22 November, 2010

.......तो इंसानों की प्रजाति पर ही खतरे मडराने लगेगे.

कटनी / कभी हरी सब्जी को मानव जीवन के लिए स्वास्थ्यप्रद मना जाता था लेकिन अब वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है. चौकिये मत अब प्रत्येक सब्जी फल, मिठाई, दूध, घी, तेल आदि सभी में जहर है. इन जहर मिली चीजो के सेवन से जहा इंसानों की सेहत बिगड़ रही है वही दूसरी ओर दुर्लभ पशु पक्षियों की प्रजातियों पर भी लुप्त होने का खतरा बन गया है.
यदि आप सोच रहे है की दूध, घी, फल, सब्जी खाना सेहत के लिए लाभकारी है तो बिलकुल गलत सोच रहे है.क्योकि अब शायद ही कोई साग-सब्जी या फसल हो जिनपर रासायनिक खाद या दवाओं का प्रयोग न होता हो.. बढ़िया किस्म का गेहू, चावल, चना, सोयाबीन आदि  भी आज जहरीली हानिकारक दवाओं के हानिकारक उपयोग से उगाया जा रहा है.
सब्जियों में इंजेक्सन के प्रयोग से अब लोग अनजान नहीं है, लौकी एवं ककड़ी में आक्सीटोसिन के इंजेक्सन लगाना आम बात है. इन से न केवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल  असर पड़ता है बल्कि कई लोगो की मौत भी लौकी के जूस पीने से हो चुकी है.
आज सब्जियों को चमकदार तथा ज्यादा हरा दिखाने  के लिए केमिकल में डुबाया जाता है... केले एवं पपीते को केमिकल में डुबाकर ही पकाया जाता है जो जहर बनकर सीधे शरीर में प्रवेश कर जाता है. तालाब एवं डबरो में सिंघाडो   की खेती के लिए भी खतरनाक केमिकल एवं दवाईया पानी में डाली जाती है. सब्जियों को ज्यादा चमकदार और हरी दिखाने के लिए रासायनिक रंगों का प्रयोग भी किया जा रहा है.
भिन्डी, करेला, परवल, मटर आदि रंगों एवं केमिकल के प्रयोग के बिना इतने चमकदार नहीं दिख सकते.
पशु पालन एवं दुग्ध डेयरी में गाय, भैसों आदि को पालने वाले ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्सन प्रतिदिन लगाकर दूध दुह रहे है. जिससे ज्यादा दूध निकलता है और इस इंजेक्सन के कारण दूध भी जहरीला हो जाता है और फिर इस दूध को पीने वालो की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. खासतौर पर छोटे बच्चो एवं बड़ो में भी ऐसे दूध के सेवन से कैंसर एवं अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बार-बार इंजेक्सन लगाने से जानवरों के शरीर भी जहरीले हो जाते है जिनके मरने पर चील, गिद्धों एवं कौओ द्वारा इनका मांस खाने से इन प्रजातियों पर भी संकट मंडरा रहा है, एवं इनकी प्रजातिया भी अब लुप्त होने की कगार पर है.
होटलों पर मिलने वाली मिठाइयो को भी मीठा जहर कहा जा सकता है क्योकि आये दिन नकली मावा पकडे जाने की खबरों को से अखबार और चैनल आते पड़े है. दूध धल्ल्ले से नकली बनाया जा रहा है और इतनी वैज्ञानिक तकनीक से बनाया जा रहा है  की इसे जाँच में भी नहीं पकड़ा जा सकता. कई मामलो में बीसियों टेस्ट करने के बाद भी असली दूध की पहचान नहीं की जा सकती.
तेल के नाम पर तेल की तरह दिखने वाला एवं व्यव्हार करने वाले केमिकल्स बाजार में बेचे जा रहे है, मसालों में मिलावट तो अब कोई नई बात नहीं है.
हरी सब्जियों को और चटकदार एवं ताजा बनाये जाने के लिए मिलाया जा रहा रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक  हो इससे इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में यह रसायन शरीर में पहुचकर आंतो, गुर्दों एवं त्वचा पर नुकसान पहुचाते है. तब जब इनकी मात्रा शरीर में बढ़ने लगे प्रारंभिक दौर में इसका असर नहीं पड़ता लेकिन केमिकल युक्त सब्जियों के ज्यादा उपयोग से धीरे-धीरे इनका प्रभाव बढ़ने लगता है.
प्रशासन द्वारा केमिकलो के हो रहे उपयोग पर अभी तक न कार्रवाई की गई है और न ही कोई जाँच. खास बात तो यह है की जाँच करने वाले आला अफसरों और कर्मचारी ही इन सब्जियों का  उपयोग कर रहे है जो एक लापरवाही का जीता  जगता उदहारण है.

यदि शीघ्र ही इन खतरनाक एवं जहरीले रसायनों एवं नकली सामग्री पर प्रतिबन्ध नहीं लाया गया तो इंसानों की प्रजाति पर ही  खतरे मडराने लगेगे.