31 October, 2010

लाभ से वंचित पात्र हितग्राही

कई गरीबो का नहीं है सूची में कमी
अखिलेश उपाध्याय / कटनी
सरकार द्वारा बीपीएल कार्ड धारियों को दिया जा रहा सस्ता राशन, तमाम आर्थिक रियायतों को देखकर अच्छी खासी सम्पत्ति के मालिक सरकारी गरीब बनाने  के लिए लालायित हो रहे है और जोड़-तोड़ कर किसी तरह गरीबी रेखा की सर्वे सूची में शामिल भी हो गए है. जो वास्तविक रूप से गरीब है वह इन योजनाओं के लाभों से बंचित बने हुए है. आर्थिक रूप से सक्षम लोग फर्जी रूप से गरीब बनकर सरकार की योजनाओं का जमकर लाभ उठा रहे है.
इस स्थिति में सरकार द्वारा गरीबो के उत्थान के लिए  चलाई जा रही योजनाओं के उद्देश्य की पूर्ती नहीं हो पा रही है और सरकारी राशी का अपव्यय भी हो रहा है.
विकासखंड की ग्राम पंचायतो में कुछ ऐसे गरीब परिवार है जिनकी आर्थिक स्थिति बदतर है. यह परिवार मजदूरी कर दो जून की रोटी जुटा पाते है लेकिन उसके बावजूद शासन के जिम्मेदार अधिकारियो की नजरो  में यह  परिवार गरीबो की श्रेणी में आज तक नहीं आ पाए है. जबकि ठीक इसके विपरीत ग्राम में कृषि भूमि. पक्के मकान के स्वामी ग्रामीण गरीबी रेखा की सर्वे सूची में शामिल होकर बीपीएल कार्ड धारी बन गए है और बीपीएल धारियों को मिलने वाली तमाम रियायतों का जमकर लाभ उठा रहे है. अंधेर  नगरी चौपट राजा की तर्ज पर फर्जी गरीब बनकर शासन की योजनाओं का लाभ लेने का फर्जीवाड़ा केवल रीठी जनपद की पंचायतो में ही नहीं बल्कि जिले की लगभग हर पंचायत में हो रहा है और तो और नगरीय क्षेत्र में भी फर्जी गरीबो की संख्या हजारो में है.

कटौती ने बदली दिनचर्या

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
दीपावली का त्यौहार नजदीक आने के बावजूद विद्युत् कटौती  में कोई रियायत नहीं दी जा रही है. बिजली कटौती ने आम आदमी की दिनचर्या को बिलकुल बदल दिया है. गृहणियो   के चौके चूल्हे, बच्चो के शौक और वयस्कों के काम करने का तरीका बिलकुल बदल गया है. वही शहर में चोरियों की घटनाएं भी काफी बढ़ गई है. इस तरह लोगो को दिन में कामकाज और रात्रि में घर की रखवाली पर ध्यान देना पड़ रहा है.
विद्युत् वितरण कंपनी ने क्षेत्र में बिजली कटौती का जो समय निर्धारित किया है उसका शहरी जन जीवन पर व्यापक  असर पड़ा है. वर्तमान  में विद्युत् विभाग द्वारा तहसील क्षेत्रो में सुबह तीन से छेह, दोपहर बारह से शाम छेह तक और रात्रि नो से बारह बजे तक घोषित कटौती की जाती है. इसके अलावा अघोषित विद्युत् कटौती किसी भी समय कर ली जाती है, जिसे लोगो में कुछ समय तक तो आक्रोश का माहौल बना रहा लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा अनसुनी किये जाने और राजनैतिक दलों के मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते हुए जनता की सुनवाई न होने से अब धीरे-धीरे लोगो ने अपने आप को कटौती के अनुसार ढालना आरम्भ कर दिया है. वर्तमान में विद्युत् कटौती के समबन्ध में लोगो से चर्चा करने पर कुछ इस प्रकार तस्वीर उभरी-
बहुत साल से बिजली के प्रकाश में रहते-रहते हम उसके आदि हो गए है अब बिजली कटौती के समय विद्युत् विभाग को ताने देने से अच्छा है पार्क में सैर करने निकल जाते है. घर के काम में परेशानी तो है पर क्या करे सब कुछ बिजली विभाग  पर निर्भर है
- निर्मला पण्डे, समाज सेविका
शाम की कटौती से पहले मेरे पति को घर आकर बच्चो को घुमाने ले जाना पड़ता है. जिससे बच्चे खुश रह सके. घोषित कटौती के कारण उजियारे में घर का खाना भी जल्दी तैयार करना पड़ता है. हमें खुद को बिजली कटौती के अनुसार ढालना शुरू कर दिया है, क्योकि हमें मालूम है की बिजली विभाग को कोसने से कुछ नहीं होने वाला अपनी पुरानी दिनचर्या को ही बदलना होगा
 - मनोरमा सिंह, शिक्षिका
परिवार में अब बिजली कटौती ने बच्चो के शौक बदल दिए है पहले घर के बच्चे टीवी के सामने बैठे कार्टून चैनल देखा करते थे लेकिन अब मोहल्ले के बच्चो के साथ खेलने में समय बिताते है. इन बच्चो ने खुद को बिजली कटौती  भुलाने का बहाना  ढूढ़ लिया है. लेकिन यह स्थाई नहीं है. - श्रीमती अंजना डेविड केमोर
हमारे घर पर तो इनवर्टर है इसीलिए घर में ज्यादा परेशानी नहीं आती लेकिन हास्पिटल में मरीजो को जरूर परेशानी होती है जब  प्रदेश शासन बिजली देने असमर्थ है तो हम क्या कर सकते है इसलिए समय के अनुसार खुद को ढाल लिया है.
- डाक्टर श्रीमती राकेश रंजन , कटनी
विद्युत् विभाग द्वारा बिजली की कटौती के चलते दिनचर्या बिलकुल बदल गई है. घर गृहस्थी  का काम प्रभावित हुआ है. शाम के वक्त जब लाईट नहीं रहती तो बच्चो का मन बहलाने के लिए बच्चो के साथ खेलना पड़ता है तथा दिन में अपने काम निपटा लेती हूँ
-  श्रीमती दिव्या पटेल, बहोरिबंद

मिलावट का खेल अधिकारी फेल

अखिलेश उपाध्याय / कटनी दीपावली आते ही मिलावटखोर एक बार फिर सक्रिय हो गए है  लेकिन इस बार शहर में नकली माल तैयार करने की जगह कटनी के आसपास  बसे गावो में नकली मावा और घी  तैयार किया जा रहा है. माल तैयार होने के बाद यहाँ से कई जिलो  में नकली माल की सप्लाई हो रही है. दिलचस्प बात यह है की खाद्य एवं सम्मिश्रण विभाग सब कुछ जानते हुए भी मिलावटखोरो पर कार्रवाई करने में कंजूसी बरत रहा है.

हर चीज मिलावटी
दाल - बटर की दाल
बेसन - पीला रंग
मावा - डालडा और एसेंस
घी -  डालडा, रिफाइंड  और एसेंस
शक्कर - सफ़ेद पावडर
लाल मिर्च -  लाल रंग
रिफाइंड  -  पाम आयल
दूध - vaiitanar, सपरेटा, शेम्पू
मिनरल वाटर -  अशुद्ध पानी
हल्दी - पीला रंग

खाद्य विभाग करता है फर्ज अदायगी
खाद्य एवं औषधीय सम्मिश्रण विभाग में जब नए इंस्पेक्टरों की शहर में पोस्टिंग हुई थी, तो काफी कार्रवाई हुई  लेकिन इसके बाद जैसे-जैसे बाहर से आये अधिकारियो के शहर में संपर्क बढ़ते गए, कार्रवाई औपचारिकता बनकर रह गई. आलम  यह है की आधी जगह जो कार्रवाई की जाती है वह तो कागजो में दिखाई जाती है जबकि अधिकांस जगह तो मामला बिना दर्ज हुए ही निपटा दिया जाता है.

भ्रष्टाचार और दलाल मुक्त करने कृत संकल्पित

अखिलेश उअप्ध्यय / कटनी
जनपद पंचायत रीठी अद्ध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह ने अपने वाडे के अनुरूप जनपद में विकास को गति प्रदान करने में एक और कदम बढाया. ग्राम पंचायत घनिया में वर्षों से अवरुद्ध विकास कार्य को नवजीवन देने जनपद अद्ध्यक्ष प्रीति सिंह ने रंगमंच का भूमिपूजन किया.

इस अवसर पर जनता के विभिन्न मुद्दों को उन्होंने गंभीरता से सुना और अपने वाडे के अनुरूप भ्रस्टाचार और दलाल मुक्त जनपद के अपने वाडे को और तेजी से अमल में लेन का संकल्प दुहराया.
सरपंच राम्सखिबाई, सचिव पुष्पेन्द्र मिश्र एवं अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ.