22 December, 2010

कमाई के लिए नियम तक पर रखे

सरकार कोई भी योजना शुरू तो कर देती है लेकिन घुमा फिरा कर वह पैसा नोकर्शाहो  और नेताओ के भ्रस्टाचार के मकडजाल के कारण  वही गोल-गोल घूमता रहता है.
मध्यान्ह भोजन योजना पर हर माह करोडो रूपये व्यय हो रहा है इसके  बाद भी शालाओ में उपस्थिति कम क्यों होती जा रही है....? स्वसहायता समूहों की मनमानी एवं अधिकारियो की ढुलमुल नीति इस योजना को चोपट कर रहा है.

हमारी  आने वाली पीढ़ी ज्यादा पढ़ी  लिखी हो देश के बच्चे शारीरिक रूप से मजबूत हो इस हेतु शुरू की गई मध्याह्न भोजन योजना भ्रस्टाचार की भेट चढ़कर रह गई है.
कटनी जिले के शासकीय विद्यालयों में पढने वाले छात्र-छात्राओं के भोजन पर करोडो  रूपये खर्च होने के बाद भी बच्चो को मानक के अनुरूप खाना नहीं मिल पा रहा है. जबकि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी जिले में सब कुछ ठीक होने का रटा रटाया वाक्य दोहरा रहे है.

इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक घटिया स्तर के भोजन की शिकायत सैकड़ो बार प्रकाश में आई है इसके बाद भी जिले में न तो व्यवथाये सुधरी और न ही अनियमितताए करने वाले समूह ही बदले गए. कुछ स्कूलों में तो हालत यह है की न तो स्कूल में बच्चे आ रहे और न ही खाना बन रहा है.

विगत दिनों जनपद पंचायत अध्यक्ष रीठी प्रीति सिंह ने क्षेत्र के विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन और शिक्षा के स्तर का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में अधिकांस स्कूलों में भोजन वितरण में अनियमितता दर्ज की गई थी. देवरी प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला, मोहास ई जी एस, प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला कैमोरी में ढेरो विसंगतिया पाई गई. इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है.

अधिकांस स्कूलों में सरपंच और सचिव के समर्थक समूहों द्वारा भोजन वितरण का काम किया जा रहा है. जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के कारण अधिकारी स्कूलों में एम् डी एम् पर ध्यान ही नहीं देते.

ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूलों में भोजन वितरण कर रहे समूह भोजन बनाने से ज्यादा कमाई पर ध्यान दे  रहे है. अधिकांस समूहों के द्वारा बनाये जा रहे भोजन में कच्ची रोटिया और दाल सब्जी के नाम पर सिर्फ पानी ही मिलता है. जिले के लगभग हर समूहों पर अनियमितताओं के आरोप लग चुके है.

सरकार की योजना का हाल ऐसा है जैसे एक टुकड़ा रोटी बीस कुत्तो में डाल दी गई हो और उस पर सब टूट पड़े हो.