14 November, 2010

तेजी से पैर पसार रहा नशे का कारोबार

कटनी / एक ओर जहा प्रशासन तथा पुलिस नशा मुक्ति के नाम पर दिखावा करके लाखो रूपये यू ही बहा देते है तो वही पुलिस के सरक्षण में जिले में स्मैक  जैसा आधुनिक नशा जिला  पुलिस के प्रभावशाली वरिष्ठ पुलिस कर्मियों के सरक्षण में इन दिनों एक बड़े कारोबार का रूप धारण कर चुका है.

जानकर सूत्रों के अनुसार प्रारंभ में जबलपुर से छुटपुट शौकीनों एवं अपराधी तत्वों के जरिये शहर में प्रवेश करने वाले इस अत्यंत घातक नशे ने अब शहरी क्षेत्र के अलावा कस्बो और ग्रामीण अंचल तक अपनी घुसपैठ बना ली है. इसके पूर्व गांजे का अवैध व्यापार संचालित करने वाले कुछ बड़े कारोबारियों द्वारा पुलिस की मदद से इसे चौतरफा प्रचारित प्रसारित करने में अहम् भूमिका निभाई गई है.

मात्रा के अनुपात में मुनाफा कम होने और उसका भी एक बड़ा हिस्सा पुलिस सहित आबकारी विभाग के अपने सरंक्षको और सहयोगियों आदि के साथ बंट जाने से गांजे के मुकाबले स्मैक का धंधा चूकी इन सभी के लिए भारी भरकम लाभ कमाने के अवसर दे रहा है अतः इस कारोबार के विस्तार में इनकी व्यापक दिलचस्पी है. नतीजन अब स्मैक की एक ग्राम के भी दसवे हिस्से वाली सफ़ेद भूरे जहरीले पाउडर की टिकिट के नाम से जानकारों के बीच में चर्चित पुडिया शहर के भीतर और  बाहर दूर-दूर तक थोड़े प्रयासों से सहज उपलब्द्ध होने लगी है. इसी तरह जिले भर में प्रतिदिन दो ढाई  हजार टिकटों की खपत का अनुमान है. जाहिर है की इस सबके पीछे एक बड़े संगठित नेटवर्क और उसके कुछ सञ्चालन केन्द्रों की अहम् भूमिका है. इन केन्द्रों के संचालको की पुलिस के साथ सीधी सौदेबाजिपूर्ण साठ्गाथ तथा सम्बन्ध है.

यही कारण है की जिला मुख्यालय के स्टेसन, बस स्टेंड, घंटाघर, नई बस्ती जैसे कई प्रमुख इलाको में स्मैक बिक्री के छोटे-बड़े केंद्र तेजी से उभर आये है जबकि संत नगर स्थित बंद शंभू टाकिज क्षेत्र के इर्द गिर्द तो असमाजिक तत्वों के एक गिरोह द्वारा जिसमे महिलाओं तक  की भागीदारी बताई जाती है द्वारा इस घातक नशे के सबसे बड़ा कारोबार खुलेआम संचालित किये जाने की जानकारिय सामने आ रही है.
आश्चर्यजनक  रूप से इस गिरोह के स्मैक विक्रेता सदस्यों से पुलिस महकमे के कर्मचारी प्रायः रोजाना दिन रात कई-कई बार संपर्क करते और आपस में लेन-देन करते देखे जाते है और स्मैक विक्रय के काले धंधे को इनकी ओर से इस तरह सरेआम प्रोत्साहन प्रदान किये जाने से इन पर और इनकी काली करतूतों के विरुद्ध कोई मुह खोलने का सहस नहीं कर पाता.

शहर ही नहीं उपनगरीय क्षेत्रो में भी टिकट के नाम से मशहूर हो चुकी स्मैक तस्करों के जरिये जबलपुर से कटनी लाई जा रही है. स्टेसन, घंटाघर में स्मैक की पुडिया बेहद आसानी से उपलब्द्ध है. कुछ समय पूर्व जैसे गांजे की बिक्री ने धीरे-धीरे जोर पकड़ा  और अब यह गली कूचो में आसानी से उपलब्द्ध हो रहा है वैसे ही स्मैक के गोरखधंधे में रोक नहीं लगाई गई तो यह भी गांजे की तरह हर गली, नुक्कड़ में बिकता नजर आएगा क्योकि इसकी लत में अब बच्चे, युवा तक आ चुके है.

पुलिस और अपराधी तत्वों की मिलीभगत से फल फूल रहे इस घातक नशे से अब लोगो को भरोसा ही नहीं होता की निकट भविष्य में कटनी में बढ़ते स्मैक के व्यापार पर किसी भी प्रकार का अंकुश लग सकेगा.