15 November, 2010

109 गांवो में अवैध शराब का नेटवर्क

कटनी / वैध शराव के कारोबार की आड़ में अवैध  शराब का व्यापार कर शासन को करोडो का चूना लगाया जा रहा है. शराब व्यवसाय के कुछ बड़े ठेकेदार पुलिस और आबकारी अमले के कुछ भ्रष्ट अधिकारियो के सहयोग से इस कारनामे को खुले आम अंजाम दिया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार रीठी, स्लिम्नाबाद, बहोरिबंद, कैमोर  थाना तथा सलैया और बिलहरी पुलिस चौकी  क्षेत्रो के लगभग एक सौ नौ गांवो में अवैध शराब के अड्डे खुले आम चल रहे है. इस काले कारोबार को शराब  के वैध ठेकों की आड़ में चलाया जा रहा है, हालाकि वैध ठेके तो तीन चार जगहों के ही है लेकिन काला कारोबार इन ठेकों से सटे सैकड़ो गांवो तक पहुच चुका है.

इस प्रकार समाज की जड़ो को खोखला  करने वाली यह अवैध शराब युवा पीढ़ी को दीमक  की तरह चाट रही है. ऐसा नहीं है की आबकारी विभाग और पुलिस विभाग को इसकी भनक न हो. सच तो यह है की दोनों विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियो के हाथ के नीचे ही यह कारोबार हो रहा है. भ्रष्ट अधिकारी भ्रसटाचार में आकंठ डूबे है. शराब के अवैध कारोबार की ओर से आँख मूँद लेने के एवज में उन्हें बड़े शराब ठेकेदारों की ओर से एक बड़ी राशी भी मिलती है. यह राशी इतनी अधिक है की ये अधिकारी धनकुबेर बन बैठे है. कुछ शराब ठेकेदारों ने तो इन अधिकारियो को वाहन, फ्लेट और अन्य दूसरी सुविधाए भी उपलब्द्ध करवा रखी है. इन सुविधाओं के एवज में भ्रस्टाचारी शराब ठेकेदार का हुकुम बजाने लगते है. आखो के सामने बिकती हुई अवैध शराब भी उन्हें दिखाई नहीं देती है. इस प्रकार शासन को धोखा देकर अपने घर भरने का सिलसिला लगातार जारी है.. शहर के कुछ ठेकेदार तो इस कारोबार के जरिये धन कमाने के कीर्तिमान बना रहे है. सीधी बात है की यदि वे करोडो कमा रहे है तो चंद टुकड़े कुछ कर्मचारियों को दे देने में उनका कुछ खास नहीं बिगड़ेगा.

यदि कभी कोई पुलिसकर्मी इन बड़े शराब ठेकेदार की शराब पकड़ भी लेता है तो चंद मिनटों में इस अवैध शराब को वैध बना दिया जाता है. यह सब होता है आबकारी विभाग में मौजूद इनके सरकारी नुमाइंदो की मदद से दरअसल आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियो को जैसे ही शराब पकडाने की सूचना मिलती है वे इस अवैध शराब के कागज तैयार कर इसे वैध बना देते है. इस प्रकार पुलिस के लिए भी कार्रवाई करना मुस्किल हो जाता है.

ऐसा नहीं है की पुलिस विभाग इस मामले में साफ़ सुथरा हो. पुलिस अधिकारियो को अवैध शराब पकड़ने के लिए दूसरे क्षेत्रो के थाना प्रभारियो की मदद लेनी पड़ती है. शराब के ठेकेदार इतने शातिर है की यह स्वयं थोड़ी-थोड़ी समय पर फर्जी शराब भी पकड़वाते  है. जो की सौ या दो सौ रूपये से ज्यादा की नहीं होती है. यह कार्रवाई इसलिए होती है ताकि इनके बड़े काले कारोबारों पर किसी का ध्यान न जाए.