24 November, 2010

मोबाइल से याददाश्त गायब हुई

आजकल युवाओं  के हाथो में सुबह से शाम तक मोबाईल देखने मिलता है. चौबीसों घंटे सुबह हो या शाम, घर हो या बाहर, पैदल हो या फिर किसी  वाहन पर सभी अपने सेल फोन पर बाते करते ही दिखते है.
आज सेल फोन इन युवाओं के लिए अपने आप को आधुनिक और स्टाईलिश दिखाने का जरिया बन गया है. या कहे तो यह आज उनका स्टेटस सिम्बल बन गया है. विद्यर्थियो के हाथो में भले ही किताब कापिया न दिखे लेकिन आपको उनको पास हेंडसेट जरूर देखने को मिल सकता है.
विज्ञानं के चमत्कारों में से एक मोबाइल के जहा बहुत से लाभ है तो दूसरी तरफ इसके नुक्सान भी कम नहीं  है . और शायद आज के युवा इस बात से अनजान है की अधिक समय तक मोबाईल के उपयोग से शरीर पर इसका क्या दुष्प्रभाव पड़  रहा है.
विशेषज्ञों के अनुशार सेल फोन शरीर के विभिन्न अंगो पर घातक प्रभाव पंहुचा रहा है. कहा जाता है की किसी भी चीज का हद से अधिक उपयोग करना नुकसानदायक ही होता है.
सेल फोन युवाओं की जीवन शैली का केवल अंग ही  नहीं बल्कि आज ऐसा साथी हो गया है जिसके बिना उनका एक पाल भी जीना कठिन हो गया है. अक्सर देखने में आता है की आज के युवा चाहे वे यात्रा में हो, खाली खली समय में हो या किसी  के इन्तजार में हो वे मनोरंजन करना चाहते है और इसके लिए कोई भी कीमंत चुकाने के लिए तैयार है.
इसलिए चिकित्सको  ने सचेत किया है की मोबाईल फोन के इस्तेमाल से होने वाली मौते धूम्रपान से होने वाली मौतों की तुलना में ज्यादा हो सकती है.
यह बात सही भी है पहले बच्चो की जुबान पर कोई भी फोन नंबर या पता रटा होता था लेकिन अब उसी नंबर को मस्तिष्क में रखने की जगह अब मोबाइल में फीड कर दिया जाता है.
 डाक्टर आर बी सिंह का कहना है की मोबाईल का ज्यादा उपयोग बच्चो  की एकाग्रता पर तो असर डालता ही है साथ ही उसकी याददाश्त पर भी बुरा असर पड़ता है. अब बच्चो के दिमाग की अधिक कसरत ही नहीं हो पाती. हर पाल कानो से सेल फोन के इअरफोन   लगाकर रहने वाले इन बच्चो की सुनने की शक्ति भी प्रभावित हो रही है.