31 October, 2010

कटौती ने बदली दिनचर्या

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
दीपावली का त्यौहार नजदीक आने के बावजूद विद्युत् कटौती  में कोई रियायत नहीं दी जा रही है. बिजली कटौती ने आम आदमी की दिनचर्या को बिलकुल बदल दिया है. गृहणियो   के चौके चूल्हे, बच्चो के शौक और वयस्कों के काम करने का तरीका बिलकुल बदल गया है. वही शहर में चोरियों की घटनाएं भी काफी बढ़ गई है. इस तरह लोगो को दिन में कामकाज और रात्रि में घर की रखवाली पर ध्यान देना पड़ रहा है.
विद्युत् वितरण कंपनी ने क्षेत्र में बिजली कटौती का जो समय निर्धारित किया है उसका शहरी जन जीवन पर व्यापक  असर पड़ा है. वर्तमान  में विद्युत् विभाग द्वारा तहसील क्षेत्रो में सुबह तीन से छेह, दोपहर बारह से शाम छेह तक और रात्रि नो से बारह बजे तक घोषित कटौती की जाती है. इसके अलावा अघोषित विद्युत् कटौती किसी भी समय कर ली जाती है, जिसे लोगो में कुछ समय तक तो आक्रोश का माहौल बना रहा लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा अनसुनी किये जाने और राजनैतिक दलों के मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते हुए जनता की सुनवाई न होने से अब धीरे-धीरे लोगो ने अपने आप को कटौती के अनुसार ढालना आरम्भ कर दिया है. वर्तमान में विद्युत् कटौती के समबन्ध में लोगो से चर्चा करने पर कुछ इस प्रकार तस्वीर उभरी-
बहुत साल से बिजली के प्रकाश में रहते-रहते हम उसके आदि हो गए है अब बिजली कटौती के समय विद्युत् विभाग को ताने देने से अच्छा है पार्क में सैर करने निकल जाते है. घर के काम में परेशानी तो है पर क्या करे सब कुछ बिजली विभाग  पर निर्भर है
- निर्मला पण्डे, समाज सेविका
शाम की कटौती से पहले मेरे पति को घर आकर बच्चो को घुमाने ले जाना पड़ता है. जिससे बच्चे खुश रह सके. घोषित कटौती के कारण उजियारे में घर का खाना भी जल्दी तैयार करना पड़ता है. हमें खुद को बिजली कटौती के अनुसार ढालना शुरू कर दिया है, क्योकि हमें मालूम है की बिजली विभाग को कोसने से कुछ नहीं होने वाला अपनी पुरानी दिनचर्या को ही बदलना होगा
 - मनोरमा सिंह, शिक्षिका
परिवार में अब बिजली कटौती ने बच्चो के शौक बदल दिए है पहले घर के बच्चे टीवी के सामने बैठे कार्टून चैनल देखा करते थे लेकिन अब मोहल्ले के बच्चो के साथ खेलने में समय बिताते है. इन बच्चो ने खुद को बिजली कटौती  भुलाने का बहाना  ढूढ़ लिया है. लेकिन यह स्थाई नहीं है. - श्रीमती अंजना डेविड केमोर
हमारे घर पर तो इनवर्टर है इसीलिए घर में ज्यादा परेशानी नहीं आती लेकिन हास्पिटल में मरीजो को जरूर परेशानी होती है जब  प्रदेश शासन बिजली देने असमर्थ है तो हम क्या कर सकते है इसलिए समय के अनुसार खुद को ढाल लिया है.
- डाक्टर श्रीमती राकेश रंजन , कटनी
विद्युत् विभाग द्वारा बिजली की कटौती के चलते दिनचर्या बिलकुल बदल गई है. घर गृहस्थी  का काम प्रभावित हुआ है. शाम के वक्त जब लाईट नहीं रहती तो बच्चो का मन बहलाने के लिए बच्चो के साथ खेलना पड़ता है तथा दिन में अपने काम निपटा लेती हूँ
-  श्रीमती दिव्या पटेल, बहोरिबंद