15 October, 2010

त्योहारों के मौसम में कालाबाजारी

अखिलेश उपाध्याय
कटनी
जिले में शासकीय राशन वितरण केन्द्रों की मनमानी से गरीबो को राशन नहीं मिल रहा है. उनके हिस्से की खाद्य सामग्री की कालाबाजारी हो रही है. त्योहारों के मौसम को देखते हुए लगभग सभी राशन दुकान संचालक गरीबो को कम राशन  का वितरण कर रहे है. इसके पीछे वजह कम आवंटन होने की बात कर रहे  है.
दीपावली और दशहरा तथा कई और पर्वो के नजदीक आते ही शहर के सभी कंट्रोल संचालक गेंहू , चावल, केरोसिन शक्कर का कोटा बी पी एल एवं अति गरीबी कार्डधारियो को न देकर उसे खुले बाजार में बेच देते है, खास बात यह है की यह घालमेल खाद्य निरीक्षको की जानकारी में होता है. निरीक्षक सिर्फ उस पर ही कार्यवाही करते है जो उनके बनाए नियम से काम नहीं करते.
ऐसे होती है कालाबाजारी
बी पी एल और ऐ पी एल का सस्ता राशन पहले स्टाक कम बाटकर स्टाक करना और बाद में उसको बेच देना.. किसी दुकान से एक ट्रक गेहू गायब ओ जाता है तो किसी दुकान से पांच दस क्विंटल शक्कर या चावल. जाँच में लीपापोती कर दी जाती है. ग्रामीण अंचलो में दो महीने में एक बार राशन और केरोसिन वितरित किया जाता   है. इसी प्रकार पुराने स्टाक की जानकारी दिए बगैर नया आवंटन मिल जाता है. बगैर निरीक्षको की जानकारी के ऐसा होना संभव नहीं है.
अभी ठंडी  पड़ी मुहिम
वर्तमान में खाद्य विभाग ने राशन दुकानों पर कार्यवाई करना तो जैसे छोड़ ही दिया है. जबकि यह सबको अच्छी तरह से मालूम है की  संचालक केरोसिन, शक्कर और गेहू को ब्लेक में बेच रहे है. रजिस्टर में फर्जी एंट्री कर कोटा किसी और को दिया जा रहा है. रीठी में हाल ही में जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ने तो रंगे हाथो केरोसिन में सौ लीटर पानी मिला होना पकड़ा था. लेकिन इस पर अभी तक न तो कलेक्टर, एस डी एम्  और न ही खाद्य अधिकारी ने कोई भी कार्यवाही की है.
इससे साफ़ जाहिर होता है की इस काले कारनामे में सभी लिप्त है.