26 November, 2010

तेजी से रफ़्तार पकड़ रहा अंको का खेल

कटनी / शहर में इन दिनों एक साथ सट्टा और सटोरियों की बाढ़  सी आई दिखाई देने लगी है. एक विशेष विभाग की रजामंदी से चल रहे इस अवैध कारोबार से कई घर चौपट  होने की कगार पर पहुच गए है. वही हफ्ते  के चंद लाभ के चलते कुछ तयशुदा लोग और सटोरिये  जमकर माल बनाने में लगे है. पुलिस की निष्क्रियता के चलते पिछले कुछ दिनों से सट्टा कारोबार बढ़ गया है.
रोज दोपहर तीन बजे और पांच बजे शहर के कुछ प्रमुख चौराहे और तय स्थानों पर अचानक लोगो की आवाजाही और हलचल  आजकल सामान्य दिनों  की अपेक्षा अधिक दिखाई देने लगी है आम लोगो की बात छोड़ दे तो इस भीड़ में शामिल सभी की निगाहे अपने मोबाईल और एक विशेष व्यक्ति को खोजती नजर आती है.
और थोड़ी ही देर हाथो की अगुलिया और आख के इशारे से सांकेतिक सूचना प्रदान करते हुए आते एक खास व्यक्ति के गुजर जाने के बाद फिर दो घंटे  के लिए जनजीवन सामान्य हो जाता है और यह क्रम प्रतिदिन सुबह  से लेकर शाम तक चार शिफ्टो में चलता है. जिसमे रात की अपेक्षा दिन में चहल-पहल खासी तादात में रहती है क्योकि इसमें एक बड़ा धडा ग्रामीण क्षेत्रो  से आये लोगो की भागीदारी से भी होता है. और रात्रि  में यह कारोबार अधिकांशतः मोबाईल नेटवर्क के मध्यम से संचालित हो रहा है.
सैया  भये कोतवाल की तर्ज पर सट्टे में लगे सटोरियों और इनके दलालों के मध्यम से यह लाखो का व्यापार खुलेआम बेख़ौफ़ होकर चल रहा है. इस कारोबार से जुड़े सैकड़ो लोगो के तंत्र के अलावा शहर का आम आदमी इस बात को जानता है की कौन से लोग किन स्थानों पर कमीशन पर काम कर रहे है और मातहतो के माध्यम से इसको संचालित करवा रहे है. पुलिस के आला अधिकारी से लेकर अंतिम दर्जे तक के सिपाही भी दिन में वारी-वारी से नगर में गुजरते है लेकिन इस काम में लगे लोग इसकी निगाहों से ओझल रहते  है और इनके गुजरने के दौरान यह लोग  देखने दिखाने के लिए  सामने से दाये-बाये हो जाते है जिसके बदले प्रत्येक शनिवार तय राशी तयशुदा स्थान पर निश्चित व्यक्ति के मध्यम से पहुच जाती है.
अल सवेरे से ही शहर के कुछ तय स्थानों पर इन सटोरियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता रहता है. वही इस धंधे से जुड़े दलालों और पुलिस के जबानो की सार्वजानिक जुगलबंदी और मित्रता  भी आमजन में जगजाहिर है. सामाजिक बुराई और समाज की रक्षा  के लिए खड़े दोनों पक्षों की यह जुगलबंदी भी आम लोगो की समझ से परे है.

वर्तमान में किसान मालामाल है. पिछले दो माह के आंशिक विश्राम के बाद सट्टा  कारोबार की गाड़ी अब पुनः पटरी पर लौट  आई है. इस काले धंधे में क्षेत्र के किसान भी बढ़ चढ़कर पैसा  लगा रहे है और बर्बाद हो रहे है. आसपास के कई किसान तो सिर्फ सट्टा खेलने के लिए ही रोज शहर पहुचते है और अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई सटोरियों को सौपकर चलते बनते है.