19 October, 2010

हाई लिविंग एंड हाई थिंकिंग का चालान बढ़ रहा


अखिलेश उपाध्याय  
जैसे-जैसे समय बदल रहा है वैसे-वैसे लोगो की सोच में परिवर्तन आने लगा है. एक जमाना था जब आम इंसान रोटी, कपडा और मकान के पीछे भागते-भागते पूरी जिन्दगी जद्दोजहद करता था लेकिन फिर भी मकान का सपना पूरा नहीं हो पता था लेकिन बदलते परिवेश में अब तीनो के अलावा भी लोग दिखावे और जरूरत के लिए नए-नए शौक पूरे करने में भी पीछे नहीं हट रहे है. यही कारण है की अब हिन्दुस्तानियों  के रहन-सहन में तेजी से बदलाव आने लगा है.


चकाचौध ने किया प्रभावित
इंसान  भी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ती के अलावा उन चीजो का उपयोग भी करता है जो उसके लिए व्यक्तिगत रूप से जरूरी नहीं है लेकिन वह समाज के लोगो से बराबरी करने के लिए करता है. बुद्धिजीवी बर्ग का कहना है की आम इंसान को भी दुनिया की चकाचौध ने प्रभावित किया है. वह उन बड़े इंसानों की तरह रहना चाहता है जो उनके लिए आदर्श है या जो समाज में लोगो के लिए एक ब्रांड है उनके रहन-सहन से प्रभावित होकर उन्ही की तरह  रहना चाहता है.


प्रचार प्रसार से आय बदलाव
कुछ लोग इसका एक अन्य मुख्य कारण टेलीविसन  को भी मानते है लोगो का कहना है की टीवी ने जहा आज घर-घर में आम वस्तुओ को भी उपयोग करने के लिए बड़े रूप में दिखा कर प्रस्तुत किया है जिससे आम इंसान मानसिक रूप से प्रभावित हुआ है. वही बैंक सेक्टरो द्वारा दिए जा रहे हर कार्य के लिए ऋण ने भी इंसान को अपने शौक की वस्तुओ को खरीदने की राह आसान कर दी है. टेलीविसन में प्रचारित किये जाने वाले विज्ञापनों को देखकर भी लोगो की सोच में ख़ास बदलाव आय है.


सपना नहीं रही कार
करीब डेढ़ दशक पूर्व इंसान के लिए कार खरीदना मुस्किल होता था यह आम व्यक्तिओ के लिए तो एक सपना ही समझी जाती थी लेकिन आज लोग एक से एक लक्जरी गाडिया लोन लेकर खरीद रहे है. इसका मतलब  यह नहीं की वे मात्र  शौक या दिखावे के लिए ही कार या अन्य वस्तुए खरीद रहे है. दरअसल सुविधाओं की प्राप्ति के लिए लोगो के मन में आज के विज्ञापनों ने एक अलग मानसिकता बनाई है.

इनसे हुआ जीवन स्तर में सुधार
आम तौर पर लोगो के लिए अपना जीवन स्तर प्रदर्शित करने के लिए कार और मकान ऐसे साधन है जो उन्हें समाज में एक स्तर प्रदान करते है. वही महगे मोबाईल सेट्स खरीदना हालाकि अब यह अत्यधिक प्रचलित हो जाने के कारण  इनका रुझान कुछ कम हुआ है अब लोग कारो को जल्द से जल्द बदलकर नई कारे लेने  में रूचि रखने लगे है.


दूसरे से अलग दिखने की होड़
वाहनों के नाम पर जहा मात्र  स्कूटर होना बड़ी बात हुआ करती थी कार से यदि कोई इंसान घर पर आता था तो पूरे मोहल्ले वाले पूछते थे की कौन आया था. वही आज बड़ी और महगी कारो से लोग आते है उसके बाद भी किसी को इतना फर्क नहीं पड़ता यह जीवन स्तर में सुधार ही है की आज हर बड़ी चीज आम आदमी की पकड़ में है.
पहले समाज के इक्का दुक्का लोगो के पास कारे हुआ करती थी वही आज हजारो की संख्या में दौडती महगी  कारे यह बताती है की आज हर इंसान अपने आप को दूसरे से अलग दिखाना चाहता है.


मकान भी एक जरिया
पिछले बीस वर्ष की बात करे तो बहुत अधिक कालोनिय बनी है और यह प्रक्रिया सतत जारी भी है. आज बैंको के द्वारा होम लोन आसानी से मिल जाने के कारण हर इंसान अपना मकान बनाना चाहता है. पहले जहा लोग पांच से दस लाख के स्वतंत्र बंगले खरीदकर अपने आप को उच्च वर्ग के समझते थे वही अब पच्चीस से पचास लाख तक के मकानों को भी  आम समझा जाता है.


क्या कहते है लोग
पहले मै ज्यादा ध्यान नहीं देता था की कौन क्या खरीद रहा है लेकिन अब लोगो को जब जीवन स्तर में सुधार के लिए तत्पर देखता हूँ तो मेरे मन में भी उनसे लड़ने का ख्याल आता है इसलिए मै भी हर दो तीन वर्ष में कार बदल लेता हूँ
- सुरेश त्रिपाठी, जबलपुर
पहले  जहा घर में लेंडलाइन फोन था जिसका  बिल 250 से 300 रूपये आता था तो पसीना छूट जाता था आज घर में पांच सदस्यों के पास मोबाइल है जिसका खर्च जोड़ा जाए तो एक हजार से अधिक हो जाता है लेकिन कुछ नहीं कर सकते. 
- संतोष पटेल, कटनी
बाजार में आये दिन एक से एक बढ़िया मोबाइल आ रहे है और उनकी कीमअत भी दिनों दिन कम होती जा रही है जिससे हर व्यक्ति मोबाइल का शौक  करने  लगा है ऐसे में अलग मोबाइल दिखने की चाह में बदलना जरूरी हो जाता है.
- सुरेन्द्र सेंगर, ग्वालियर