17 November, 2010

आदिवासी सरपंचो के साथ सौतेला व्यवहार

कटनी / हरिजन तथा आदिवासी वर्ग के विकास के लिए मध्य प्रदेश सरकार कितना भी प्रयास कर ले लेकिन मैदानी स्तर पर उसकी हकीकत तो कुछ और ही कहानी कहती है. दलित एवं आदिवासी समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए राज्य सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतो एवं नगरीय निकायों में उनके लिए पदों का आरक्षण तो कर दिया जाता है पर जब इस समाज के लोग जनप्रतिनिधि बन जाते है तो इन्हें काम करने नहीं देते विशेष रूप से ग्राम पंचायतो में तो यह आये दिन देखा जा सकता है.

आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित ग्राम पंचायतो में दबंगों द्वारा इनकी  लगातार उपेक्षा की जाती है उसे अपमानित करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा जाता. प्रायः पूरे जिले इसी प्रकार की स्थिति है. आदिवासी वर्ग के सरपंचो को प्रताड़ित किया जा रहा है. उक्त आशय की शिकायत  मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद् द्वारा गत दिवस जिला कलेक्टर से की गई है.

जिला प्रशासन को भेजी गई अपनी शिकायत में आदिवासी परिषद् के जिलाध्यक्ष बलवान सिंह जगैत ने रीठी जनपद की ग्राम पंचायत बकलेहता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया है की यहाँ पूर्व सरपंच द्वारा कपिलधारा योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कराये गए कार्यो में व्यापक अनियमितताए की है. उक्त कार्य में सचिव भी शामिल रहे.इस पंचायत में  भगवान दास लुहार के नाम पर फर्जी कुए का निर्माण दर्शाया गया. उसकी  राशी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई. सरोजबाई पत्नी स्वर्गीय सीताराम लोधी एवं मस्तराम लोस्धि  के नाम कपिल धारा योजना के तहत कूप निर्माण स्वीकृत हुआ लेकिन कार्य अधूरी अवस्था में ही छोड़ दिया गया. जबकि उक्त कार्य की पूरी राशी पंचायत के खाते से निकाली जा चुकी  है. राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण के काम में फर्जी मस्टर रोल भरकर मजदूरी भुगतान के नाम राशी हडपी गई. उक्त सभी कार्य अभी तक अधूरे पड़े है.

वर्तमान में यह पंचायत आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित की  गई थी और यहाँ से आदिवासी अजीत सिंह सरपंच चुने गए है . मौजूदा सरपंच द्वारा ग्राम में विकास कार्यो की योजना अधिकारियो के सामने प्रस्तुत किये जाने पर उन्हें पूर्व में लंबित कार्य कराये जाने की नसीहत दी जा रही. हकीकत यह है की जो कार्य पूर्व पंचायत द्वारा अधूरी स्थिति में छोड़ दिए गए है उनकी राशी निकाली जा चुकी है.

ऐसे में वर्तमान सरपंच उक्त अधूरे कार्य कार्य कराने के लिए राशी की व्यस्था कहा से करे. यह उनके समझ के बाहर है. यह भी बताया गया है की उपसरपंच द्वारा सरपंच अजीत सिंह के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है. विकास कार्यो  के लिए कमीशन की मांग की जाती है. नहीं देने पर सरपंच को डराया धमकाया जाता है. उपसरपंच एवं सचिव द्वारा सरपंच के फर्जी सील और हस्ताक्षर  से राशी का आहरण भी कर लिया जाता है. इन सब की शिकायत पूर्व में भी प्रशासन  से की  जा चुकी है पर अब तक प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है.

आदिवासी परिषद् द्वारा गत दिनों पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को भी इस सम्बन्ध में लिखित शिकायत सौपी गई थी . साथ ही आदिवासी सरपंच को धमकाने उसके साथ गाली गलौच कने वालो के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज करने  की मांग की गई थी. परिषद् के जिलाध्यक्ष बलवान सिंह जगैत ने कहा है की  जिले में आदिवासी जन प्रतिनिधियों के साथ हो रहे सौतेले व्यव्हार में जल्द सुधार नहीं किया गया तो आदिवासी विकास परिषद् आन्दोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो जायेगी.