21 November, 2010

गुटखा पाउच की लत ने बिगाड़ी सेहत

कटनी / आज कल स्कूलों में पढने वाले छात्रो पर गुटखा-पाउच संस्कृति ने अपना बर्चस्व जमा रखा है. गुटखा कंपनियों के आकर्षक विज्ञापनों तथा फैशन के प्रभाव में आज स्कूल कालेज के लड़के ही नहीं लडकिया भी तम्बाकू युक्त धीमा जहर गुटखा गटक रही है. स्कूलों, कालेजो से रोज निकलने वाला पाउचो का कचरा स्वयं अपनी कहानी बया कर रहा है.
न केवल शहर बल्कि सुदूर बसे ग्रामीण अंचलो में भी तम्बाकूयुक्त गुटखा चबाना  आज फैशन बनता जा रहा है. आज स्कूलों में भी गुटखा संस्कृति बढती जा रही है. अब तो लडकियों में भी इसकी लत होना आम बात हो गई है, लोग बैठे बिठाए अनेक बीमारियों के लिये दावत दे रहे है.
स्कूलों में पाचवी से बारहवी तक के बच्चो में पाउच संस्कृति बढ़ रही है. विद्यालयों के जबावदार शिक्षक और पालक भी इन सब बातो से बेखबर है. स्कूलों में सुबह निकाले जाने वाले कचरे और यहाँ की दीवारे स्वतः ही इस नशे की गिरफ्त में आये नवजवानों की कहानी कहती है.
बीते ज़माने में शहरी दुस्प्रभावो से ग्रामीण लोग दूर हुआ करते थे लेकिन आज स्थिति बिलकुल उलटी है. अब शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में गुटखा खाने वाले बच्चो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. स्कूल कक्षों के अलावा मैदानों में व कमरों के आसपास बिखरे रंग-बिरंगे पाउच के खाली पैक यह हकीकत स्वतः ही बया कर रहे है. ग्रामीण अंचल में बच्चो के माता-पिता इन हरकतों पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे है. इस कारण बच्चे असमय इस लत का शिकार हो जाते है.
ऐसा नहीं है की इस शौक में सिर्फ लड़किया ही शामिल है. महिलाओं तक भी गुटखा पाउच अपनी पहुच बना चुके है. आजकल यह नशा जीवन जीने का स्टेटस सिम्बल बन गया है.
स्कूल, कालेजो के आसपास पान की गुमटियों पर गुटखा पाउच आसानी से मिल जाते है, प्रशासनिक स्तर पर इनकी बिक्री रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जाती, इस कारण आज की युवा पीढ़ी इन नशीली वस्तुओ का शिकार होकर अपना जीवन बर्बाद कर रही है और प्रशासन बेखबर बना हुआ है.