21 November, 2010

रोजगार पाने वालो की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है !

कटनी / जिले में संचालित रोजगार गारंटी योजना भ्रस्टाचार की भेट चढ़ गई है. भ्रस्टाचार के मामले आये दिन अखबारों एवं जनसुनवाई के मध्यम से जिला प्रशासन के sangyan   में लाये जाते है लेकिन इसके बावजूद भी सम्बंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर नकेल नहीं कसी जा सकी है. केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना में फैली गड़बड़ी के कारण पिछले तीन सालो में रोजगार पाने वालो की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है और मजदूरों का पलायन badh   रहा है.
सरकारी आकड़ो में पिछले तीन सालो में जिले भर के लाखो लोगो के जाब कार्ड बनाये गए है लेकिन इनमे से सौ दिन का रोजगार बहुत कम लोगो को दिया गया है. योजना शुरू हो jane   के बाद साल दर साल रोजगार पाने वालो की संख्या कम होती चली जा रही है. रोजगार गारंटी में काम नहीं मिलने से हर sal  हजारो की संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के लोग महानगरो में पलायन कर रहे है. कागजो में जिले की ग्राम पंचायतो में हजारो की संख्या में काम प्रगति पर है लेकिन सवाल यह है की जब लोगो को काम नहीं मिला है तो फिर काम कौन कर रहा है...?
जब  गिने चुने मजदूर ही सौ दिन का काम कर रहे है फिर तो मतलब साफ़ है की ग्रामीणों को समय पर भुगतान नहीं होने से वे केवल एक बार ही योजना में काम कर असलियत समझ जाते है. बाद में उनकी काम में रूचि नहीं रहती. इसलिए हजारो की संख्या में सालो पूर्व शुरू कार्यो के रिकार्ड में अधूरे होने के कारण ही जिले को naveen  कार्यो के liye paryapt bajat  नहीं mil pa रहा है. काम अधूरे rahne से काम karne vaale  लोगो के आकड़ो पर भी sandeh उठता है.

गुटखा पाउच की लत ने बिगाड़ी सेहत

कटनी / आज कल स्कूलों में पढने वाले छात्रो पर गुटखा-पाउच संस्कृति ने अपना बर्चस्व जमा रखा है. गुटखा कंपनियों के आकर्षक विज्ञापनों तथा फैशन के प्रभाव में आज स्कूल कालेज के लड़के ही नहीं लडकिया भी तम्बाकू युक्त धीमा जहर गुटखा गटक रही है. स्कूलों, कालेजो से रोज निकलने वाला पाउचो का कचरा स्वयं अपनी कहानी बया कर रहा है.
न केवल शहर बल्कि सुदूर बसे ग्रामीण अंचलो में भी तम्बाकूयुक्त गुटखा चबाना  आज फैशन बनता जा रहा है. आज स्कूलों में भी गुटखा संस्कृति बढती जा रही है. अब तो लडकियों में भी इसकी लत होना आम बात हो गई है, लोग बैठे बिठाए अनेक बीमारियों के लिये दावत दे रहे है.
स्कूलों में पाचवी से बारहवी तक के बच्चो में पाउच संस्कृति बढ़ रही है. विद्यालयों के जबावदार शिक्षक और पालक भी इन सब बातो से बेखबर है. स्कूलों में सुबह निकाले जाने वाले कचरे और यहाँ की दीवारे स्वतः ही इस नशे की गिरफ्त में आये नवजवानों की कहानी कहती है.
बीते ज़माने में शहरी दुस्प्रभावो से ग्रामीण लोग दूर हुआ करते थे लेकिन आज स्थिति बिलकुल उलटी है. अब शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में गुटखा खाने वाले बच्चो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. स्कूल कक्षों के अलावा मैदानों में व कमरों के आसपास बिखरे रंग-बिरंगे पाउच के खाली पैक यह हकीकत स्वतः ही बया कर रहे है. ग्रामीण अंचल में बच्चो के माता-पिता इन हरकतों पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे है. इस कारण बच्चे असमय इस लत का शिकार हो जाते है.
ऐसा नहीं है की इस शौक में सिर्फ लड़किया ही शामिल है. महिलाओं तक भी गुटखा पाउच अपनी पहुच बना चुके है. आजकल यह नशा जीवन जीने का स्टेटस सिम्बल बन गया है.
स्कूल, कालेजो के आसपास पान की गुमटियों पर गुटखा पाउच आसानी से मिल जाते है, प्रशासनिक स्तर पर इनकी बिक्री रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जाती, इस कारण आज की युवा पीढ़ी इन नशीली वस्तुओ का शिकार होकर अपना जीवन बर्बाद कर रही है और प्रशासन बेखबर बना हुआ है.

इन्हें कौन देता है लाईसेंस...?

कटनी / शहर में सडको पर अधिक वाहन होने के कारण आये दिन हादसे हो रहे है.  इन सडको पर जहा चाहिए वहा गति अवरोधक भी नहीं बनाये गए है  जिससे वाहन तेज गति से चल रहे है.

इन दिनों सडको पर वाहनों की मात्रा तो बढ़ी है लेकिन सडको की चौडाई नहीं बधाई गई है. भारी वाहन सहित सभी वाहन तेज गति से शहर के बीचो बीच से तेज गति से गुजरते है. पैदल चलने वाले लोगो को खतरा हमेशा बना रहता है. पुलिस प्रशासन द्वारा तेज रफ़्तार से निकलने वाले वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.

जिले में अठारह साल से कम उम्र के बच्चे मोटरसाइकल, ट्रेक्टर, कार चला रहे है लेकिन पुलिस द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. नवजवानों द्वारा तेज गति से लहराकर वाहन चलाने से भी आये दिन हादसे होते रहे है.

जिले में तहसील  स्तर पर बसे मुक्यलायो में भी सडको पर अतिक्रमण के चलते यातायात मुश्किल और संकट भरा हो गया है. रीठी तहसील  से होकर गुजरने वाले  कटनी दमोह मार्ग को यहाँ बसे व्यापारियों ने अतिक्रमण के कारण बहुत ही संकीर्ण बना दिया है. यहाँ से गुजरने वाले भारी वाहनों को निकलने पर जाम जैसी स्थिति दिन कई-कई बार निर्मित हो जाती है. पिछले बीस वर्षों में अतिक्रमण के नाम पर केवल नाप जोख के बाद न जाने क्यों अतिक्रमण विरोधी मुहिम ठंडी पड़ जाती है...?
शायद यहाँ के व्यापारी अधिकारियो को काम न करने का पैसा पंहुचा देते है......

पुलिस के खौफ से पुरुषो ने छोड़ा गाँव

कटनी / बिलहरी
बिलहरी चौकी क्षेत्र के करहिया गाँव की सड़के पुलिस के खौफ से सूनी पड़ी है. गाँव के सभी पुरुष घर छोड़कर अन्यत्र चले गए है और घरो में केवल महिलाये व बच्चे ही शेष बचे है. घरो में बचे परिजनों से पुलिस पता पूछने सख्ती बरत रही है. कुछ महिलाओं ने पुलिस द्वारा रात्रि में सोते से उठाकर मारपीट किये जाने के आरोप लगाये है. पुलिस पर हमला करने वालो की तलाश आसपास के गाँव में भी हो रही है. पुलिस ने गिरफ़्तारी के लिए निजी मुखबिर भी लगा रखे है.
दूसरे दिन भी किसी की  गिरफ़्तारी देर शाम तक नहीं हो पाई थी. विदित हो की शुक्रवार की रात करहिया गाँव में जुआ फड पर दबिश के दौरान बिलहरी चौकी प्रभारी सज्जन सिंह व चार अन्य पुलिस कर्मियों पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया था. हमले में चौकी प्रभारी व एक अन्य पुलिस कर्मी जख्मी हुए. पुलिस ने दो दर्जन से अधिक लोगो पर बलवा, शासकीय कार्य में बाधा पहुचाने की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है. हमले के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने दो दिन से सर्चिंग अभियान चला रखा है लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही है.

करहिया गाँव में कुछ महिलाओं ने बताया की करहिया में जुआ फड कई वर्षों से संचालित हो रहा है. जुआ फड में ज्यादातर शहर के जुआरी शामिल होते है. हमले के दौरान भी शहर के बड़े जुआरी मौजूद रहे. इन महिलाओं की माने  तो हमले के समय ग्रामीणों ने पुलिस को सहयोग दिया और उन्हें बचाया भी. जख्मी पुलस कर्मियों को ग्रामीणों ने ही वाहन व्यस्था कर भिजवाया.

पुलिस  के भय से पुरुष तो गाँव छोड़कर चले गए है और घरो पर मौजूद महिलाये भी घरो से बाहर नहीं निकल रही. दरवाजा खटखटाने पर महिलाये और बच्चे भयभीत होकर दीवारों  से चिपट जाते है. गाँव की सडको पर इस कदर सन्नाटा पसरा है जैसे कर्फू का माहौल छाया हो. बच्चे भी घरो से बाहर नहीं निकल रहे. ऐसा पता चला है की हमले की रात से ही गाँव के पुरुष घर छोड़ चुके है .
इसके बाद रात्रि में करीब दो बजे पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई. महिलाओं को सोते से उठाकर पूछताछ की गई.
हमलावरों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने करहिया में डेरा दाल  रखा है. कुठला टी आई  बी एस राजपूत दो दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों के साथ करहिया में मौजूद है. बंदूकधारी पुलिसकर्मी गाँव में गश्त कर रहे है. सब कुछ ग्रामीणों में यह दहशत पैदा करने किया जा रहा है की दोबारा पुलिस पर ग्रामीण हमला करने की सोच ने सके.
वही पुलिस के अनुसार जुआदियो  की धरपकड़ करने गए पुलिस दल पर हमला करने वालो के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है. हमले में जख्मी हुए चौकी प्रभारी सज्जन सिंह का एमजीएम अस्पताल में उपचार जारी है.
पुलिस पर हुए हमले को लेकर ग्रामीणों में अलग-अलग चर्चाओं का दौर जारी है. पुलिस के अनुसार करहिया ग्राम में जुआ फड बैठे होने की सूचना मुखबिर से मिली थी और पुलिस दल ने जुआ फड में दबिश दी तभी जुआरियो ने हमला कर दिया. वही ग्रामीणों के अनुसार गाँव में जुआ फड एक दिन नहीं बल्कि साल भर चलता है.