30 November, 2010

शेर उठा ले गया बच्ची

स्लीमनाबाद से 14 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मढ़ना अंतर्गत आने वाले ग्राम शिवराजपुर में एक सात वर्षीय बच्चो को शेर ने अपना शिकार बना लिया
शाहडार   के जंगल में झाड़ियो के बीच दूसरे दिन सुबह बच्ची की क्षत-विक्षत लाश पाए जाने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. शेर के गाँव आने के बाद शिवराजपुर  सहित आसपास के ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है. हालाकि वन विभाग द्वारा बच्ची पर तेदुए द्वारा हमला किये  जाने की बात कही जा रही है लेकिन परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने शेर को देखा  है

प्राप्त जानकारी के अनुसार कटनी जिले के बहोरिबंद तहसील के शिवराजपुर गाँव  के निवासी श्याम सिंग सोमवार  की शाम बाजार के लिए ग्राम धरवारा  आये थे. रात करीब सात बजे श्यामसिंह  की सात वर्षीय पुत्री अर्चना माँ के कहने पर राख फेकने घर के पिछवाड़े गई थी. वह  वापस लौटकर आ पाती इससे पहले उसके चीखने की जोरो से आवाज सुनकर परिजन दौड़े. परिजनों के अनुसार शेर अर्चना को मुह में दबाकर जंगल की ओर जा रहा था.

रात से ही खोजबीन चालू हो गई. बच्ची की तलाश के लिए  ग्रामीण वन विभाग का पूरा साथ दे रहे थे. बताया जाता है की शिवराजपुर गाँव से एक किलोमीटर दूर शाहडार  के बीहड़ जंगलो में झाड़ियो के भीतर बच्ची की क्षत-विक्षत लाश पड़ी थी. लाश दूसरे दिन सुबह करीब बारह घंटे बाद मिल पाई.

अर्चना की लाश काफी क्षत-विक्षत मिली. शरीर से शिर व बाया हाथ गायब था. जबकि दोनों पैर का मांस नोच लिया गया था. ग्रामीणों के अनुसार सुबह लाश मिलने के बाद स्लिम्नाबाद पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस अपने अंदाज के अनुरूप पांच घंटे बाद दोपहर करीब बारह बजे कागजी कार्रवाई करने पहुची.

शिवराजपुर में शेर की आमद के बाद आसपास के क्षेत्रो के ग्रामीण भी दहशतजदा है. ग्रामीणों का कहना है की  6 माह पूर्व समीपस्थ ग्राम खमतरा में भी तेंदुआ ने हमला कर ग्रामीणों को जख्मी किया था.
शाहडार  का जंगल राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ से लगा है. ग्रामीण क्षेत्रो में अक्सर जंगली जानवर पानी की तलाश में जंगल से भटककर आते है और किसी ग्रामीण के सामने आने पर हमला बोल देते है. ग्रामीणों के बार-बार वन विभाग के ध्यान दिलाने के बाद भी उनके द्वारा सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किये जा रहे है.

29 November, 2010

खुले आम दिन में सबके सामने

प्रदेश सरकार भले ही लोक सेवा गारंटी अधिनियम बनाकर लोक हित का ढिढोरा  पीट रही है लेकिन वास्तविकता तो यह है की भ्रस्टाचार में यदि कोई पिस रहा है तो वह है किसान और गरीब. मजबूरो और गरीबो को ठगने का यह काम कही और नहीं प्रशासन के सामने खुले आम दिन में सबके सामने चल रहा है.

जिला पंजीयक और उपपंजीयक कटनी  के  दफ्तर के  सामने ही स्टाम्प वेंडर दस का स्टाम्प बीस  रूपये में बेच रहे है. कमीशन के इस खेल को देख रहे अधिकारी भी शिकायत आने के इन्तजार में बैठे रहते है.
सोमवार को दिनेश उपाध्याय   को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी निकंलने  के लिए दस रूपये के दो गैर न्यायिक स्टाम्प की आवश्यकता थी. उन्होंने कचहरी परिसर में स्टाम्प विक्रेता से दो स्टाम्प देने को कहा. इस पर स्टाम्प विक्रेता ने उनसे स्टाम्प ख़त्म होने की बात कही. थोड़ी देर भटकने के बाद दिनेश फिर से उसके पास पहुचे तो उन्होंने दस के स्टाम्प के बदले बीस रूपये मांगे. दिनेश ने बीस रूपये में स्टाम्प लेने से मना कर दिया और वह दूसरे वेंडर के पास गए तो वहा भी स्टाम्प न  होने की बात कही गई.
चूकी दिनेश को जल्दबाजी थी इसलिए उन्होंने दस का स्टाम्प बीस में मजबूरन खरीदा. यह किस्सा सिर्फ दिनेश के साथ घाटा हो ऐसा नहीं है बल्कि उनके जैसे सैकड़ो लोग इसी तरह स्टाम्प वेंडरो के द्वारा ठगे जा रहे है. यदि वेंडरो के मौके पर स्टाक रजिस्टर जांचे जाये तो यह बात स्पष्ट हो जाएगी की उनके पास वास्तव में स्टाम्प होते है जो की वे ग्राहकों की कमी की बात बताकर ग्राहक से औने पौने दामो में बेच रहे है.
जिला पंजीयक, उपपंजीयक  कार्यालय द्वारा इस ओर कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती. जबकि जानकर सूत्रों की माने तो जिले में इस समय स्टाम्प की कोई भी कमी नहीं है.
ऐसे में  जो विक्रेता स्टाम्प की कमी बताकर अधिक पैसा वसूल रहे है प्रशासन को  उनकी जाँच करके उनके लायसेंस समाप्त कर  करना चाहिए.
इस विसंगाई के बारे में बिलहरी के विनोद शंकर शर्मा ने बताया की यहाँ आकर तो रोजाना लोग लुटते है. हर दिन हजारो की संख्या में लोगो लो अदालत का काम पड़ता है और यहाँ पर कमीशन और घूस दिए बिना कोई काम नहीं होता. किसी अधिकारी से शिकायत भी करो तो कोई सुनने वाला नहीं है. इसी तरह बहोरिबंद के मनोज तिवारी ने बताया की वकील जैसा कहता है वैसा करना पड़ता है. वकील ने यदि कहा की टिकट लेकर आओ तो लाना ही पड़ता है. अगर यहाँ कीमत से ज्यादा पैसा नहीं दे तो वेंडर बोल देता है स्टाम्प नहीं है. जबकि स्टाम्प विक्रेता स्टाम्प की कमी बताकर जरूरतमंदों से अधिक पैसा वसूलते है. एक स्टाम्प विक्रेता ने बताया की यह  सारा खेल जिला कोषालय से होता है. कोषालय के कर्मचारी हमें समय पर स्टाम्प नहीं देते और कमी का हवाला देने लगते है. जब तक उनको अतिरिक्त कमीशन नहीं दो तब तक वह स्टाम्प नहीं देते. इससमे सब कमीशन का खेल है और भुगतना पड़ता है तो आम आदमी को.

हमें तो सिर्फ आप से पानी चाहिए......

ग्रामीण अंचलो में पहुचे विधायक मोती कश्यप एवं कटनी  कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण से लोगो ने जगह-जगह जो सवाल किये वे कुछ इस प्रकार के थे -
पंचायती व्यस्था में सरपंच सचिव के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाओ....
सरकारी योजनाओं का अनुदान, मजदूरी उनके रिश्तेदारों के नाम हडपी जा रही है.......
बोगस निर्माण कार्य किया जा रहा है आदि आदि...

सिहुड़ी गाँव पहुचते ही गाँव की महिलाओ ने कहा की पिछली बार मुख्यमंत्री बोल गए थे की हमारे गाँव की पानी की समस्या दूर करेगे, बस आप तो हमारी पानी की समस्या भर सुलझा दो......जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों ने निराकरण का आश्वासन दोहराया है.

पानी की समस्या पर शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया. ग्राम दादर सिहुड़ी में महिलाओ ने अपनी समस्या केवल पानी ही बताया. उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री ने अपने दौरे में तो मात्र आश्वासन दिया था और उसके बाद फिर दोबारा किसी ने मुड़कर भी नहीं देखा. हमें तो सिर्फ आप से पानी चाहिए......

ग्राम जिर्री के सैकड़ो मजदूरों ने अपनी शिकायत में कहा की ग्राम के सरपंच एवं सचिव ने वनाधिकार में आदिवासियों के पट्टे मिलने पर सरपंच पति, देवर, जेठ के नाम जोड़े गए एवं रोजगार गारंटी अंतर्गत हाट बाजार समतलीकरण में नब्बे हजार के फर्जी भुगतान एवं कपिलधार के अंतर्गत हितग्राहियों के कुए  पहली बरसात में ही धरासायी हो गए. जिसमे उपयंत्री की मिलीभगत एवं फर्जी भुगतान किया गया है.

28 November, 2010

आर ई एस में मचा भ्रष्टाचार

अखिलेश उपाध्याय
कटनी /  जिले में कहते है कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण  बड़े ईमानदार अधिकारी है फिर भी यहाँ व्याप्त भ्रस्टाचार को रोक पाने में असमर्थ है. एक दक्षिण भारतीय का जिले  में कलेक्टर बनकर आना लोगो को उम्मीद लेकर  आया था की शायद अब उन्हें न्याय मिल पायेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

जिले में कानून और व्यस्था जैसी कोई भी स्थिति नजर नहीं आती. शिकायतों पर यहाँ महीनो बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती.

जिले में चल रहे बड़े निर्माण कार्य इस समय आर ई एस के द्वारा कराये जा रहे है. इन कार्यो  में नियम कायदे दरकिनार कर ठेकेदार मनमानी कर रहे है तथा  इंजिनीअर अपना कमीशन लेकर मौज कर कर रहे है.

ऐसा ही कुछ वाकया जनपद पंचायत रीठी में हाईस्कूल भवन के निर्माण कार्य में हो रहा है.


जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने एक लिखित शिकायत में कलेक्टर को निर्माण कार्य में के जा रही गड़बड़ियो से अवगत कराया उन्होंने अपने पत्र में लिखा  है की बिलहरी में बन रहे हाईस्कूल भवन में ठेकेदार एस के शर्मा एवं आर ई एस के इंजिनीअर द्वारा सिविल इंजिनीअरिंग के नियमो को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है.


बी आर जी ऍफ़ मद से बन रहे तीस लाख की लागत के इस भवन में ठेकेदार और इंजिनीअर लोहे में बड़ा खेल कर रहे है. निम्न स्तर का घटिया तथा कम लोहा लगाया जा रहा है.


ईट, रेट, सरिया  भी घटिया ही लगाईं जा रही है.


जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने कलेक्टर से इस भवन निर्माण में की जा रही अनियमितताओ पर तत्काल रोक लगाने के लिए लिखा है


इस भवन में लगाई जा रही खिड़की तथा दरवाजे भी कम वजन के तथा हलके चद्दर के लोहे का इस्तेमाल के लगाये गए है.

ज्ञात हो की एस के शर्मा नाम का यह ठेकेदार आर ई एस के एक इंजिनीअर का रिशेतेदार है और इसके द्वारा बनायी गई सभी बिल्डिंग घटिया स्तर की बनाई गई है.


रीठी हाईस्कूल प्रांगन में बनाई जा रही बिल्डिंग भी इसी ठेकेदार द्वारा बनाई जा रही जो एक जाँच का विषय है.

27 November, 2010

भारत के प्रधानमंती या पराधीन मंत्री..........?

जब शिक्षिका ने छात्रो को जूतों की माला पहनाई

कटनी / शहर के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका द्वारा छात्रो को जूते चप्पलो की माला पहनाने और उन्हें जूते सूघने की सजा देने का आरोप जाँच में सही पाया गया है.

दो सदस्यीय दीम द्वारा जाँच के बाद सौपी गई रिपोर्ट के आधार  पर जिला शिक्षा अधिकारी शशिबाला झा ने शनिवार को दोषी शिक्षिका को निलंबित करने के आदेश जारी किये गए . यह घटना तीन दिन पहले खिरहनी फाटक के पास  स्थित निषाद स्कूल में हुई थी.

जिसमे प्राथमिक शाला की प्रधानाध्यापिका अनुसुईया गौड़ ने बच्चो  को चप्पल जूते कक्षा  से बाहर न उतारने पर यह सजा सुनाई थी. इस कृत्य  से प्रताड़ित लगभग एक दर्जन छात्रो ने इसकी शिकायत अभिभावकों  से की थी. जिसके बाद स्कूल में जमकर हंगामा भी हुआ था.
पीड़ित  छात्र माया निषाद, शालू दुबे व अन्य ने बताया की पहले उन्हें चप्पल सूघने के लिए कहा गया और बाद में चप्पल की माला गले में पहनाई गई. जबकि दोषी पाई  गई प्रधानाध्यापिका ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

एक तरफ शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने के लिए करोडो रूपये खर्च कर रही है दूसरी तरफ ऐसे चंद शिक्षक बच्चो को शिक्षा से दूर कर शाला त्यागी बनाने की कोशिश में जुटे हुए है. इस बाकये ने पूरे शिक्षा विभाग को शर्मसार किया है.

26 November, 2010

घोड़े की सवारी व शहनाई की गूँज हुई महँगी

देवउठनी ग्यारस के कुछ दिनों के बाद ही अब शादी विवाह धूम धाम से होने लगे है लेकिन इस साल शादी में धूम धड़का पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार डेढ़ गुना महगा हो गया है. चाहे शादी में डी जे या बंदबाजो   की बात या खाने-पीने  की या फिर मैरिज धर्मशाला के किराये की.

इस बार महगाई का चारो तरफ बोलबाला है. वर और वधु पक्ष दोनों की जेब पर पिछले दिनों बढ़ी महगाई के कारण अतिरिक्त बोझ बाद  गया है. पिछले कुछ माह से लगातार बढ़  रही महगाई की मार अब उन लोगो को सहन करनी पड़ रही है जिनके बेटा -बेटी की शादी होने जा रही है. वो लोग भी महगाई की मार से पीड़ित दिख रहे है क्योकि शादी विवाह के अवसर पर अपने यार दोस्तों रिश्तेदारों के लिए भोजन का निमंत्रण देते है लेकिन पिछले वर्ष की अपेक्षा  इस बार दावत में उपयोग होने वाली सामग्री के भाव आसमान छू रहे है. शादी समारोह में खाना बनाने वाले हलवाई का कहना है की शक्कर, आटा, दाल, सब्जी आदि महगे दामो पर खरीदना पड़ेगा इसलिए पहले से तय रेट का कोई मतलब नहीं रह गया है.

शादी के कार्ड्स की कीमत इस साल पंद्रह प्रतिशत तक बढ़ी  है. इस बार बाजार में सामान्य श्रेणी में तीन से लेकर साठ रूपये तक के कार्ड उपलब्द्ध है. ग्राहकों की मांग पर भी महगे कार्डो की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन कार्डो की महगाई का असर फ़िलहाल कतई दिखाई नहीं दे रहा है. शादी विवाह के निमंत्रण को देने के लिए मजबूरी में लोगो को कार्डो को छपवाना पड़ रहा है. बगैर कार्ड के  किसी को भी मुह जुबानी दावत देना कुछ लोग अच्छा नहीं समझते है. वही प्रिंटिंग प्रेस के संचालक  संजय तिवारी ने बताया की बढती महगाई से कार्डो में कोई ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है बल्कि कुछ लोग हलकी क्वालिटी के कार्ड छपवा रहे है.
लडको की शादी हो और घोड़े और बैंडबाजे न हो तो कुछ अजीब सा लगता है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बैंडबाजो के साथ-साथ घोड़े वालो ने भी बढती महगाई को देखकर अपने भी दाम बढ़ा दिए है जो पहले पाच सौ रूपये से लेकर एक हजार रूपये में होते  थे वे एक से तीन हजार रूपये मात्र दो घंटे   के लिए मनमाने दाम लिए  जा रहे है कीमतों का असर डी जे बैंडो पर भी पड़ा है जहा बैंडबाजे पांच हजार में हा जाया करते  थे आज वह पंद्रह से बीस हजार रूपये में भी नहीं हो रहे है.

दिन प्रतिदिन बढती महगाई ने विवाह समारोह का बजट बिगाड़ दिया है. बैंडबाजो से लेकर घोड़े की सवारी, रोड लाईट, दीजे तक के भाव दिनोदिन बढ़ते जा रहे है. इसके कारण शादी में होने वाले  खर्च  पिछले साल के मुकाबले बीस फीसदी तक बढ़ चुका है. महगाई ने शादी की तैयारियों में जुटे लोगो को बजट बिगड़ दिया है.

तेजी से रफ़्तार पकड़ रहा अंको का खेल

कटनी / शहर में इन दिनों एक साथ सट्टा और सटोरियों की बाढ़  सी आई दिखाई देने लगी है. एक विशेष विभाग की रजामंदी से चल रहे इस अवैध कारोबार से कई घर चौपट  होने की कगार पर पहुच गए है. वही हफ्ते  के चंद लाभ के चलते कुछ तयशुदा लोग और सटोरिये  जमकर माल बनाने में लगे है. पुलिस की निष्क्रियता के चलते पिछले कुछ दिनों से सट्टा कारोबार बढ़ गया है.
रोज दोपहर तीन बजे और पांच बजे शहर के कुछ प्रमुख चौराहे और तय स्थानों पर अचानक लोगो की आवाजाही और हलचल  आजकल सामान्य दिनों  की अपेक्षा अधिक दिखाई देने लगी है आम लोगो की बात छोड़ दे तो इस भीड़ में शामिल सभी की निगाहे अपने मोबाईल और एक विशेष व्यक्ति को खोजती नजर आती है.
और थोड़ी ही देर हाथो की अगुलिया और आख के इशारे से सांकेतिक सूचना प्रदान करते हुए आते एक खास व्यक्ति के गुजर जाने के बाद फिर दो घंटे  के लिए जनजीवन सामान्य हो जाता है और यह क्रम प्रतिदिन सुबह  से लेकर शाम तक चार शिफ्टो में चलता है. जिसमे रात की अपेक्षा दिन में चहल-पहल खासी तादात में रहती है क्योकि इसमें एक बड़ा धडा ग्रामीण क्षेत्रो  से आये लोगो की भागीदारी से भी होता है. और रात्रि  में यह कारोबार अधिकांशतः मोबाईल नेटवर्क के मध्यम से संचालित हो रहा है.
सैया  भये कोतवाल की तर्ज पर सट्टे में लगे सटोरियों और इनके दलालों के मध्यम से यह लाखो का व्यापार खुलेआम बेख़ौफ़ होकर चल रहा है. इस कारोबार से जुड़े सैकड़ो लोगो के तंत्र के अलावा शहर का आम आदमी इस बात को जानता है की कौन से लोग किन स्थानों पर कमीशन पर काम कर रहे है और मातहतो के माध्यम से इसको संचालित करवा रहे है. पुलिस के आला अधिकारी से लेकर अंतिम दर्जे तक के सिपाही भी दिन में वारी-वारी से नगर में गुजरते है लेकिन इस काम में लगे लोग इसकी निगाहों से ओझल रहते  है और इनके गुजरने के दौरान यह लोग  देखने दिखाने के लिए  सामने से दाये-बाये हो जाते है जिसके बदले प्रत्येक शनिवार तय राशी तयशुदा स्थान पर निश्चित व्यक्ति के मध्यम से पहुच जाती है.
अल सवेरे से ही शहर के कुछ तय स्थानों पर इन सटोरियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता रहता है. वही इस धंधे से जुड़े दलालों और पुलिस के जबानो की सार्वजानिक जुगलबंदी और मित्रता  भी आमजन में जगजाहिर है. सामाजिक बुराई और समाज की रक्षा  के लिए खड़े दोनों पक्षों की यह जुगलबंदी भी आम लोगो की समझ से परे है.

वर्तमान में किसान मालामाल है. पिछले दो माह के आंशिक विश्राम के बाद सट्टा  कारोबार की गाड़ी अब पुनः पटरी पर लौट  आई है. इस काले धंधे में क्षेत्र के किसान भी बढ़ चढ़कर पैसा  लगा रहे है और बर्बाद हो रहे है. आसपास के कई किसान तो सिर्फ सट्टा खेलने के लिए ही रोज शहर पहुचते है और अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई सटोरियों को सौपकर चलते बनते है.
खाद बीज लेने में किसानो को आ रहा पसीना
कटनी / पिछले तीन सालो से सूखे की मार झेल रहे किसानो की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. इस समय मंडी में धान लेकर पहुच रहे किसानो को उचित भाव नहीं मिल रहे है. मंडी में धान की जमकर आवक हो रही है और मंडी में धान लेकर आये किसान उचित दाम की आस लगाये हुए है जबकि व्यापारी औने पौने दाम बता रहे है.

दूसरी तरफ किसान बोवनी के लिए खाद बीज जुटाने के लिए जद्दोजह  कर रहे है. मौसम में गर्मी बने रहने  के कारण कई किसानो की बोवनी बर्बाद हो गई उसे दुबारा बोवनी करनी पड़ रही है.
वैसे ही  कृषि विभाग से एक बार बीज मिल पाना कठिन है ऐसे में किसानो को दुबारा बोवनी के लिए बीज  प्राप्त करने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे है. मजबूर किसान कृषि अधिकारियो के पास लाइन लगाये हुए है.

क्षेत्र के किसानो ने दीपावली के समय बोवनी कर दी थी लेकिन मौसम की बेरुखी से चने और गेहू की बोवनी काफी प्रभावित हो रही है. इस कारण कई किसानो को दोबारा बोवनी करने की नौबत आ गई है. अभी चूकी बोवनी का समय चल रहा है इस कारण किसान चाहते है की उन्हें सुलभता से खाद बीज मिल जाए जिससे की बोवनी समय से कर ले लेकिन गोदाम से बीज खाद देने में कोताही की जा रही है, गोदाम प्रभारी नए नए नियम बताकर किसानो को परेशा कर रहे है.

सरकारी गोदामों में खाद का खेल बदस्तूर जारी है इस खेल में स्थानीय व्यपियो से साठ- गाठ के चलते डिमांड लैटर भेजने के बाद हफ्तों खाद नहीं आती और फिर मजबूरन किसान को स्थानीय व्यापारियों से अधिक दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है. फिर जब तक सरकारी खाद आती है तो किसानो की आवश्कताए समाप्त हो चुकी होती है और फिर इस खाद को व्यापारियों को धीरे से सहकारी समिति द्वारा ब्लेक कर दिया जाता है. जिस खाद को इन व्यापारियों द्वारा इन्ही किसानो को फिर से बेच दिया जाता है.

परेशान किसान ने जिला प्रशासन से मांग की है की खाद तथा बीज पर्याप्त मात्र में उपलब्द्ध कराये जाये.

अघोषित कटौती से लोग परेशान


कटनी  /  लगातार हो रही विद्युत् कटौती से रीठीवासी   परेशान है. चौबीस घंटे  में मात्र चार घंटे भी थ्री फेस की बिजली उपलब्द्ध न होने से आटा चक्की, बेल्डिंग मशीन, फोटो कापी, कम्पुटर, स्टूडियो जैसे विद्युत् संचालित यंत्र ठप्प पड़े है. बिजली के अभाव में इलेक्ट्रानिक उपकरण सो पीस बनकर रह गए है,

बिजली के अभाव में नल जल योजना भी ठप्प पड़ी है. गाँव में जल संकट भी गहरा गया है. मजबूरन  महिलाओं को पानी के लिए हेंड पम्पो  का सहारा लेना पड़ रहा है. इन दिनों रवि की फसलो के पलेवा का कार्य चल रहा है लेकिन किसानो को पलेवा के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से विवश होकर  उन्हें डीजल पम्प और जनरेटर लगाकर सोचाई करना पड़ रही है.

एक तरफ किसानो को बिजली देने का दवा किया जा रहा है उनसे अस्थाई कनेक्शन की राशी भी जमा कराई गई है लेकिन सिचाई के लिए  पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. आये दिन ट्रांसफार्मर जल जाते है जिससे  कई ग्रामो  में बिजली गुल हो जाती है. शिकायतों का असर विद्युत् वितरण कंपनी के कर्णधारो पर नहीं होता है.

खाद्य पदार्थो में जमकर हो रही मिलावट


कटनी / शहर के कुछ मुनाफाखोर दुकानदारो ने लाभ कमाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट के लिए एक से बढ़कर एक विकल्प तैयार कर लिए है. शहर की कुछ दुकानों पर खाद्य पदार्थो में हानिकारक पदार्थ मिलाकर  व्यापारी जमकर लूट रहे है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय शक्कर, हल्दी, लौंग, काली मिर्च और यहाँ तक की दूध और खाद्य तेलों के भी सस्ते विकल्प तैयार लिए गए है. मिलावट के तरीके भी अजीबोगरीब है उनके कुछ उदहारण यहाँ प्रस्तुत है -
चावल के चूरे को चीनी में मिलावट के लिए प्रयोग किया जा रहा है. इससे चीनी का वजन बढ़ जाता है वही ग्राहक को शक भी नहीं होता. हालाकि इस मिलावटी चीनी को आप कितनी ही मात्रा में खाद्य पदार्थ  में डाल दीजिये मिठास नहीं आएगी. और तो और बाजार में हर दुकान की शक्कर अलग-अलग मिल रही है. किसी दुकान की शक्कर को कम मात्रा में डाल देने पर भी मिठास आ जाती है तो कही शक्कर की भरपूर मात्रा भी मिठास नहीं ला पाती है. कई बार चाय में शक्कर डालने के बाद छानते समय सफ़ेद चूरा भी मिलावट की कहानी  बया करता है.

इसी प्रकार   चावल में इस समय सफ़ेद रंग के बारीक पत्थर धड़ल्ले  से मिलाये जा रहे है जो की चावल के रंग में मिल जाते है और इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है. चावल खाने पर ही इस बात का अहसास होता है की इसमें कंकर है, इन पत्थरो के लगातार सेवन से पथरी और आंत सम्बन्धी रोग होंने की आशंका बढ़ जाती है.
इतना ही नहीं काली मिर्च में पपीते के बीज और लौंग जैसे मसालों में लकड़ी की मिलावट भी की जा रही है. बात यही तक रहती तो भी गनीमत थी लेकिन चिंताजनक बात यह है की कुछ हानिकारक पदार्थो की मिलावट करने से भी दुकानदार नहीं चूक रहे है, इस समय हल्दी में पीली मिटटी , लाल मिर्च में गेरू, दूध में सिंथेटिक पदार्थ, खाद्य तेल में जहरीले रसायनों का खुलकर प्रयोग किया जा रहा है. यह मिलावटी माल तुरंत तो असर नहीं करता लेकिन यह धीमा जहर मानव स्वास्थ्य को बुरी तरह चौपट कर देता है.
खाद्य  विभाग भी कभी कभार छापामार कार्रवाई कर सेम्पल जब्त करता है. इसी कारण दुकानदारो के हौसले बुलंदियों पर है. वे बेख़ौफ़ होकर मिलावटी माल बेच रहे है.

24 November, 2010

आज की दौड़ती भागती जिन्दगी में थकना मना है

आज की दौड़ती भागती जिन्दगी में थकना मना है ऐसे  में स्वयं को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए अब दवाये लेना आम बात हो गई है. मजेदार बात यह है की लोग अपनी मनमर्जी से दवाओं का सेवन कर रहे है. इसमें होता यह है की तत्काल तो आराम मिल जाता है पर इन दवाओं का प्रतिदिन सेवन करने से इन दवाओं का मानव शरीर  पर घातक असर पड़ता है.
अब तो आलम यह है की थोडा सा सर्दी जुकाम हुआ नहीं की लोगो ने अपनी मर्जी से दवा लेकर स्वयं को ठीक करने के जतन में लग जाते है. और ऐसे लोगो की भी कमी नहीं है जो अनावश्यक दवाओं का प्रयोग रोज ही कर रहे है.
वह बचपन ही क्या जिसमे शैतानी न हो मगर व्यस्तताओं के चलते अब पालक का धैर्य पहले जैसा नहीं बचा है. यही कारण है की बच्चो की शैतानी को रोकने के लिए भी दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है. नीद के लिए तरह-तरह के सिरप मेडिकल की दुकानों पर उपलब्द्ध है जिन्हें बच्चे को देने से उसे नीद आ जाती है.
जबकि इस सम्बन्ध में चिकित्सको का कहना है की  बिना योग्य डाक्टर की सलाह के दवाये लेना खतरनाक साबित हो सकता है. लोग अपनी मनमर्जी से रोगों की दवा का सेवन करते है जिसके  विपरीत परिणाम देखने को मिलते है. इन दवाओं से किडनी पर सूजन आना , जी मचलाना, सिरदर्द व अन्य दुष्प्रभाव देखने को मिलते है. ऐसे में जो भी दवा ले वह बिना डाक्टर के परामर्श के न ले.

किराना दुकानों में बिक रही दवा
ग्रामीण क्षेत्रो व शहर की गली मोहल्लो में छोटी किराने की दुकानों पर दवाये आसानी से उपलब्द्ध हो जाती है इन किराने की दुकानों पर लोग हरी और नीली पन्नी के नाम से दवा खरीदते आसानी से देखे जाते है. मर्ज कोई भी हो बस एक गोली हरी या नीली पन्नी की. कई किराना दुकाने बिना लाईसेंस के मेडिकल स्टोर्स का काम कर रहे है.

बाजार में मेडिकल दुकानों पर हेल्थ बनाने की दवाये भी उपलब्द्ध है, जिनका उपयोग सबसे ज्यादा युवा वर्ग कर रहा है. स्वयं को आकर्षक और सलोना दिखाने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल बिना डाक्टर की सलाह के किया जा रहा है. लुभावने विज्ञापनों के जाल में फसकर युवा अपनी हेल्थ बनाने के लिए दवाये तो लेते है परन्तु इन दवाओं के सेवन करने तक ही हेल्थ अच्छी रहती है. और दवाये बंद करने पर फिर से हेल्थ पहले की ही तरह हो जाती है. इन दवाओं के नियमित सेवन करने से लोगो की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. कई बार तो यह दवाये  घातक भी सिद्ध हो जाती है. इनके सेवन से विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभाव पड़ते है.

मुख्यालय पर नहीं रहते साहब

कटनी / शासकीय कार्यालयों में अपना काम करवाने के लिए भटकनेवाले  नागरिको की परेशानी का एक बड़ा कारण मुख्यालय पर न रहकर अप-डाउन करनेवाले कर्मचारी और अधिकारी है. कार्यालय आने के बाद एक एक घंटे थोडा बहुत काम करने की नौटंकी कर साहब स्वयं निकलने की फ़िराक में रहते है
कटनी जिला मुख्यालय में अधिकांस विभागों में यह स्थिति बनी हुई है. ऐसा ही कुछ हाल जिले के तहसील मुख्यालयों रीठी, विजयराघवगढ़, बडवारा, ढीमारखेडा , बहोरिबंद  का भी है. बड़े आश्चर्य की बात तो यह है की इस ओर प्रशासनिक अधिकारी या विभाग के प्रमुखों का ध्यान बिलकुल भी नहीं है. यह बात जग जाहिर है की विभिन्न विभागों के  अधिकारी सहित कर्मचारी डिउटी  स्थल पर रात नहीं ठहरते है. ट्रेन, बस से ड्यूटी का समय मिलाते है.
जबकि शासन की मंशा  है की कार्यरत शासकीय कर्मचारी-अधकारी मुख्यालय में रहकर विभागीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करे एवं जरूरत पड़ने पर कभी भी किसी भी कार्यालय का काम लिया जा सके.
बाहर से मुख्यालय पर ड्यूटी करने जा रहे अधिकारी-कर्मचारी के अप-डाउन का खेल कई वर्षों से चल रहा है. इनको कई बार शासन से सख्त निर्देश भी मिल चुके है लेकिन इसके बावजूद भी यहाँ के कर्मचारियों पर कोई भी असर होता नहीं दीखता.
 मुख्यालय पर रहकर शासकीय कार्य को करने के सख्त निर्देश कमिश्नर प्रभात पराशर ने दिए थे. उन्होंने कहा था की अधिकारी मुख्यालय पर आवास व्यस्था बनाए ताकि विभागीय योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन हो सके. अगर कोई व्यक्ति मिलने आता है तो उसकी समस्या ध्यान से सुने लेकिन यह निर्देश अब ठन्डे बसते  में जा पहुचे है.

मोबाइल से याददाश्त गायब हुई

आजकल युवाओं  के हाथो में सुबह से शाम तक मोबाईल देखने मिलता है. चौबीसों घंटे सुबह हो या शाम, घर हो या बाहर, पैदल हो या फिर किसी  वाहन पर सभी अपने सेल फोन पर बाते करते ही दिखते है.
आज सेल फोन इन युवाओं के लिए अपने आप को आधुनिक और स्टाईलिश दिखाने का जरिया बन गया है. या कहे तो यह आज उनका स्टेटस सिम्बल बन गया है. विद्यर्थियो के हाथो में भले ही किताब कापिया न दिखे लेकिन आपको उनको पास हेंडसेट जरूर देखने को मिल सकता है.
विज्ञानं के चमत्कारों में से एक मोबाइल के जहा बहुत से लाभ है तो दूसरी तरफ इसके नुक्सान भी कम नहीं  है . और शायद आज के युवा इस बात से अनजान है की अधिक समय तक मोबाईल के उपयोग से शरीर पर इसका क्या दुष्प्रभाव पड़  रहा है.
विशेषज्ञों के अनुशार सेल फोन शरीर के विभिन्न अंगो पर घातक प्रभाव पंहुचा रहा है. कहा जाता है की किसी भी चीज का हद से अधिक उपयोग करना नुकसानदायक ही होता है.
सेल फोन युवाओं की जीवन शैली का केवल अंग ही  नहीं बल्कि आज ऐसा साथी हो गया है जिसके बिना उनका एक पाल भी जीना कठिन हो गया है. अक्सर देखने में आता है की आज के युवा चाहे वे यात्रा में हो, खाली खली समय में हो या किसी  के इन्तजार में हो वे मनोरंजन करना चाहते है और इसके लिए कोई भी कीमंत चुकाने के लिए तैयार है.
इसलिए चिकित्सको  ने सचेत किया है की मोबाईल फोन के इस्तेमाल से होने वाली मौते धूम्रपान से होने वाली मौतों की तुलना में ज्यादा हो सकती है.
यह बात सही भी है पहले बच्चो की जुबान पर कोई भी फोन नंबर या पता रटा होता था लेकिन अब उसी नंबर को मस्तिष्क में रखने की जगह अब मोबाइल में फीड कर दिया जाता है.
 डाक्टर आर बी सिंह का कहना है की मोबाईल का ज्यादा उपयोग बच्चो  की एकाग्रता पर तो असर डालता ही है साथ ही उसकी याददाश्त पर भी बुरा असर पड़ता है. अब बच्चो के दिमाग की अधिक कसरत ही नहीं हो पाती. हर पाल कानो से सेल फोन के इअरफोन   लगाकर रहने वाले इन बच्चो की सुनने की शक्ति भी प्रभावित हो रही है.

पोस्टमार्टम में निकाली आखे और किडनी

कटनी  / रोजगार की तलाश में  इन्दोर गए यहाँ  के एक युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई जिसका शवपरीक्षण करते हुए चिकित्सको ने उसकी दोनों आखे व किडनी निकाल ली.

इन्दोर पहुचे युवक के परिजनों ने जब आखे व किडनी निकाले जाने के सम्बन्ध में चिकित्सको व शवपरीक्षण करने वाले चिकित्सा स्टाफ से पूछताछ की तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.
प्रबंधन का मौन स्पष्ट करता है की जिला चिकित्सालय इन्दोर में लाशो से आखे व किडनी निकालकर उनको मोटी रकम लेकर बेचे जाने का गोरखधंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है.

गौरतलब है की नगरीय सीमा के अंतर्गत श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड के श्री ग्राम छ्परवाह निवासी अधिवक्ता मुरलीधर मिश्र का 21   वर्षीय युवा पुत्र रघु मिश्र गतदिवस रोजगार की तलाश में अपने दोस्तों के साथ इन्दोर गया था. इन्दोर में रोजगार की तलाश करते हुए रघु को औद्योगिक क्षेत्र इन्दोर की ही एक एंपनी में रोजगार मिल गया. जिसके बाद वह वहा काम करने लगा. रविवार की रात रघु कंपनी से छुट्टी होने के बाद औद्योगिक क्षेत्र इन्दोर स्थित एक ढाबे में अपने दोस्तों के साथ खाना खाकर जब वापस लौट रहा था उसी दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर रघु व उसका एक दोस्त जीप की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए.
बाद में दोनों को अस्पताल में भरती कराया गया जहा उपचार के दौरान रघु मिश्र की मौत हो गई. बताया जाता है की जिला चिकित्सालय में रघु का शव परिक्षण करते हुए चिकित्सक ने उसकी दोनों आखे व किडनी निकाल ली. जिसका  वहा पहुचे परिजनों ने विरोध करते हुए आखे व किडनी निकाले जाने के सम्बन्ध में पूछताछ की लेकिन चिकित्सको ने इसका कोई जबाब नहीं दिया और शव अंतिम संस्कार हेतु उन्हें  सौप दिया.

यदि जिला चिकित्सालय इन्दोर के चिकित्सको एवं शव परिक्षण करने वाले कर्मचारियों ने ऐसा किया है तो यह मानवता के खिलाफ एक जघन्य अपराध है जिसकी जाँच होनी  चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए.

कालाबाजारी को भला कौन रोकेगा....?

कटनी / पिछले लम्बे समय से रीठी तहसील मुख्यालय में रसोई गैस की कमी लगातार बनी हुई है. जब कभी महीने में कटनी से गैस सिलिंडर आता है तो आलम यह होता है की लाइन में लगने वालो को गैस सिलिंडर नहीं मिलता जबकि कालाबाजारी करने वाले तथा चंद छुटभैये नेता एक बार में ही दस से पंद्रह सिलिंडर अकेले ले जाते है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार एह्पी  गैस एजेंसी कटनी  के संचालक की मनमानी के चलते रीठी में उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. रीठी में कोई भी अधिकृत गैस एजेंसी न होने से यहाँ पर कटनी से महीने में एक बार ट्रक  के मध्यम से सिलिंडर आते है. यहाँ अधिकांस सरकारी कर्मचारी है इन नौकरीपेशा लोगो को जब तक पता चल पता है तब तक कालाबाजारी करने वाले एकमुश्त सिलिंडर ले जा चुके होते है.
उपभोक्ताओं की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की गैस की गाडी आने के बाद घंटो लाइन में लगने के बाद भी लाइन में लगे लोगो को गैस नहीं मिल पाती और कुछ समाज सुधारक और नेता इक्कट्ठे दस से पंद्रह गैस सिलिंडर भरवाकर ले जाते है.
रीठी के आम उपभोक्ताओं को यहाँ पर गैस भले ही न मिल पाती हो परन्तु कालाबाजारी करने वालो के यहाँ गैस सिलिंडर आसानी से मिल जाती है. और जब गैस एजेंसी कटनी में भी गैस नहीं मिलती तो भी इन कालाबाजारियो के पास से गैस सिलिंडर मिल जाते है. चंद दिनों पहले जब यहाँ गैस का सिलिंडर 450 रुपे में मिल जाता था वही अब 575 रूपये में मिल रहा है. रीठी, बडगांव में इस समय कुछ लोग चोरी छुपे गैस की कालाबाजारी का काम कर रहे है. उपभोक्ताओं का आरोप है की खाद्य आपूर्ति विभाग  व गैस एजेंसी के संचालको की मिली भगत से यहाँ पर इस काम को अंजाम दिया जा रहा है. कुछ समय पहले खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियो के सख्त होने पर यहाँ पर कालाबाजारी पर काफी हद  तक काबू पा लिया गया था परन्तु इस समय खाद्य आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने ढीले तेवर अपना रखे है.
ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रस्टाचार में लिप्त कटनी जिला  आपूर्ति अधिकारी की मिलीभगत से यहाँ पर गैस की कालाबाजारी खुले आम हो रही है क्या कभी  इस पर कभी रोक लगे सकेगी ...?

23 November, 2010

एस पी को आवेदन के साथ पचास का नोट दिया

कटनी / सरकारी कार्यालयों में काम के बदले दाम अब शिस्टाचार बन गया है. ऎसी ही मानसिकता लिए अपने ससुराल से प्रताड़ित 29 वर्षीय महिला दुर्गाबाई  बीते मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान ससुराल के विरुद्ध अपनी शिकायत का आवेदन लेकर पुलिस अधीक्षक मनोज शर्मा के पास पहुची.
अपने आवेदन के साथ पचास का नोट यह कहते हुए बढाया की साहब यह चाय-पानी के लिए रख लो लेकिन आप मेरा यह काम करा दो मै बहुत परेशान हूँ. यह देख सुनकर पुलिस अधीक्षक श्री शर्मा सहित वहा मौजूद सी एस पी राजेश तिवारी और पत्रकारवर्ग  भौचक्के रह गए.
आश्चर्य मिश्रित माहौल में सीएसपी श्री तिवारी ने दुर्गाबाई  को डांट के लहजे समझाया भी लेकिन महिला ने लगभग गिडगिडाते हुए यही बात फिर से दुहराई.
इस पर पुलिस अधीक्षक श्री शर्मा ने महिला को समझाया और कहा आपको ऐसा नहीं करना व कहना चाहिए था. हम आपके आवेदन पर कार्यवाही करेगे, आपके पति और सास को बुलाकर उनसे भी पूछा जायेगा. जो भी उचित और पुलिस के दायरे में होगा वह हम करेगे.
वर्तमान में राबर्ट लाइन कैम्प कुम्हार मोहल्ला में रहने वाली दुर्गाबाई  ने बताया की दहेज़ की मांग को लेकर उसके पति नारायण पटेल व सास मैगी बाई (निवासी खिरहनी) ने मारपीट कर उसे घर से बाहर निकालते हुए बच्चो को छुड़ा लिए जाने एवं जान से मारने की धमकी दी है. अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही दुर्गा ने श्री शर्मा से अपने घर (ससुराल )  में वापस रखवाने का निवेदन किया है.

22 November, 2010

प्याज व लहसुन के दामो ने अतीत की याद दिलाई

कुछ दिनों पूर्व तक दस रूपये किलो तक बिकने वाली प्याज इन दिनों दुगने भाव में बिक रही है इस प्रकार प्याज पर महगाई डायन के  कहर से लोग न केवल  परेशान है बल्कि वे आँसू भी नहीं बहा पा रहे है, वही सब्जियों के दामो ने भी आम नागरिक का स्वाद फीका कर दिया है.
सब्जी का तड़का तो लहसुन-प्याज से ही लगता है और ये दोनों चीजो के भाव सातवे आसमान पर है लेकिन हालत कुछ ऐसे है की गरीब तबके के लोग जो की सब्जी के अभाव में प्याज-लहसुन से ही रोटी खाकर अपना पेट भर लेते थे, वे अब प्याज लहसुन का उपयोग बमुश्किल कर पा रहे है.
आम तौर पर प्याज के भाव अधिकतम  दस रूपये तक रहते थे जो की  इन दिनों बीस से तीस रूपये किलो पर पहुच गए है वही लहसुन जो अधिकतम बीस-तीस रूपये किलो तक बिकती थी वह अब १२० रूपये किलो में बिक रही है. इतने अधिक भावो के चलते निम्न वर्ग के लोगो को प्याज लहसुन खरीदने से पहले सोचना पड़ रहा है, प्याज पर महगाई डायन का कहर सुरसा के मुह की तरह बढ़ रहा है, प्याज लहसुन के दामो में ऐसा लगता है की अब यह गरीब की थाली से भी कोसो दूर हो चुकी है.
महगाई से अधिक बढ़ने से इनकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है इस सम्बन्ध में प्याज लहसुन  विक्रेताओं ने बताया की हमेशा प्याज की खपत अधिक रहती है लेकिन जब से इनके भाव सातवे आसमान पर पहुचे है. खपत में गिरावट आई है जो प्रतिदिन गिरती ही जा रही है
जिस प्याज ने केंद्र की सरकार को ध्वस्त कर दिया था तथा काफी समय से प्याज के  भाव अधिकतम दस रूपये तक पहुचे थे लेकिन एकदम से बढे प्याज व लहसुन के दामो ने अतीत की याद ताजा कर दी है क्योकि पूर्व  में भी प्याज एवं लहसुन के भावो ने रिकार्ड स्थापित किये थे. इस प्रकार लोगो को पुराने दिन ताजा हो गए.
हाल ही में हुई बारिश के कारण  प्याज के भावो में लम्बा उछाल आया है क्योकि रुक-रूककर हुई इस बारिश से प्याज की फसल प्रभावित हुई है. उत्पादित प्याज भी बारिश होने से दागदार हो गयी है जिसके चलते बाजार में प्याज की आवक मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है. स्थानीय प्याज के थोक विक्रेताओं ने बताया की इस समय जिन-जिन प्रदेश, क्षेत्रो तथा अन्य प्रान्तों से प्याज आती थी वहा की फसल बारिश होने से ख़राब हो गई है जिसके चलते बाजार में प्याज के भाव सातवे आसमान पर पहुच चुके है वही लहसुन का स्वाद भी भाव के कारण लोगो से कोसो दूर पहुच चुका है.

.......तो इंसानों की प्रजाति पर ही खतरे मडराने लगेगे.

कटनी / कभी हरी सब्जी को मानव जीवन के लिए स्वास्थ्यप्रद मना जाता था लेकिन अब वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है. चौकिये मत अब प्रत्येक सब्जी फल, मिठाई, दूध, घी, तेल आदि सभी में जहर है. इन जहर मिली चीजो के सेवन से जहा इंसानों की सेहत बिगड़ रही है वही दूसरी ओर दुर्लभ पशु पक्षियों की प्रजातियों पर भी लुप्त होने का खतरा बन गया है.
यदि आप सोच रहे है की दूध, घी, फल, सब्जी खाना सेहत के लिए लाभकारी है तो बिलकुल गलत सोच रहे है.क्योकि अब शायद ही कोई साग-सब्जी या फसल हो जिनपर रासायनिक खाद या दवाओं का प्रयोग न होता हो.. बढ़िया किस्म का गेहू, चावल, चना, सोयाबीन आदि  भी आज जहरीली हानिकारक दवाओं के हानिकारक उपयोग से उगाया जा रहा है.
सब्जियों में इंजेक्सन के प्रयोग से अब लोग अनजान नहीं है, लौकी एवं ककड़ी में आक्सीटोसिन के इंजेक्सन लगाना आम बात है. इन से न केवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल  असर पड़ता है बल्कि कई लोगो की मौत भी लौकी के जूस पीने से हो चुकी है.
आज सब्जियों को चमकदार तथा ज्यादा हरा दिखाने  के लिए केमिकल में डुबाया जाता है... केले एवं पपीते को केमिकल में डुबाकर ही पकाया जाता है जो जहर बनकर सीधे शरीर में प्रवेश कर जाता है. तालाब एवं डबरो में सिंघाडो   की खेती के लिए भी खतरनाक केमिकल एवं दवाईया पानी में डाली जाती है. सब्जियों को ज्यादा चमकदार और हरी दिखाने के लिए रासायनिक रंगों का प्रयोग भी किया जा रहा है.
भिन्डी, करेला, परवल, मटर आदि रंगों एवं केमिकल के प्रयोग के बिना इतने चमकदार नहीं दिख सकते.
पशु पालन एवं दुग्ध डेयरी में गाय, भैसों आदि को पालने वाले ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्सन प्रतिदिन लगाकर दूध दुह रहे है. जिससे ज्यादा दूध निकलता है और इस इंजेक्सन के कारण दूध भी जहरीला हो जाता है और फिर इस दूध को पीने वालो की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. खासतौर पर छोटे बच्चो एवं बड़ो में भी ऐसे दूध के सेवन से कैंसर एवं अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बार-बार इंजेक्सन लगाने से जानवरों के शरीर भी जहरीले हो जाते है जिनके मरने पर चील, गिद्धों एवं कौओ द्वारा इनका मांस खाने से इन प्रजातियों पर भी संकट मंडरा रहा है, एवं इनकी प्रजातिया भी अब लुप्त होने की कगार पर है.
होटलों पर मिलने वाली मिठाइयो को भी मीठा जहर कहा जा सकता है क्योकि आये दिन नकली मावा पकडे जाने की खबरों को से अखबार और चैनल आते पड़े है. दूध धल्ल्ले से नकली बनाया जा रहा है और इतनी वैज्ञानिक तकनीक से बनाया जा रहा है  की इसे जाँच में भी नहीं पकड़ा जा सकता. कई मामलो में बीसियों टेस्ट करने के बाद भी असली दूध की पहचान नहीं की जा सकती.
तेल के नाम पर तेल की तरह दिखने वाला एवं व्यव्हार करने वाले केमिकल्स बाजार में बेचे जा रहे है, मसालों में मिलावट तो अब कोई नई बात नहीं है.
हरी सब्जियों को और चटकदार एवं ताजा बनाये जाने के लिए मिलाया जा रहा रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक  हो इससे इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में यह रसायन शरीर में पहुचकर आंतो, गुर्दों एवं त्वचा पर नुकसान पहुचाते है. तब जब इनकी मात्रा शरीर में बढ़ने लगे प्रारंभिक दौर में इसका असर नहीं पड़ता लेकिन केमिकल युक्त सब्जियों के ज्यादा उपयोग से धीरे-धीरे इनका प्रभाव बढ़ने लगता है.
प्रशासन द्वारा केमिकलो के हो रहे उपयोग पर अभी तक न कार्रवाई की गई है और न ही कोई जाँच. खास बात तो यह है की जाँच करने वाले आला अफसरों और कर्मचारी ही इन सब्जियों का  उपयोग कर रहे है जो एक लापरवाही का जीता  जगता उदहारण है.

यदि शीघ्र ही इन खतरनाक एवं जहरीले रसायनों एवं नकली सामग्री पर प्रतिबन्ध नहीं लाया गया तो इंसानों की प्रजाति पर ही  खतरे मडराने लगेगे.

मार्बल खदान में घायल की मौत को सड़क दुर्घटना बताया

कटनी / स्लिम्नाबाद थाना अंतर्गत ग्राम निमास निवासी एक 29  वर्षीय युवक को लक्ष्मी मार्बल खदान में गंभीर रूप से जख्मी होने के बाद गतदिवस गंभीरावस्थ में कचहरी चौक स्थित एमजीएम  अस्पताल में दाखिल किया गया था जहा उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई.
युवक स्लिम्नाबाद क्षेत्र की लक्ष्मी मार्बल कंपनी में  इलेक्ट्रीसियन था तथा उसकी यह हालत मार्बल कंपनी की शाखा  राधिका माइंस की खदान में काम करते समय मशीन में फसने से हुई थी लेकिन अस्पताल पहुचाने  वालों ने अस्पताल प्रबंधन को यह बताया की युवक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ है. बहरहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जाच में लिया है.
इस सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम निमास निवासी 29 वर्षीय बब्बू पिता राममिलन झारिया ग्राम khdara    स्थित लक्ष्मी मार्बल कंपनी की शाखा राधिका माइंस  में  इलेक्ट्रीसियन था. बताया जाता है की खदान के अन्दर किसी मशीन में सुधार कार्य  करते समय ही बब्बू उसमे फसकर गंभीर रूप से घायल हो गया. जिसके बाद माइंस प्रबंधन ही उसे कचहरी चौक स्थित एमजीएम अस्पताल लेकर आया लेकिन उसने अस्पताल प्रबंधन को यह जानकारी दी की बब्बू किसी सड़क हादसे का शिकार हुआ है तथा उसको यह चोटे सड़क दुर्घटना में आई है.
बताया जाता है की एम्जीएम अस्पताल में उपचार के दौरान बब्बू की मौत हो गई तो माइंस प्रबंधन वहा से भाग खड़ा हुआ.  वैसे यह पहला मौका नहीं है जब स्लिम्नाबाद मार्बल कंपनी में  हुए किसी भी हादसे को माइंस प्रबंधन ने सड़क दुर्घटना बनाने की कोशिश की है बल्कि इसके पूर्व भी ऎसी कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी है. जिसमे माइंस के अन्दर हुई दुर्घटनाओं को माइंस प्रबंधन ने सड़क दुर्घटना बता दिया है.
बहरहाल पुलिस ने शवपरिक्षण कराते हुए मार्ग कायम किया है.

21 November, 2010

रोजगार पाने वालो की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है !

कटनी / जिले में संचालित रोजगार गारंटी योजना भ्रस्टाचार की भेट चढ़ गई है. भ्रस्टाचार के मामले आये दिन अखबारों एवं जनसुनवाई के मध्यम से जिला प्रशासन के sangyan   में लाये जाते है लेकिन इसके बावजूद भी सम्बंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर नकेल नहीं कसी जा सकी है. केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना में फैली गड़बड़ी के कारण पिछले तीन सालो में रोजगार पाने वालो की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है और मजदूरों का पलायन badh   रहा है.
सरकारी आकड़ो में पिछले तीन सालो में जिले भर के लाखो लोगो के जाब कार्ड बनाये गए है लेकिन इनमे से सौ दिन का रोजगार बहुत कम लोगो को दिया गया है. योजना शुरू हो jane   के बाद साल दर साल रोजगार पाने वालो की संख्या कम होती चली जा रही है. रोजगार गारंटी में काम नहीं मिलने से हर sal  हजारो की संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के लोग महानगरो में पलायन कर रहे है. कागजो में जिले की ग्राम पंचायतो में हजारो की संख्या में काम प्रगति पर है लेकिन सवाल यह है की जब लोगो को काम नहीं मिला है तो फिर काम कौन कर रहा है...?
जब  गिने चुने मजदूर ही सौ दिन का काम कर रहे है फिर तो मतलब साफ़ है की ग्रामीणों को समय पर भुगतान नहीं होने से वे केवल एक बार ही योजना में काम कर असलियत समझ जाते है. बाद में उनकी काम में रूचि नहीं रहती. इसलिए हजारो की संख्या में सालो पूर्व शुरू कार्यो के रिकार्ड में अधूरे होने के कारण ही जिले को naveen  कार्यो के liye paryapt bajat  नहीं mil pa रहा है. काम अधूरे rahne से काम karne vaale  लोगो के आकड़ो पर भी sandeh उठता है.

गुटखा पाउच की लत ने बिगाड़ी सेहत

कटनी / आज कल स्कूलों में पढने वाले छात्रो पर गुटखा-पाउच संस्कृति ने अपना बर्चस्व जमा रखा है. गुटखा कंपनियों के आकर्षक विज्ञापनों तथा फैशन के प्रभाव में आज स्कूल कालेज के लड़के ही नहीं लडकिया भी तम्बाकू युक्त धीमा जहर गुटखा गटक रही है. स्कूलों, कालेजो से रोज निकलने वाला पाउचो का कचरा स्वयं अपनी कहानी बया कर रहा है.
न केवल शहर बल्कि सुदूर बसे ग्रामीण अंचलो में भी तम्बाकूयुक्त गुटखा चबाना  आज फैशन बनता जा रहा है. आज स्कूलों में भी गुटखा संस्कृति बढती जा रही है. अब तो लडकियों में भी इसकी लत होना आम बात हो गई है, लोग बैठे बिठाए अनेक बीमारियों के लिये दावत दे रहे है.
स्कूलों में पाचवी से बारहवी तक के बच्चो में पाउच संस्कृति बढ़ रही है. विद्यालयों के जबावदार शिक्षक और पालक भी इन सब बातो से बेखबर है. स्कूलों में सुबह निकाले जाने वाले कचरे और यहाँ की दीवारे स्वतः ही इस नशे की गिरफ्त में आये नवजवानों की कहानी कहती है.
बीते ज़माने में शहरी दुस्प्रभावो से ग्रामीण लोग दूर हुआ करते थे लेकिन आज स्थिति बिलकुल उलटी है. अब शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में गुटखा खाने वाले बच्चो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. स्कूल कक्षों के अलावा मैदानों में व कमरों के आसपास बिखरे रंग-बिरंगे पाउच के खाली पैक यह हकीकत स्वतः ही बया कर रहे है. ग्रामीण अंचल में बच्चो के माता-पिता इन हरकतों पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे है. इस कारण बच्चे असमय इस लत का शिकार हो जाते है.
ऐसा नहीं है की इस शौक में सिर्फ लड़किया ही शामिल है. महिलाओं तक भी गुटखा पाउच अपनी पहुच बना चुके है. आजकल यह नशा जीवन जीने का स्टेटस सिम्बल बन गया है.
स्कूल, कालेजो के आसपास पान की गुमटियों पर गुटखा पाउच आसानी से मिल जाते है, प्रशासनिक स्तर पर इनकी बिक्री रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जाती, इस कारण आज की युवा पीढ़ी इन नशीली वस्तुओ का शिकार होकर अपना जीवन बर्बाद कर रही है और प्रशासन बेखबर बना हुआ है.

इन्हें कौन देता है लाईसेंस...?

कटनी / शहर में सडको पर अधिक वाहन होने के कारण आये दिन हादसे हो रहे है.  इन सडको पर जहा चाहिए वहा गति अवरोधक भी नहीं बनाये गए है  जिससे वाहन तेज गति से चल रहे है.

इन दिनों सडको पर वाहनों की मात्रा तो बढ़ी है लेकिन सडको की चौडाई नहीं बधाई गई है. भारी वाहन सहित सभी वाहन तेज गति से शहर के बीचो बीच से तेज गति से गुजरते है. पैदल चलने वाले लोगो को खतरा हमेशा बना रहता है. पुलिस प्रशासन द्वारा तेज रफ़्तार से निकलने वाले वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.

जिले में अठारह साल से कम उम्र के बच्चे मोटरसाइकल, ट्रेक्टर, कार चला रहे है लेकिन पुलिस द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. नवजवानों द्वारा तेज गति से लहराकर वाहन चलाने से भी आये दिन हादसे होते रहे है.

जिले में तहसील  स्तर पर बसे मुक्यलायो में भी सडको पर अतिक्रमण के चलते यातायात मुश्किल और संकट भरा हो गया है. रीठी तहसील  से होकर गुजरने वाले  कटनी दमोह मार्ग को यहाँ बसे व्यापारियों ने अतिक्रमण के कारण बहुत ही संकीर्ण बना दिया है. यहाँ से गुजरने वाले भारी वाहनों को निकलने पर जाम जैसी स्थिति दिन कई-कई बार निर्मित हो जाती है. पिछले बीस वर्षों में अतिक्रमण के नाम पर केवल नाप जोख के बाद न जाने क्यों अतिक्रमण विरोधी मुहिम ठंडी पड़ जाती है...?
शायद यहाँ के व्यापारी अधिकारियो को काम न करने का पैसा पंहुचा देते है......

पुलिस के खौफ से पुरुषो ने छोड़ा गाँव

कटनी / बिलहरी
बिलहरी चौकी क्षेत्र के करहिया गाँव की सड़के पुलिस के खौफ से सूनी पड़ी है. गाँव के सभी पुरुष घर छोड़कर अन्यत्र चले गए है और घरो में केवल महिलाये व बच्चे ही शेष बचे है. घरो में बचे परिजनों से पुलिस पता पूछने सख्ती बरत रही है. कुछ महिलाओं ने पुलिस द्वारा रात्रि में सोते से उठाकर मारपीट किये जाने के आरोप लगाये है. पुलिस पर हमला करने वालो की तलाश आसपास के गाँव में भी हो रही है. पुलिस ने गिरफ़्तारी के लिए निजी मुखबिर भी लगा रखे है.
दूसरे दिन भी किसी की  गिरफ़्तारी देर शाम तक नहीं हो पाई थी. विदित हो की शुक्रवार की रात करहिया गाँव में जुआ फड पर दबिश के दौरान बिलहरी चौकी प्रभारी सज्जन सिंह व चार अन्य पुलिस कर्मियों पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया था. हमले में चौकी प्रभारी व एक अन्य पुलिस कर्मी जख्मी हुए. पुलिस ने दो दर्जन से अधिक लोगो पर बलवा, शासकीय कार्य में बाधा पहुचाने की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है. हमले के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने दो दिन से सर्चिंग अभियान चला रखा है लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही है.

करहिया गाँव में कुछ महिलाओं ने बताया की करहिया में जुआ फड कई वर्षों से संचालित हो रहा है. जुआ फड में ज्यादातर शहर के जुआरी शामिल होते है. हमले के दौरान भी शहर के बड़े जुआरी मौजूद रहे. इन महिलाओं की माने  तो हमले के समय ग्रामीणों ने पुलिस को सहयोग दिया और उन्हें बचाया भी. जख्मी पुलस कर्मियों को ग्रामीणों ने ही वाहन व्यस्था कर भिजवाया.

पुलिस  के भय से पुरुष तो गाँव छोड़कर चले गए है और घरो पर मौजूद महिलाये भी घरो से बाहर नहीं निकल रही. दरवाजा खटखटाने पर महिलाये और बच्चे भयभीत होकर दीवारों  से चिपट जाते है. गाँव की सडको पर इस कदर सन्नाटा पसरा है जैसे कर्फू का माहौल छाया हो. बच्चे भी घरो से बाहर नहीं निकल रहे. ऐसा पता चला है की हमले की रात से ही गाँव के पुरुष घर छोड़ चुके है .
इसके बाद रात्रि में करीब दो बजे पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई. महिलाओं को सोते से उठाकर पूछताछ की गई.
हमलावरों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने करहिया में डेरा दाल  रखा है. कुठला टी आई  बी एस राजपूत दो दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों के साथ करहिया में मौजूद है. बंदूकधारी पुलिसकर्मी गाँव में गश्त कर रहे है. सब कुछ ग्रामीणों में यह दहशत पैदा करने किया जा रहा है की दोबारा पुलिस पर ग्रामीण हमला करने की सोच ने सके.
वही पुलिस के अनुसार जुआदियो  की धरपकड़ करने गए पुलिस दल पर हमला करने वालो के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है. हमले में जख्मी हुए चौकी प्रभारी सज्जन सिंह का एमजीएम अस्पताल में उपचार जारी है.
पुलिस पर हुए हमले को लेकर ग्रामीणों में अलग-अलग चर्चाओं का दौर जारी है. पुलिस के अनुसार करहिया ग्राम में जुआ फड बैठे होने की सूचना मुखबिर से मिली थी और पुलिस दल ने जुआ फड में दबिश दी तभी जुआरियो ने हमला कर दिया. वही ग्रामीणों के अनुसार गाँव में जुआ फड एक दिन नहीं बल्कि साल भर चलता है.

20 November, 2010

पुलिस दल जमकर पिटा

कटनी / बिलहरी चौकी अंतर्गत करहिया गाँव में जुआ फड में दबिश देने पहुचे चौकी प्रभारी सज्जन सिंह सहित पुलिस दल पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया. हमले में चौकी प्रभारी सहित आधा दर्जन पुलिस कर्मी जख्मी हो गए. चौकी प्रभारी को सर में चोट व एक हाथ  की कलाई में फ्रेक्चर हुआ और उन्हें उपचार के लिए एम् जी एम् हास्पिटल में दाखिल किया गया है.

हमले के बाद पुलिस ने रात्रि में हमलावरों को पकड़ने तलाशी अभियान भी चलाया और पुरुषो के न मिलने पर दो महिलाओं के साथ जमकर मारपीट की.  कुठला टी आई के मुताबिक दो दर्जन से अधिक लोगो पर मामला दर्ज किया गया लेकिन किसी हमलावर की गिरफ़्तारी नहीं हो पाई.

कुठला थाना प्रभारी भारत सिंह राजपूत ने बताया की बिलहरी चौकी के अंतर्गत ग्राम करहिया में  दिवाली से पूर्व ही जुआ फड  चलाये जाने की सूचना मिल रही थी तथा पुलिस  आये दिन मिलने वाली इस सूचना के बाद गाँव में दबिश भी देती थी लेकिन जुआरी हमेशा पुलिस को चकमा देकर बच निकलते थे. टी आई ने बताया कलरात भी मुखबिरों ने बिलहरी चौकी प्रभारी सज्जन सिंह को करहिया में जुआ चल रहे होने की सूजना दी. जिसके बाद बिलहरी चौकी प्रभारी सजन सिंह व आरक्षक जगदीश  पांडे कुछ और पुलिसकर्मियों को साथ लेकर जुआ फड  में दबिश देने करहिया पहुच गए. जहा जुआ फड की घेराबंदी करते हुए इसकी भनक  जुआरियो को लग गई और उन्होंने पुलिस दल पर पथराव करते हुए हमला कर दिया इस हमले में बिलहरी चौकी  प्रभारी सजन सिंह व आरक्षक जगदीश पण्डे सहित सभी पुलिसकर्मियों को चोटे  आई लेकिन बिलहारी चौकी प्रभारी सजन सिंह व आरक्षक जगदीश पण्डे को गंभीर चोटे आई.
बिलहरी चौकी प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मियों पर हुए हमले को लेकर ग्रामीणों का कहना है की चौकी प्रभारी की सह पर करहिया ही नहीं आसपास के कुछ अन्य गांवो में भी सट्टा व जुआ फड का अबैध कारोबार अरसे से खूब फल-फूल रहा था. कटनी से बड़े जुआरी फड में पहुचते है. चौकी प्रभारी की सटोरियों, अवैध शराब के कारोबारियो से अच्छे सम्बन्ध है. करहिया में पुलिस निश्चित तिथि पर सट्टे की रकम बसूलने पहुचती है. हमले के पीछे भी रकम को लेकर हुआ विवाद एक कारण बताया जा रहा है.

चौकी प्रभारी सज्जन सिंह वर्मा दूसरी बार बिलहरी में पदस्थ हुए है और उनकी कार्यशैली काफी चर्चित है. क्षेत्रीय जनता के मुताबिक चौकी प्रभारी वर्मा पुलिस के काम छोड़कर कमाई  में लगे रहते है. यहाँ तक की मनरेगा के तहत चल रहे काम एवं अन्य निर्माण कार्य में शासकीय नियम कायदों को बताकर बसूली कर रहे है. इस क्षेत्र के सभी सरपंच और सचिव भी वर्मा से त्रस्त है.

बिलहरी चौकी प्रभारी सहित पुलिस दल पर हमले की जानकारी लगते ही जहा कुठला थाना प्रभारी भारत सिंह राजपूत पुलिस बल के साथ करहिया गाँव पहुच गए बही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह व नगर पुलिस अधीक्षक राजेश तिवारी बिलहरी चौकी पहुच कर पूरे घटना क्रम से अवगत हुए.
चौकी प्रभारी सहित पुलिस दल पर हुए हमले को लेकर पुलिस ने गाँव करहिया के दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों पर शासकीय कार्य में बाधा  डालने व बलवा की धारा 186 , 332 , 353 , 147 , 149 के  तहत मामला दर्ज कर लिया है. आरोपियों में से अभी किसी भी गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है.

ग्रामीण गाँव छोड़ रहे
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह, सीएसपी राजेश तिवारी, टी आई बी एस राजपूत ने बिलहरी पहुचकर घटना की जानकारी हासिल  की. रात्रि में हुए हमले के बाद से ही कुछ अन्य पुलिस बल उपलब्द्ध कराकर आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए  पुलिस टीम करहिया पहुची. हमले के बाद दहशत में ग्रामीणों ने गाँव छोड़ दिया है. बताया जाता है की पुलिस ने ग्रामीणों को पकड़ने घर-घर तलाशी अभियान चलाया. घरो में महिलाए व बच्चे मौजूद है. पुलिस ने महिलाओं पर गुस्सा उतारा.
बिलहरी चौकी प्रभारी सज्जन सिंह वर्मा पर यह दूसरी बार हमला हुआ है. इससे पहले क्षेत्र के एक अपराधी ने उनके साथ मारपीट की थी.

19 November, 2010

सावधान ! मिटटी में बचा है सिर्फ जहर

कटनी / यदि भारत की मिटटी करोडो वर्षों से अपनी उत्पादक क्षमता बनाये हुए है तो इसके पीछे मुख्य रूप से  गोबर की खाद और गौ मूत्र का प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया जाना एक प्रमुख कारण रहा है.
आज जब किसान उत्पादन तो खूब ले रहे है लेकिन उचित मात्रा में गोबर खाद की कमी और रासायनिक उर्वरको की भरमार के चलते मिटटी से कार्बनिक पदार्थ क्षीण होते जा रहे है. मिटटी में पर्याप्त मात्रा में सिर्फ पोटाश बचा है बाकि के नाइट्रोजन, फास्फोरस, कार्बनिक पदार्थ कम होते जा रहे है.
अधिक  उत्पादन लेने की होड़ में किसान मिटटी को पत्थर बनाने पर तुले हुए है. अत्यधिक मात्रा में रासायनिक खादों के उपयोग से मिटटी में कड़कपन   आने लगा है. वही पौधों  को पोषण देने वाले तत्व धीरे-धीरे समाप्त होने लगे है जो किसानो के लिए खतरे की घंटी है.
कार्बनिक पदार्थ मिटटी में उपस्थित होने से मिटटी में उपस्थित मिटटी जल भोजन की क्रिया ठीक से संपन्न कर सकती है इससे उत्पादन पर असर पड़ता है. गोबर की खाद की कमी हो जाती इसकी पूर्ती के लिए गोबर की खाद किसानो  को अवश्य डालना चाहिए
फास्फोरस की कमी से पौधों की जड़, पत्ती और पौधे के विकास पर प्रभाव  पड़ता है यदि मिटटी में फास्फोरस की कमी होती है तो पौधे का ठीक से विकास नहीं हो पाता. जड़ कमजोर रह जाने से पौधे का विकास रुक जाता है. परिणामस्वरूप उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है. नाईट्रोजन की कमी से भी उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है इन तत्वों की कमी का कारण गोबर की खाद के स्थान पर अत्यधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरको का उपयोग करना है.
वर्तमान में किसान जमकर रासायनिक खादों को खेतो में डालकर बम्फर फसले ले रहे है लेकिन इसी तरह रासायनिक खाडे  डाली जाती रही तो एक दिन मिटटी से सभी पोषक तत्व नष्ट हो जायेगे और खेतो से मिटटी के स्थान पर कंकड़ पत्थर बचेगे, जिनसे फसले  उगाना किसानो के लिए मुश्किल होगा. इसलिए किसान सीमित मात्रा में ही अंग्रेजी खाद का उपयोग करे और ज्यादा से ज्यादा गोबर खाद डाले.
कृषि विभाग के अधिकारी ए के नागल का कहना है की किसान अपने खेतो से रासायनिक के स्थान पर गोबर के खाद का अधिक उपयोग करे. यदि किसान जैविक खेती पर ध्यान दे तो उनकी भूमि की उर्वरकता न सिर्फ बची रहेगी बल्कि साल दर साल बढती भी जाएगी.

रसोई गैस से बेख़ौफ़ चल रही टेक्सी

कटनी / जिले में आजकल प्रायः सभी टेक्सिया रसोई गैस से चल रही है. जिससे स्कूल जाने वाले बच्चो की जान का खतरा बना रहता है. ज्यादातर टेक्सी चालक स्कूल में लगे वाहनों में गैस सिलिंडर के वाहनों का उपयोग कर रहे है.

आये दिन जिले में गैस एजेंसी पर लम्बी लेने एवम गैस की किल्लत के चलते भीड़ देखी जा सकती है. गैस के कमी के चलते कई लोगो के घरो में भले ही खाना नहीं बन पाता हो लेकिन चार पहिया वाहन चालको को गाडी चलाने के लिए गैस मिल जाती है. इन गाडियों के चालको को कही भी गैस भरते आसानी से देखा जा सकता है. 

जिले में जननी सुरक्षा योजना में लगे वाहन भी इससे अछोते नहीं है. बी एम् ओ कार्यालय में इसकी जानकारी होने के बाद भी न तो बे एम् ओ कुछ कार्यवाही कर रहे और कटनी सी एम् ओ तो अपना कमीशन लेकन अपने आप को मुक्त समझती है.

क्या इस पर कभी रोक लग पायेगा .......?

17 November, 2010

आदिवासी सरपंचो के साथ सौतेला व्यवहार

कटनी / हरिजन तथा आदिवासी वर्ग के विकास के लिए मध्य प्रदेश सरकार कितना भी प्रयास कर ले लेकिन मैदानी स्तर पर उसकी हकीकत तो कुछ और ही कहानी कहती है. दलित एवं आदिवासी समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए राज्य सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतो एवं नगरीय निकायों में उनके लिए पदों का आरक्षण तो कर दिया जाता है पर जब इस समाज के लोग जनप्रतिनिधि बन जाते है तो इन्हें काम करने नहीं देते विशेष रूप से ग्राम पंचायतो में तो यह आये दिन देखा जा सकता है.

आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित ग्राम पंचायतो में दबंगों द्वारा इनकी  लगातार उपेक्षा की जाती है उसे अपमानित करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा जाता. प्रायः पूरे जिले इसी प्रकार की स्थिति है. आदिवासी वर्ग के सरपंचो को प्रताड़ित किया जा रहा है. उक्त आशय की शिकायत  मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद् द्वारा गत दिवस जिला कलेक्टर से की गई है.

जिला प्रशासन को भेजी गई अपनी शिकायत में आदिवासी परिषद् के जिलाध्यक्ष बलवान सिंह जगैत ने रीठी जनपद की ग्राम पंचायत बकलेहता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया है की यहाँ पूर्व सरपंच द्वारा कपिलधारा योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कराये गए कार्यो में व्यापक अनियमितताए की है. उक्त कार्य में सचिव भी शामिल रहे.इस पंचायत में  भगवान दास लुहार के नाम पर फर्जी कुए का निर्माण दर्शाया गया. उसकी  राशी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई. सरोजबाई पत्नी स्वर्गीय सीताराम लोधी एवं मस्तराम लोस्धि  के नाम कपिल धारा योजना के तहत कूप निर्माण स्वीकृत हुआ लेकिन कार्य अधूरी अवस्था में ही छोड़ दिया गया. जबकि उक्त कार्य की पूरी राशी पंचायत के खाते से निकाली जा चुकी  है. राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण के काम में फर्जी मस्टर रोल भरकर मजदूरी भुगतान के नाम राशी हडपी गई. उक्त सभी कार्य अभी तक अधूरे पड़े है.

वर्तमान में यह पंचायत आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित की  गई थी और यहाँ से आदिवासी अजीत सिंह सरपंच चुने गए है . मौजूदा सरपंच द्वारा ग्राम में विकास कार्यो की योजना अधिकारियो के सामने प्रस्तुत किये जाने पर उन्हें पूर्व में लंबित कार्य कराये जाने की नसीहत दी जा रही. हकीकत यह है की जो कार्य पूर्व पंचायत द्वारा अधूरी स्थिति में छोड़ दिए गए है उनकी राशी निकाली जा चुकी है.

ऐसे में वर्तमान सरपंच उक्त अधूरे कार्य कार्य कराने के लिए राशी की व्यस्था कहा से करे. यह उनके समझ के बाहर है. यह भी बताया गया है की उपसरपंच द्वारा सरपंच अजीत सिंह के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है. विकास कार्यो  के लिए कमीशन की मांग की जाती है. नहीं देने पर सरपंच को डराया धमकाया जाता है. उपसरपंच एवं सचिव द्वारा सरपंच के फर्जी सील और हस्ताक्षर  से राशी का आहरण भी कर लिया जाता है. इन सब की शिकायत पूर्व में भी प्रशासन  से की  जा चुकी है पर अब तक प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है.

आदिवासी परिषद् द्वारा गत दिनों पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को भी इस सम्बन्ध में लिखित शिकायत सौपी गई थी . साथ ही आदिवासी सरपंच को धमकाने उसके साथ गाली गलौच कने वालो के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज करने  की मांग की गई थी. परिषद् के जिलाध्यक्ष बलवान सिंह जगैत ने कहा है की  जिले में आदिवासी जन प्रतिनिधियों के साथ हो रहे सौतेले व्यव्हार में जल्द सुधार नहीं किया गया तो आदिवासी विकास परिषद् आन्दोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो जायेगी.

16 November, 2010

पेट्रोल में साल्वेंट मिलाकर बेचा जा रहा

नया चार पहिया फॉर स्ट्रोक  वाहन कुछ माह में धुआ छोड़ने लगे उसमे बार-बार सर्विसिंग कराना पड़ रहा हो तो कंपनी जाकर वाहन दिखने  के बजाय जिस स्थान से आप पेट्रोल भरवा रहे है उसकी बजाय दूसरे स्थान से पेट्रोल भरना  शुरू कर दे. दरअसल मिलावटखोरो ने अब पेट्रोल में भी मिलावट करना प्रारंभ कर दिया है.
कटनी में पहले से ही पेट्रोल पम्प उपभोक्ताओं को पेट्रोल की मात्रा कम दे रहे थे लेकिन अब पम्प संचालक कमाई के चलते पेट्रोल में साल्वेंट मिलाकर उपभोक्ताओं के वाहनों को दो साल में कंडम बना रहे है. गौर करने  बाली बात यह है की पूर्व में पेट्रोल में केरोसिन मिलाने के कई मामले सामने आ चुके है लेकिन हाल में साल्वेंट मिलाये जाने के बाद से पम्पो के मिलावटी कारोबार का खुलासा हुआ है. इस कारोबार में कही न कही खाद्य विभाग की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है. विभाग सूचना  या शिकायत के आधार पर ही पेट्रोल पम्प पर कार्य करता है. जानकारों का कहना  है की
अगर पेट्रोल में साल्वेंट की मात्रा तय मानक से अधिक मिलाई जाती है तो इसका सीधा असर वाहन पर पड़ता है.

विवाह मुहूर्त शुरू

घर घर में होगा तुलसी विवाह
आज देव उठानी ग्यारस (तुलसी विवाह) का त्यौहार धूमधाम से मनाया जायेगा. गत चार माह से छीर  सागर में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु आज विश्राम समाप्त कर उठेगे और माता तुलसी से विवाह संपन्न होगा. तुलसी विवाह से सभी प्रकार के मांगलिक कार्यो की शुरूआत हो जाएगी. कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात दीपावली से ग्यारहवी  तिथि में देवोत्थान उत्सव देवतत्व प्रबोधन एकादशी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन हिन्दू  अपने-अपने घरो के आगन में तुलसी के चारो ओर गन्ने से आकर्षक मंडप सजायेगे और चौक पर भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह विधि विधान से संपन्न करायेगे. चार माह के शयनोपरांत इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर से जगेगे इसलिए उनके शयनकाल में मांगलिक कार्य संपन्न नहीं किये जाते है. हरी जागरण के उपरांत ही शुभ मांगलिक कार्य प्रारंभ होते है.

परिणय सूत्र में बढ़ेगे भगवान
महिलाओं द्वारा ग्यारस के त्यौहार पर आगन में चौक पूरकर भगवान विष्णु के चरणों  को कलात्मक रूप से अंकित करती है. तेज धुप में विष्णु के चरणों को ढँक  दिया जाता है. रात्रि को विधिवत पूजन के बाद प्रातःकाल भगवान को संख, घंटा, घड़ियाल आदि बजाकर जगाया जाता है. इसके बाद पूजा कर कहानी सुनाई जाती है. तुलसी विवाह की तैयारियों को लेकर गन्ना कृषको द्वारा बाजारों में गन्ने बेचने के लिए लाये जाते है साथ ही बेर, चने की भाजी, आवला आदि की भी  जमकर बिक्री होती है.

वृन्दावन चमक उठे
तुलसी विवाह को लेकर नागरिको में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है. घरो के आगन में स्थित तुलसी दीवाले  को नागरिको ने रंग रोगन कर आकर्षक रूप दे दिया है. आज माता तुलसी को आकर्षक चुनरी से सजाया जाएगा और महिलाये भजन कीर्तन कर उनका विवाह संपन्न कराएगी. जमकर पटाखे भी चलाये  जायेगे . तुलसी विवाह के दौरान चहल-पहल से दिवाली की यादे फिर ताजा हो उठती है.

फिर मनेगी दिवाली
दीपावली उत्सव की तरह ही देवउठनी ग्यारस पर भी दीपावली की तरह ही तुलसी विवाह होने के उपरांत ख़ुशी में आतिशबाजी की जायेगी. लोगो ने तुलसी विवाह पर आतिशबाजी करने के लिए जमकर पटाखे की खरीददारी की ताकि वह खुशिया मना सके.

विवाह मुहूर्त शुरू
तुलसी विवाह के बाद सभी प्रकार के मांगलिक कार्यो एवं विवाह मुहूर्तो की शुरूआत होती है. तुलसी विवाह करने के उपरांत शादी योग्य पुत्र-पुत्रियों के अभिभावक  भी शादियों की तैयारियों को अंतिम रूप देना प्रारंभ कर देगे. वही कुछ अभिभावक ऐसे भी रहते है जो देव उठने पर ही शुभ  विवाह की चर्चा करना पसंद करते है. ऐसे अभिभावक भी अपने-अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाह की चर्चा करना प्रारंभ कर देगे.

15 November, 2010

109 गांवो में अवैध शराब का नेटवर्क

कटनी / वैध शराव के कारोबार की आड़ में अवैध  शराब का व्यापार कर शासन को करोडो का चूना लगाया जा रहा है. शराब व्यवसाय के कुछ बड़े ठेकेदार पुलिस और आबकारी अमले के कुछ भ्रष्ट अधिकारियो के सहयोग से इस कारनामे को खुले आम अंजाम दिया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार रीठी, स्लिम्नाबाद, बहोरिबंद, कैमोर  थाना तथा सलैया और बिलहरी पुलिस चौकी  क्षेत्रो के लगभग एक सौ नौ गांवो में अवैध शराब के अड्डे खुले आम चल रहे है. इस काले कारोबार को शराब  के वैध ठेकों की आड़ में चलाया जा रहा है, हालाकि वैध ठेके तो तीन चार जगहों के ही है लेकिन काला कारोबार इन ठेकों से सटे सैकड़ो गांवो तक पहुच चुका है.

इस प्रकार समाज की जड़ो को खोखला  करने वाली यह अवैध शराब युवा पीढ़ी को दीमक  की तरह चाट रही है. ऐसा नहीं है की आबकारी विभाग और पुलिस विभाग को इसकी भनक न हो. सच तो यह है की दोनों विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियो के हाथ के नीचे ही यह कारोबार हो रहा है. भ्रष्ट अधिकारी भ्रसटाचार में आकंठ डूबे है. शराब के अवैध कारोबार की ओर से आँख मूँद लेने के एवज में उन्हें बड़े शराब ठेकेदारों की ओर से एक बड़ी राशी भी मिलती है. यह राशी इतनी अधिक है की ये अधिकारी धनकुबेर बन बैठे है. कुछ शराब ठेकेदारों ने तो इन अधिकारियो को वाहन, फ्लेट और अन्य दूसरी सुविधाए भी उपलब्द्ध करवा रखी है. इन सुविधाओं के एवज में भ्रस्टाचारी शराब ठेकेदार का हुकुम बजाने लगते है. आखो के सामने बिकती हुई अवैध शराब भी उन्हें दिखाई नहीं देती है. इस प्रकार शासन को धोखा देकर अपने घर भरने का सिलसिला लगातार जारी है.. शहर के कुछ ठेकेदार तो इस कारोबार के जरिये धन कमाने के कीर्तिमान बना रहे है. सीधी बात है की यदि वे करोडो कमा रहे है तो चंद टुकड़े कुछ कर्मचारियों को दे देने में उनका कुछ खास नहीं बिगड़ेगा.

यदि कभी कोई पुलिसकर्मी इन बड़े शराब ठेकेदार की शराब पकड़ भी लेता है तो चंद मिनटों में इस अवैध शराब को वैध बना दिया जाता है. यह सब होता है आबकारी विभाग में मौजूद इनके सरकारी नुमाइंदो की मदद से दरअसल आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियो को जैसे ही शराब पकडाने की सूचना मिलती है वे इस अवैध शराब के कागज तैयार कर इसे वैध बना देते है. इस प्रकार पुलिस के लिए भी कार्रवाई करना मुस्किल हो जाता है.

ऐसा नहीं है की पुलिस विभाग इस मामले में साफ़ सुथरा हो. पुलिस अधिकारियो को अवैध शराब पकड़ने के लिए दूसरे क्षेत्रो के थाना प्रभारियो की मदद लेनी पड़ती है. शराब के ठेकेदार इतने शातिर है की यह स्वयं थोड़ी-थोड़ी समय पर फर्जी शराब भी पकड़वाते  है. जो की सौ या दो सौ रूपये से ज्यादा की नहीं होती है. यह कार्रवाई इसलिए होती है ताकि इनके बड़े काले कारोबारों पर किसी का ध्यान न जाए.

आंगनवाडी के हाल बेहाल

नहीं पहुचती आंगनवाडी कार्यकर्ताए
कटनी / रीठी विकासखंड क्षेत्र के बुरे हाल है. क्षेत्र के  कई आंगनवाडी  केंद्र बंद है तो कई आंगनवाडी केन्द्रों पर कार्यकर्त्ता  नहीं पहुचती. यह सब महिला बाल विकास विभाग की निष्क्रियता के चलते हो रहे है. वर्तमान में परियोजना अधिकारी आंगनवाडी केन्द्रों का निरिक्षण जाने कब करते है ....?

जिसका परिणाम यह है की शासन की मंशा पर ग्रहण लगा हुआ है. वही शासन की इन योजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रो की आगंवादियो    में बच्चो की उपस्थिति नहीं के बराबर है. बच्चो को आन्गंवादियो से मोह भंग हो गया है फिर भी खाद्यान्न के कूपन उपस्थिति के आधार पर कार्यकर्ताओं को दिए जाते है. इन दिनों उच्च  अधिकारियो की अनदेखी का नतीजा है की सेक्टर सुपरवाइजर भी कई पखवाड़े तक इन ग्रामीण क्षेत्रो में पहुचती ही नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रो में फाइलेरिया अभियान की हवा निकल चुकी है. विभाग कागजी कार्रवाई कर अभियान को सफल बनाने में जुटा है.

14 November, 2010

तेजी से पैर पसार रहा नशे का कारोबार

कटनी / एक ओर जहा प्रशासन तथा पुलिस नशा मुक्ति के नाम पर दिखावा करके लाखो रूपये यू ही बहा देते है तो वही पुलिस के सरक्षण में जिले में स्मैक  जैसा आधुनिक नशा जिला  पुलिस के प्रभावशाली वरिष्ठ पुलिस कर्मियों के सरक्षण में इन दिनों एक बड़े कारोबार का रूप धारण कर चुका है.

जानकर सूत्रों के अनुसार प्रारंभ में जबलपुर से छुटपुट शौकीनों एवं अपराधी तत्वों के जरिये शहर में प्रवेश करने वाले इस अत्यंत घातक नशे ने अब शहरी क्षेत्र के अलावा कस्बो और ग्रामीण अंचल तक अपनी घुसपैठ बना ली है. इसके पूर्व गांजे का अवैध व्यापार संचालित करने वाले कुछ बड़े कारोबारियों द्वारा पुलिस की मदद से इसे चौतरफा प्रचारित प्रसारित करने में अहम् भूमिका निभाई गई है.

मात्रा के अनुपात में मुनाफा कम होने और उसका भी एक बड़ा हिस्सा पुलिस सहित आबकारी विभाग के अपने सरंक्षको और सहयोगियों आदि के साथ बंट जाने से गांजे के मुकाबले स्मैक का धंधा चूकी इन सभी के लिए भारी भरकम लाभ कमाने के अवसर दे रहा है अतः इस कारोबार के विस्तार में इनकी व्यापक दिलचस्पी है. नतीजन अब स्मैक की एक ग्राम के भी दसवे हिस्से वाली सफ़ेद भूरे जहरीले पाउडर की टिकिट के नाम से जानकारों के बीच में चर्चित पुडिया शहर के भीतर और  बाहर दूर-दूर तक थोड़े प्रयासों से सहज उपलब्द्ध होने लगी है. इसी तरह जिले भर में प्रतिदिन दो ढाई  हजार टिकटों की खपत का अनुमान है. जाहिर है की इस सबके पीछे एक बड़े संगठित नेटवर्क और उसके कुछ सञ्चालन केन्द्रों की अहम् भूमिका है. इन केन्द्रों के संचालको की पुलिस के साथ सीधी सौदेबाजिपूर्ण साठ्गाथ तथा सम्बन्ध है.

यही कारण है की जिला मुख्यालय के स्टेसन, बस स्टेंड, घंटाघर, नई बस्ती जैसे कई प्रमुख इलाको में स्मैक बिक्री के छोटे-बड़े केंद्र तेजी से उभर आये है जबकि संत नगर स्थित बंद शंभू टाकिज क्षेत्र के इर्द गिर्द तो असमाजिक तत्वों के एक गिरोह द्वारा जिसमे महिलाओं तक  की भागीदारी बताई जाती है द्वारा इस घातक नशे के सबसे बड़ा कारोबार खुलेआम संचालित किये जाने की जानकारिय सामने आ रही है.
आश्चर्यजनक  रूप से इस गिरोह के स्मैक विक्रेता सदस्यों से पुलिस महकमे के कर्मचारी प्रायः रोजाना दिन रात कई-कई बार संपर्क करते और आपस में लेन-देन करते देखे जाते है और स्मैक विक्रय के काले धंधे को इनकी ओर से इस तरह सरेआम प्रोत्साहन प्रदान किये जाने से इन पर और इनकी काली करतूतों के विरुद्ध कोई मुह खोलने का सहस नहीं कर पाता.

शहर ही नहीं उपनगरीय क्षेत्रो में भी टिकट के नाम से मशहूर हो चुकी स्मैक तस्करों के जरिये जबलपुर से कटनी लाई जा रही है. स्टेसन, घंटाघर में स्मैक की पुडिया बेहद आसानी से उपलब्द्ध है. कुछ समय पूर्व जैसे गांजे की बिक्री ने धीरे-धीरे जोर पकड़ा  और अब यह गली कूचो में आसानी से उपलब्द्ध हो रहा है वैसे ही स्मैक के गोरखधंधे में रोक नहीं लगाई गई तो यह भी गांजे की तरह हर गली, नुक्कड़ में बिकता नजर आएगा क्योकि इसकी लत में अब बच्चे, युवा तक आ चुके है.

पुलिस और अपराधी तत्वों की मिलीभगत से फल फूल रहे इस घातक नशे से अब लोगो को भरोसा ही नहीं होता की निकट भविष्य में कटनी में बढ़ते स्मैक के व्यापार पर किसी भी प्रकार का अंकुश लग सकेगा.

12 November, 2010

अबैध ईट भट्टो के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं...?

कटनी / अवैध ईट भट्टो का व्यवसाय जिले में बेधड़क जारी है लेकिन कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदार इस अवैध धंधे पर अंकुश लगा पाने में अक्षम है. शहर से लेकर तहसील एवं गाँव स्तर पर चल रहे अवैध ईट भट्टे  के इस व्यापार पर खनिज विभाग से इजाजत नहीं ली जाती.

जबकि शासन के निर्देशानुसार   ईट भट्टे चलाने के लिए बाकायदा खनिज विभाग से इजाजत लेनी पड़ती है लेकिन जिले में उंगलियों पर गिने जाने वाले भट्टे संचालको ने विधिवत शासन से अनुमति ली है जबकि लगभग आधा सैकड़ा ईट भट्टे अवैध रूप से संचालित हो रहे है.

कलेक्टर एम् शेलवेनद्रम की निष्क्रियता के चलते कटनी जिले में शासन प्रशासन में कही भी कसावट  नहीं दिखती इसीलिए शहर एवं आस-पास में अवैध रूप से धड़ल्ले  से ईट भट्टे चल रहे है. यह ईट भट्टे विशेष रूप से रहवासी क्षेत्र के पास चल रहे है जिनसे आसपास के इलाके में प्रदूषण फ़ैल रहा है, साथ ही राजस्व की हानी भी हो रही है. बताया जाता  है की इन भट्टो से निकलने वाले धुओ से आसपास के लोगो को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

प्रशासन से इस सम्बन्ध में तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा है शहरी क्षेत्र में चल रहे इन अवैध ईट भट्टो पर तुरंत रोक लगाईं जावे एवं उन्हें तुरंत बंद कराया जावे. खास बात यह है की ईट भट्टे पूरी तरह से अवैथ रूप से चल रहे है जिनकी वजह से उन लोगो को भी नुक्सान उठाना पड़ रहा है जो नियमानुसार अनुमति लेकर काम कर रहे है और शासन को राजस्व जमा कर रहे है.

हरियाली में शिक्षा का घोटाला

कटनी / हरित कोर योजना के तहत स्कूलों के आसपास पढ़-पौधे लगाने के लिए राशी तो मुहैया करा दी गई लेकिन अभी तक कई स्कूलों में इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है. हरियाली के नाम पर जारी हुए लाखो  रूपये से घोटाले  की बू आने लगी है.

पर्यावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूलों में हरियाली की पाठशाला लगाने की योजना है और इसके लिए बाकायदा राशी भी स्कूलों को दी जा चुकी है. लेकिन अभी तक इसका क्रियान्वयन न होने के कारण हरियाली के नाम पर जारी हुए लाखो रूपये से घोटाले की संभावना दिखने लगी है. कटनी जिले के सभी विकासखंडो में स्कूलों का चयन कर हरित कोर योजना (ईको क्लब ) द्वारा स्कूल के आसपास  पेड़  पौधे लगाने के लिए राशी मुहैया कराई गई है लेकिन अभी तक कई जगह इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है.

इस योजना के तहत प्रत्येक स्कूल को 2500 रूपये की राशी आवंटित की गई  है जो जिले के लगभग 250 स्कूलों को ईको क्लब में शामिल किया गया है इस हिसाब से लगभग 06  लाख रूपये शासन ने व्यर्थ ही बहा दिए और विभाग ने मात्र बोर्ड लगा कर अपनी खाना पूर्ति  कर ली.

11 November, 2010

मनरेगा के कार्यो में अब नहीं होगा भ्रस्टाचार

मनरेगा के कार्यो में अब नहीं होगा भ्रस्टाचार
कटनी / मनरेगा के अंतर्गत होने वालो कार्यो से मजदूरों को लाभ देने  के लिए सरकार ने नए निर्देश जारी किये है. इसके तहत पूर्व में शत-प्रतिशत मनरेगा के कार्य से स्वीकृत निर्माण कार्यो को निरस्त किया जाएगा. नए कार्यो पर होने वाले व्यय में से 60 प्रतिशत राशी मजदूरी पर तथा 40 प्रतिशत निर्माण में खर्च होगी, बाकि राशी अन्य मदों से ली जायेगी.

गौरतलब है की ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाले जाबकार्ड धारक मजदूरों को जीविका उपलब्द्ध करने  के लिए सरकार ने महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी मिशन शुरू किया है. अप्रैल 08 से शुरू हुई इस योजना में अभी तक लगभग पांच हजार लाख के आसपास राशी खर्च  की जा चुकी  है. इसके बाद भी न तो ग्रामीण  क्षेत्रो में विकास कार्यो में प्रगति दर्ज की गई और न ही मजदूरों को लाभ मिला. योजना में हो रही गड़बड़ियो को रोकने के लिए सरकार ने मनरेगा अधिनियम के अंतर्गत नए निर्देश जारी किये है. तुरंत प्रभाव से लागू हुए निर्देश के बाद इस योजना में घपलेबाजो  पर लगाम कसने में मदद मिलेगी

इस तरह होगी स्वीकृति
ग्रामीण विकास विभाग से आये आदेश के मुताबिक कन्वर्जन के कार्यो में होने वाले घपलो पर लगाम लगेगी तथा मजदूरों को लाभ मेलेगा. अभिसरण मद से होने वाले कार्य की स्वीकृति  के लिए अब मनरेगा के नियमानुसार त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं से अनुमोदन कारण होगा.

मजदूरों को मिलेगा लाभ
नए कार्यो के प्रारम्भ होने पर मनरेगा मद से मिली राशी में से 60 प्रतिशत राशी  अनिवार्य रूप से मजदूरी पर खर्च की जायेगी. इससे जिले के समस्त जाब कार्ड धारको, अर्ध कुशल कुशल मजदूरों को मजदूरी मिलना सुनिश्चित होगी.

रुक सकेगा भ्रस्टाचार
कार्यो की स्वीकृति की प्रक्रिया के तहत कलेक्टर द्वारा कार्य एजेंसी का निर्धारण किया जाएगा. प्रशासकीय स्वीकृति में अलग-अलग मदों से मिलने वाली राशी का स्पष्ट उल्लेख होने से सरकारी धन में घपला करने वालो पर शिकंजा कसा जा सकेगा.

ऐसे होगा निर्धारण
कार्य अनुमोदन के बाद तकनीकी स्वीकृति में पहली किश्त  की राशी मनरेगा मद से होगी. दूसरे भाग की राशी की व्यवस्था कन्वर्जन के अंतर्गत विधायक निधि या अन्य विभागीय योजना से की जा सकेगी. पंचायत एक्ट के तहत लेखा संधारण किया जाएगा.

विकास में मिडिया की भूमिका अहम्

तहसील स्तरीय पत्रकार कार्यशाला
कटनी / शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मिडिया की भूमिका अहम् है मिडिया योजनाओं में हो रही गड़बड़ियो अथवा कमियों की ओर शासन प्रशासन का ध्यानाक्रष्ट करके जहा एक ओर प्रशासनिक कसावट लाता है वही नागरिको को भी इस बारे में जागरूक करता है. इस आशय के विचार बहोरिबंद में आयोजित एक दिवसीय तहसील स्तरीय पत्रकारिता कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष शंकर महतो ने व्यक्त किये.
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता एस डी एम् एस  के अहिरवार ने की. उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा की तहसील में तहसील स्तर पर एक समिति का गठन किया जाएगा जिसमे प्रशासनिक अधिकारियो को भी शामिल किया जायेगा. यह समिति क्षेत्र में संचालित शासकीय योजना के अलावा विकास कार्यो के क्रियान्वयन में भी निगरानी रखेगी. पत्रकारों द्वारा पत्रकार भवन की मांग  उठाये जाने पर एस डी एम्  ने कहा की पत्रकार जगह का चयन कर प्रारंभिक औपचारिकताये पूरी कर दे तो वे इस सप्ताह के भीतर भवन के लिए भूमि आवंटित कर देगे.
विशिष्ट अतिथि सीताराम सेठिया ने कहा की देश के विकास में चौथे स्तम्भ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. मिडिया शासन प्रशासन की दशा और दिशा तय करता रहा है. उन्होंने पत्रकारों से यह अपेक्षा की है की वे निर्भीक और निष्पक्ष होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करेगे. क्षेत्र के  वरिष्ठ पत्रकार राजाराम अग्रहरी ने कहा की जबलपुर जैसे महानगर में पत्रकारिता की नई ऊचीय  छूने वाले स्वर्गीय अरुण शुक्ल बहोरिबंद क्षेत्र के ही रहे है. जो आज पत्रकारों के लिए आदर्श है. श्री अग्रहरी ने क्षेत्र के पत्रकारों से यह आवाहन किया की वे पत्रकारिता में वैसी ही लगन और निष्ठा  रखे जैसी स्वर्गीय अरुण शुक्ल की पत्रकारिता में देखी गई थी.

तहसील स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में सहायक जनसंपर्क अधिकारी कटनी एम् एल पवार, पत्रकार पुष्पेन्द्र मोदी, अनिल गौतम, अरविन्द अग्रहरी, मुकेश गर्ग, सचिन जैन, मनोज तिवारी, रमाकांत पौराणिक, मनोज गुप्ता, मनोज पटेल, संजीव गर्ग आदि की उपस्थिति रही, कार्यशाला स्थानीय बी आर सी कार्यशाला में आयोजित की गई.

10 November, 2010

धडा धड जारी हो रही सीसी

कटनी / महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के तहत होने वाले कार्यो की इन दिनों धडाधड सीसी जारी की जा रही है. यह सारी कवायद इसलिए हो रही है की जमीन पर पूरे  हो चुके  कामो को कागजो पर भी पूर्ण दिखाया जा सके. सूत्रों का दवा है की निर्माणाधीन कार्यो  की अधिक तादाद के चलते राशी मिलने में दिक्कत आ रही है.

इन दिनों रीठी जनपद में सीसी (कम्प्लीट सर्टिफिकेट) जारी करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है. जनपद में कर्मचारियों की ड्यूटी केवल इसी कार्य के लिए लगाईं गई है. वे सीसी में रह गई कमियों  को कम्प्लीट कर कोडिंग आदि का कार्य कर रहे है. बताया जाता है की दर्जनों की संख्या में सीसी जारी करने का कार्य फिलहाल जारी है. इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योकि पंचायतो द्वारा बहुत से काम जमीन पर नहीं कराये गए लेकिन जगजो पर वे कार्य पूर्ण दर्शा  दिए गए है. मनरेगा की वेबसाईट पर दिखाए जा रहे जनपद रीठी के कामो में जमीनी स्तर पर काम नहीं हुए है लेकिन उन्हें कागजो पर पूर्ण दिखाया जा चुका है.

सूत्रों के मुताबिक जनपद पंचायत रीठी में पदस्थ आर ई एस के इंजिनीअर बी बी गुप्ता द्वारा सीसी जारी करने के एवज में जमकर बसूली की जा रही है. इस इंजिनीअर से जनपद के सारे सरपंच और सचिव परेशान है. किसी  भी काम की सी सी जारी करने के बदले में इंजिनीअर द्वारा  दस से बीस हजार तक बसूले जाने की बाते सरपंच और सचिव द्वारा की जा रही है.

नाम न बताने की शर्त पर एक सचिव ने बताया की पाच लाख के काम में जो तीन वर्ष पूर्व का काम सेंक्सन है उस पर आज की महगाई में सीमेंट, रेट, गिट्टी के दाम बढ़ जाने से पहले ही जैसे तैसे काम निपटाया गया है उस पर सीसी जारी करने के नाम पर इंजिनीअर गुप्ता खुले आम पैसा मांग रहे है.

जैसे तैसे क्षेत्र के लोगो को भ्रष्ट सीइओ झरिया से मुक्ति मिली है तो अब वर्षों से जमे आर ई एस के इंजिनीअर गुप्ता द्वारा खुले आम वसूली से सचिव व सरपंच परेशान है लेकिन अपनी व्यथा किसी से कह नहीं सकते क्योकि हर रोज इन्ही से काम पड़ता है.

कुछ ऐसे भी काम है जो हुए ही नहीं और उनकी सीसी जारी कर दी गई है ऐसा ही एक मामला  ग्राम पंचायत कैना का है जहा डेहरिया नाला और बड़ा तालाब बंधान का काम म न रेगा के तहत हुआ ही नहीं जिसकी रिकवरी सचिव ने भर भी दी है फिर इंजिनीअर गुप्ता ने इसकी सीसी फिर कैसे जारी कर दी है ?

न शौचालय बने न हुआ पौधरोपण

कटनी.. जिले की समस्त जनपद पंचायतो के अंतर्गत निर्मल ग्राम-निर्मल वाटिका योजना में अति गरीबी रेखा और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों के यहाँ शौचालय निर्माण कर तीन फलदार और दो छायादार  पौधों का रोपण किया जाना था. लेकिन अभी तक न तो शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हो सका है और न ही हितग्राहियों  के यहाँ पौधे लग सके है, जबकि खुले में शौच की प्रथा का उन्मूलन और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशासन ने एन आर जी  पी के तहत यह योजना चलाई थी.

इस योजना में मजदूरी और निर्माण सामग्री के तहत हजारो रूपये खर्च भी किये लेकिन इसका लाभ सम्बंधित हितग्राहियों तक नहीं पहुच सका. जिसके कारण शासन की इस योजनाओं को लेकर लोगो में रोष का माहौल देखा जा रहा है. बताया जाता है की जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचायतो में तत्कालीन सी ई ओ सुरेश झरिया और सचिव की मिलीभगत से छप्पन ग्रामपंचायतो में लाखो के वारे न्यारे किये गए है.  योजना की देखरेख में लगे कर्मचारी कभी भी स्थल परीक्षण पर नहीं गए और आफिस में बैठे-बैठे ही अवलोकन की सही तस्वीर पेश करते रहे किन्तु ग्राम पंचायत की लापरवाही की वजह से न तो बारिश के पूर्व शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ और न ही खोदे गए गड्ढे के बचाव के लिए कोई उपाय किये गए.

ऐसे में अधिकांस गड्ढे बारिश के पानी से धस गए तो दूसरी तरफ निर्मित शौचालय भी बारिश की भेट चढ़ गए. इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है की ग्राम पंचायतो में हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुचने में कितनी गंभीर और  किस तरह कर्तव्यों का निर्वाह कर रही है. जानकर सूत्रों की माने तो  पंचायतो की इन्ही लापरवाही के चलते योजना की आधे से अधिक राशी निर्माण के पूर्व ही बर्बाद हो चुकी है और रिकार्ड में बारिश व अन्य कारणों से मटेरियल व निर्माण कार्य में नुक्सान दर्शा दिया जाता है. परिणाम स्वरुप योजनाओं का प्रतिसाद ग्रामीणों को मिले उससे पहले ही योजनाये लापरवाही की भेट चढ़ रही है.

नहीं लग सका एक भी पौधा
ग्राम पंचायतो में न तो निर्मल ग्राम के शौचालय गड्ढे का कार्य पूरा हुआ और न ही निर्मल वाटिका योजना के तहत पौधे रोपे गए. बताया जाता है की निर्मल वाटिका के अंतर्गत प्रत्येक हितग्राहियों के यहाँ पांच-पांच पौधे रोपे जाने थे. जिसमे से तीन पौधे फलदार और दो पौधे छायादार लगाने के निर्देश थे लेकिन  इस योजना की वास्तविकता यह है की अभी तक एक भी हितग्राही इस योजना से लाभान्वित नहीं हो सका है और न ही पंचायतो द्वारा पौधरोपण को गंभीरता से लेकर समय रहते पौधे लगाने की पहल की जा रही है.

खर्च करना था 4200 रूपये
हितग्राही को निर्मल ग्राम और निर्मल वाटिका के तहत लाभान्वित करने के लिए शासन ने प्रत्येक हितग्राही पर 4200 रूपये खर्च करने के निर्देश दिए थे. जिसके तहत 2100 रूपये की लागत से शौचालय के गड्ढे निर्माण और शेष राशी से तीन फलदार पौधे और दो छायादार पौधे खरीदकर लगाने को कहा था, लेकिन पंचायत ने इन योजनाओं का किस कदर मखौल उड़ाया है इसका अंदाजा आधे अधूरे गड्ढे और शौचालय से लगाया जा सकता है. यही नहीं जो पौधे रोपे जाने थे वे भी हितग्राही तक नहीं पहुचे है. 

09 November, 2010

अब लग सकेगा भ्रष्टाचार पर अंकुश ?



ग्राम पंचायतो में विकास कार्य कराये जाने के लिए तेरहवे
वित्त आयोग की गाइड लाइन तय हो गई है.इसके अंतर्गत पंचायतो को जारी मार्गदर्शिका के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद ही काम शुरू हो पायेगे. सरपंच एवं सचिव इस मद में मिली राशी से जरूरी होने पर ही पंद्रह सौ रूपये निकल सकेगे. काम के लिए होने वाला भुगतान एकाउंट पेयी  चेक के मध्यम से होगा.

ग्राम पंचायतो में मूलभूत विकास कार्य कराये
 जाने के लिए सरकार ने तेरहवे वित्त आयोग की अनुशंसा पर वर्ष 2010 -2011 के दौरान खर्च होने वाली राशी के वितरण एवं क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शिका बना दी है. इसके अंतर्गत तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति के बाद समय-समय पर उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन किया जायेगा. कलेक्टर व जिला पंचायत सी ई ओ को निर्देश दिए गए है की सरपंच एव सचिव इस मद से पंद्रह सौ रूपये से ज्यादा का आहरण न कर सके. साथ ही नगद राशी के अग्रिम आहरण के बाद भी इसका दुरूपयोग रोकने के लिए नियम बनाए गए है.

जनप्रतिनिधियों की निगाह रहेगी
तेरहवे वित्त की राशी से स्वीकृत कार्यो पर नियंत्रण रखने के लिए काम की पूरी जानकारी जिला एवं जनपदों की सभा में रखी जाएगी. कार्यो की निगरानी  के लिए सम्बंधित जनपद सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्यों को पूरी जानकारी दी जायेगी.

क्या कार्य होगे
* निर्माण  कार्य की पंजियो का संधारण कठोरता से लागू किया जाएगा.
* पंचायत संपत्तियों एवं योजनाओं का वर्षवार विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा
* राज्य वित्त एवं केंद्र वित्त सहित अन्य मद से खर्च होने वाली राशी से निर्माण का व्योरा पी सी ओ दर्ज करेगे
* उपयंत्री करेगे सत्यापन कार्य
* पंजियो के संधारण की जम्मेदारी आर ई एस की होगी
* कन्वर्जेन्स के मध्यम से एक कार्य पर भी खर्च हो सकेगी राशी
* करारोपण कार्य ग्राम पंचायतो को कराना होगा
* पिछले माह से बनाना होगा मासिक व्यय पत्रक
* २० दिसंबर तक पंचायत राज संचालनालय तक भेजेगे कलेक्टर एवं सी ई ओ रिपोर्ट

लगी इन पर रोक
* म न रे गा का अंतर्गत होने वाले कार्य इस मद से नहीं होगे
* सीमेंट, कंक्रीट एवं मुरुम, गिट्टी रोड तेरहवे वित्त की राशी से नहीं होगे
* तालाबो का निर्माण अलग मद से होगा.

शासन के एक निर्देश में तेरहवे वित्त की राशी से होने वाले कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर कराने के लिए ई ई आर ई एस, ऐ ई आर ई एस, सी ई ओ जनपद एवं पंचायत इंस्पेक्टरों को निर्देशित किया गया है. इस कार्य पर लापरवाही बरतने पर कठोर कार्रवाई की जावेगी.

03 November, 2010

मिठाई पर डायन महगाई का डाका

Akhilesh uapdhyaya / katni
दीपोत्सव के मद्देनजर शहर के बाजार पूरी तरह सजकर तैयार है और बड़ी हुई महगाई ने लोगो को सीमित कर दिया है. शहर में दीपावली के लिए तैयार की जा रही मिठाई के दाम जहा 150 से 500 रूपये प्रति किलो है. वही आतिशबाजी  की कम आवक और बढी हुई कीमतों से इस बार आतिशबाजी फोड़ने के शौकीनों को निराशा ही हाथ लगी है.
अकेले जिला मुख्यालय पर ही इन दिनों 150  क्विंटल  दूध की खपत है, जबकि जिले में यह आकड़ा 480 क्विंटल को पार कर रहा है, साथ ही रेडीमेड मावे की हपत 20 से 25 क्विंटल बताई जा रही है. ग्राहकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से शहर की मशहूर मिठाई की दुकानों पर इस दिवाली पर खास किस्म की मिठाईया तैयार कराई जा रही है. खास बात यह है की इन दुकानों पर मिठाईयों में ड्राई फ्रूट  का चलन तेजी से बढ़ा है.

क्या कहते है लोग

शिक्षक संजय सकवार का कहना है की भले ही शासकीय कर्मचारियों के वेतन बढ़ गये हो लेकिन महगाई ने भी जबरदस्त विस्तार कर लोगो की कमर तोड़ दी है
वही हाथ ठेला चलाकर अपना परिवार चलाने वाले रमेश का कहना है की हम मजदूरों  के लिए दीपावली की खरीदारी तो आज के दौर में कभी न पूरा होने वाले स्वप्न की तरह है


हाय महगाई
दीपावली पर मुह का जायका मीठा  करना इस बार बास्तव में बहुत महगा है. जहा अच्छी गुणवत्ता  वाली सभी mithaaiyaa   200 रूपये किलो से ऊपर बिक रही है.
महगाई का सबसे ज्यादा असर आतिशबाजी की सामग्री पर देखने को मिल रहा है और आलम यह है की हर ब्रांडेड आईटम आम ग्राहकी की पहुच से बाहर है. इसका एक कारण तो बड़ी हुई  महगाई है दूसरी तरफ इस बार शिवकाशी उत्तर प्रदेश से आतिशबाजी की कम आवक भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है.

छात्रावास स्थापना दिवस मनाया




कटनी आदिमजाति आश्रमशाला चिखला में मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के साथ-साथ छात्रावास स्थापना दिवस मनाया गया. इस अवसर पर जनपद पंचायत रीठी सी ई ओ पंकज जैन ने कहा की सरकार आदिवासी बच्चो के चहुमुखी विकास के प्रयास कर रही है और इन आश्रम शालाओ में पढने वाले बच्चे संस्कारवान बने और देश के अच्छे नागरिक बने ऎसी सरकार की मंशा है.

जिला पंचायत सदस्य सुरेश सकवार ने कहा की आश्रम शाळा में पढने वाले बच्चे अपने माँ-बाप की आशाओं के अनुरूप पढाई कर उनका नाम रोशन करे. इस अवसर पर प्रधानाचार्य शर्मा, शुशील राय, ग्राम पंचायत पटोहा सरपंच दिग्विजय सिंह, ग्राम पंचायत सचिव ने भी संबोधित किया. इस दौरान भाषण, निबंध, गीत प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार भी बाटे गए. आभार छात्रावास अधीक्षक कुंजबिहारी परोहा ने व्यक्त किया. इस दौरान चिखला ग्राम के ग्रामीणजन भी उपस्थित रहे.

अनुदान में हो रहा भ्रस्टाचार

कटनी.
केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा कृषको को सिचाई हेतु स्प्रिंकलर सिस्टम ट्यूब बेल एवं अन्य कृषि उपकरणों पर दिए जाने वाले अनुदान में भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है. कृषि विभाग के अधिकारी अनुदान मिलने वाले कृषि उपकरणों एवं ट्यूबबेल के कोटेशन के आधार पर भुगतान सीधे उपकरण एवं ट्यूबबेल सप्लाई करने वाली एजेंसी को करते है.


उनमे अधिकारी भारी भ्रस्टाचार करते है. यदि कोई कृषक बीस फुट लम्बा सिचाई पाईप किसी एजेंसी से सीधे नकद रूपये देकर खरीदता है तो उसकी कीमत चार सौ बताई जाती है तथा वही पाईप अनुदान के रूप में कृषि विभाग के अधिकारियो की मिलीभगत से किसानो की 650 रूपये में दिया जाता है. जिससे कृषको को मिलने वाले अनुदान की कीमत 75 प्रतिशत से घटकर लगभग 40 प्रतिशत पर आ जाती है.


जिले के किसानो ने कलेक्टर से मांग की है की इस तरह होने वाले लाखो रूपये के भ्रस्टाचार की न केवल जाँच की जाए बल्कि इस पर तत्काल अंकुश लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाए. साथ ही ऎसी व्यस्था की जाए की कृषक अपनी इच्छानुसार जहा से चाहे वहा से सिचाई उपकरण खरीद सके एवं अनुदान की राशी सीधे कृषको के खाते में पहुचे.

02 November, 2010

कैसे बचाए दिवाली पर बिजली

दिनों दिन बढ़ रही विद्युत् खपत को लेकर विद्युत् कंपनी के अधिकारी चिंतित है. कंपनी अधिकारियो द्वारा सुझाव दिया गया है की अगर आम जन चाहे तो वह अपने विद्युत् बिलों  पर नियंत्रण कर सकते है, साथ ही कंपनी की मदद भी कर सकते है.
इस समय सभी उपभोक्ता बढे हुए बिलों से परेशान है. उनका कहना है की कंपनी द्वारा जानबूझकर अधिक बिल दिए जा रहे है लेकिन हकीकत यह बताई जा रही है की उपभोक्ता स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार है. अगर उपभोक्ता तरीके से विद्युत् का उपयोग करे तो वह अपने बिल पर नियंत्रण रख सकता है.
किस पर कितनी खपत
उपकरण                विद्युत् भार          अवधी               खपत
4 बल्ब                  240 वाट               6 घंटे                 1 .44 यूनिट
2 सी ऍफ़ एल       14 वाट               6 घंटे                 0 .44 यूनिट
                                                    अंतर                 एक यूनिट
फ्रिज                      150 वाट            12 घंटे              1 .80 यूनिट
टी वी                     150 वाट              03 घंटे             0 .44 यूनिट
प्रेस                        750 वाट              01   घंटे                 0 .75 यूनिट
गीजर                     3000 वाट             02 घंटे                6 .00 यूनिट
ऐ सी 1 .5 टन         2250  वाट             06 घंटे                 13 .5 0   यूनिट
वाशिंग मशीन          750 वाट              आधा घंटे            ०.375 यूनिट
विद्युत् मोटर            746 वाट                दो घंटे               1 .5 यूनिट
कम्पुटर सेट           200 वाट               तीन घंटे               0 .6 यूनिट

कैसे करे बचत
* बल्ब की जगह सी ऍफ़ एल का उपयोग करे. सी ऍफ़ एल भी तीन तथा पांच वाट की उपयोग करे. सी  ऍफ़ एल से रोशनी अधिक एवं विद्युत् खपत बहुत कम होती है.
* दिन  में या रात को अगर अधिक समय तक टी वी बंद रखना है तो उसका प्लग निकल दे या स्विच से बंद कर दे.
* बल्बों की झालर न लगाए क्यों की जीरो वाट का बल्ब 15 वाट का होता है. पतले तारो की या कम खपत वाली झालर का उपयोग  करे.
* दुकानदार दिन में अनावश्यक लाईट जलाते व रात के समय बाहर अत्यधिक रोशनी करते है वह उस पर नियंत्रण करे.
* उपभोक्ता विद्युत् उपकरण अच्छी क्वालिटी के उपयोग करे. अधिकांशतः स्टार   रेटिंग वाले उपकरण उपयोग करे.अच्छे उपकरणों से विद्युत् कम खपत होती है, लोकल व घटिया उपकरणों से बिजली खर्च होती है.
* हीटर का उपयोग करी न करे.