भाईजान बताते है की एक दिन में सौ पचास रूपये मिल जाते है. इस काम में जो जितनी मेहनत करता है उसे उतना दाम मिलता है.

कबाड़ के भाव
लोहा                     12 से 16 रूपये किलो
प्लास्टिक               12 से 14 रूपये किलो
रद्दी                       4 से 6 रूपये किलो
मसाला प्लास्टिक    4 से 5 रूपये किलो