02 November, 2010

कैसे बचाए दिवाली पर बिजली

दिनों दिन बढ़ रही विद्युत् खपत को लेकर विद्युत् कंपनी के अधिकारी चिंतित है. कंपनी अधिकारियो द्वारा सुझाव दिया गया है की अगर आम जन चाहे तो वह अपने विद्युत् बिलों  पर नियंत्रण कर सकते है, साथ ही कंपनी की मदद भी कर सकते है.
इस समय सभी उपभोक्ता बढे हुए बिलों से परेशान है. उनका कहना है की कंपनी द्वारा जानबूझकर अधिक बिल दिए जा रहे है लेकिन हकीकत यह बताई जा रही है की उपभोक्ता स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार है. अगर उपभोक्ता तरीके से विद्युत् का उपयोग करे तो वह अपने बिल पर नियंत्रण रख सकता है.
किस पर कितनी खपत
उपकरण                विद्युत् भार          अवधी               खपत
4 बल्ब                  240 वाट               6 घंटे                 1 .44 यूनिट
2 सी ऍफ़ एल       14 वाट               6 घंटे                 0 .44 यूनिट
                                                    अंतर                 एक यूनिट
फ्रिज                      150 वाट            12 घंटे              1 .80 यूनिट
टी वी                     150 वाट              03 घंटे             0 .44 यूनिट
प्रेस                        750 वाट              01   घंटे                 0 .75 यूनिट
गीजर                     3000 वाट             02 घंटे                6 .00 यूनिट
ऐ सी 1 .5 टन         2250  वाट             06 घंटे                 13 .5 0   यूनिट
वाशिंग मशीन          750 वाट              आधा घंटे            ०.375 यूनिट
विद्युत् मोटर            746 वाट                दो घंटे               1 .5 यूनिट
कम्पुटर सेट           200 वाट               तीन घंटे               0 .6 यूनिट

कैसे करे बचत
* बल्ब की जगह सी ऍफ़ एल का उपयोग करे. सी ऍफ़ एल भी तीन तथा पांच वाट की उपयोग करे. सी  ऍफ़ एल से रोशनी अधिक एवं विद्युत् खपत बहुत कम होती है.
* दिन  में या रात को अगर अधिक समय तक टी वी बंद रखना है तो उसका प्लग निकल दे या स्विच से बंद कर दे.
* बल्बों की झालर न लगाए क्यों की जीरो वाट का बल्ब 15 वाट का होता है. पतले तारो की या कम खपत वाली झालर का उपयोग  करे.
* दुकानदार दिन में अनावश्यक लाईट जलाते व रात के समय बाहर अत्यधिक रोशनी करते है वह उस पर नियंत्रण करे.
* उपभोक्ता विद्युत् उपकरण अच्छी क्वालिटी के उपयोग करे. अधिकांशतः स्टार   रेटिंग वाले उपकरण उपयोग करे.अच्छे उपकरणों से विद्युत् कम खपत होती है, लोकल व घटिया उपकरणों से बिजली खर्च होती है.
* हीटर का उपयोग करी न करे.

त्यौहार पर मौसम ने किया बीमार

मौसम में ठंडक घुलते ही मौसमी बीमारियों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है. बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी मर्ज की चपेट में है. चिकित्सालयों में बीमारों की भीड़ बढ़ने लगी है. बीमारी के कारण लोगो के उत्साह फीका पड़ रहा है. दूषित  और मिलावटी खाद्य पदार्थ भी सेहत बिगाड़ रहे है.
एक ओर जहा त्यौहार का उत्साह है वही अचानक मौसम ने लोगो को बेहाल कर दिया है. अस्पतालों में सर्दी, खासी, बुखार के मरीजो की संख्या में बढ़ोत्तरी  हो रही है. भले ही डाक्टरों के लिए तापमान में आये बदलाव के कारण यह होना सामान्य बात है, लेकिन त्योहारों के दिनों में बीमारी उत्साह को कम कर रही है. पिछले तीन-चार दिनों से हवाओं में ठंडक घुलते ही मौसमी बीमारियों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है. लोगो को अपने घरो को सवारने और दीपावली की तैयारी की जगह अपनी सेहत की फ़िक्र होने लगी है.
त्योहारी मौसम में खानपान में सावधानी बरतना जरूरी है. बाजारों में दूषित व मिलावटी वस्तुओ से बने खाद्य पदार्थो की बिक्री जोरो पर हो रही है. ऐसे में स्वास्थ्य को बचाना बहुत मुश्किल है, लेकिन इन्हें खाने के बाद दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते है.
मंगलवार को मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजो  की संख्या जिला चिकित्सालय में अधिक रही. इसके साथ ही अन्य शासकीय व निजी चिकित्सालयों में भी मौसमी बीमारियों  से पीड़ित मरीज आ रहे है, इन मरीजो में निमोनिया, सर्दी, खासी, बुखार के बीमार अधिक है. चिकित्सको के अनुसार सेहत को लेकर बरती गई जरा सी लापरवाही से लोग बीमार पड़ रहे है. इस मौसम में लोगो को अधिक सावधानी की आवश्यकता है. विशेषरूप से गंदगी से बचना जरूरी है.
बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
मौसम में आये बदलाव ने सबसे ज्यादा असर बच्चो पर दिखाया है. इस समय शिशु रोग विशेषग्य के पास सुबह आठ से एक बजे तक यहाँ परिजन सर्दी, खासी, बुखार जैसी बीमारियों के शिकार बच्चो को इलाज के लिए आ रहे है. खासकर नवजात शिशुओ पर मौसम बदलने का असर सबसे पहले पड़ता है. अस्पताल में फिलहाल रोजाना सौ से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुच रहे है.
चिकित्सको का कहना है
ठण्ड के मौसम में सबसे अधिक श्वास सम्बन्धी रोग जैसे अस्थमा वगैरह होने की सम्भावना होती है. धूल, धुएं से बचे, खासकर दो पहिया वाहन चालको को हेलमेट अथवा कपडा ढककर चलना चाहिए. इसके  अलावा निमोनिया, बुखार, सर्दी व खासी होने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए.