26 November, 2010

खाद्य पदार्थो में जमकर हो रही मिलावट


कटनी / शहर के कुछ मुनाफाखोर दुकानदारो ने लाभ कमाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट के लिए एक से बढ़कर एक विकल्प तैयार कर लिए है. शहर की कुछ दुकानों पर खाद्य पदार्थो में हानिकारक पदार्थ मिलाकर  व्यापारी जमकर लूट रहे है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय शक्कर, हल्दी, लौंग, काली मिर्च और यहाँ तक की दूध और खाद्य तेलों के भी सस्ते विकल्प तैयार लिए गए है. मिलावट के तरीके भी अजीबोगरीब है उनके कुछ उदहारण यहाँ प्रस्तुत है -
चावल के चूरे को चीनी में मिलावट के लिए प्रयोग किया जा रहा है. इससे चीनी का वजन बढ़ जाता है वही ग्राहक को शक भी नहीं होता. हालाकि इस मिलावटी चीनी को आप कितनी ही मात्रा में खाद्य पदार्थ  में डाल दीजिये मिठास नहीं आएगी. और तो और बाजार में हर दुकान की शक्कर अलग-अलग मिल रही है. किसी दुकान की शक्कर को कम मात्रा में डाल देने पर भी मिठास आ जाती है तो कही शक्कर की भरपूर मात्रा भी मिठास नहीं ला पाती है. कई बार चाय में शक्कर डालने के बाद छानते समय सफ़ेद चूरा भी मिलावट की कहानी  बया करता है.

इसी प्रकार   चावल में इस समय सफ़ेद रंग के बारीक पत्थर धड़ल्ले  से मिलाये जा रहे है जो की चावल के रंग में मिल जाते है और इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है. चावल खाने पर ही इस बात का अहसास होता है की इसमें कंकर है, इन पत्थरो के लगातार सेवन से पथरी और आंत सम्बन्धी रोग होंने की आशंका बढ़ जाती है.
इतना ही नहीं काली मिर्च में पपीते के बीज और लौंग जैसे मसालों में लकड़ी की मिलावट भी की जा रही है. बात यही तक रहती तो भी गनीमत थी लेकिन चिंताजनक बात यह है की कुछ हानिकारक पदार्थो की मिलावट करने से भी दुकानदार नहीं चूक रहे है, इस समय हल्दी में पीली मिटटी , लाल मिर्च में गेरू, दूध में सिंथेटिक पदार्थ, खाद्य तेल में जहरीले रसायनों का खुलकर प्रयोग किया जा रहा है. यह मिलावटी माल तुरंत तो असर नहीं करता लेकिन यह धीमा जहर मानव स्वास्थ्य को बुरी तरह चौपट कर देता है.
खाद्य  विभाग भी कभी कभार छापामार कार्रवाई कर सेम्पल जब्त करता है. इसी कारण दुकानदारो के हौसले बुलंदियों पर है. वे बेख़ौफ़ होकर मिलावटी माल बेच रहे है.