13 December, 2010

सिम का असामाजिक तत्व कर सकते है उपयोग


आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियों द्वारा इन दिनों तरह-तरह के प्रलोभन देकर लोगो को बहुत ही कम दरो पर सेल फोन की सिम बेचीं जा रही है. कीमत से अधिक बैलेंस देने  की बात कई कंपनियों द्वारा इंटरनेट और थ्री जी कीसुविधा भी दिए  जाने की बात की जा रही है.

बड़ी आसानी से कई सुविधायुक्त  इन सिमो के गलत उपयोग की भी ज्यादा सम्भावना है. हाल ही में कई आतंकवादी घटनाओं में भी आतंकवादियों द्वारा इन्ही फर्जी सिमो का उपयोग किये जाने की बात सामने आई थी. टू जी स्पेक्ट्रम घोटालो की वजह से ही कई कंपनिया बाजार में आई और आगे होने के चक्कर में नियमो को ताक पर रखकर बेधड़क इनकी बिक्री की जा रही है.

वास्तव में सैकड़ो की तादाद में प्रतिदिन बिक रही इन सिमो की बिक्री पर नजर और साथ ही ग्राहक द्वारा जमा किया गए दस्तावेजो की जाँच भी की जानी चाहिए,इन फर्जी सिमो की वजह से आये दिन लोगो के मोबाइलों पर असामाजिक तत्वों द्वारा गलत सन्देश व फोन कर परेशान किया जाता है.

साथ ही हाल ही में शुरू हुई 108 सेवा में भी गलत सूचनाये  इन सिमो के माध्यम से सेवा में लगे कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है. मजनुओ द्वारा इन फर्जी सिमो से महिलाओं को परेशान किया जा रहा है. वही युवा भी इन सस्ती और फ्री टू  फ्री सेवा का जमकर उपयोग कर रहे है.

इन दिनों फर्जी सिमो का व्यवसाय धड़ल्ले से चल रहा है. सिम की कीमत से कई गुना बैसेंस देने के लालच के चलते प्रतिदिन सैकड़ो की तादाद में सीमो की बिक्री हो रही है. इन सिमो की बिक्री के दौरान जमा किये जाने वाले दस्तावेज भी फर्जी लगाये जा रहे है.

देखा जाए तो इन सिमो का सबसे ज्यादा उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है. मगर इन सबसे बेखबर प्रशासन गफलत की नीद में सो रहा है. वही इसका खामियाजा शरीफ लोगो को भुगतना पड़  रहा है.

 पिछले लम्बे समय से विभिन्न कंपनियों की सिम कीमत से अधिक बैलेंस देने की बात कहकर बेचीं जा रही है. पांच और दस रूपये का बैसेंस दिया जा रहा है. शहरो के मुख्य बाजारों सहित गाँव की गलियों तक में इन कंपनियों द्वारा सिम बिक्री के स्टाल लगाए जा रहे है. 

लोगो द्वारा सस्ती दर पर मिलने वाली इन सिमो को खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेजो का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. वही दूकानदार भी अधिक बिक्री के चक्कर में दस्तावेजो का निरिक्षण न कर स्वयं इसे बढ़ावा दे रहे है.

ग्राहक द्वारा परिचय पत्र के साथ जमा की गई फोटो को स्केन कर कई दुकानदार दूसरे परिचय पत्र में इन फोटो को लगाकर सिम बेच रहे है. चूकी यह सिमे उपयोग कर फेक दी जाती है इसलिए दूकानदार और ग्राहक द्वारा सिमे चालू करने के उद्देश्य से ही कंपनी को  यह फर्जी दस्तावेज जमा किये जाते है. इन दस्तावेजो की जाँच होने तक यह सिमे बंद कर दी जाती है.

इन सिमो की बिक्री  पर नजर डाले तो शहर में प्रतिदिन विभिन्न कंपनियों की लगभग डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा सिमे बिकती है.  शरीफ व्यक्ति एक बार नंबर लेने के बाद दोबारा उसे नहीं बदलता मगर असामाजिक तत्वों द्वारा बड़ी संख्या में इन सिमो को खरीदकर  उसका गलत उपयोग कर फैक दिया जाता है. इन सिमो का सबसे ज्यादा उपयोग सटोरिये, जुआरी, वाहन चोर और मजनुओ सहित असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है.