16 October, 2010

टेक्स पैड बिना खप रहा लाखो रूपये का सामान

अखिलेश उपाध्याय
कटनी
दीपावली के त्यौहार को देख व्यापारियों ने माल का स्टाक शुरू कर दिया है प्रतिदिन बाजार में लाखो का सामान बिना टेक्स पेड़ किये लाया जा रहा है. इस टेक्स चोरी में शहर के तीन दर्जन से अधिक प्लास्टिक  व्यापारी शामिल है. बिना टेक्स पेड़ माल को दशहरे के बाद बाजार में खपाया जाएगा. हर माह करोडो रूपये की प्लास्टिक सामग्री  का व्यापर करने वाले ये प्लास्टिक व्यापारी टेक्स के नाम पर चंद रूपये ही अदा करते है और कारोबार करोडो रूपये का करते है. दीपावली त्यौहार से बढ़ी  प्लास्टिक सामग्री की मांग को देख बाजार में करोडो रूपये का माल टेक्स चोरी कर आ गया है, ये माल दशहरे के बाद बाजार में खपाया जायेगा.
 
इस टेक्स चोरी में न केवल फुटकर विक्रेता शामिल है बल्कि थोक विक्रेता भी है. शहर में हर माह करीब  तीन  करोड़ रूपये की सामग्री का व्यापर होता है. यह प्लास्टिक की सामग्री अधिकांश मात्रा में बाहर से आती है. थोक विक्रेताओं द्वारा बाजार में प्लास्टिक का काम किया जाता है जिसमे दोनों व्यापारियों द्वारा मिलकर टेक्स की चोरी की जा रही है.
सूत्र बताते है की व्यापारियों द्वारा माल तो हजारो रूपये का खरीदा और बेचा जाता है लेकिन कागजो में लिखा पढ़ी सैकड़ो में ही की जाती है इस खेल में हजारो रूपये के टेक्स की चोरी की जाती है. प्लास्टिक की सामग्री का व्यापार करने वाले छोटे-बड़े मिलाकर कुल एक सैकड़ा से अधिक व्यापारी है. इनमे करीब तीन दर्जन वह व्यापारी है जो प्लास्टिक का थोक का काम करते है. थोक व्यापारियो द्वारा बाहर से माल मगाकर शहर में सप्लाई का काम किया जाता है. जानकार सूत्रों के अनुसार इन व्यापारियों ने दीपावली के लिए दरोड़ो रूपये का मॉल मंगा लिया है.
प्लास्टिक की सामग्री का व्यापर शहर के व्यापारियों द्वारा गुजरात के वापी और दमन दीव से किया जाता है. गुजरात में प्लास्टिक  की फेक्टरियो के सी एंड ऍफ़ अधिक संख्या में है वही दमन दीव में फेक्ट्रीय है यहाँ पर सरकार द्वारा उत्पादन शुल्क नहीं लिया जाता है. हालाकि छोटे स्तर पर माल मगाने  का काम आगरा और दिल्ली  से भी किया जाता है.
आखिर कैसे होती है टेक्स  चोरी
गुजरात और दमन दीव से ट्रको द्वारा माल देश भर में सप्लाई किया जाता है. इसमें कंपनियों द्वारा टेक्स चोरी के लिए खरीदार व्यापारी को आधे माल का बिल और शेष माल उसकी साख पर दे दिया जाता है. ऐसे व्यापारी और कंपनिया मिलकर  हजारो रूपये की टेक्स चोरी करती है. वही थोक व्यापारियों द्वारा टेक्स  चोरी के लिए कच्चे पर्चे का सहारा लिया जाता है. व्यापारियों द्वारा फुटकर विक्रेताओं को माल की आधी कीमत का बिल दिया जाता है. फुटकर व्यापारी जितनी राशी का बिल होता है उससे दुगनी कीमत का भुगतान थोक व्यापारी को कर देता है.