08 December, 2010

आस्था से खिलवाड़ करते मोबाइल

आज के आधुनिक  युग में भी अंधविश्वास लोगो का पीछा नहीं छोड़ रहा है. इतना ही नहीं इसका तरीका भी आधुनिक होता जा रहा है. आस्था की आड़ में भावनात्मक सन्देश भेजकर किसी स्थान विशेष का प्रचार प्रसार या अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कंपनिया  एस एम् एस का माध्यम अपना रही है. खास बात यह है की शिक्षित  और समाज के जिम्मेदार लोग  भी इस अन्धविश्वास में उलझ जाते है.

पेशे से शिक्षक राकेश कोरी ने बताया की उनके पास भी एक नए नंबर से एस एम् एस आया जिसमे सन्देश के साथ लिखा था की आप भी कम से कम दस लोगो को तो यह एस एम् एस भेजे अन्यथा अनिष्ट हो जायेगा.
उन्होंने कहा की कई लोग भय और अन्धविश्वास के कारण अन्य लोगो को भी एस एम् एस करके समय  और पैसा तो बर्बाद करते ही है साथ ही दूसरो  को भी भ्रमित कर देते है.

'जय माँ शेरावाली' यह सन्देश वैष्णो देवी जम्मू से चलकर आया है.इस सन्देश को  नौ लोगो को भेजो तो 48 घंटे के अन्दर तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी. लेकिन इस श्रंखला को तोड़ने पर  आपके साथ कुछ अनिष्ट भी हो सकता है. इसलिए इसे अवश्य नौ  लोगो को भेज देना.

हुनमान के इन 6 नामो को 12 लोगो को भेजो अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, रामदूत, बजरंगबली, महाबली, इस शनिवार तक अच्छी  खबर मिलेगी. श्रद्धा और आस्था से भरे ऐसे  मैसेज आजकल हर मोबाइल उपयोगकर्ता के इनबाक्स में आते ही रहते है.

कई लोग पूरी आस्था के साथ इन्हें दूसरे लोगो तक पहुचाते भी है. इस उम्मीद के साथ शायद उनके ऐसा करने से उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाए, उनकी इस आस्था  का कोई गलत फायदा उठा रहा है और उनकी इन भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है.

कभी शिर्डी से, कभी रामेश्वर से, कभी अमरनाथ आदि और भी अन्य  पवित्र स्थलों  से भक्तो द्वारा भेजे जाने वाली मुरादो को पूर्ण करने वाले इन मैसेज में मनोकाम पूर्ण करने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से श्रंखला तोड़ने पर कुछ गलत होने की चेतावनी भी रहती है. इसके  चलते लोग कुछ गलत न हो जाए इस डर से यह मैसेज अपने मित्रो, रिश्तेदारी को भेज देते  है ताकि वे किसी दैवीय कोप से बचे रहे.

इस विषय पर बहोरिबंद निवासी राजेन्द यादव ने बताया की पहले पोस्टकार्ड के मध्यम से आस्था से भरे हुए ऐसे सन्देश लोगो द्वारा भेजे जाते थे. जिनमे भी इश्वर की स्तुति उपरांत पूर्ण होने वाली मनोकामना के उल्लेख के साथ भी ऎसी अप्रत्यक्ष धमकी रहती थी लेकिन अब उन पोस्टकार्ड की जगह मोबाइल के इन भक्ति मैसेज ने ले ली है, जिसके चलते मनोकामना पूर्ण होने एवं बड़ा पुन्य लाभ कमाने की चाहत ने मोबाइल पर ऐसे संदेशो की बाढ़ सी ला दी है. जो लोगो में एक झूठी आस तो बांधते ही है वही इस तरह के मैसेज से तकनीक का गलत उपयोग भी हो रहा है.

आस्था  के खिलवाड़ में यह कोई नई बात नहीं है. सूचनाक्रांति के इस युग में मोबाइल का उपयोग किया जाने लगा है तो पहले पत्रों के मध्यम से यह होता था. कोई पोस्टकार्ड इस्तेमाल करता था तो चिट्ठी-पत्री को मध्यम बनाताथा. मौजूदा समय में मोबाइल जैसे महत्वपूर्ण उपकरण को और भी कई ऎसी बातो के लिए दुरूपयोग किया जा रहा है जिससे समाज में विकृति फ़ैल  रही है. आस्था के मामले में लोग एक दूसरे को भ्रमित कर रहे है.

धार्मिक संदेशो का यह फलसफा कुछ देर के लिए तो खुशिया देने वाला होता है. इस पर विचार किया जाए तो निश्चित ही भेजने वाले को इसकी अहमियत समझ आ जायेगी. लोगो की आस्था से जुड़े ये सन्देश मजाक के पर्याय बन रहे है. अपने फायदे या फिर लाभ के लिए इनका इस्तेमाल करने वाले लोग या फिर यह कंपनियों की सुनियोजित चाल है  जिसका इस्तेमाल करने लोग बाज नहीं आ रहे है.

युवाओं में यह चलन ख़ास होता जा रहा है, कुछ देर की हंसी, मजाक के लिए धार्मिक आस्थाओं को ताक पर रख रहे युवा ऐसे संदेशो को भेजकर तो आनंदित  होते है लेकिन स्वाभाविक तौर पर देखा जाए तो युवा आधुनिकता की होड़ में यह भूल जाते है की वे खुद अपनी धार्मिक भावनाओ को संदेशो के मध्यम से व्यक्त कर रहे . इस संदेशो को भेजने वालो की धारणा भी जाहिर तौर पर पता लग जाती है वे अपने आराध्य को पूजने के बजाये उन्हें मजाकिया रूप से पेश कर रहे है.ये खुद भेजने वाले  की संकुचित सोच का नतीजा होते है.

साईं वावा, दुर्गा  माँ, भगवान् गणेश, शंकर, हनुमान, राम आदि के नाम  से आने वाले मैसेज को पढने के बाद लोगो के मन में भ्रम जरूर बैठ जाता है, जिसके चलते वह अपने इस अन्धविश्वास के नाम दस या बीस मैसेज तो लोगो को भेज ही देते है. यह कहना है जगदीश पटेल का जिनके अनुसार इस तरह के सन्देश लोगो को भ्रमित करते है तो वही लोगो के अन्धविश्वास को भी बढ़ाते है. क्योकि जो लोग इन मैसेज को ट्रांसफर नहीं करते है और उनके साथ कुछ बुरा हो जाता है तो वह उस घटना को इन्ही संदेशो का दुष्परिणाम मानते है.