10 November, 2010

धडा धड जारी हो रही सीसी

कटनी / महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के तहत होने वाले कार्यो की इन दिनों धडाधड सीसी जारी की जा रही है. यह सारी कवायद इसलिए हो रही है की जमीन पर पूरे  हो चुके  कामो को कागजो पर भी पूर्ण दिखाया जा सके. सूत्रों का दवा है की निर्माणाधीन कार्यो  की अधिक तादाद के चलते राशी मिलने में दिक्कत आ रही है.

इन दिनों रीठी जनपद में सीसी (कम्प्लीट सर्टिफिकेट) जारी करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है. जनपद में कर्मचारियों की ड्यूटी केवल इसी कार्य के लिए लगाईं गई है. वे सीसी में रह गई कमियों  को कम्प्लीट कर कोडिंग आदि का कार्य कर रहे है. बताया जाता है की दर्जनों की संख्या में सीसी जारी करने का कार्य फिलहाल जारी है. इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योकि पंचायतो द्वारा बहुत से काम जमीन पर नहीं कराये गए लेकिन जगजो पर वे कार्य पूर्ण दर्शा  दिए गए है. मनरेगा की वेबसाईट पर दिखाए जा रहे जनपद रीठी के कामो में जमीनी स्तर पर काम नहीं हुए है लेकिन उन्हें कागजो पर पूर्ण दिखाया जा चुका है.

सूत्रों के मुताबिक जनपद पंचायत रीठी में पदस्थ आर ई एस के इंजिनीअर बी बी गुप्ता द्वारा सीसी जारी करने के एवज में जमकर बसूली की जा रही है. इस इंजिनीअर से जनपद के सारे सरपंच और सचिव परेशान है. किसी  भी काम की सी सी जारी करने के बदले में इंजिनीअर द्वारा  दस से बीस हजार तक बसूले जाने की बाते सरपंच और सचिव द्वारा की जा रही है.

नाम न बताने की शर्त पर एक सचिव ने बताया की पाच लाख के काम में जो तीन वर्ष पूर्व का काम सेंक्सन है उस पर आज की महगाई में सीमेंट, रेट, गिट्टी के दाम बढ़ जाने से पहले ही जैसे तैसे काम निपटाया गया है उस पर सीसी जारी करने के नाम पर इंजिनीअर गुप्ता खुले आम पैसा मांग रहे है.

जैसे तैसे क्षेत्र के लोगो को भ्रष्ट सीइओ झरिया से मुक्ति मिली है तो अब वर्षों से जमे आर ई एस के इंजिनीअर गुप्ता द्वारा खुले आम वसूली से सचिव व सरपंच परेशान है लेकिन अपनी व्यथा किसी से कह नहीं सकते क्योकि हर रोज इन्ही से काम पड़ता है.

कुछ ऐसे भी काम है जो हुए ही नहीं और उनकी सीसी जारी कर दी गई है ऐसा ही एक मामला  ग्राम पंचायत कैना का है जहा डेहरिया नाला और बड़ा तालाब बंधान का काम म न रेगा के तहत हुआ ही नहीं जिसकी रिकवरी सचिव ने भर भी दी है फिर इंजिनीअर गुप्ता ने इसकी सीसी फिर कैसे जारी कर दी है ?

न शौचालय बने न हुआ पौधरोपण

कटनी.. जिले की समस्त जनपद पंचायतो के अंतर्गत निर्मल ग्राम-निर्मल वाटिका योजना में अति गरीबी रेखा और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों के यहाँ शौचालय निर्माण कर तीन फलदार और दो छायादार  पौधों का रोपण किया जाना था. लेकिन अभी तक न तो शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हो सका है और न ही हितग्राहियों  के यहाँ पौधे लग सके है, जबकि खुले में शौच की प्रथा का उन्मूलन और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशासन ने एन आर जी  पी के तहत यह योजना चलाई थी.

इस योजना में मजदूरी और निर्माण सामग्री के तहत हजारो रूपये खर्च भी किये लेकिन इसका लाभ सम्बंधित हितग्राहियों तक नहीं पहुच सका. जिसके कारण शासन की इस योजनाओं को लेकर लोगो में रोष का माहौल देखा जा रहा है. बताया जाता है की जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचायतो में तत्कालीन सी ई ओ सुरेश झरिया और सचिव की मिलीभगत से छप्पन ग्रामपंचायतो में लाखो के वारे न्यारे किये गए है.  योजना की देखरेख में लगे कर्मचारी कभी भी स्थल परीक्षण पर नहीं गए और आफिस में बैठे-बैठे ही अवलोकन की सही तस्वीर पेश करते रहे किन्तु ग्राम पंचायत की लापरवाही की वजह से न तो बारिश के पूर्व शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ और न ही खोदे गए गड्ढे के बचाव के लिए कोई उपाय किये गए.

ऐसे में अधिकांस गड्ढे बारिश के पानी से धस गए तो दूसरी तरफ निर्मित शौचालय भी बारिश की भेट चढ़ गए. इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है की ग्राम पंचायतो में हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुचने में कितनी गंभीर और  किस तरह कर्तव्यों का निर्वाह कर रही है. जानकर सूत्रों की माने तो  पंचायतो की इन्ही लापरवाही के चलते योजना की आधे से अधिक राशी निर्माण के पूर्व ही बर्बाद हो चुकी है और रिकार्ड में बारिश व अन्य कारणों से मटेरियल व निर्माण कार्य में नुक्सान दर्शा दिया जाता है. परिणाम स्वरुप योजनाओं का प्रतिसाद ग्रामीणों को मिले उससे पहले ही योजनाये लापरवाही की भेट चढ़ रही है.

नहीं लग सका एक भी पौधा
ग्राम पंचायतो में न तो निर्मल ग्राम के शौचालय गड्ढे का कार्य पूरा हुआ और न ही निर्मल वाटिका योजना के तहत पौधे रोपे गए. बताया जाता है की निर्मल वाटिका के अंतर्गत प्रत्येक हितग्राहियों के यहाँ पांच-पांच पौधे रोपे जाने थे. जिसमे से तीन पौधे फलदार और दो पौधे छायादार लगाने के निर्देश थे लेकिन  इस योजना की वास्तविकता यह है की अभी तक एक भी हितग्राही इस योजना से लाभान्वित नहीं हो सका है और न ही पंचायतो द्वारा पौधरोपण को गंभीरता से लेकर समय रहते पौधे लगाने की पहल की जा रही है.

खर्च करना था 4200 रूपये
हितग्राही को निर्मल ग्राम और निर्मल वाटिका के तहत लाभान्वित करने के लिए शासन ने प्रत्येक हितग्राही पर 4200 रूपये खर्च करने के निर्देश दिए थे. जिसके तहत 2100 रूपये की लागत से शौचालय के गड्ढे निर्माण और शेष राशी से तीन फलदार पौधे और दो छायादार पौधे खरीदकर लगाने को कहा था, लेकिन पंचायत ने इन योजनाओं का किस कदर मखौल उड़ाया है इसका अंदाजा आधे अधूरे गड्ढे और शौचालय से लगाया जा सकता है. यही नहीं जो पौधे रोपे जाने थे वे भी हितग्राही तक नहीं पहुचे है.